Ujjain News: योगिनी एकादशी पर बाबा महाकाल का दिव्य भस्म श्रृंगार, अलौकिक दर्शन के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
Ujjain आषाढ़ कृष्ण पक्ष की दशमी और पवित्र योगिनी एकादशी के शुभ अवसर पर शुक्रवार तड़के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। बाबा महाकाल के दिव्य भस्म श्रृंगार और प्रातःकालीन भस्म आरती के दर्शन के लिए देशभर से आए हजारों श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर में पहुंचने लगे थे। सुबह मंदिर के पट खुलते ही वैदिक मंत्रोच्चार, विशेष पूजन, अभिषेक, श्रृंगार और भस्म आरती के साथ पूरा वातावरण शिवमय हो गया। मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से देर तक गूंजता रहा।
देर रात से लगी श्रद्धालुओं की लंबी कतार
Ujjain योगिनी एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व होने के कारण श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक था। मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और देश के कई अन्य राज्यों से आए भक्त रात से ही मंदिर पहुंच गए थे। सुबह चार बजे होने वाली विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालु निर्धारित समय से कई घंटे पहले कतारों में खड़े रहे।
मंदिर प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए थे। सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की भी तैनाती की गई थी, जिससे दर्शन व्यवस्था शांतिपूर्ण ढंग से संचालित होती रही।
ब्रह्ममुहूर्त में जागृत हुए बाबा महाकाल
प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर के पट खोले गए और सबसे पहले भगवान महाकाल को जागृत किया गया। इसके बाद परंपरागत विधि-विधान के अनुसार विशेष पूजा-अर्चना प्रारंभ हुई। गर्भगृह में मौजूद देवी-देवताओं का पूजन करने के बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया।
अभिषेक के दौरान भगवान शिव को पवित्र जल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, पंचामृत तथा विभिन्न फलों के रस अर्पित किए गए। वैदिक मंत्रों और रुद्रपाठ के बीच संपन्न हुई इस पूजा ने पूरे मंदिर परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। प्रथम घंटाल बजाकर भगवान को “हरि ओम” का जल अर्पित किया गया, जिसके बाद आगे की धार्मिक परंपराएं निभाई गईं।
वीरभद्र की आज्ञा के बाद शुरू हुई भस्म आरती
Ujjain महाकाल मंदिर की प्राचीन परंपरा के अनुसार भस्म आरती प्रारंभ करने से पहले भगवान वीरभद्र से आज्ञा ली गई। मंदिर के पुजारियों ने शास्त्रों में वर्णित विधि के अनुसार सभी धार्मिक अनुष्ठानों का पालन किया। इसके बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया।
पूजन संपन्न होने के बाद भगवान को नवीन मुकुट धारण कराया गया और कपूर आरती की गई। इसके पश्चात महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से शिवलिंग पर पवित्र भस्म अर्पित की गई। भस्म अर्पित होते ही झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद की मधुर ध्वनि से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया। श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक क्षण के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया।
भांग से हुआ विशेष श्रृंगार बना आकर्षण का केंद्र
योगिनी एकादशी के अवसर पर बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। इस अवसर पर भगवान का श्रृंगार भांग से किया गया और उन्हें “राम-राम” से अलंकृत किया गया। इसके बाद विधि-विधान के साथ भस्म अर्पित की गई।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल अपने निराकार स्वरूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी कारण भस्म आरती को देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। यह परंपरा महाकाल मंदिर की सबसे विशिष्ट धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है।
पुजारी ने बताया पूजा का धार्मिक महत्व
मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि भस्म आरती से पहले सभी धार्मिक नियमों और परंपराओं का पूरी श्रद्धा के साथ पालन किया जाता है। सबसे पहले वीरभद्र जी की अनुमति लेकर मंदिर के गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। इसके बाद भगवान महाकाल का अभिषेक, श्रृंगार और भस्म आरती संपन्न होती है।
उन्होंने बताया कि योगिनी एकादशी के दिन बाबा महाकाल के दर्शन और पूजन का विशेष पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए दर्शन से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।
पूरे दिन बना रहा भक्तिमय माहौल
Ujjain भस्म आरती के बाद भी श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचना लगातार जारी रहा। दिनभर दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर आते रहे। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, मंत्रोच्चार और “जय श्री महाकाल” के जयघोष से आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और जीवन में खुशहाली की कामना करते हुए भगवान महाकाल के दर्शन किए।
महाकाल मंदिर में आरतियों का समय
महाकालेश्वर मंदिर में शरद पूर्णिमा तक आरतियों का संशोधित समय लागू रहेगा। वर्तमान समयानुसार प्रतिदिन भस्म आरती सुबह 4:00 बजे से 6:00 बजे तक, दद्योदक आरती सुबह 7:00 बजे से 7:45 बजे तक, भोग आरती सुबह 10:00 बजे से 10:45 बजे तक, संध्या पूजन शाम 5:00 बजे से 5:45 बजे तक, संध्या आरती शाम 7:00 बजे से 7:45 बजे तक तथा शयन आरती रात 10:30 बजे से 11:00 बजे तक संपन्न की जाती है। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से निर्धारित समय के अनुसार दर्शन के लिए पहुंचने और मंदिर की व्यवस्थाओं का पालन करने की अपील की है।
निष्कर्ष
योगिनी एकादशी के पावन अवसर पर Ujjain स्थित महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। बाबा महाकाल के दिव्य भस्म श्रृंगार और अलौकिक भस्म आरती के दर्शन कर हजारों श्रद्धालुओं ने स्वयं को सौभाग्यशाली माना। भक्ति, परंपरा और सनातन संस्कृति की यह अनुपम झलक एक बार फिर महाकाल की नगरी उज्जैन की धार्मिक महिमा को जीवंत करती नजर आई।
