उज्जैन की ‘किन्नर अघोरी काली’ को लेकर नया विवाद, पुराने वीडियो-फोटो के आधार पर लगाए गंभीर आरोप
Ujjain News: चक्रतीर्थ श्मशान घाट के वायरल वीडियो के बाद चर्चा में आई काली उर्फ नंद गिरि को लेकर अघोर अखाड़े से जुड़े विष्णु नाथ ने किए कई दावे; आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं
उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित चक्रतीर्थ श्मशान घाट से सामने आए एक वायरल वीडियो के बाद चर्चा में आई किन्नर अघोरी काली उर्फ नंद गिरि को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। अब अघोर अखाड़े से जुड़े बताए जा रहे खड़ेश्वरी विष्णु नाथ ने काली के अतीत और कथित गतिविधियों को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आना भी बाकी है।
विष्णु नाथ वही व्यक्ति बताए जा रहे हैं जिन्होंने काली के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। अब उन्होंने कुछ पुराने फोटो और वीडियो का हवाला देते हुए कई आरोप लगाए हैं। इन आरोपों के बाद सोशल मीडिया पर भी मामला चर्चा का विषय बन गया है।
पहले पुरुष होने और बाद में जेंडर ट्रांजिशन का दावा
विष्णु नाथ का दावा है कि काली उर्फ नंद गिरि की पहचान पहले पुरुष के रूप में थी और बाद में उन्होंने जेंडर ट्रांजिशन कराया। इसके बाद किन्नर के रूप में नई पहचान के साथ अघोर साधना से जुड़ने और सोशल मीडिया पर ‘लेडी अघोरी’ के नाम से चर्चित होने का दावा किया गया है।
यह किसी व्यक्ति की निजी पहचान से जुड़ा संवेदनशील विषय है और उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विवाद का मुख्य विषय श्मशान घाट में कथित गतिविधियों और उनसे जुड़े आरोप हैं।
तेलंगाना की घटना को लेकर भी लगाया आरोप
विष्णु नाथ ने काली के अतीत से जुड़ी एक कथित घटना का भी उल्लेख किया है। उनका दावा है कि तेलंगाना में एक युवती से कथित छेड़छाड़ के मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने काली के साथ मारपीट की थी।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में जानकारी उन्हें केरल में अघोर परंपरा से जुड़े एक संत से मिली। साथ ही कुछ पुराने फोटो और वीडियो भी साझा किए जाने का दावा किया गया है।
हालांकि इस कथित घटना, शिकायत या पुलिस कार्रवाई से संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड की पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इसे फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पुराने पुलिस मामले का भी दावा
विष्णु नाथ ने यह भी दावा किया कि उन्हें केरल के कुछ संतों के माध्यम से काली के खिलाफ तेलंगाना क्षेत्र में पूर्व में पुलिस मामला दर्ज होने की जानकारी मिली थी।
इस कथित मामले के संबंध में संबंधित पुलिस विभाग की आधिकारिक पुष्टि या दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। केवल किसी व्यक्ति के दावे के आधार पर आपराधिक आरोप को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
श्मशान में गतिविधियों को लेकर उठाए सवाल
विवाद का सबसे गंभीर हिस्सा श्मशान घाट में काली की कथित गतिविधियों को लेकर है। विष्णु नाथ का आरोप है कि उन्हें पूर्व में भी रात के समय शवों के साथ अनुचित गतिविधि किए जाने की शिकायतें मिली थीं।
उन्होंने कहा कि अघोर परंपरा में श्मशान साधना का विशेष महत्व है, लेकिन इसकी अपनी धार्मिक मर्यादाएं और परंपराएं हैं। उनका आरोप है कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से शव या जलती चिता से जुड़ी गतिविधियों को प्रदर्शित करना अघोर परंपरा का हिस्सा नहीं है।
इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
वायरल वीडियो के बाद चर्चा में आया मामला
उज्जैन के चक्रतीर्थ श्मशान घाट से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद काली उर्फ नंद गिरि अचानक चर्चा में आ गई थीं। वीडियो को लेकर विभिन्न दावे किए गए और धार्मिक-सामाजिक संगठनों की ओर से आपत्ति भी सामने आई।
वायरल वीडियो के आधार पर कई तरह की व्याख्याएं सोशल मीडिया पर की गईं। ऐसे मामलों में वीडियो के पूरे संदर्भ और पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने आने से पहले किसी दावे को अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
अघोर परंपरा की मर्यादा का मुद्दा
विष्णु नाथ ने पूरे मामले को अघोर साधना की परंपराओं और मर्यादाओं से भी जोड़ा है। उनका कहना है कि अघोर साधना को लेकर समाज में पहले से कई तरह की भ्रांतियां मौजूद हैं और सोशल मीडिया पर सनसनी पैदा करने वाली गतिविधियों से इन भ्रांतियों को और बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने दावा किया कि वास्तविक अघोर साधना में अनुशासन और धार्मिक मर्यादाओं का पालन किया जाता है। इसलिए श्मशान में की जाने वाली किसी भी गतिविधि को केवल ‘अघोर साधना’ का नाम देकर उचित नहीं ठहराया जा सकता।
सोशल मीडिया पर ‘लेडी अघोरी’ के नाम से बनी पहचान
काली उर्फ नंद गिरि की सोशल मीडिया पर ‘लेडी अघोरी’ के रूप में पहचान बनने की बात कही जा रही है। श्मशान साधना और अघोर परंपरा से जुड़े वीडियो के कारण उनके सोशल मीडिया कंटेंट ने लोगों का ध्यान खींचा।
चक्रतीर्थ श्मशान घाट से जुड़ा विवाद सामने आने के बाद यही ऑनलाइन पहचान अब सवालों के घेरे में आ गई है। पुराने वीडियो और तस्वीरें भी दोबारा सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही हैं।
हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल किसी तस्वीर या वीडियो को उसके मूल संदर्भ की पुष्टि किए बिना प्रमाण नहीं माना जा सकता।
पुलिस जांच से साफ होगी स्थिति
पूरे मामले में कई गंभीर आरोप सामने आए हैं, लेकिन उनकी सत्यता पुलिस जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही तय हो सकती है। विशेष रूप से दूसरे राज्य में कथित पुराने मामले और श्मशान घाट में पूर्व में हुई कथित गतिविधियों को लेकर किए जा रहे दावों की पुष्टि आवश्यक है।
फिलहाल काली उर्फ नंद गिरि को लेकर विवाद लगातार बढ़ रहा है। चक्रतीर्थ श्मशान घाट के वायरल वीडियो से शुरू हुआ मामला अब उनके अतीत और अघोर परंपरा से जुड़े सवालों तक पहुंच गया है।
इस मामले में काली उर्फ नंद गिरि का विस्तृत पक्ष और पुलिस जांच के आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
