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Indore वनमंडल में बाघ और तेंदुओं की गतिविधियां बढ़ीं, नए सुरक्षित क्षेत्रों और वाइल्डलाइफ कारिडोर की संभावना उभरी

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Published On: 3 March 2026
Tiger and Leopard Activity Rises in Indore Forest Division, New Safe Zones and Wildlife Corridor Emerging
— Tiger and Leopard Activity Rises in Indore Forest Division, New Safe Zones and Wildlife Corridor Emerging

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Indore वनमंडल: बाघ और तेंदुओं के लिए बढ़ रहा सुरक्षित आवास

Indore । वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे के मौके पर इंदौर वनमंडल से सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। जंगल में घना वनस्पति आवरण, पर्याप्त जल स्रोत और शिकार की उपलब्धता ने चोरल-महू-मानपुर क्षेत्र को बाघों और तेंदुओं के लिए आदर्श बना दिया है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र धीरे-धीरे बड़े वन्य जीवों का ठिकाना बनता जा रहा है।

बाघों की मौजूदगी के पुख्ता प्रमाण

जनवरी से फरवरी के बीच चोरल क्षेत्र में बाघों की उपस्थिति के कई पुख्ता प्रमाण मिले हैं। वन अधिकारियों ने बाघों के पंजों के निशान और विष्ठा के नमूने दर्ज किए हैं। वहीं, तेंदुओं की गतिविधियां भी लगातार देखी जा रही हैं। यह संकेत है कि वन्यजीव आबादी स्वास्थ्यपूर्ण तरीके से इस क्षेत्र में बढ़ रही है।

नया टेरीटरी: उदयनगर से बड़वाह

दिसंबर में हुई बाघ गणना के दौरान नाहरझाबुआ-भड़किया, उमठ-वेका और मलेंडी-मांगलिया क्षेत्रों में बाघों की हलचल दर्ज की गई। वन अधिकारियों के अनुसार, बाघ अब उदयनगर से बड़वाह तक नया टेरीटरी विकसित कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खिवनी अभयारण्य से उदयनगर-बड़वाह तक का क्षेत्र एक संभावित वाइल्डलाइफ कारिडोर के रूप में उभर रहा है।

देहरादून स्थित वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया भी इस क्षेत्र को महत्वपूर्ण मानता है। हालांकि, विकास परियोजनाओं और औद्योगिक गतिविधियों के कारण जंगलों का दायरा प्रभावित हुआ है।

वन्यजीवों के लिए सुरक्षित क्षेत्रों की ओर रुख

Indore -खंडवा मार्ग, महू-सनावद रेल लाइन और अन्य विकास परियोजनाओं से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास बाधित हुआ है। इस वजह से वे नए सुरक्षित क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं। 2022 से 2024 के बीच कई बार बाघ और तेंदुओं को इन इलाकों में देखा गया है। यह बताता है कि वन्यजीव अपने सुरक्षित आवास की तलाश में लगातार फैल रहे हैं।

कैमरा ट्रैप निगरानी

वन विभाग ने बाघ और तेंदुओं की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए चोरल, महू और इंदौर के विभिन्न हिस्सों में कैमरा ट्रैप लगाए हैं। इन कैमरों से मिली तस्वीरों का अध्ययन देहरादून स्थित संस्थान में किया जा रहा है। इससे बाघों की संख्या, उनकी गतिविधि और मूवमेंट का सटीक आकलन किया जा सकेगा।

शिकार और प्राकृतिक संसाधनों का महत्व

विशेषज्ञों के अनुसार, क्षेत्र में सांभर, चीतल, हिरण और नीलगाय जैसी शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या बढ़ने से बाघों और तेंदुओं को पर्याप्त शिकार मिल रहा है। वन्यजीवों का यह संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र उन्हें अधिक सक्रिय बनाता है और नए क्षेत्रों में फैलने का अवसर देता है।

मानव गतिविधियों और विकास का प्रभाव

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों में बढ़ती मानव गतिविधियां और निर्माण कार्य वन्यजीवों के आवास पर दबाव डाल रहे हैं। मांचल और मोरोद जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक और प्रस्तावित परियोजनाओं के कारण वनक्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। अगर वन्यजीव मार्ग और आवास के लिए सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो बाघ और तेंदुओं के जीवन और संख्या पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

वन्यजीव संरक्षण के प्रयास

इंदौर वनमंडल में वन विभाग लगातार सुरक्षा और संरक्षण के उपाय कर रहा है। बाघ और तेंदुओं की संख्या बढ़ाने के लिए विभाग ने कई जंगलों में सुरक्षा बढ़ाई है। वन्यजीवों के लिए पर्याप्त जल स्रोत और शिकार की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जंगलों में प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किया जा रहा है।

संभावित वाइल्डलाइफ कारिडोर

विशेषज्ञों का मानना है कि खिवनी अभयारण्य से उदयनगर-बड़वाह तक का क्षेत्र महत्वपूर्ण वाइल्डलाइफ कारिडोर बन सकता है। इस मार्ग के माध्यम से बाघ और तेंदुओं की आबादी अलग-अलग क्षेत्रों में फैल सकती है। इसके लिए वन्यजीव संरक्षण की योजना और स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

निष्कर्ष

इंदौर वनमंडल में बाघ और तेंदुओं की गतिविधियों में वृद्धि यह संकेत देती है कि क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र धीरे-धीरे संतुलन में लौट रहा है। वन्यजीवों के लिए घने जंगल, पर्याप्त जल स्रोत और शिकार की उपलब्धता आदर्श परिस्थितियां बनाती हैं। वन्यजीव संरक्षण और कारिडोर के विकास के लिए स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की सतत निगरानी अत्यंत महत्वपूर्ण है, ताकि भविष्य में बाघ और तेंदुओं की संख्या सुरक्षित रह सके।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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