झाबुआ में गुरु भक्ति का महाकुंभ: ऐतिहासिक चातुर्मास प्रवेशोत्सव में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, भंडारी परिवार ने ओढ़ाई कांबली
झाबुआ | प्रतिनिधि – मनीष कुमट
मालवा की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान मानी जाने वाली झाबुआ नगरी सोमवार, 20 जुलाई को गुरु भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के अभूतपूर्व संगम की साक्षी बनी। शहर में आयोजित द्विशताब्दी आध्यात्मिक चातुर्मास–2026 प्रवेशोत्सव के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को धर्ममय बना दिया। भगवान महावीर के संदेश, गुरु परंपरा के सम्मान और जैन संस्कृति की गौरवशाली विरासत को समर्पित इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रीसंघों, संत-भक्तों और समाजजनों ने भाग लेकर कार्यक्रम को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।
इस अवसर पर पूज्य पुण्यसम्राट, युगप्रभावकाचार्य गुरुदेव श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी महाराजा के पट्टधर, धर्मदिवाकर, हृदयसम्राट एवं गच्छाधिपति पूज्य श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी महाराज तथा आचार्य श्रीमद् विजय जयरत्न सूरीश्वरजी महाराज साहेब की आज्ञानुवर्ती परम पूज्य साध्वी श्री अविचल दृष्टा श्रीजी महाराज साहेब सहित ठाणा-श्रमणी वृंद का भव्य चातुर्मास प्रवेश हुआ। यह आयोजन प्रभु श्री राजेन्द्रसूरीश्वरजी महाराज साहेब के जन्म द्विशताब्दी वर्ष को समर्पित रहा, जिससे इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया।
द्विशताब्दी चातुर्मास बना ऐतिहासिक अवसर
इस वर्ष आयोजित चातुर्मास केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जैन समाज की गुरु परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक एकता का विराट उत्सव बन गया। झाबुआ की ऐतिहासिक धरती पर आयोजित यह प्रवेशोत्सव हजारों श्रद्धालुओं के लिए जीवन भर यादगार रहने वाला क्षण साबित हुआ।
सुबह से ही शहर के प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। महिलाएं मंगल गीत गाती हुईं, युवक-युवतियां धार्मिक ध्वज लेकर चलते हुए तथा समाज के वरिष्ठजन गुरु वंदना करते हुए शोभायात्रा में शामिल हुए। पूरा शहर भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंगा नजर आया।
गुरु भक्ति के जयघोष से गूंजा पूरा शहर
प्रवेशोत्सव के दौरान जैसे ही साध्वी श्री अविचल दृष्टा श्रीजी महाराज साहेब एवं श्रमणी वृंद का नगर प्रवेश हुआ, पूरा वातावरण गुरु वंदना और जयघोषों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर संतों का स्वागत किया तथा मार्ग में जगह-जगह धार्मिक स्वागत द्वार बनाए गए थे।
श्रद्धालु हाथ जोड़कर संतों के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और बच्चों की भागीदारी देखने को मिली, जिसने आयोजन को और भी भव्य बना दिया।
देशभर से पहुंचे श्रीसंघ और श्रद्धालु
परिषद के मीडिया प्रभारी एवं नवकार संयोजक योगेन्द्र नाहर ने बताया कि इस ऐतिहासिक आयोजन में देशभर के अनेक शहरों और श्रीसंघों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस अवसर पर मुंबई, अहमदाबाद, सूरत, इंदौर, रतलाम, जावरा, राजगढ़, दाहोद, खाचरोद, डिसा, पारा, बाग, खट्टाली, जोबट, अलीराजपुर, रानापुर, कल्याणपुरा, खवासा, बामनिया, थांदला, मेघनगर सहित अनेक स्थानों से सैकड़ों श्रद्धालु झाबुआ पहुंचे।
इसके साथ ही श्वेतांबर, स्थानकवासी और तेरापंथ सहित जैन समाज के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों एवं ट्रस्टियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
झाबुआ में लगातार दसवां चातुर्मास
झाबुआ जैन समाज के लिए यह अवसर इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि शहर में लगातार दसवें चातुर्मास का आयोजन हो रहा है। समाजजनों ने इसे गुरु कृपा का परिणाम बताते हुए कहा कि झाबुआ धार्मिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।
समाज के वरिष्ठजनों का मानना है कि लगातार चातुर्मास आयोजन से नई पीढ़ी को जैन धर्म, संस्कार और आध्यात्मिक जीवन से जुड़ने का अवसर मिलता है।
भंडारी परिवार ने ओढ़ाई कांबली
प्रवेशोत्सव के दौरान आयोजित विशेष धार्मिक अनुष्ठानों में वाक्षेप पूजन का लाभ परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश छाजेड़ ने प्राप्त किया।
