उज्जैन न्यूज:
आज उज्जैन में बाबा महाकाल की राजसी शाही सवारी का भव्य आयोजन किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह आयोजन श्रावण-भाद्रपद मास की महाकाल की छठवीं और अंतिम सवारी है, जिसमें देश भर से लगभग 10 लाख श्रद्धालु शामिल होने का अनुमान है।
शाही सवारी शाम 4 बजे महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होकर करीब 7 किलोमीटर के निर्धारित मार्ग से होकर रात 10 बजे वापस मंदिर परिसर में समाप्त होगी। इस बार पहली बार 10 ड्रोन से आकाश से पुष्पवर्षा की भी योजना है, जो इस सवारी को और भी भव्य और मनोरम बनाएगी।
सवारी में छह मुखारविंद शामिल होंगे — रजत पालकी में श्री चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर श्री मनमहेश, गरूड़ रथ पर श्री शिवतांडव, नंदी रथ पर श्री उमा-महेश, डोल रथ पर होल्कर स्टेट का मुखारविंद और सप्तधान मुखारविंद। साथ ही 70 से अधिक भजन मंडलियां, साधु-संत, मंदिर के पुजारी और पुरोहित इस शाही सवारी के साथ रहेंगे।
सवारी से पहले मंदिर में विशेष पूजन-अर्चन होगा और मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर के साथ स्वागत किया जाएगा। सवारी के चल समारोह में महाकालेश्वर मंदिर का प्रचार वाहन सबसे आगे रहेगा, उसके पश्चात यातायात पुलिस, तोपची, रजत ध्वज, घुड़सवार, विशेष सशस्त्र बल, स्काउट-गाइड सदस्यों, कांग्रेस सेवा दल और सेवा समिति बैंड शामिल होंगे।
सवारी मार्ग पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं, जिसमें मोबाइल डिटेक्शन टीम भी तैनात रहेगी। सुरक्षा कारणों से इस साल सेल्फी लेने पर प्रतिबंध भी लगाया गया है।
सवारी में स्थानीय जनजातीय और लोककलाओं का भी विशेष योगदान रहेगा, जिनमें ढुलिया जनजातीय का गुदुम बाजा नृत्य, हरदा के भुवनेश्वर का डंडा लोक नृत्य और बालाघाट की बैगा जनजाति का करमा नृत्य प्रमुख आकर्षण होंगे। साथ ही राजसी चलित रथ के दोनों तरफ LED स्क्रीन पर लाइव प्रसारण होगा, जिसे उज्जैन के विभिन्न क्षेत्रों जैसे फ्रीगंज, नानाखेड़ा, दत्त अखाड़ा आदि से देखा जा सकेगा।
यह शाही सवारी न केवल धार्मिक श्रद्धा का बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का भी जीवंत रूप है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में सिंधिया और होलकर जैसे महाराजाओं का भी योगदान रहा है, जिन्होंने इसे आज के भव्य स्वरूप तक पहुँचाया है।
इस भव्य आयोजन में भाग लेने के लिए लाखों भक्त उज्जैन आएंगे और बाबा महाकाल के दर्शन कर आस्था का अनुभव करेंगे।
