सक्षम जीवन कौशल कार्यक्रम के तहत दो बैचों में शिक्षक प्रशिक्षण संपन्न, विद्यार्थियों के समग्र विकास और जेंडर समानता पर दिया गया विशेष जोर
संवाददाता गौतम साल्वे मंडलेश्वर
मण्डलेश्वर। जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित “सक्षम जीवन कौशल कार्यक्रम” के अंतर्गत विकासखंड महेश्वर स्थित माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर में एक दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। प्रशिक्षण को दो अलग-अलग बैचों में आयोजित किया गया, जिसमें क्षेत्र के शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को जीवन कौशल आधारित शिक्षा, जेंडर समानता, सुरक्षित विद्यालय वातावरण और विद्यार्थियों के समग्र विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षित करना था, ताकि वे विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण एवं व्यवहारिक शिक्षा प्रदान कर सकें।
यह प्रशिक्षण केवल शैक्षणिक जानकारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षकों को विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, सकारात्मक सोच और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे जीवन मूल्यों को विकसित करने के लिए भी प्रेरित किया गया। विशेषज्ञों ने सहभागिता आधारित गतिविधियों, समूह चर्चा और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराया।
माँ सरस्वती के पूजन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रूप से माँ सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित प्रभारी प्राचार्य ने सभी शिक्षकों का स्वागत करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कराना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार, संवेदनशील और आत्मनिर्भर नागरिक तैयार करना है जो समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को केवल विषय आधारित ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक जीवन कौशल भी प्रदान करना आवश्यक है। शिक्षक यदि इन कौशलों को विद्यार्थियों के व्यवहार और दैनिक जीवन का हिस्सा बना दें, तो शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य पूर्ण हो सकता है।
जीवन कौशल शिक्षा की आवश्यकता पर हुआ विस्तार से मंथन
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने जीवन कौशल शिक्षा की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जीवन कौशल विद्यार्थियों में निर्णय लेने की क्षमता, समस्या समाधान, आत्मविश्वास, संवाद कौशल, भावनात्मक संतुलन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रशिक्षकों ने कहा कि बदलते समय में विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं, बल्कि व्यवहारिक शिक्षा भी देना आवश्यक है। विद्यालयों में यदि जीवन कौशल आधारित गतिविधियों को नियमित रूप से लागू किया जाए, तो विद्यार्थियों का मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास अधिक प्रभावी ढंग से हो सकता है।
स्वागत सत्र और एनर्जाइजर गतिविधियों से बना सकारात्मक माहौल

प्रशिक्षण की शुरुआत स्वागत सत्र, कल्चर सेटिंग और प्रेरणादायक एनर्जाइजर गतिविधियों से की गई। इन गतिविधियों का उद्देश्य प्रतिभागियों को सक्रिय, उत्साहित और प्रशिक्षण के प्रति सकारात्मक बनाना था।
सभी शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक इन गतिविधियों में भाग लिया। इससे प्रशिक्षण का वातावरण संवादात्मक और सहभागितापूर्ण बन गया, जिससे प्रतिभागियों को विषयों को समझने में आसानी हुई।
वर्ष-03 के पाठ्यक्रम की दी गई विस्तृत जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान सक्षम जीवन कौशल कार्यक्रम के वर्ष-03 पाठ्यक्रम पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि नए पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए अनेक व्यवहारिक गतिविधियों और जीवन कौशल आधारित विषयों को शामिल किया गया है।
शिक्षकों को प्रत्येक मॉड्यूल की उपयोगिता, शिक्षण पद्धति और विद्यालय स्तर पर उसके प्रभावी क्रियान्वयन की जानकारी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि किस प्रकार कक्षा शिक्षण को अधिक रोचक, संवादात्मक और विद्यार्थी-केंद्रित बनाया जा सकता है।
सेक्स और जेंडर की अवधारणाओं पर हुआ संवाद
प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण विषय सेक्स और जेंडर की अवधारणा रहा। विशेषज्ञों ने इन दोनों विषयों के बीच का अंतर स्पष्ट करते हुए बताया कि समाज में व्याप्त अनेक भ्रांतियों को दूर करना शिक्षकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि विद्यालय बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र होता है। ऐसे में यदि शिक्षक विद्यार्थियों में समानता, सम्मान और संवेदनशीलता की भावना विकसित करें, तो भविष्य में एक अधिक समावेशी और सकारात्मक समाज का निर्माण किया जा सकता है।
जेंडर समानता और सुरक्षित विद्यालय वातावरण पर विशेष जोर
प्रशिक्षण में जेंडर समानता को प्रमुख विषय के रूप में शामिल किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि प्रत्येक विद्यार्थी को बिना किसी भेदभाव के समान अवसर उपलब्ध कराना शिक्षा व्यवस्था का मूल उद्देश्य होना चाहिए।
