त्विषा शर्मा केस: CBI चार्जशीट के बाद जांच पर उठे सवाल, फंदे की बेल्ट से CCTV फुटेज तक कई बिंदुओं पर संदेह
भोपाल: त्विषा शर्मा मामले में CBI की 636 पन्नों की चार्जशीट सामने आने के बाद अब जांच की प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। मामले में अब तक मानसिक प्रताड़ना और घटना से जुड़े आरोपों की चर्चा होती रही है, लेकिन चार्जशीट और गवाहों के बयानों से घटनास्थल की सुरक्षा, फंदे में इस्तेमाल बेल्ट की जांच और ब्यूटी पार्लर से सीसीटीवी फुटेज हासिल किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल सामने आए हैं।
जांच से जुड़े बयानों के आधार पर सबसे अहम सवाल यह है कि 13 मई को त्विषा के ब्यूटी पार्लर पहुंचने वाले दो पुरुष और एक महिला कौन थे, जिन्होंने खुद को अधिवक्ता बताया था। आरोप है कि इन लोगों ने पुलिस जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज की मांग की और पार्लर से रिकॉर्डिंग हासिल कर ली। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि फुटेज लेने की अनुमति किसने दी और क्या उनके पास पुलिस या जांच एजेंसी का कोई लिखित आदेश था?
इसके अलावा घटनास्थल को पूरी तरह सील किए जाने और फंदे में इस्तेमाल नायलान की बेल्ट को पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों तक नहीं पहुंचाए जाने को लेकर भी जांच प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
ब्यूटी पार्लर में सामान्य थी त्विषा की स्थिति
CBI को दिए गए ब्यूटी पार्लर संचालक और कर्मचारियों के बयानों के अनुसार, त्विषा 12 मई को दोपहर करीब 3 बजे कटारा हिल्स स्थित एक्सप्रेशन्स ब्यूटी पार्लर पहुंची थीं। यहां उन्होंने हेड ऑयल मसाज, पेडीक्योर और फुल-बॉडी वैक्सिंग कराई थी।
पार्लर कर्मचारियों के मुताबिक उस दौरान त्विषा का व्यवहार सामान्य था। उनके शरीर या पैरों पर किसी तरह की चोट, खरोंच या अन्य निशान दिखाई नहीं दिए थे। यह जानकारी जांच के लिहाज से इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि बाद की घटनाओं और उनके मानसिक तनाव को लेकर कई सवाल जांच का हिस्सा बने हैं।
चार्जशीट के अनुसार 12 मई की रात करीब 9:36 बजे त्विषा ने अपनी मां को संदेश भेजा था। इसमें उन्होंने अपनी स्थिति और मानसिक पीड़ा का जिक्र किया था। इसके बाद रात करीब 10:23 बजे उन्हें घर से बाहर ले जाने से जुड़ा घटनाक्रम सामने आता है। बाद में करीब 10:55 बजे एम्स में जांच के बाद उन्हें मृत घोषित किया गया।
आधी रात के बाद पुलिस को मिली सूचना
सब-इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा के बयान के अनुसार 13 मई को रात करीब 12:30 बजे उन्हें एम्स भोपाल से सूचना मिली कि त्विषा ने घर की छत पर फांसी लगा ली है। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम रात करीब 2:30 से 3 बजे के बीच बागमुगालिया स्थित घर की छत पर पहुंची।
पुलिस को छत पर लोहे के पाइप से नायलान की दो काली बेल्टनुमा पट्टियां लटकी मिलीं। घटनास्थल के पास पलंग, गद्दे और कुछ कपड़े भी मौजूद थे। वहां लाल रंग का एक मोबाइल फोन भी मिला। इसके अलावा पहली मंजिल के कमरे से लैपटॉप बरामद किया गया।
पुलिस अधिकारी के बयान के मुताबिक कमरे को सील कर दिया गया था और छत के दरवाजे पर कुंडी लगा दी गई थी। हालांकि, सीबीआई की पूछताछ में यह सवाल सामने आया कि जिस स्थान पर फंदा मिला था, उस छत को पूरी तरह सील क्यों नहीं किया गया।
फंदे की बेल्ट को लेकर भी सवाल
घटना के बाद एफएसएल टीम को भी मौके पर बुलाया गया। बताया गया कि 13 मई की सुबह करीब 8 बजे एफएसएल जोन-2 के डॉ. बड़ोनिया को सूचना दी गई और करीब 9 बजे घटनास्थल का निरीक्षण किया गया।
जांच के दौरान मोबाइल फोन, लैपटॉप और दो रिंग के साथ फंदे में इस्तेमाल की गई बेल्ट भी जब्त की गई थीं। हालांकि, सीबीआई की पूछताछ में यह सवाल सामने आया कि फंदे में इस्तेमाल नायलान बेल्ट पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों को क्यों नहीं सौंपी गई।
जब इस संबंध में पुलिस अधिकारी दिनेश शर्मा से सवाल किया गया, तो उन्होंने अपनी तबीयत खराब होने और मामले की पूरी जानकारी नहीं होने की बात कही। इसी बिंदु को लेकर जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं, क्योंकि फंदे में इस्तेमाल वस्तु पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण साक्ष्य मानी जा सकती है।
CCTV फुटेज को लेकर भी उठे सवाल
मामले में सीसीटीवी फुटेज हासिल किए जाने की प्रक्रिया भी चर्चा में है। पार्लर संचालक किरण परिहार के बयान के अनुसार 13 मई की सुबह करीब 11:30 बजे त्विषा की सास गिरिबाला सिंह ने उन्हें फोन किया था।
फोन पर उन्होंने पूछा था कि क्या त्विषा 12 मई को पार्लर आई थीं और क्या वहां सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। इसके करीब दो घंटे बाद यानी दोपहर लगभग 1:30 बजे दो पुरुष और एक महिला पार्लर पहुंचे।
बताया गया कि इन लोगों ने खुद को अधिवक्ता बताया और पुलिस जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज की जरूरत होने की बात कही। इसके बाद उन्होंने पार्लर से रिकॉर्डिंग हासिल कर ली।
यहीं से जांच प्रक्रिया को लेकर एक अहम सवाल उठता है कि जब मामला पुलिस के पास था, तो सीसीटीवी जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य को जांच अधिकारी ने सीधे क्यों नहीं लिया? फुटेज लेने पहुंचे लोगों को यह रिकॉर्डिंग किसकी अनुमति से दी गई और क्या उनके पास कोई लिखित आदेश था? चार्जशीट में दर्ज बयानों के बाद यह प्रक्रिया जांच के महत्वपूर्ण सवालों में शामिल हो गई है।
अब जांच प्रक्रिया पर भी फोकस
CBI की चार्जशीट के बाद मामले में केवल घटना के कारणों और मानसिक प्रताड़ना से जुड़े आरोप ही चर्चा में नहीं हैं, बल्कि जांच के दौरान साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और एकत्र करने की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है।
घटनास्थल को पूरी तरह सुरक्षित रखने, फंदे की बेल्ट को पोस्टमार्टम और फोरेंसिक प्रक्रिया में शामिल करने तथा सीसीटीवी फुटेज को आधिकारिक तरीके से हासिल करने जैसे बिंदु अब मामले की जांच को समझने के लिए महत्वपूर्ण हो गए हैं।
हालांकि, इन सवालों का अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही सामने आएगा। चार्जशीट में दर्ज बयानों और दस्तावेजों के आधार पर उठे ये सवाल अब मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
