Ujjain Mahakal Bhasma Aarti: गंगा दशहरा पर दिव्य स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, मां गंगा के विशेष पूजन के साथ हुई भस्म आरती
Ujjain स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गंगा दशहरा के पावन अवसर पर मंगलवार सुबह आयोजित भस्म आरती में बाबा महाकाल के अलौकिक दर्शन ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। ज्येष्ठ अधिकमास शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर तड़के चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पूरा परिसर “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा। देशभर से पहुंचे हजारों श्रद्धालु देर रात से ही कतारों में लगकर अपने आराध्य बाबा महाकाल के दर्शन का इंतजार कर रहे थे।
गंगा दशहरा के विशेष पर्व पर इस बार बाबा महाकाल का श्रृंगार बेहद अद्भुत और आकर्षक रहा। भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल के शीश पर विराजमान मां भागीरथी गंगा का विशेष पूजन किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा दशहरा के दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था, इसलिए इस अवसर पर बाबा महाकाल के साथ मां गंगा की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है।
सुबह चार बजे शुरू हुई भस्म आरती
Ujjain श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि प्रतिदिन की तरह मंगलवार को भी तड़के चार बजे भस्म आरती की शुरुआत हुई। सबसे पहले वीरभद्र भगवान से आज्ञा ली गई, जिसके बाद मंदिर के गर्भगृह के पट खोले गए। इसके पश्चात गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया।
इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। अभिषेक में दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और विभिन्न फलों के रस का उपयोग किया गया। “हरि ओम” मंत्रोच्चार और घंटानाद के बीच पुजारियों ने भगवान को पवित्र जल अर्पित किया। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति और आस्था का अद्भुत वातावरण बना रहा।
बाबा महाकाल का हुआ भव्य श्रृंगार
अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। पुजारियों और पुरोहितों ने भगवान को नवीन मुकुट धारण कराया और चंदन, भस्म तथा फूलों से दिव्य रूप में सजाया। गंगा दशहरा के अवसर पर भगवान के मस्तक पर मां गंगा का प्रतीक स्वरूप विशेष अलंकरण किया गया, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
कपूर आरती के बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल के शिवलिंग पर पवित्र भस्म अर्पित की गई। झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच जब भस्म आरती संपन्न हुई, तब पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
मां गंगा के पूजन का विशेष महत्व
गंगा दशहरा हिंदू धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। इस कारण उज्जैन के महाकाल मंदिर में बाबा महाकाल के साथ मां गंगा का पूजन विशेष रूप से किया गया।
पुजारियों के अनुसार, भगवान शिव ने ही मां गंगा को अपनी जटाओं में धारण कर पृथ्वी पर अवतरित किया था। इसी परंपरा के अनुसार बाबा महाकाल के शीश पर विराजमान मां भागीरथी का पूजन कर भस्म आरती की शुरुआत की गई। श्रद्धालुओं ने इसे दुर्लभ और पुण्यदायी दर्शन माना।
श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह
गंगा दशहरा और ज्येष्ठ अधिकमास के शुभ संयोग के कारण महाकाल मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर विशेष इंतजाम किए गए थे।
श्रद्धालुओं का कहना था कि बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन से मन को अद्भुत शांति और ऊर्जा मिली। कई भक्तों ने भस्म आरती को जीवन का सबसे आध्यात्मिक अनुभव बताया।
Ujjain भस्म आरती की धार्मिक मान्यता
Ujjain महाकाल मंदिर की भस्म आरती विश्वभर में प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।
महाकाल मंदिर की यह परंपरा सदियों पुरानी है और इसे देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। विशेष पर्वों और त्योहारों पर भस्म आरती का महत्व और भी बढ़ जाता है।
महाकाल मंदिर में आरती का समय
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन के अनुसार वर्तमान में आरतियों का समय इस प्रकार निर्धारित किया गया है—
- भस्म आरती – सुबह 4:00 बजे से 6:00 बजे तक
- दद्योदक आरती – प्रातः 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
- भोग आरती – प्रातः 10:00 बजे से 10:45 बजे तक
- संध्या पूजन – शाम 5:00 बजे से 5:45 बजे तक
- संध्या आरती – शाम 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
- शयन आरती – रात 10:30 बजे से 11:00 बजे तक
मंदिर प्रशासन ने बताया कि आरतियों के समय में किया गया यह बदलाव आश्विन मास की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा तक लागू रहेगा।
आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हुआ उज्जैन
गंगा दशहरा के अवसर पर बाबा महाकाल की भस्म आरती ने पूरे Ujjain को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने “हर हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयघोष के साथ भगवान के दर्शन किए। मंदिर परिसर में हर ओर भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण दिखाई दिया।
बाबा महाकाल के इस दिव्य और अद्भुत स्वरूप के दर्शन ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया और गंगा दशहरा का पर्व धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ।
