उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर को नए स्थान पर शिफ्ट करने को लेकर हिंदू संगठनों ने विरोध किया। जमीन के मालिकाना हक के दस्तावेज और विधि-विधान से स्थापना की मांग के बीच कई प्रमुख मार्ग प्रभावित हुए। कलेक्टर रोशन कुमार सिंह की समझाइश के बाद आंदोलन समाप्त हुआ।
खड़े हनुमान मंदिर उज्जैन पर बड़ा विरोध: 6 प्रमुख मार्गों पर चक्काजाम, कलेक्टर की समझाइश के बाद आंदोलन खत्म
मालिकाना हक के लिखित आश्वासन और विधि-विधान से नए स्थान पर स्थापना की मांग; कलेक्टर की समझाइश के बाद प्रदर्शन समाप्त
दैनिक स्वराज वाणी | प्रियंका गुजराती
उज्जैन। खड़े हनुमान मंदिर उज्जैन को नए स्थान पर शिफ्ट किए जाने को लेकर हिंदू संगठनों का विरोध रविवार को जारी रहा। मंदिर के बाहर स्थानीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रामेश्वर दास महाराज, विश्व हिंदू परिषद एवं बजरंग दल के पदाधिकारी मौजूद रहे। मंदिर स्थानांतरण को लेकर प्रशासन और हिंदू संगठनों के बीच काफी देर तक चर्चा का दौर चला।
हिंदू संगठनों की ओर से मांग रखी गई कि मंदिर को नए स्थान पर स्थानांतरित करने से पहले नई जमीन के मालिकाना हक का लिखित आश्वासन और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही मंदिर को नए स्थान पर शुभ मुहूर्त, विधि-विधान और शोभायात्रा के साथ धार्मिक परंपराओं के अनुरूप स्थापित किए जाने की मांग की गई।
मौके पर एसडीएम एल.एन. गर्ग, नगर निगम के अपर आयुक्त संतोष टैगोर सहित प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। मंदिर के पुजारी भी मौके पर उपस्थित रहे। अधिकारियों ने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रामेश्वर दास महाराज और हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों से चर्चा कर उनकी मांगों और आपत्तियों को सुना।
खड़े हनुमान मंदिर उज्जैन के विरोध के बीच चारों ओर चक्काजाम
मंदिर शिफ्ट किए जाने के विरोध में प्रदर्शन के दौरान शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ। प्रदर्शनकारियों द्वारा चक्काजाम किए जाने से इंदौर-उज्जैन मार्ग, भैरूगढ़-नागदा मार्ग, उन्हेल मार्ग, बड़नगर मार्ग, आगर रोड और देवास रोड सहित प्रमुख रास्तों पर आवाजाही बाधित होने की स्थिति बनी।
चक्काजाम के चलते शहर के अलग-अलग हिस्सों में वाहनों की कतारें लग गईं और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। देखते ही देखते मंदिर के आसपास सहित शहर के प्रमुख मार्गों पर विरोध का असर दिखाई देने लगा।
क्या मंदिर विस्थापन का विरोध उचित?
एक ओर हिंदू संगठन मंदिर को वर्तमान स्थान से हटाए जाने का विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शहर में यह सवाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि सड़क निर्माण एवं शहर के विकास के लिए मंदिर को सड़क से हटाकर किसी बेहतर स्थान पर स्थापित किया जा रहा है, तो इसका विरोध किस सीमा तक उचित है?
हालांकि हिंदू संगठनों का कहना है कि उनकी आपत्ति विकास कार्य से नहीं, बल्कि मंदिर के स्थानांतरण की प्रक्रिया और नए स्थान की जमीन के अधिकार एवं भविष्य की व्यवस्थाओं को लेकर है। संगठन चाहते हैं कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो और धार्मिक परंपराओं के अनुसार मंदिर को नए स्थान पर स्थापित किया जाए।
कलेक्टर की समझाइश के बाद आंदोलन समाप्त
स्थिति को देखते हुए उज्जैन कलेक्टर श्री रोशन कुमार सिंह ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए प्रदर्शनकारियों से चर्चा की और उन्हें समझाइश दी। कलेक्टर की समझाइश के बाद चक्काजाम और प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया।
प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया कि किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा और सभी संबंधित पक्षों को विश्वास में लेकर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह भी कहा कि सभी धर्मस्थलों को लेकर समान प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
साथ ही प्रशासन ने लोगों से अपील की कि वे किसी भी अफवाह या भ्रामक जानकारी पर भरोसा न करें और शांति एवं व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।
सभी प्रमुख मार्गों पर यातायात बहाल
कलेक्टर की समझाइश के बाद प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन समाप्त कर दिया। इसके साथ ही शहर को जोड़ने वाले सभी प्रमुख मार्गों से चक्काजाम हटाया गया और यातायात बहाल कर दिया गया।
फिलहाल खड़े हनुमान मंदिर उज्जैन को लेकर प्रशासन और हिंदू संगठनों के बीच संवाद का रास्ता खुला है। मंदिर को नए स्थान पर स्थानांतरित करने से पहले जमीन के मालिकाना हक, दस्तावेज, धार्मिक परंपराओं और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर सहमति बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
आने वाले दिनों में प्रशासन और मंदिर से जुड़े पक्षों के बीच होने वाली चर्चा के बाद मंदिर स्थानांतरण को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
