सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन को मिलेंगे दो बड़े एलिवेटेड ब्रिज, यातायात जाम से मिलेगी राहत
कल होगा भूमि पूजन, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे शुभारंभ
Ujjain , 18 अगस्त 2026। सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए दो महत्वपूर्ण एलिवेटेड ब्रिज परियोजनाओं पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। शहर में लगातार बढ़ते यातायात दबाव और सिंहस्थ के दौरान देशभर से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए इन दोनों परियोजनाओं को शहर के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दोनों एलिवेटेड ब्रिज का भूमि पूजन 19 अगस्त को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री के उज्जैन दौरे को लेकर प्रशासन और संबंधित विभागों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। भूमि पूजन के बाद दोनों परियोजनाओं के निर्माण कार्य को गति मिलने की उम्मीद है।
मकोड़िया आम से देवास गेट-हरिफाटक तक पहला एलिवेटेड ब्रिज
पहली महत्वपूर्ण परियोजना आगर रोड स्थित मकोड़िया आम चौराहे से देवास गेट और हरिफाटक क्षेत्र तक प्रस्तावित है। यह कॉरिडोर शहर के कई महत्वपूर्ण स्थानों को जोड़ता है और यहां सामान्य दिनों में भी यातायात का दबाव बना रहता है।
इस मार्ग पर आगर रोड, चरक अस्पताल, गधा पुलिया, देवास गेट और रेलवे स्टेशन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र आते हैं। सिंहस्थ के दौरान इन क्षेत्रों में श्रद्धालुओं और वाहनों की आवाजाही बढ़ने की संभावना है। ऐसे में एलिवेटेड ब्रिज को यातायात प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ब्रिज के निर्माण से मुख्य मार्ग पर चलने वाले यातायात को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने और प्रमुख चौराहों पर वाहनों के दबाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
निर्माण की तैयारियां शुरू
सिंहस्थ की तैयारियों के तहत इस मार्ग पर निर्माण संबंधी गतिविधियां और बैरिकेडिंग की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आई है। परियोजना के निर्माण के दौरान यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि निर्माण कार्य के दौरान आम लोगों को कम से कम परेशानी हो और साथ ही परियोजना का काम निर्धारित समयसीमा में आगे बढ़े।

निकास चौराहे से इंदौर गेट तक दूसरा एलिवेटेड कॉरिडोर
दूसरी बड़ी परियोजना निकास चौराहे से दौलतगंज होते हुए इंदौर गेट तक प्रस्तावित है। यह मार्ग भी उज्जैन शहर के व्यस्ततम यातायात कॉरिडोर में शामिल है।
इस क्षेत्र में प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही होती है। सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं और बाहरी वाहनों की संख्या बढ़ने पर इस मार्ग पर यातायात का दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में एलिवेटेड कॉरिडोर को भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है।
नई सड़क क्षेत्र में काम को मिली गति
दूसरे एलिवेटेड ब्रिज से जुड़े क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के बाद परियोजना से संबंधित गतिविधियों को गति दी जा रही है। सड़क की क्षमता बढ़ाने और एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण से मुख्य मार्ग पर यातायात का दबाव कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
परियोजना पूरी होने के बाद शहर के इस हिस्से में वाहनों को अपेक्षाकृत सुगम आवागमन उपलब्ध कराने और प्रमुख चौराहों पर लगने वाले जाम को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सिंहस्थ 2028 के लिए अहम तैयारी
उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ महापर्व का आयोजन होना है। सिंहस्थ के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से लाखों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन के कारण शहर की यातायात व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ना स्वाभाविक है।
इसी को देखते हुए प्रशासन सड़क, पुल, पार्किंग, यातायात प्रबंधन और अन्य आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। दोनों एलिवेटेड ब्रिज परियोजनाएं इसी व्यापक तैयारी का हिस्सा मानी जा रही हैं।
स्थानीय यातायात के साथ श्रद्धालुओं को भी मिलेगी सुविधा
इन दोनों परियोजनाओं का लाभ केवल सिंहस्थ के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को ही नहीं, बल्कि शहर के स्थानीय नागरिकों को भी मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में जिन मार्गों पर नियमित रूप से यातायात का दबाव रहता है, वहां एलिवेटेड कॉरिडोर बनने के बाद वाहनों की आवाजाही को अलग-अलग स्तरों पर व्यवस्थित किया जा सकेगा।
इससे प्रमुख चौराहों पर रुकने वाले वाहनों की संख्या कम करने और यात्रा के समय में कमी लाने में मदद मिल सकती है।
जाम की समस्या कम करने पर रहेगा फोकस
उज्जैन में धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों के कारण वर्षभर बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होता है। पर्व और विशेष आयोजनों के दौरान यातायात का दबाव कई गुना बढ़ जाता है। सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन के दौरान यह चुनौती और अधिक बढ़ने वाली है।
ऐसे में एलिवेटेड ब्रिज परियोजनाओं का प्रमुख उद्देश्य शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात के प्रवाह को बेहतर बनाना और जाम की स्थिति को कम करना है। साथ ही शहर में प्रवेश और निकास के प्रमुख मार्गों को अधिक सक्षम बनाने की कोशिश की जा रही है।
समय पर पूरा करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती
सिंहस्थ 2028 से पहले दोनों परियोजनाओं को पूरा करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण लक्ष्य होगा। बड़े निर्माण कार्यों के दौरान भूमि, यातायात, वैकल्पिक मार्ग और निर्माण सामग्री से जुड़ी कई चुनौतियां सामने आती हैं। ऐसे में परियोजनाओं की नियमित निगरानी और समयबद्ध क्रियान्वयन जरूरी होगा।
यदि दोनों एलिवेटेड ब्रिज निर्धारित समय पर तैयार हो जाते हैं, तो सिंहस्थ के दौरान उज्जैन की यातायात व्यवस्था को संभालने में काफी मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री के दौरे के बाद निर्माण को मिलेगी गति
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रस्तावित उज्जैन दौरे और भूमि पूजन कार्यक्रम के बाद दोनों परियोजनाओं के निर्माण कार्य को और गति मिलने की संभावना है। प्रशासनिक स्तर पर कार्यक्रम की तैयारियां की जा रही हैं।
भूमि पूजन के साथ उज्जैन के शहरी यातायात नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण चरण शुरू होगा। आने वाले समय में इन दोनों एलिवेटेड ब्रिज परियोजनाओं की प्रगति पर शहरवासियों और सिंहस्थ की तैयारियों से जुड़े लोगों की नजर रहेगी।
उज्जैन के यातायात नेटवर्क को मिलेगी नई दिशा
दोनों एलिवेटेड ब्रिज के निर्माण से उज्जैन के प्रमुख प्रवेश मार्गों और व्यस्त शहरी क्षेत्रों के बीच यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। परियोजनाओं का उद्देश्य केवल सिंहस्थ के दौरान यातायात संभालना नहीं, बल्कि भविष्य में बढ़ने वाले शहर के यातायात दबाव के लिए भी आधारभूत ढांचा तैयार करना है।
सिंहस्थ 2028 से पहले यदि ये परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं, तो उज्जैन को बेहतर कनेक्टिविटी, सुगम यातायात और बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान अधिक प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन का लाभ मिल सकता है।
रिपोर्ट: प्रियंका गुजराती