वहीं परम पूज्य साध्वी श्रीजी महाराज साहेब को कांबली ओढ़ाने का सौभाग्य श्रीमती लीलाबाई शांतिलाल भंडारी की स्मृति में मनोहरलाल, राजेन्द्र एवं प्रदीप शांतिलाल भंडारी परिवार को प्राप्त हुआ।
यह धार्मिक सेवा श्रद्धालुओं के लिए विशेष गौरव का विषय रही और समाजजनों ने भंडारी परिवार का अभिनंदन किया।
नवकारसी और साधर्मिक वात्सल्य का मिला लाभ
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित नवकारसी का लाभ मनोज कुमार, मुकेश कुमार एवं चंद्रशेखर नाकोड़ा परिवार द्वारा लिया गया।
वहीं साधर्मिक वात्सल्य का लाभ स्वर्गीय लीलाबाई शांतिलाल भंडारी की स्मृति में मनोहरलाल, राजेन्द्र एवं प्रदीप शांतिलाल भंडारी परिवार ने प्राप्त किया।
इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से प्रसादी ग्रहण कर धार्मिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया।
मुख्य लाभार्थियों का हुआ सम्मान
इस ऐतिहासिक चातुर्मास के मुख्य लाभार्थी मनोहरलाल शांतिलाल भंडारी एवं प्रमोद कुमार चंपालाल भंडारी परिवार रहे।
देशभर से आए विभिन्न श्रीसंघों तथा झाबुआ श्रीसंघ ने दोनों परिवारों का शाब्दिक बहुमान कर उनके धार्मिक योगदान की सराहना की।
समाजजनों ने कहा कि ऐसे सेवाभावी परिवारों के सहयोग से ही इतने विशाल धार्मिक आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो पाते हैं।
धर्मसभा और गुरु वंदना से मिला आध्यात्मिक संदेश
प्रवेशोत्सव के दौरान आयोजित धर्मसभा में गुरु महिमा, संयम, सेवा, अहिंसा, करुणा और आध्यात्मिक जीवन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
गुरु वंदना के साथ श्रद्धालुओं ने आत्मचिंतन और धर्म साधना का संकल्प लिया। कार्यक्रम में मंगल प्रवेश, धार्मिक स्तवन, सामूहिक वंदना तथा अन्य आध्यात्मिक गतिविधियां भी आयोजित की गईं।
धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरुजनों के प्रवचनों को अत्यंत श्रद्धा और ध्यानपूर्वक सुना।
समाज के सभी संगठनों का रहा सक्रिय योगदान
कार्यक्रम को सफल बनाने में समाज के विभिन्न संगठनों एवं कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आयोजन में परिषद अध्यक्ष राकेश मेहता, सचिव संदीप सकलेचा, अरविंद लोड़ा, प्रकाश कटारिया, विवेक वागरेचा, मीत बरमेचा, मनोहर छाजेड़, योगेन्द्र नाहर, मनोज संघवी, भरत बाबेल, सुनील संघवी सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
इसके अतिरिक्त तरुण परिषद, महिला परिषद, बहु परिषद एवं श्री सौधर्म बृहत्तपोगच्छीय श्रीसंघ झाबुआ के सदस्यों ने आयोजन की विभिन्न व्यवस्थाओं का सफल संचालन किया।
श्रीसंघ अध्यक्ष ने किया संचालन
पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीसंघ अध्यक्ष संजय मेहता ने किया। उन्होंने देशभर से आए सभी श्रीसंघों, श्रद्धालुओं एवं अतिथियों का स्वागत करते हुए आयोजन की सफलता के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।
चातुर्मास समिति ने जताया आभार
चातुर्मास समिति के सचिव पंकज कोठारी ने कार्यक्रम के समापन अवसर पर देशभर से पधारे सभी श्रीसंघों, संत-भक्तों एवं झाबुआ जिले के नागरिकों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि समाज के सामूहिक सहयोग, सेवा भावना और गुरु भक्ति के कारण यह प्रवेशोत्सव ऐतिहासिक एवं अविस्मरणीय बन सका।
गुरु भक्ति और सामाजिक एकता का बना संदेश
यह भव्य चातुर्मास प्रवेशोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि समाज में एकता, सेवा, संस्कार और गुरु भक्ति का प्रेरणादायी संदेश भी दे गया। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि जैन समाज अपनी आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए आज भी पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ कार्य कर रहा है।
झाबुआ की पावन धरती पर आयोजित यह ऐतिहासिक आयोजन आने वाले समय में जैन समाज की धार्मिक विरासत का एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाएगा। गुरु वंदना, धर्मसभा, साधर्मिक वात्सल्य, नवकारसी और भव्य प्रवेश जुलूस ने पूरे शहर को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया और श्रद्धालुओं के मन में गुरु भक्ति की नई चेतना जागृत की।
