चैनपुर पुलिस की FIR पर गंभीर सवाल: बस की जगह दर्ज हुआ कथित दोपहिया वाहन का नंबर, फरियादी का नाम भी गायब
रिपोर्टर: महेंद्र शर्मा
झिरन्या। चित्तौड़गढ़-भुसावल राष्ट्रीय राजमार्ग पर ग्राम पाडल्या के पास यात्री बस पलटने से 13 यात्रियों के घायल होने के मामले में चैनपुर थाना पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एफआईआर में दुर्घटनाग्रस्त बस का कथित रूप से गलत पंजीयन नंबर दर्ज होने के साथ फरियादी और आरोपी चालक की स्पष्ट जानकारी नहीं होने का मामला सामने आया है।
दुर्घटनाग्रस्त एच. सुरूर ट्रैवल्स की बस पर पंजीयन नंबर MP10 ZE 4364 दिखाई देने का दावा किया गया है। वहीं, चैनपुर थाने में दर्ज एफआईआर क्रमांक 0272/2026 में संबंधित वाहन का नंबर MP10 ZE 4346 लिखा गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार एफआईआर में दर्ज नंबर किसी दोपहिया वाहन से संबंधित बताया जा रहा है। हालांकि, इसकी अंतिम पुष्टि आधिकारिक वाहन रिकॉर्ड और पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
बस दुर्घटना में घायल हुए थे 13 यात्री
शुक्रवार सुबह खरगोन से बुरहानपुर जा रही यात्री बस ग्राम पाडल्या के पास अनियंत्रित होकर पलट गई थी। बस में 30 से अधिक यात्री सवार बताए गए थे। दुर्घटना में पांच वर्षीय बच्ची सहित 13 यात्री घायल हुए। हादसे के बाद चालक और परिचालक के मौके से चले जाने की जानकारी सामने आई थी।
घटना के बाद पुलिस ने दोपहर करीब एक बजे पत्रकारों को उपलब्ध कराई गई प्रारंभिक जानकारी में बस मालिक का नाम साबिर बी., चालक का नाम आरिफ बेग और परिचालक का नाम दिनेश बताया था। इसके करीब दो घंटे बाद दोपहर तीन बजे दर्ज की गई एफआईआर में आरोपी चालक को ‘अज्ञात’ बताया गया।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पुलिस के पास बस मालिक, चालक और परिचालक से संबंधित जानकारी पहले से उपलब्ध थी, तो एफआईआर में आरोपी चालक का नाम क्यों दर्ज नहीं किया गया।
फरियादी के नाम को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं
एफआईआर का अवलोकन करने पर उसमें फरियादी का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं होने का दावा किया गया है। दूसरी तरफ, फरियादी द्वारा बताए गए उसके रिश्तेदारों के नाम एफआईआर में लिखे गए हैं। इस विरोधाभास के कारण पुलिस की दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
किसी भी एफआईआर में शिकायतकर्ता की पहचान, घटना का समय और स्थान, आरोपी का उपलब्ध विवरण तथा घटना में शामिल वाहन की सही जानकारी महत्वपूर्ण मानी जाती है। यदि इन विवरणों में त्रुटि हो तो आगे की विवेचना, वाहन की जब्ती, बीमा दावा और न्यायालयीन प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका रहती है।
FIR में इन सवालों का जवाब स्पष्ट नहीं
मामले में कई बुनियादी सवाल उठाए जा रहे हैं। एफआईआर किस व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज हुई, शिकायत किसके खिलाफ की गई, दुर्घटनाग्रस्त बस किस कंपनी की थी, वाहन का वास्तविक पंजीयन नंबर क्या है और चालक एवं परिचालक की पहचान क्या है—इन बिंदुओं पर स्पष्टता की मांग की जा रही है।
दुर्घटना के फोटो और मौके पर मौजूद बस की नंबर प्लेट की जांच करके वाहन का सही पंजीयन नंबर आसानी से सत्यापित किया जा सकता है। इसके बावजूद यदि एफआईआर में दूसरा नंबर दर्ज हुआ है तो यह टाइपिंग की गलती है या जांच में हुई गंभीर चूक, इसका जवाब पुलिस को देना होगा।
दो घंटे पहले नाम मालूम था तो चालक ‘अज्ञात’ क्यों?
पुलिस द्वारा पत्रकारों को दी गई प्रारंभिक जानकारी में चालक का नाम बताया जाना और बाद में एफआईआर में उसे अज्ञात लिखना सबसे बड़ा विरोधाभास माना जा रहा है। सवाल यह भी है कि क्या प्रारंभिक सूचना अपुष्ट थी या एफआईआर तैयार करते समय उपलब्ध जानकारी को शामिल नहीं किया गया।
यदि फरियादी चालक का नाम नहीं जानता था, तब भी पुलिस के पास मौजूद अन्य जानकारी को विवेचना में शामिल किया जा सकता था। मामले में चालक और परिचालक की पहचान तथा दुर्घटना के बाद उनकी स्थिति की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
थाना प्रभारी ने क्या कहा?
मामले में चैनपुर थाना प्रभारी गणपत कनेल ने कहा कि संभवतः फरियादी को आरोपी चालक का नाम मालूम नहीं रहा होगा। फरियादी जो जानकारी देता है, उसी के आधार पर एफआईआर दर्ज की जाती है। उन्होंने चालक की पहचान को जांच का विषय बताया।
थाना प्रभारी के इस जवाब के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि एफआईआर में फरियादी का नाम ही स्पष्ट नहीं है तो बयान किस व्यक्ति ने दर्ज कराया और एफआईआर में लिखे रिश्तेदारों की जानकारी किसके माध्यम से प्राप्त हुई।
एसडीओपी बोले—जांच करवाता हूं
एफआईआर में कथित विसंगतियों के संबंध में भीकनगांव एसडीओपी केतन अडलक से संपर्क किया गया। उन्होंने कहा, “मैं चेक करवाता हूं।” उनके बयान के बाद अब पुलिस विभाग द्वारा एफआईआर के तथ्यों की जांच और आवश्यक सुधार किए जाने की उम्मीद है।
वाहन नंबर लिखने में हुई संभावित त्रुटि, फरियादी की पहचान और आरोपी चालक के विवरण को लेकर पुलिस की आधिकारिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति साफ हो सकेगी। संबंधित पुलिस अधिकारियों का विस्तृत पक्ष सामने आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।
