Ujjain Mahakal Bhasma Aarti: भांग और मोरपंख की माला से सजे बाबा महाकाल, गुप्त नवरात्रि में भस्म आरती के दिव्य दर्शन के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
Ujjain Mahakal Bhasma Aarti: धर्मनगरी उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार, 17 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की तृतीया और गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान श्री महाकाल की भस्म आरती भव्य और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई। इस विशेष अवसर पर बाबा महाकाल का भांग और मोरपंख की माला से अलौकिक श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शन के लिए देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ देर रात से ही मंदिर परिसर में उमड़ पड़ी।
तड़के 4 बजे खुले मंदिर के पट
शुक्रवार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में करीब चार बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। मंदिर खुलने से पहले वीरभद्र भगवान से पारंपरिक रूप से आज्ञा ली गई। इसके बाद गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया।
मंदिर के पुजारियों और पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा महाकाल का अभिषेक आरंभ किया। पूरे मंदिर परिसर में भक्तों की आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
पंचामृत और फलों के रस से हुआ जलाभिषेक
Ujjain भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल का विशेष जलाभिषेक किया गया। इस दौरान दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और विभिन्न फलों के रस से भगवान का अभिषेक किया गया। वैदिक मंत्रों और शंखध्वनि के बीच संपन्न इस पूजा ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।
पूजन के दौरान प्रथम घंटानाद के साथ भगवान को “हरि ॐ” का जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती कर भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया।
भांग और मोरपंख की माला से हुआ विशेष श्रृंगार
इस दिन के श्रृंगार की सबसे बड़ी विशेषता बाबा महाकाल का भांग से किया गया आकर्षक श्रृंगार रहा। इसके साथ ही भगवान को मोरपंख की सुंदर माला धारण कराई गई, जिसने उनके स्वरूप को और भी मनमोहक बना दिया।
भांग का श्रृंगार भगवान शिव की परंपरागत आराधना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। गुप्त नवरात्रि और आषाढ़ शुक्ल पक्ष की तृतीया के अवसर पर किए गए इस विशेष श्रृंगार के दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है।
श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को नवीन मुकुट भी धारण कराया गया और विभिन्न प्रकार के पुष्पों से उनका अलंकरण किया गया।
महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से अर्पित की गई भस्म
श्रृंगार के उपरांत महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल के शिवलिंग पर पवित्र भस्म अर्पित की गई। इसके बाद झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद की गूंज के बीच विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती संपन्न हुई।
मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार स्वरूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।
देर रात से लगी रही भक्तों की लंबी कतार
विशेष अवसर होने के कारण हजारों श्रद्धालु रात से ही मंदिर के बाहर कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। सुबह मंदिर के पट खुलते ही “जय श्री महाकाल” और “हर हर महादेव” के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा।
भक्तों ने बाबा महाकाल के दिव्य और अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगल की कामना की।
पुजारी ने बताई पूजा की विशेषता
श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की तृतीया और गुप्त नवरात्रि के अवसर पर संपन्न होने वाली भस्म आरती का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन भगवान महाकाल का विशेष पूजन, अभिषेक और श्रृंगार शास्त्रोक्त विधि से किया जाता है।
उन्होंने बताया कि भस्म आरती की प्रत्येक प्रक्रिया प्राचीन परंपराओं और वैदिक नियमों के अनुसार संपन्न होती है, जिसकी वजह से इसका आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
Ujjain महाकाल मंदिर की आरती का समय
श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन होने वाली प्रमुख आरतियों का समय इस प्रकार है—
- भस्म आरती: सुबह 4:00 बजे से 6:00 बजे तक
- दद्योदक आरती: सुबह 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
- भोग आरती: सुबह 10:00 बजे से 10:45 बजे तक
- संध्या पूजन: शाम 5:00 बजे से 5:45 बजे तक
- संध्या आरती: शाम 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
- शयन आरती: रात 10:30 बजे से 11:00 बजे तक
मंदिर प्रशासन के अनुसार, आरतियों का यह संशोधित समय आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक प्रभावी रहेगा।
आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है महाकालेश्वर मंदिर
Ujjain स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि सोमवार, सावन, महाशिवरात्रि, गुप्त नवरात्रि और विशेष पर्वों पर श्रद्धालुओं की संख्या लाखों तक पहुंच जाती है।
विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है, जिसे देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु उज्जैन आते हैं। भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर यह दिव्य आयोजन हर दिन भगवान महाकाल की महिमा का अद्भुत अनुभव कराता है।
