Ujjain Mahakal: राम नाम से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में गूंजा ‘जय श्री महाकाल’
Ujjain के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार सुबह श्रावण शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर बाबा महाकाल की भस्म आरती विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। तड़के 3 बजे मंदिर के पट खुलने के बाद गर्भगृह में विशेष पूजन-अभिषेक किया गया। इस दौरान भगवान महाकाल का पंचामृत से अभिषेक कर आकर्षक श्रृंगार किया गया। विशेष बात यह रही कि बाबा महाकाल को राम नाम से सजाया गया। उनके मस्तक पर राम नाम अंकित किया गया और राम नाम लिखे बेलपत्र भी अर्पित किए गए।
भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। जैसे ही बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन हुए, भक्तों ने उत्साह के साथ ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष किए। पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।
तड़के 3 बजे खुले मंदिर के पट
Ujjain श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, श्रावण शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर शुक्रवार को भस्म आरती के लिए सुबह करीब 3 बजे मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित भगवान की प्रतिमाओं का विधिवत पूजन किया।
सबसे पहले बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का अभिषेक किया गया। धार्मिक विधियों के बीच मंत्रोच्चार और पूजन संपन्न हुआ।
इसके बाद प्रथम घंटाल बजाया गया और बाबा महाकाल को हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद भगवान महाकाल को चांदी का मुकुट और मुंड माला धारण कराई गई।
राम नाम से हुआ विशेष श्रृंगार
शुक्रवार की भस्म आरती में बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। भगवान महाकाल को बेलपत्र, त्रिपुंड और त्रिनेत्र से सजाया गया। हालांकि, इस श्रृंगार की सबसे खास बात उनका राममय स्वरूप रहा।
बाबा महाकाल के मस्तक पर राम नाम अंकित किया गया। इसके साथ ही राम नाम लिखे बेलपत्र भी भगवान को अर्पित किए गए। इस दिव्य स्वरूप ने श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित किया। भक्तों ने बाबा महाकाल के साथ भगवान श्रीराम की भक्ति का यह अद्भुत संगम देखा।
श्रद्धालुओं के बीच इस विशेष श्रृंगार को लेकर काफी उत्साह दिखाई दिया। मंदिर परिसर में भक्ति और आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा।
महानिर्वाणी अखाड़े ने अर्पित की भस्म
विशेष पूजन और श्रृंगार के बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग पर महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती महाकाल मंदिर की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इसका विशेष महत्व माना जाता है।
भस्म अर्पण के बाद कपूर आरती की गई और बाबा महाकाल को भोग लगाया गया। इस दौरान गर्भगृह में मौजूद पुजारी मंत्रोच्चार करते रहे और भक्त बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते रहे।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म आरती के बाद भगवान महाकाल के निराकार स्वरूप के साकार दर्शन होते हैं। यही वजह है कि भस्म आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।
भक्तों ने लगाए जयकारे
Ujjain भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी मौजूदगी रही। जैसे ही विशेष श्रृंगार के बाद बाबा महाकाल का स्वरूप भक्तों के सामने आया, मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारों से गूंज उठा।
श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। कई भक्तों ने भगवान के राममय स्वरूप को आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष बताया।
श्रावण मास होने के कारण उज्जैन में धार्मिक गतिविधियां भी चरम पर हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन और भस्म आरती में शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं।
आरतियों के समय में बदलाव
Ujjain महाकालेश्वर मंदिर में वर्तमान समय के अनुसार विभिन्न आरतियों का कार्यक्रम भी निर्धारित किया गया है। भस्म आरती सुबह 3 बजे से 6 बजे तक होती है। इसके बाद दध्योदक आरती सुबह 7 बजे से 7:45 बजे तक होती है।
भोग आरती का समय सुबह 10 बजे से 10:45 बजे तक निर्धारित है। इसके बाद शाम को 5 बजे से 5:45 बजे तक संध्या पूजन और शाम 7 बजे से 7:45 बजे तक संध्या आरती होती है। रात में शयन आरती 10:30 बजे से 11 बजे तक संपन्न होती है।
मंदिर प्रशासन के अनुसार आरतियों का यह संशोधित समय आश्विन मास की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा तक प्रभावी रहेगा।
श्रद्धालुओं के लिए खास रहा दिन
शुक्रवार को बाबा महाकाल का राम नाम से किया गया विशेष श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव का केंद्र रहा। भगवान महाकाल के मस्तक पर राम नाम और राम नाम अंकित बेलपत्रों के साथ किया गया श्रृंगार भक्तों के बीच आकर्षण का विषय बना रहा।
Ujjain की धार्मिक पहचान में महाकालेश्वर मंदिर का विशेष स्थान है। श्रावण मास में यहां होने वाली भस्म आरती, पूजन और विभिन्न श्रृंगार परंपराएं श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक रूप से जोड़ती हैं। शुक्रवार की भस्म आरती में भी इसी आस्था और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जहां बाबा महाकाल के राममय स्वरूप के दर्शन कर भक्त भाव-विभोर नजर आए।
