Ujjain News: श्री महाकाल के दरबार में हनुमान स्वरूप के दिव्य दर्शन, भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
Ujjain विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी के अवसर पर आयोजित भस्म आरती के दौरान आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। तड़के सुबह चार बजे से शुरू हुई भस्म आरती में हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान श्री महाकाल के दिव्य दर्शन किए। इस विशेष अवसर पर बाबा महाकाल का आकर्षक हनुमान स्वरूप में श्रृंगार किया गया, जिसने भक्तों का मन मोह लिया। पूरे मंदिर परिसर में “जय श्री महाकाल” के जयघोष और धार्मिक वातावरण के बीच श्रद्धालु भक्ति में सराबोर नजर आए।
रात से ही लग गई थी श्रद्धालुओं की कतार
Ujjain भस्म आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर पहुंचने लगे थे। सुबह होने से पहले ही मंदिर के बाहर लंबी कतारें लग गईं। देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं के अलावा विदेशी पर्यटक भी इस अद्भुत धार्मिक परंपरा के साक्षी बने।
मंदिर प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा और दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई थी, ताकि सभी भक्त व्यवस्थित तरीके से बाबा महाकाल के दर्शन कर सकें।
वीरभद्र की आज्ञा के बाद खुले मंदिर के पट
Ujjain महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, प्रतिदिन की परंपरा के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र भगवान से आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
पूजन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक प्रारंभ हुआ। इस दौरान शुद्ध जल के साथ दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और विभिन्न फलों के रस से अभिषेक किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
भव्य श्रृंगार और भस्म अर्पण की परंपरा
जलाभिषेक के बाद भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। पुजारियों ने पहले कपूर आरती की और फिर बाबा को नवीन मुकुट धारण कराया। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल के ज्योतिर्लिंग पर परंपरानुसार पवित्र भस्म अर्पित की गई।
भस्म अर्पण के बाद झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद की गूंज के बीच भस्म आरती संपन्न हुई। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा और श्रद्धालु भगवान महाकाल के जयकारे लगाते रहे।
हनुमान स्वरूप में सजे बाबा महाकाल
शनिवार की भस्म आरती का सबसे विशेष आकर्षण बाबा महाकाल का हनुमान स्वरूप में किया गया दिव्य श्रृंगार रहा। भगवान को विशेष वस्त्र, मुकुट और अलंकरणों से सजाया गया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत आकर्षक और मनमोहक दिखाई दिया।
भक्तों ने इस अलौकिक रूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा महाकाल के ऐसे विशेष श्रृंगार के दर्शन करने से जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
Ujjain भस्म आरती का धार्मिक महत्व
Ujjain महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती विश्वभर में प्रसिद्ध है। यह भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र ऐसी परंपरा है, जहां प्रतिदिन तड़के सुबह भगवान महाकाल की भस्म आरती की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भस्म अर्पित करने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि इस आरती में शामिल होने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।
मंदिर में गूंजे जयकारे
भस्म आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल”, “हर-हर महादेव” और “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ आरती में भाग लिया। कई भक्तों ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बताया।
महाकाल मंदिर में आरतियों का समय
महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन विभिन्न आरतियां निर्धारित समय पर संपन्न होती हैं। वर्तमान में आरती का समय इस प्रकार है—
- भस्म आरती: सुबह 4:00 बजे से 6:00 बजे तक
- दध्योदक आरती: सुबह 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
- भोग आरती: सुबह 10:00 बजे से 10:45 बजे तक
- संध्या पूजन: शाम 5:00 बजे से 5:45 बजे तक
- संध्या आरती: शाम 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
- शयन आरती: रात 10:30 बजे से 11:00 बजे तक
मंदिर प्रशासन के अनुसार, आरतियों का यह संशोधित समय आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक लागू रहेगा।
आस्था का अद्भुत केंद्र है महाकाल मंदिर
Ujjain स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। विशेष पर्व, तिथियों और शनिवार जैसे शुभ अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।
शनिवार को हनुमान स्वरूप में बाबा महाकाल के दर्शन और भस्म आरती ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि महाकाल की नगरी उज्जैन केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि सनातन परंपरा और आध्यात्मिक संस्कृति का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है।
