Ujjain: सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल को डिजिटल अरेस्ट का झांसा 3 लाख रुपये की ठगी से बैंक अधिकारी ने बचाया
Ujjain:हाल ही में Ujjainमें एक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल को डिजिटल माध्यम से ठगी का शिकार होने से बचाने वाली घटना सामने आई। बताया जा रहा है कि धोखाधड़ी करने वाले अपराधियों ने उन्हें CBI अधिकारी बनकर धमकाया और तीन लाख रुपये की मांग की। हालांकि, बैंक अधिकारियों और पुलिस की त्वरित सतर्कता ने समय रहते उन्हें भारी नुकसान से बचा लिया।
घटना का पूरा क्रम
80 वर्षीय गंगाराम वर्मा, निवासी ग्राम लेकोड़ा और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल, मंगलवार दोपहर को एक व्यक्ति से फोन पर संपर्क में आए। फोन करने वाले ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर धमकी दी कि उनके नाम से मुंबई के कैनरा बैंक में खाता है, जिसमें लगभग 2.5 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। साथ ही कहा गया कि उनका नाम मनी लांड्रिंग मामले में ब्लैकलिस्ट हो गया है और यदि वह तुरंत तीन लाख रुपये नहीं भेजते, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
धोखेबाजों ने विश्वास बनाने के लिए फर्जी नोटिस, वीडियो कॉल और पुलिस वर्दी का इस्तेमाल किया। उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर ही रहने को कहा गया और घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई। फर्जी नोटिसों में CBI हाई कोर्ट और वित्त मंत्रालय के आधिकारिक लेटरहेड्स का भी इस्तेमाल किया गया।
रातभर का तनाव
कर्नल गंगाराम वर्मा और उनकी पत्नी गीता पूरी रात इस डर में जागते रहे। कॉल करने वाले ने लगातार धमकी दी और वीडियो कॉल के माध्यम से उन्हें दबाव में रखा। रातभर वे सो नहीं पाए और मानसिक रूप से बेहद तनाव में थे।
बैंक अधिकारी की सतर्कता ने बचाया
अगले दिन बुधवार को कर्नल वर्मा नई सड़क स्थित एसबीआई बैंक गए, जहां उन्होंने तीन लाख रुपये ट्रांसफर करने की तैयारी की। बैंक के वरिष्ठ एसोसिएट प्रियांक वर्मा ने कर्नल की स्थिति में गड़बड़ी महसूस की और तुरंत एसडीओपी आकांक्षा और एसपी प्रदीप शर्मा को सूचित किया।
पुलिस अधिकारियों ने बैंक पहुंचकर कर्नल और उनकी पत्नी को समझाइश दी। करीब एक घंटे तक समझाइश और सुरक्षा का आश्वासन देने के बाद कर्नल भयमुक्त हुए। एसपी प्रदीप शर्मा ने कहा कि यह घटना डिजिटल ठगी का नया तरीका है, जिसमें अपराधी वीडियो कॉल, फर्जी नोटिस और सरकारी पदों का डर दिखाकर लोगों को पैसे देने के लिए मजबूर करते हैं।

साइबर अपराधियों की रणनीति
विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना यह दर्शाती है कि साइबर अपराधी अब केवल ऑनलाइन लेनदेन को निशाना नहीं बना रहे हैं। वे डिजिटल अरेस्ट, कानूनी कार्रवाई और सरकारी चेतावनी के डर का इस्तेमाल कर लोगों को डराने की कोशिश कर रहे हैं। इस तरह की ठगी में अपराधी:
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आधिकारिक नाम और पदों का इस्तेमाल करते हैं।
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कॉल, मैसेज और वीडियो कॉल से डराने की कोशिश करते हैं।
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समय की कमी और डर का फायदा उठाकर तुरंत पैसे भेजवाने की कोशिश करते हैं।
पुलिस और बैंक की भूमिका
एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि घटना में बैंक अधिकारी की सतर्कता और पुलिस का समय पर हस्तक्षेप ही कर्नल को बड़ी ठगी से बचा सका। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सतर्क रहना और आधिकारिक माध्यमों से ही जांच करना जरूरी है।
बैंक और पुलिस ने कर्नल को बताया कि अगर कोई भी संदिग्ध कॉल या ईमेल आता है, तो तुरंत बैंक या पुलिस से संपर्क करें। उन्हें किसी भी अनजान नंबर पर पैसे भेजने से बचना चाहिए।
कर्नल का अनुभव
गंगाराम वर्मा इस दौरान भावुक हो गए और कहा, “सेना से सेवानिवृत्त हुआ हूँ, लेकिन इस डिजिटल अरेस्ट की धमकी ने पूरी रात सोने नहीं दिया। मेरी गांव में इज्जत और सम्मान की चिंता हो रही थी।”
निष्कर्ष
यह घटना डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे को उजागर करती है। साइबर अपराधी अब डर और फर्जी आधिकारिक नोटिस का सहारा लेकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। इस मामले में बैंक अधिकारियों की सतर्कता और पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने सेवानिवृत्त कर्नल को भारी नुकसान से बचाया।
विशेषज्ञों का संदेश साफ है:
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कभी भी डर या धमकी के आधार पर पैसे न भेजें।
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संदिग्ध कॉल या मैसेज की तुरंत रिपोर्ट करें।
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केवल आधिकारिक और सत्यापित चैनलों का ही उपयोग करें।
