जैन महाविद्यालय में तिरंगा यात्रा से गूंजा राष्ट्रप्रेम, आर्यिका श्री विजिज्ञासा माता जी ने दिया देश के नाम संदेश
आर्यिका श्री ने कहा—देश की आजादी में साधु-संतों और महापुरुषों का भी रहा महत्वपूर्ण योगदान
युवाओं से किया राष्ट्र की एकता, अखंडता, मातृभाषा और भारतीय संस्कृति को मजबूत करने का आह्वान
तिरंगा यात्रा का शुभारंभ श्री आदिनाथ दिगंबर जैन चैत्यालय मंदिर से हुआ। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर यात्रा में शामिल लोगों ने नगर के विभिन्न मार्गों से भ्रमण करते हुए राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए जैन महाविद्यालय पहुंची, जहां आर्यिका श्री 105 विजिज्ञासा माता जी ससंघ का श्रद्धा और उत्साह के साथ भव्य स्वागत किया गया।
जैन महाविद्यालय में आर्यिका श्री ससंघ का भव्य स्वागत
तिरंगा यात्रा के जैन महाविद्यालय पहुंचने पर धार्मिक और देशभक्ति से ओतप्रोत वातावरण देखने को मिला। महाविद्यालय परिसर में आर्यिका श्री 105 विजिज्ञासा माता जी ससंघ के स्वागत के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं।
भदावर प्रांतिक दिगंबर जैन सभा के सदस्यों द्वारा पूज्य माताजी के पद प्रक्षालन किए गए। विद्यालय एवं महाविद्यालय के प्राचार्यों ने शास्त्र भेंट कर आर्यिका श्री से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर उपस्थित सकल जैन समाज के पदाधिकारियों, वरिष्ठजनों एवं समाज के अन्य सदस्यों ने भी आर्यिका श्री ससंघ का श्रद्धापूर्वक स्वागत किया।
कार्यक्रम में धार्मिक आस्था के साथ देशभक्ति का सुंदर संगम दिखाई दिया। बड़ी संख्या में उपस्थित समाजजनों और विद्यार्थियों ने आयोजन में सहभागिता कर राष्ट्र के प्रति अपनी भावना व्यक्त की।
मंगलाचरण और दीप प्रज्ज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ
जैन महाविद्यालय में आयोजित मुख्य कार्यक्रम की शुरुआत बाल ब्रह्मचारिणी दीदी राधिका द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण से हुई। मंगलाचरण के पश्चात दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम में विद्यालय और महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने देशभक्ति तथा भारतीय संस्कृति से जुड़ी विभिन्न प्रस्तुतियां दीं। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित अतिथियों और समाजजनों का मन मोह लिया। प्रस्तुतियों के माध्यम से देश के प्रति प्रेम, स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और भारतीय संस्कृति के महत्व का संदेश दिया गया।
स्वतंत्रता आंदोलन में साधु-संतों का भी रहा योगदान : आर्यिका श्री
धर्मसभा एवं कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आर्यिका श्री 105 विजिज्ञासा माता जी ने देश की स्वतंत्रता और राष्ट्र निर्माण में साधु-संतों तथा महापुरुषों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि भारत की आजादी के संघर्ष में अनेक साधु-संतों और महापुरुषों ने प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को देश की स्वतंत्रता के लिए दिए गए बलिदानों को समझना चाहिए। स्वतंत्रता केवल एक ऐतिहासिक उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भी बोध कराती है। हमें अपने कर्तव्यों को समझते हुए राष्ट्र और समाज के उत्थान के लिए कार्य करना चाहिए।
आर्यिका श्री ने विद्यार्थियों और युवाओं से कहा कि देश की स्वतंत्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी भूमिका समझनी होगी। राष्ट्रहित, अनुशासन, संस्कार और सामाजिक एकता को जीवन में स्थान देकर ही मजबूत भारत का निर्माण किया जा सकता है।
मानसिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता भी जरूरी
आर्यिका श्री विजिज्ञासा माता जी ने स्वतंत्रता के व्यापक अर्थ को समझाते हुए कहा कि केवल राजनीतिक रूप से स्वतंत्र होना पर्याप्त नहीं है। व्यक्ति को मानसिक और सांस्कृतिक रूप से भी स्वतंत्र होने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमें अपनी संस्कृति, संस्कारों और परंपराओं को समझते हुए उन पर गौरव करना चाहिए। आधुनिकता के साथ आगे बढ़ना आवश्यक है, लेकिन इस प्रक्रिया में अपनी जड़ों और सांस्कृतिक मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संस्कारवान युवा ही राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बन सकते हैं।
मातृभाषा हिंदी और भारतीय संस्कृति पर करें गर्व
आर्यिका श्री ने अपने संबोधन में मातृभाषा हिंदी के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमें अपनी भाषा के प्रति सम्मान और गौरव का भाव रखना चाहिए। दूसरी और विदेशी भाषाओं का ज्ञान प्राप्त करना गलत नहीं है, लेकिन इसके कारण अपनी मातृभाषा और संस्कृति को पीछे नहीं छोड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाषा किसी भी समाज की संस्कृति और पहचान का महत्वपूर्ण माध्यम होती है। इसलिए नई पीढ़ी को हिंदी के साथ भारतीय भाषाओं, साहित्य, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति भी जागरूक रहना चाहिए।
आर्यिका श्री ने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार ग्रहण करने, माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करने तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा दी।
तिरंगा यात्रा ने दिया एकता और राष्ट्रभक्ति का संदेश

श्री आदिनाथ दिगंबर जैन चैत्यालय मंदिर से जैन महाविद्यालय तक निकाली गई तिरंगा यात्रा ने नगर में राष्ट्रभक्ति का वातावरण निर्मित किया। यात्रा के माध्यम से समाज ने संदेश दिया कि राष्ट्रीय ध्वज प्रत्येक भारतीय के सम्मान, स्वाभिमान और एकता का प्रतीक है।
आयोजन में धर्म और राष्ट्रप्रेम का अनूठा संगम देखने को मिला। एक ओर आर्यिका श्री के सानिध्य ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान किया, वहीं तिरंगा यात्रा और विद्यार्थियों की देशभक्ति प्रस्तुतियों ने लोगों में राष्ट्र के प्रति गौरव की भावना को मजबूत किया।
बड़ी संख्या में समाजजन और विद्यार्थी रहे उपस्थित

कार्यक्रम में सकल जैन समाज के पदाधिकारी, भदावर प्रांतिक दिगंबर जैन सभा के सदस्य, समाज के वरिष्ठजन, विद्यालय एवं महाविद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मंच संचालन शैलू जैन एलआईसी एवं बॉबी जैन ने किया। आयोजन के दौरान उपस्थित लोगों ने राष्ट्र की एकता और अखंडता बनाए रखने, भारतीय संस्कृति और संस्कारों को आगे बढ़ाने तथा देश के विकास में अपनी भूमिका निभाने का संदेश ग्रहण किया।
तिरंगा यात्रा और आर्यिका श्री 105 विजिज्ञासा माता जी के प्रेरक उद्बोधन ने पूरे आयोजन को राष्ट्रप्रेम, धर्म, संस्कृति और सामाजिक एकता से जोड़ते हुए युवाओं और विद्यार्थियों को देश के प्रति अपने कर्तव्यों के निर्वहन की प्रेरणा दी।