शिक्षकों को विद्यालयों में ऐसा वातावरण विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया जहाँ छात्र और छात्राएँ समान सम्मान, सुरक्षा और अवसर प्राप्त कर सकें। प्रशिक्षण के दौरान सुरक्षित विद्यालय वातावरण, बाल संरक्षण, सम्मानजनक व्यवहार और सकारात्मक संवाद जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
डेमो सेशन के माध्यम से सीखने का मिला व्यवहारिक अवसर
कार्यक्रम के दौरान एसबीटी (School Based Training) डेमो सेशन आयोजित किया गया। इसमें शिक्षकों को व्यवहारिक रूप से यह समझाया गया कि जीवन कौशल आधारित गतिविधियों को कक्षा में किस प्रकार प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है।
समूह गतिविधियों, रोल प्ले, चर्चा और प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में सक्रिय सहभागिता की। इससे शिक्षकों को वास्तविक परिस्थितियों में इन तकनीकों के उपयोग की बेहतर समझ विकसित हुई।
पिछले दो वर्षों के अनुभवों और उपलब्धियों की हुई समीक्षा
प्रशिक्षण में पिछले दो वर्षों के दौरान संचालित सक्षम जीवन कौशल कार्यक्रम की उपलब्धियों और अनुभवों की भी समीक्षा की गई। शिक्षकों ने अपने विद्यालयों में किए गए नवाचारों, सफल गतिविधियों और सामने आई चुनौतियों को साझा किया।
विशेषज्ञों ने इन अनुभवों का विश्लेषण करते हुए भविष्य में कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाने के सुझाव दिए। इस संवाद से प्रतिभागियों को एक-दूसरे से सीखने और बेहतर कार्यप्रणाली अपनाने का अवसर मिला।
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का लिया संकल्प
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर सभी शिक्षकों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने विद्यालयों में जीवन कौशल आधारित शिक्षा को प्रभावी रूप से लागू करेंगे तथा प्रत्येक विद्यार्थी के व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक सोच को विकसित करने के लिए निरंतर कार्य करेंगे।
उन्होंने यह भी संकल्प लिया कि विद्यालयों में जेंडर समानता, सुरक्षित वातावरण, सहयोगात्मक शिक्षा और समावेशी शिक्षण संस्कृति को बढ़ावा देंगे ताकि प्रत्येक विद्यार्थी अपनी पूर्ण क्षमता के साथ आगे बढ़ सके।
अनुभवी प्रशिक्षकों ने किया मार्गदर्शन
इस प्रशिक्षण का संचालन ब्लॉक मैनेजर राहुल यादव के नेतृत्व में किया गया। प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर सीताराम प्रजापत, अजय राठौर एवं हिम्मत सिटोले ने विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।
प्रशिक्षकों ने सहभागिता आधारित गतिविधियों, समूह चर्चा, केस स्टडी और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से प्रशिक्षण को रोचक और प्रभावी बनाया। इस दौरान ब्लॉक मैनेजर राजेश गुप्ता का भी विशेष सहयोग रहा।
सहभागिता आधारित शिक्षण पद्धति को मिली प्राथमिकता
प्रशिक्षण में पारंपरिक व्याख्यान पद्धति के स्थान पर सहभागिता आधारित शिक्षण को प्राथमिकता दी गई। समूह चर्चा, गतिविधि आधारित शिक्षण, प्रश्नोत्तर सत्र और व्यवहारिक अभ्यास के माध्यम से प्रतिभागियों को विषयों से जोड़ने का प्रयास किया गया।
विशेषज्ञों ने कहा कि जब शिक्षक स्वयं सक्रिय रूप से सीखते हैं, तभी वे विद्यार्थियों को भी प्रभावी तरीके से प्रेरित कर सकते हैं। यही कारण है कि प्रशिक्षण को पूरी तरह संवादात्मक बनाया गया।
शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
जनजातीय कार्य विभाग द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जीवन कौशल आधारित शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल अकादमिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से भी मजबूत बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विद्यालय स्तर पर इस प्रकार के प्रशिक्षण नियमित रूप से आयोजित किए जाएँ, तो शिक्षकों की क्षमता में निरंतर वृद्धि होगी और उसका सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा।
शिक्षकों ने जताई संतुष्टि
प्रशिक्षण में शामिल शिक्षकों ने कार्यक्रम को उपयोगी और प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि उन्हें नई शिक्षण तकनीकों, जीवन कौशल शिक्षा और जेंडर समानता जैसे विषयों पर व्यवहारिक जानकारी प्राप्त हुई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षण से मिली सीख को वे अपने विद्यालयों में प्रभावी रूप से लागू करेंगे।
समग्र शिक्षा की दिशा में प्रभावी प्रयास
सक्षम जीवन कौशल कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित यह प्रशिक्षण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास को प्रोत्साहित करने और विद्यालयों में सकारात्मक एवं सुरक्षित वातावरण विकसित करने की दिशा में एक प्रभावी पहल साबित हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य में विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर, संवेदनशील, जिम्मेदार और नेतृत्व क्षमता से परिपूर्ण नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
