Ujjain-Jawara स्टेट हाईवे-17: मौत का मार्ग बनता जा रहा है, जनता में आक्रोश
मध्यप्रदेश के Ujjain-Jawara स्टेट हाईवे-17 पर हाल ही में हुए तीन घातक हादसों ने इस मार्ग की भयावह स्थिति को उजागर कर दिया है। चार दिन के भीतर लगातार तीन लोगों की मौत ने न केवल आम जनता के जीवन को खतरे में डाल दिया है, बल्कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
बुधवार को इंगोरिया तिराहे पर 55 वर्षीय बाइक सवार राजेंद्र तंवर, निवासी जीवाजी नगर, नागदा की तेज रफ्तार ट्रेलर से टक्कर में मौत हो गई। दुर्घटना इतनी भयंकर थी कि सड़क पर बाइक के घसीटने के निशान स्पष्ट दिखाई दिए। सिर और पैर में गंभीर चोट के कारण उनकी मृत्यु मौके पर ही हो गई। ट्रेलर चालक घटना के बाद मौके से भाग गया, जिसे बाद में पुलिस ने डायल 112 की सहायता से पकड़ लिया।
इससे पहले रविवार को मौनी अमावस्या के दिन रतलाम निवासी युवक शुभम की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हुई थी। इसके अलावा मंगलवार को नागझिरी निवासी बाइक सवार सुल्तान की भी अज्ञात वाहन से टक्कर में मौत हो गई।
स्थानीय जनता का दर्द और आक्रोश
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह सड़क अत्यधिक व्यस्त है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में ट्रक, ट्रेलर, बस, टैक्सी और स्थानीय वाहन गुजरते हैं। इसके बावजूद सड़क संकरी, अव्यवस्थित और असुरक्षित बनी हुई है। ब्लैक स्पॉट चिन्हित होने के बावजूद सुधार कार्य नहीं हुआ है। स्पीड कंट्रोल, साइनेज, लाइटिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव भी है।
स्थानीय लोगों ने कहा, “अब यह सड़क नहीं, डर बन गई है। जब तक कोई बड़ा आंदोलन नहीं होगा, शायद सरकार जागेगी।”
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट की प्रतिक्रिया
जनहित की गंभीरता को देखते हुए भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह यादव ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, माननीय श्री नितिन गडकरी को औपचारिक पत्र प्रेषित किया है। पत्र में उज्जैन-जावरा स्टेट हाईवे-17 के तत्काल चौड़ीकरण, ब्लैक स्पॉट सुधार और सड़क सुरक्षा उपायों की मांग की गई है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह यादव ने कहा, “उज्जैन-जावरा हाईवे अब सड़क नहीं, बल्कि श्मशान पथ बनता जा रहा है। सरकार और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी बेहद शर्मनाक है। क्या किसी जनप्रतिनिधि के परिवार में मौत होगी तभी कार्रवाई होगी? जनता की जान किसी भी राजनीति से बड़ी है। यदि शीघ्र सड़क चौड़ीकरण नहीं हुआ तो संगठन सड़क से सदन तक आंदोलन करेगा।”
संगठन के अन्य पदाधिकारी भी इस मुद्दे पर गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि जहां यातायात कम है, वहां फोरलेन बनाकर वाहवाही लूटी जा रही है, और जहां सबसे ज्यादा दबाव है, वहां जनता को जान के जोखिम में छोड़ा जा रहा है।
संगठन की प्रमुख मांगें
- उज्जैन-जावरा स्टेट हाईवे-17 का तत्काल चौड़ीकरण
- सभी ब्लैक स्पॉट्स पर युद्धस्तर पर सुधार
- पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा
- हाईवे पर सीसीटीवी कैमरे, स्पीड कंट्रोल और संकेतक बोर्ड की स्थापना
- स्ट्रीट लाइट और पर्याप्त सुरक्षा उपाय
- भारी वाहनों के लिए पृथक लेन व्यवस्था
सड़क की वर्तमान स्थिति और जोखिम
Ujjain-Jawara स्टेट हाईवे-17 मध्यप्रदेश का एक अत्यंत व्यस्त मार्ग है। इस पर दैनिक हजारों वाहनों की आवाजाही होती है, जिसमें ट्रक, ट्रेलर, बस और अन्य बड़े वाहन शामिल हैं। सड़क संकरी, पुराने निर्माण और अपर्याप्त सुरक्षा उपायों के कारण यह मार्ग अब आम जनता के लिए जानलेवा बन गया है।
स्थानीय ब्लैक स्पॉट्स पर न तो पर्याप्त साइनेज है और न ही सड़क चौड़ीकरण कार्य हुआ है। सड़क पर तेज रफ्तार वाहनों और स्थानीय परिवहन के मिश्रण से हादसों की संभावना बढ़ गई है। स्थानीय जनता ने कई बार प्रशासन से शिकायत की है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
आक्रोश और चेतावनी
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन द्वारा तत्काल ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट जनहित में आंदोलन शुरू करेगा। इस आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
निष्कर्ष
Ujjain-Jawara हाईवे-17 की वर्तमान स्थिति सरकार और प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती है। चार दिन में तीन मौतें इस बात का संकेत हैं कि यदि सड़क सुरक्षा उपाय तुरंत लागू नहीं किए गए, तो भविष्य में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं। जनता और सामाजिक संगठन सड़क चौड़ीकरण, ब्लैक स्पॉट सुधार और सुरक्षा उपायों की मांग कर रहे हैं।
सड़क सुरक्षा और जनजीवन की रक्षा अब केवल प्रशासन की संवेदनशीलता पर निर्भर है। यदि उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह मार्ग न केवल मौत का मार्ग बन जाएगा, बल्कि जन आंदोलन की चिंगारी भी बन सकता है।
