Ujjain 22 जनवरी महाकाल आरती: रजत मुकुट ड्रायफ्रूट और दिव्य आभूषणों से सजे बाबा महाकाल भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
Ujjain विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में गुरुवार, 22 जनवरी 2026 को माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के पावन अवसर पर तड़के भस्म आरती अत्यंत भव्य और दिव्य वातावरण में संपन्न हुई। अल सुबह 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए, जिसके साथ ही बाबा महाकाल की नगरी Ujjain भक्तिरस में डूब गई।
जैसे ही मंदिर के द्वार खुले, गर्भगृह में मंत्रोच्चार, शंखनाद और घंटियों की मधुर ध्वनि गूंज उठी। चारों ओर “हर हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयकारों से संपूर्ण मंदिर परिसर गुंजायमान हो गया। सैकड़ों श्रद्धालु इस अद्भुत दृश्य के साक्षी बने और भस्म आरती के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
पंचामृत से हुआ बाबा महाकाल का अभिषेक
Ujjain कपाट खुलते ही मंदिर के पुजारियों द्वारा गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया गया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक संपन्न हुआ। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से ज्योतिर्लिंग का अभिषेक किया गया।
अभिषेक के दौरान वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया, जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। भक्तों ने हाथ जोड़कर बाबा महाकाल से सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना की।
भस्म अर्पण से पहले विशेष धार्मिक अनुष्ठान
भस्म आरती की परंपरा के अनुसार, भस्म अर्पण से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके बाद मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के माध्यम से बाबा की आराधना की गई, जिसमें गर्भगृह की ज्योति और दीपों की रोशनी ने अलौकिक दृश्य प्रस्तुत किया।
कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर विधिवत रूप से भस्म रमाई गई। यह भस्म आरती महाकालेश्वर मंदिर की सबसे विशिष्ट और दुर्लभ परंपरा मानी जाती है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।

रजत मुकुट और आभूषणों से सजा दिव्य श्रृंगार
भस्म आरती के उपरांत बाबा महाकाल का मनमोहक और दिव्य श्रृंगार किया गया। इस दौरान भगवान को रजत मुकुट, शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की मालाएं और विभिन्न प्रकार के बहुमूल्य आभूषण अर्पित किए गए।
बाबा महाकाल को ड्रायफ्रूट, सुगंधित पुष्पों और फूलों की आकर्षक मालाओं से सजाया गया। पुष्पों की महक और धूप-दीप की सुगंध से पूरा गर्भगृह भक्तिमय हो उठा। यह दृश्य देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
अल सुबह उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
भस्म आरती में शामिल होने के लिए तड़के ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। सैकड़ों भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। भक्तों का कहना था कि बाबा के दर्शन मात्र से ही मन को शांति और आत्मा को सुकून मिलता है।
श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन भी किए। परंपरा के अनुसार, भक्त नंदी महाराज के कान के समीप जाकर अपनी मनोकामनाएं कहते नजर आए। मान्यता है कि नंदी महाराज के माध्यम से भक्तों की प्रार्थना सीधे बाबा महाकाल तक पहुंचती है।
जयकारों से गूंजता रहा मंदिर परिसर
पूरे आरती आयोजन के दौरान श्रद्धालु निरंतर “बाबा महाकाल की जय”, “हर हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयकारे लगाते रहे। जयकारों की गूंज से मंदिर परिसर ही नहीं, बल्कि आसपास का क्षेत्र भी भक्तिमय माहौल में डूबा नजर आया।
श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था। कई भक्तों की आंखों में आस्था और भक्ति के भाव स्पष्ट दिखाई दे रहे थे। कुछ श्रद्धालु ध्यान में लीन थे, तो कुछ बाबा के श्रृंगार को निहारते हुए भावविभोर हो रहे थे।
भस्म आरती का आध्यात्मिक महत्व
श्री महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह आरती ब्रह्म मुहूर्त में की जाती है और इसमें चिता भस्म का उपयोग किया जाता है, जो जीवन की नश्वरता और मृत्यु के सत्य का प्रतीक मानी जाती है। मान्यता है कि भस्म आरती के दर्शन करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
सुरक्षा और व्यवस्थाएं रहीं चाक-चौबंद
श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस और मंदिर कर्मियों की तैनाती की गई थी, जिससे आरती सुचारू और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
श्रद्धालुओं में दिखा अपार उत्साह
भक्तों ने बताया कि बाबा महाकाल का यह दिव्य श्रृंगार अत्यंत मनोहारी और अद्भुत था। कई श्रद्धालु मोबाइल और कैमरों में इस अलौकिक क्षण को कैद करते नजर आए। भस्म आरती के दर्शन के बाद भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया और मंदिर परिसर में कुछ समय ध्यान और भक्ति में बिताया।
निष्कर्ष: 22 जनवरी 2026 को संपन्न हुई महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती ने एक बार फिर बाबा महाकाल की महिमा और उज्जैन की आध्यात्मिक परंपरा को जीवंत कर दिया। रजत मुकुट, ड्रायफ्रूट और आभूषणों से सजे भगवान महाकाल के दिव्य दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और आस्था की इस पावन अनुभूति को अपने हृदय में संजोकर लौटे
