राजधानी भोपाल में Twisha Sharma की संदिग्ध मौत का मामला लगातार गंभीर और संवेदनशील होता जा रहा है। यह मामला अब केवल एक सामान्य जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें सामने आ रहे नए डिजिटल साक्ष्य, परिवार के आरोप और प्रशासनिक कार्रवाई ने इसे और अधिक जटिल बना दिया है। सबसे अहम मोड़ तब आया जब ट्विशा के मौत से कुछ दिन पहले किए गए इंस्टाग्राम चैट्स सार्वजनिक हुए, जिनमें उनका मानसिक तनाव और अंदरूनी दर्द साफ झलकता है।
इंस्टाग्राम चैट्स ने बढ़ाई जांच की गंभीरता
मामले में सामने आए इंस्टाग्राम संदेशों ने जांच को एक नया आयाम दिया है। बताया जा रहा है कि ट्विशा शर्मा ने अपनी सहेली मीनाक्षी को कुछ निजी संदेश भेजे थे, जिनमें उन्होंने अपने भीतर चल रहे संघर्ष और डर को साझा किया था।
इन संदेशों में ट्विशा ने लिखा था,
“मैं फंस गई हूं यार… तुम मत फंसना। ज्यादा बात नहीं कर सकती। सही समय आने पर कॉल करूंगी।”
इन शब्दों से स्पष्ट होता है कि वे किसी मानसिक दबाव या असहज स्थिति से गुजर रही थीं। उनकी सहेली मीनाक्षी ने जवाब में चिंता जताते हुए कहा था कि वह उनकी फिक्र कर रही हैं और उन्हें बहुत प्यार करती हैं।
इन चैट्स के सामने आने के बाद पुलिस और जांच एजेंसियों ने इस डिजिटल बातचीत को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में जांच में शामिल कर लिया है।
परिवार को भेजे गए संदेशों में गंभीर आरोप
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू तब सामने आया जब ट्विशा का एक व्हाट्सएप चैट वायरल हुआ, जो उन्होंने अपनी मौत से कुछ दिन पहले अपने माता-पिता को भेजा था। इस संदेश में उन्होंने अपने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए थे।
मैसेज में ट्विशा ने लिखा था,
“बहुत परेशान हूं, यह लोग बहुत घटिया हैं। शक करते हैं। समर्थ पूछता है किसका बच्चा है मेरे पेट में। मुझे यहां से ले जाओ। ये लोग मुझे जीने नहीं देंगे।”
इन संदेशों में उन्होंने मानसिक और कथित शारीरिक उत्पीड़न की बात कही थी। परिवार का दावा है कि शादी के बाद से ही ट्विशा लगातार तनाव में थीं और उन्हें ससुराल में प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था।
शादी के बाद से बढ़ा तनाव
परिवार के अनुसार ट्विशा शर्मा की शादी दिसंबर 2025 में समर्थ सिंह से हुई थी। इसके बाद से ही उनके व्यवहार और मानसिक स्थिति में बदलाव देखा जा रहा था। परिजनों का कहना है कि शादी के कुछ समय बाद से ही ट्विशा तनाव में रहने लगी थीं और अक्सर परेशान दिखाई देती थीं।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें लगातार मानसिक दबाव और शक जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा था, जिससे उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित हो रही थी।
शव लेने से परिवार का इनकार
इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब भोपाल एम्स की मर्चुरी में रखे ट्विशा के शव को लेने से परिवार ने इनकार कर दिया। जानकारी के अनुसार शव कई दिनों से सुरक्षित रखा हुआ है, लेकिन परिजन अंतिम संस्कार के लिए सहमत नहीं हुए।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार अस्पताल प्रशासन ने यह भी बताया है कि वे लंबे समय तक शव को सुरक्षित रखने में असमर्थ हैं। इसके बाद अब प्रशासन ने इस मामले में अदालत से मार्गदर्शन लेने का निर्णय लिया है।
संभावना है कि जिला अदालत इस पर अंतिम निर्णय लेगी कि शव का अंतिम संस्कार किस प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।
मुख्यमंत्री आवास पहुंचे परिजन
न्याय की मांग को लेकर ट्विशा शर्मा के परिजन रविवार को मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। वहां उन्होंने करीब दो घंटे तक प्रदर्शन किया और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान स्थिति भावनात्मक हो गई, जब ट्विशा की मां गर्मी के कारण बेहोश हो गईं। वहीं पिता ने सड़क पर लेटकर न्याय की मांग करते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच की अपील की।
बाद में प्रशासनिक अधिकारियों ने हस्तक्षेप करते हुए परिवार से बातचीत की और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया। परिवार की मुख्य मांग है कि मामले की जांच किसी बाहरी एजेंसी से कराई जाए और पोस्टमार्टम को दिल्ली एम्स में दोबारा कराया जाए।
SIT ने शुरू की विस्तृत जांच
इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। टीम का नेतृत्व एसीपी स्तर के अधिकारी कर रहे हैं और इसमें महिला पुलिस अधिकारी सहित कई अनुभवी जांचकर्ता शामिल हैं।
SIT ने जांच के शुरुआती चरण में घटनास्थल का निरीक्षण किया और कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं। इनमें मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डेटा शामिल हैं।
जांच टीम अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और लोकेशन डेटा की मदद से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले किन लोगों की बातचीत हुई थी और उस समय परिस्थितियां क्या थीं।
सीसीटीवी और डिजिटल सबूतों की जांच
पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज भी एकत्र कर लिए हैं। इन फुटेज की मदद से यह समझने की कोशिश की जा रही है कि घटना के समय कौन-कौन व्यक्ति वहां मौजूद था या गतिविधि क्या थी।
इसके अलावा ट्विशा के मोबाइल फोन से मिले डेटा का भी फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि किसी भी संभावित दबाव, बातचीत या मानसिक स्थिति का आकलन किया जा सके।
सामाजिक और कानूनी बहस
यह मामला अब केवल एक व्यक्तिगत घटना नहीं रहा, बल्कि इसने सोशल मीडिया और समाज में भी बहस छेड़ दी है। डिजिटल चैट्स के सामने आने के बाद लोग मानसिक स्वास्थ्य, वैवाहिक दबाव और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में डिजिटल साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष केवल फॉरेंसिक और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
लगातार सामने आ रहे नए तथ्यों और परिवार के विरोध प्रदर्शन के कारण प्रशासन पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है। परिजन लगातार निष्पक्ष और बाहरी एजेंसी से जांच की मांग कर रहे हैं, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है और हर पहलू को गंभीरता से देखा जा रहा है।
निष्कर्ष
ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब कई परतों में उलझता जा रहा है। एक तरफ इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप चैट्स उनके मानसिक तनाव की ओर इशारा कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ परिवार गंभीर आरोप लगा रहा है। SIT की जांच, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल साक्ष्य इस मामले की सच्चाई उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और अंतिम सच सामने आने के लिए पुलिस रिपोर्ट और फॉरेंसिक निष्कर्षों का इंतजार किया जा रहा है।
