Ujjain Mahakal Sawari: सावन के दूसरे सोमवार आस्था से सराबोर हुई उज्जैन नगरी, पहली बार ‘सुमा’ पर सवार होकर निकले बाबा महाकाल
रिमझिम बारिश के बीच निकली भगवान महाकाल की दूसरी सवारी, चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर और हाथी ‘सुमा’ पर मनमहेश स्वरूप के हुए दर्शन
उज्जैन। सावन के दूसरे सोमवार को धर्मनगरी उज्जैन में आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल की दूसरी सवारी सोमवार को पूरे राजसी ठाठ-बाट के साथ नगर भ्रमण पर निकली। रिमझिम फुहारों के बीच निकली बाबा महाकाल की सवारी में हजारों श्रद्धालुओं ने शामिल होकर भगवान के दर्शन किए और जयकारों से पूरा शहर गूंज उठा।
इस बार भगवान महाकाल की सवारी विशेष रूप से यादगार रही, क्योंकि पहली बार मादा हाथी ‘सुमा’ को सवारी में शामिल किया गया। भगवान महाकाल का मनमहेश स्वरूप सुमा हाथी पर विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकला। वहीं चांदी की पालकी में भगवान के चंद्रमौलेश्वर स्वरूप के दर्शन श्रद्धालुओं को हुए।
सवारी के मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल का स्वागत किया। भक्ति गीतों, धार्मिक जयकारों और लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को शिवमय बना दिया।
चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर, सुमा पर मनमहेश स्वरूप
सावन के दूसरे सोमवार की सवारी में भगवान महाकाल के अलग-अलग स्वरूपों के दर्शन हुए। भगवान महाकाल का चंद्रमौलेश्वर स्वरूप चांदी की पालकी में नगर भ्रमण पर निकला, जबकि मनमहेश स्वरूप को मादा हाथी सुमा पर विराजमान किया गया।
सवारी में शामिल धार्मिक प्रतीकों और पारंपरिक व्यवस्थाओं के बीच श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह नजर आया। उज्जैन की गलियों और सवारी मार्ग पर बड़ी संख्या में भक्त भगवान महाकाल के दर्शन के लिए जमा रहे।
बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। लोग सवारी के मार्ग में घंटों पहले पहुंचकर बाबा महाकाल के दर्शन का इंतजार करते नजर आए।
कलेक्टर ने विधिवत पूजन कर रवाना की सवारी
भगवान महाकाल की दूसरी सवारी को निर्धारित परंपरा के अनुसार विधिवत पूजन के बाद नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने दोपहर करीब 3:30 बजे भगवान महाकाल के रजत मुखारविंदों का पूजन किया।
पूजन और धार्मिक विधि पूरी होने के बाद सवारी को नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया। इसके बाद सवारी निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ी। इस दौरान प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे।
शिप्रा तट पर हुआ भगवान महाकाल का पूजन
नगर भ्रमण के दौरान भगवान महाकाल की सवारी शाम करीब 5:10 बजे शिप्रा तट पहुंची। यहां पुजारियों द्वारा भगवान महाकाल की विधिवत पूजा-अर्चना की गई।
शिप्रा तट पर धार्मिक अनुष्ठान और पूजन के बाद सवारी ने आगे का मार्ग तय किया। भगवान महाकाल की सवारी के शिप्रा तट पहुंचने के दौरान भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
पूजन के बाद सवारी अपने निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ी और शाम करीब 7 बजे वापस महाकाल मंदिर पहुंची।
पहली बार सवारी में शामिल हुई मादा हाथी ‘सुमा’
इस साल की दूसरी सवारी में सबसे बड़ा आकर्षण मादा हाथी ‘सुमा’ रही। भगवान महाकाल की सवारी में पहली बार सुमा को शामिल किया गया।
बताया गया कि सवारी में लंबे समय से शामिल रहे हाथी श्यामू के बीमार होने के कारण इस बार पशु चिकित्सा विभाग और वन विभाग की ओर से सुमा को शामिल करने का निर्णय लिया गया।
सुमा के शामिल होने के कारण सवारी का स्वरूप भी इस बार अलग नजर आया। श्रद्धालुओं में इसे लेकर विशेष उत्सुकता रही और बड़ी संख्या में लोगों ने हाथी पर विराजमान भगवान महाकाल के मनमहेश स्वरूप के दर्शन किए।
46 साल बाद रामू-श्यामू की सेवा का सफर थमा
भगवान महाकाल की सवारी में हाथियों की परंपरा का भी अपना विशेष महत्व रहा है। लंबे समय तक रामू और श्यामू हाथियों ने बाबा महाकाल की सवारी में अपनी सेवा दी।
करीब 46 वर्षों तक चली इस सेवा परंपरा में अब बदलाव आया है। श्यामू के स्वास्थ्य संबंधी कारणों के चलते इस बार सुमा को सवारी में शामिल किया गया।
इस बदलाव के साथ महाकाल की सवारी की परंपरा में एक नया अध्याय जुड़ गया है। श्रद्धालुओं के लिए भी यह अवसर भावुक और यादगार रहा।
लोक संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का दिखा संगम
महाकाल की सवारी केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं बल्कि उज्जैन की लोक संस्कृति और परंपराओं का भी प्रमुख हिस्सा है। सोमवार को निकली सवारी में धार्मिक जयकारों के साथ लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने भी श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया।
सवारी मार्ग पर कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालु बाबा महाकाल की भक्ति में डूबे नजर आए।
रिमझिम बारिश ने भी वातावरण को और मनोहारी बना दिया। बारिश के बीच भगवान महाकाल की सवारी देखने पहुंचे भक्तों ने जय श्री महाकाल और हर-हर महादेव के जयकारे लगाए।
सुरक्षा व्यवस्था के रहे व्यापक इंतजाम
सवारी को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण सवारी मार्ग और प्रमुख चौराहों पर पुलिस बल की तैनाती की गई।
प्रशासन का प्रयास रहा कि श्रद्धालुओं को भगवान महाकाल के दर्शन में किसी तरह की परेशानी न हो और सवारी भी निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ती रहे।
सावन में जारी रहेंगी बाबा महाकाल की सवारियां
सावन और भादौ मास के दौरान उज्जैन में भगवान महाकाल की सवारी का विशेष धार्मिक महत्व है। हर सोमवार श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के अलग-अलग स्वरूपों के दर्शन होते हैं।
सावन के दूसरे सोमवार की सवारी में जहां चंद्रमौलेश्वर और मनमहेश स्वरूप ने श्रद्धालुओं को दर्शन दिए, वहीं सुमा हाथी की पहली भागीदारी ने इस सवारी को खास बना दिया।
भगवान महाकाल की दूसरी सवारी के साथ एक बार फिर उज्जैन की धार्मिक परंपरा, आस्था और लोक संस्कृति का भव्य संगम देखने को मिला। रिमझिम बारिश के बीच हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी और हर-हर महादेव के जयकारों से पूरी नगरी शिवमय नजर आई।
