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Ujjain Mahakal Bhasma Aarti: गुप्त नवरात्रि में राम नाम लिखे बेलपत्र और चंद्रमा से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

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Published On: 21 July 2026
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— Mahakal Bhasma Aarti: गुप्त नवरात्रि में बाबा महाकाल का राम नाम लिखे बेलपत्र और चंद्रमा से विशेष श्रृंगार किया गया। भस्म आरती में हजारों श्रद्धालुओं ने दिव्य दर्शन किए।

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Ujjain Mahakal Bhasma Aarti: गुप्त नवरात्रि में राम नाम लिखे बेलपत्र और चंद्रमा से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

Ujjain Mahakal Bhasma Aarti: उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ शुक्ल पक्ष की सप्तमी और गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर मंगलवार सुबह बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस विशेष अवसर पर भगवान महाकाल का अद्भुत श्रृंगार राम नाम अंकित बेलपत्रों, चंद्रमा और पूजन सामग्री से किया गया। सुबह चार बजे से शुरू हुई भस्म आरती में हजारों श्रद्धालुओं ने शामिल होकर बाबा महाकाल के अलौकिक दर्शन किए। मंदिर परिसर पूरे समय “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंजता रहा।

सुबह चार बजे खुले मंदिर के पट

मंगलवार तड़के ही महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। देर रात से ही भक्त मंदिर के बाहर कतारों में लग गए थे, ताकि वे बाबा महाकाल की भस्म आरती और विशेष श्रृंगार के दर्शन कर सकें।

परंपरा के अनुसार सुबह करीब चार बजे वीरभद्र जी से आज्ञा लेने के बाद मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद गर्भगृह में विराजमान भगवान महाकाल सहित अन्य देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। मंदिर के पुजारियों और पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए।

पंचामृत और फलों के रस से हुआ जलाभिषेक

Ujjain महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, भगवान महाकाल का सबसे पहले पवित्र जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और विभिन्न फलों के रस से जलाभिषेक संपन्न हुआ।

पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर भगवान को ‘हरि ओम’ का जल अर्पित किया गया। इसके बाद धूप, दीप, नैवेद्य और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर वैदिक रीति से विशेष पूजा की गई। पूरे गर्भगृह में मंत्रोच्चार और शंखध्वनि से आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।

राम नाम के बेलपत्र और चंद्रमा से हुआ विशेष श्रृंगार

आज की भस्म आरती का सबसे बड़ा आकर्षण बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार रहा। पुजारियों ने भगवान महाकाल को राम नाम लिखे हुए बेलपत्रों से सजाया। साथ ही उनके मस्तक पर चंद्रमा का अलंकरण किया गया, जिसने बाबा के स्वरूप को और भी दिव्य बना दिया।

पूजन सामग्री से किए गए इस विशेष श्रृंगार ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को नवीन मुकुट धारण कराया गया, जिससे उनका राजसी स्वरूप और अधिक आकर्षक दिखाई दिया।

महानिर्वाणी अखाड़े ने अर्पित की भस्म

श्रृंगार पूर्ण होने के बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल के शिवलिंग पर पवित्र भस्म अर्पित की गई। इसके पश्चात झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच भव्य भस्म आरती संपन्न हुई।

मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार स्वरूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि महाकाल की भस्म आरती का धार्मिक महत्व पूरे देश में विशेष माना जाता है।

जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंजा मंदिर

भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय माहौल में डूबा रहा। हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की।

श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह देखते ही बन रहा था। जैसे ही बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा। बड़ी संख्या में देशभर से आए श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक पल को अपने मोबाइल कैमरों में भी कैद किया।

गुप्त नवरात्रि में बढ़ जाता है धार्मिक महत्व

गुप्त नवरात्रि को तंत्र साधना और विशेष पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान महाकाल मंदिर में प्रतिदिन विशेष अनुष्ठान और भस्म आरती का आयोजन किया जाता है।

मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में भगवान शिव और आदिशक्ति की आराधना करने से साधकों और श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी कारण इन दिनों महाकाल मंदिर में देशभर से श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ता है।

Ujjain महाकाल मंदिर में आरतियों का समय

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महाकालेश्वर मंदिर में विभिन्न आरतियों का समय निर्धारित किया गया है—

  • भस्म आरती: सुबह 4:00 बजे से 6:00 बजे तक
  • दद्योदक आरती: सुबह 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
  • भोग आरती: सुबह 10:00 बजे से 10:45 बजे तक
  • संध्या पूजन: शाम 5:00 बजे से 5:45 बजे तक
  • संध्या आरती: शाम 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
  • शयन आरती: रात 10:30 बजे से 11:00 बजे तक

मंदिर प्रशासन के अनुसार, आरतियों का यह संशोधित समय आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक प्रभावी रहेगा। श्रावण और गुप्त नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए विशेष व्यवस्थाएं भी की गई हैं, ताकि सभी भक्त सुगमता से बाबा महाकाल के दर्शन और आरती का लाभ प्राप्त कर सकें।

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