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Thandla में गुरु भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाई गई आचार्य उमेशमुनिजी म.सा. की जन्म जयंती

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Published On: 17 February 2026
Spiritual Fest in Thandla Honors the Life and Legacy of Jainacharya Shri Umeshmuniji M.S.A.
— Spiritual Fest in Thandla Honors the Life and Legacy of Jainacharya Shri Umeshmuniji M.S.A.

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Thandla , मध्य प्रदेश: धर्म तीर्थ और छोटा काशी के रूप में विख्यात थांदला नगर में जैनाचार्य पूज्य श्री उमेशमुनिजी म.सा. “अणु” की 94वीं जन्म जयंती श्रद्धा, भक्ति और गुरुभक्ति के साथ पूरे उत्साह के साथ मनाई गई। इस दो दिवसीय भव्य आयोजन का संचालन पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. की सानिध्य में किया गया। यह अवसर न केवल उनके जन्मोत्सव का प्रतीक था, बल्कि जैन धर्म, तपस्या, ज्ञान और सेवा के संदेश को आमजन तक पहुँचाने का माध्यम भी बना।

थांदला नगर की पवित्र भूमि को महापुरुषों के पदार्पण से हमेशा ही आध्यात्मिक ऊर्जा मिलती रही है। इसी भूमि पर जन्म लेकर पूज्य आचार्य उमेशमुनिजी म.सा. ने जिन शासन की महक और तपस्वी जीवन से पूरे जगत को सुगंधित किया। उनकी शिक्षाओं और उपदेशों का प्रभाव आज भी श्रद्धालुओं और उनके शिष्यों के जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। जन्म जयंती के अवसर पर आयोजित यह आयोजन उनके जीवन, चरित्र, तप और ज्ञान का प्रतीक रहा।

आयोजन का उद्देश्य और महत्व

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था श्रद्धालुओं और शिष्यों को गुरु के आदर्शों के प्रति प्रेरित करना। संघ के प्रवक्ता पवन नाहर ने बताया कि यह आयोजन जैनाचार्य के ज्ञान, भक्ति और तप के संदेश को जीवन में उतारने का एक प्रयास था। उनके योगदान को याद करते हुए यह दो दिवसीय उत्सव भक्ति, ध्यान और गुरु भक्ति के माध्यम से सम्पन्न हुआ।

आचार्य उमेशमुनिजी म.सा. ने अपने जीवन में हमेशा धर्म, तप, सेवा और ज्ञान का संदेश दिया। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर श्रद्धालु जीवन में संयम, अनुशासन और आध्यात्मिक चेतना के मार्ग पर चलने की दिशा प्राप्त करते हैं। इस जन्मोत्सव ने इन मूल्यों को जनमानस तक पहुँचाने का प्रयास किया।

प्रथम दिवस की गतिविधियाँ

जन्म जयंती के पहले दिन पक्खी मंडल द्वारा सामूहिक उपवास का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विराजित महासतियों ने गुरु गुणानुवाद प्रस्तुत किया। उन्होंने आचार्य के जीवन, ज्ञान और तपस्या की महिमा को लोगों के सामने रखा और सभी को गुरु के आदर्शों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

सामूहिक उपवास और ध्यान कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं को न केवल आंतरिक शांति प्रदान की, बल्कि उन्हें जीवन में संयम और आध्यात्मिक अनुशासन के महत्व को समझने का अवसर भी दिया। इस दिन गुरु के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित प्रवचन आयोजित किए गए, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

दूसरे दिवस की गतिविधियाँ

दूसरे दिन श्रावक-श्राविकाओं द्वारा गुरु भगवंतों के गुणगान किए गए। इस अवसर पर कई प्रमुख जैन समाज के पदाधिकारी उपस्थित थे, जिनमें पूज्य श्री धर्मदास गण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष भरत भंसाली, पूर्व अध्यक्ष नगीनलाल शाहजी और जितेन्द्र घोड़ावत, अध्यक्ष प्रदीप गादिया, कोषाध्यक्ष रजनीकांत शाहजी, और अन्य वरिष्ठ सदस्य शामिल थे।

श्रावक-श्राविकाओं ने गुरु के गुणों की भावाभिव्यक्ति और स्तवन के माध्यम से उनकी शिक्षाओं और जीवन के आदर्शों को उजागर किया। कार्यक्रम में सामूहिक सामयिक और पौषध का विशेष आयोजन किया गया। इसमें सहयोग देने वाले आराधकों को वीर माता तारा सुंदरलाल भंसाली, सीमा संजय चौरड़िया और कुसुम बहन वागरेचा द्वारा प्रभावना वितरित की गई।

भजन संध्या और गुरु आराधना

गुरु जयंती के दोनों दिनों में भजन संध्या “एक शाम अणु के नाम” का आयोजन किया गया। इसमें दौलत भवन में श्रावक वर्ग और पौषध भवन में श्राविकाओं ने पूज्या महासतियों की सानिध्य में गुरु स्तवन और भजन प्रस्तुत किए। इस आयोजन ने श्रद्धालुओं में भक्ति भाव और गुरुभक्ति को और मजबूत किया।

94 श्राविकाओं द्वारा 12 घंटे तक सतत गुरु उमेश चालीसा का जाप भी इस अवसर पर किया गया। इस कार्यक्रम ने विशेष रूप से महिला मंडल अध्यक्ष किरण नरेंद्रकुमार श्रीश्रीमल के नेतृत्व में श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान किया।

सामाजिक और आध्यात्मिक योगदान

पक्खी पर्व पर सामूहिक उपवास और पारणा का आयोजन मयूर वर्धमान तलेरा परिवार ने किया। धर्म सभा और प्रवचन का संचालन संघ सचिव हितेश शाहजी ने किया, जबकि नव युवक मंडल अध्यक्ष प्रांजल लोढ़ा ने संघ के सभी सदस्यों और उपस्थित श्रद्धालुओं का धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस आयोजन ने न केवल गुरु उमेशमुनिजी म.सा. की पुण्य स्मृति को जीवित रखा, बल्कि जैन धर्म के मूल सिद्धांतों—ज्ञान, तप, भक्ति और चारित्र—को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी। उपस्थित श्रद्धालुओं ने अपने जीवन में धर्म और अनुशासन को अपनाने का संकल्प लिया।

परिणाम और संदेश

दो दिवसीय आयोजन ने Thandla नगर को आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति भाव से परिपूर्ण कर दिया। यह उत्सव जैनाचार्य उमेशमुनिजी म.सा. के योगदान और उनके जीवन के आदर्शों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम साबित हुआ।

श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर गुरु के आदर्शों का पालन करने, संयम और आध्यात्मिक अनुशासन बनाए रखने और जीवन में सेवा, ज्ञान और भक्ति को उतारने का संकल्प लिया। इस तरह, जन्म जयंती का आयोजन केवल एक धार्मिक समारोह नहीं बल्कि आध्यात्मिक चेतना और समाज में नैतिक मूल्यों के प्रसार का प्रतीक बन गया।

निष्कर्ष

पूज्य आचार्य उमेशमुनिजी म.सा. की 94वीं जन्म जयंती का यह दो दिवसीय आयोजन श्रद्धालुओं, शिष्यों और जैन समाज के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन का अवसर साबित हुआ। गुरु के आदर्शों और शिक्षाओं को जीवन में उतारने के लिए यह आयोजन सभी के लिए प्रेरणास्पद रहा।

इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि गुरु भक्ति, धर्म, तपस्या और सेवा का मार्ग हमेशा समाज और आत्मा को उन्नति की दिशा में ले जाता है।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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