देवास के एम.जी. अस्पताल में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों से मारपीट, दो आरोपी गिरफ्तार; पुलिस ने BNS और स्वास्थ्यकर्मी सुरक्षा कानून के तहत की सख्त कार्रवाई
संवाददाता: अकदस शेख
देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले में स्थित एम.जी. अस्पताल (महाराजा यशवंतराव अस्पताल) में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मारपीट एवं अभद्रता का गंभीर मामला सामने आया है। उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे एक घायल व्यक्ति के साथ आए दो युवकों ने चिकित्सकीय प्रक्रिया के दौरान विवाद खड़ा कर दिया। आरोप है कि दोनों युवकों ने न केवल डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मचारियों के साथ मारपीट एवं अभद्र व्यवहार किया, बल्कि मौके पर पहुंची पुलिस टीम के साथ भी दुर्व्यवहार करते हुए शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने का प्रयास किया।
घटना के बाद कोतवाली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ मध्यप्रदेश चिकित्सा एवं स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की हिंसा या अभद्रता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उपचार के लिए अस्पताल लाया गया था घायल व्यक्ति
जानकारी के अनुसार यह घटना 17 जुलाई को देवास के एम.जी. अस्पताल में हुई। एक घायल व्यक्ति को उपचार के लिए अस्पताल लाया गया था। उसके साथ दो पुरुष और एक महिला भी मौजूद थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि साथ आए दोनों पुरुष शराब के नशे में थे।
अस्पताल के चिकित्सकों ने घायल का प्राथमिक उपचार शुरू किया और आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी की। उपचार के दौरान डॉक्टर ने परिजनों से आगे की प्रक्रिया के लिए ओपीडी पर्ची (OPD Slip) बनवाने का अनुरोध किया। इसी सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर विवाद की शुरुआत हुई।
ओपीडी पर्ची को लेकर बढ़ा विवाद
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार डॉक्टर द्वारा ओपीडी पर्ची लाने की बात कहने पर आरोपियों ने अस्पताल स्टाफ के साथ बहस शुरू कर दी। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया।
स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल में मौजूद अन्य कर्मचारियों ने आरोपियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने किसी की बात नहीं मानी। आरोप है कि इसके बाद दोनों ने अस्पताल स्टाफ के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू कर दी, जिससे अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों से की मारपीट
अस्पताल प्रशासन के अनुसार आरोपियों ने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किया। सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान इस प्रकार की हिंसक घटना से अन्य मरीजों और उनके परिजनों में भी दहशत फैल गई।
घटना के दौरान अस्पताल की नियमित स्वास्थ्य सेवाएं भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुईं। कर्मचारियों ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
सूचना मिलते ही अस्पताल पहुंची पुलिस
घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस की टीम एम.जी. अस्पताल पहुंची। पुलिस ने आरोपियों को शांत कराने और मामले को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
हालांकि, पुलिस के अनुसार आरोपियों ने पुलिस दल के साथ भी सहयोग नहीं किया। उल्टा उन्होंने पुलिसकर्मियों के साथ भी अभद्रता की तथा शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने का प्रयास किया। इसके बाद पुलिस ने आवश्यक बल का प्रयोग करते हुए दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया।
दो आरोपी गिरफ्तार
कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई—
- रूप सिंह रांगोलिया (31 वर्ष) निवासी काकड़, जिला देवास
- कालू उर्फ रोहित चौहान (28 वर्ष) निवासी बगोदा, जिला इंदौर
दोनों आरोपियों को पूछताछ के बाद विधिसम्मत कार्रवाई करते हुए न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
विभिन्न धाराओं में दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न प्रासंगिक धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है। इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश चिकित्सा एवं स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा अधिनियम के तहत भी प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है।
यह अधिनियम डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ तथा अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को ड्यूटी के दौरान हिंसा, मारपीट, धमकी और अभद्रता से कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर आरोपियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा बना अहम मुद्दा
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मारपीट की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि चिकित्सक और अस्पताल कर्मचारी लगातार आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों की सेवा करते हैं। ऐसे में उनके साथ हिंसा या अभद्र व्यवहार न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को भी प्रभावित करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है, ताकि डॉक्टर बिना किसी भय के अपनी सेवाएं दे सकें।
पुलिस ने दिया सख्त संदेश
कोतवाली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी सरकारी कर्मचारी, विशेषकर डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मारपीट, धमकी या अभद्रता करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए शांतिपूर्ण वातावरण आवश्यक है। यदि कोई व्यक्ति कानून अपने हाथ में लेने का प्रयास करेगा या शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करेगा, तो उसके विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग की अपील
अस्पताल प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि उपचार के दौरान धैर्य बनाए रखें और चिकित्सकीय प्रक्रिया में सहयोग करें। कई बार आपातकालीन परिस्थितियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण कुछ समय लग सकता है, लेकिन इसका उद्देश्य मरीज को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना होता है।
प्रशासन ने कहा कि किसी भी समस्या की स्थिति में अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया जा सकता है, लेकिन हिंसा या अभद्र व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
कानून व्यवस्था बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पताल संवेदनशील स्थान होते हैं, जहां हर दिन गंभीर मरीजों का इलाज किया जाता है। ऐसे स्थानों पर अनुशासन, धैर्य और सहयोग का वातावरण बनाए रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित होने से ही मरीजों को बेहतर और निर्बाध चिकित्सा सेवाएं मिल सकती हैं। इसी उद्देश्य से पुलिस और प्रशासन ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई कर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
त्वरित कार्रवाई से मिला स्पष्ट संदेश
देवास कोतवाली पुलिस द्वारा घटना के तुरंत बाद दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी यह दर्शाती है कि सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। पुलिस की इस कार्रवाई को अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्यकर्मियों ने सकारात्मक कदम बताया है।
प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी यदि किसी अस्पताल या अन्य शासकीय संस्थान में कर्मचारियों के साथ मारपीट, अभद्रता या शासकीय कार्य में बाधा डालने जैसी घटनाएं सामने आती हैं, तो संबंधित आरोपियों के विरुद्ध कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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