धर्मोत्कर्ष वर्षावास में डॉ. गोल्डी शाहजी का 16वां मासक्षमण पूर्ण, जयकार यात्रा में उमड़ा श्रीसंघ
थांदला। धर्मोत्कर्ष तत्वज्ञ वर्षावास के दौरान तप आराधना की श्रृंखला में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ गया। आचार्य श्री उमेशमुनिजी म.सा. के सुशिष्य, धर्मदास गणनायक प्रवर्तक श्री जिनेंद्रमुनिजी म.सा. की आज्ञानुवर्ती तत्वज्ञ श्री धर्मेंद्रमुनिजी म.सा., रोचक वक्ता श्री संदीपमुनिजी म.सा. आदि ठाणा-8 तथा साध्वी श्री निखिलशीलाजी, दिव्यशीलाजी आदि ठाणा-4 के सानिध्य में डॉ. गोल्डी शाहजी ने अपना पहला और संघ का 16वां मासक्षमण पूर्ण किया।
एक वर्ष से रसना विजय की साधना, फिर मासक्षमण का संकल्प
धर्मसभा में श्री धर्मेंद्रमुनिजी म.सा. और श्री संदीपमुनिजी म.सा. ने डॉ. गोल्डी शाहजी के तप-संकल्प की विशेष अनुमोदना की। संतों ने बताया कि गोल्डी ने करीब एक वर्ष पहले ही मासक्षमण का लक्ष्य तय कर रसना विजय की साधना शुरू की थी और प्रतिदिन केवल एक सब्जी से भोजन करने का संयम अपनाया था। क्षणिक अंतराय के बावजूद उन्हें इस कठिन तप को पूर्ण करने में सफलता मिली।
संतों ने कहा कि रसना पर विजय अत्यंत कठिन साधना है। उनकी मासक्षमण साधना उपवास शुरू होने के दिन से नहीं, बल्कि उसी दिन से प्रारंभ हो गई थी जब उन्होंने रसना पर संयम का दृढ़ संकल्प लिया था। आज भी ऐसे कठिन त्याग के लिए हर कोई सहज तैयार नहीं होता, इसलिए यह तपस्या विशेष अनुमोदना के योग्य है।
जयकार यात्रा में शामिल हुआ श्रीसंघ परिवार
संघ प्रवक्ता पवन नाहर ने बताया कि 16वां मासक्षमण पूर्ण होने पर तपस्वी डॉ. गोल्डी शाहजी की बैंडबाजों के साथ गुरुदेव, तप और तपस्वी के जयनादों के बीच जयकार यात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं और श्रीसंघ परिवार उत्साहपूर्वक शामिल हुए। यात्रा नगर के मुख्य मार्गों से होती हुई धर्मसभा स्थल पहुंची, जहां तपस्वी का भव्य बहुमान किया गया।
तप की बोली से हुआ तपस्वी का बहुमान
धर्मसभा में तप की बोली तप से लगाकर तपस्वी का अभिनंदन किया गया। 11 उपवास की बोली से गोल्डी की नानीजी मंजू सकलेचा (नलखेड़ा) तथा 8 उपवास की बोली से रजनीकांत शाहजी ने बहुमान किया। श्रीसंघ के पूर्वाध्यक्षों और पदाधिकारियों ने शॉल, माला और चांदी के सिक्के के साथ अभिनंदन-पत्र देकर तपस्वी का सम्मान किया, जिसमें पूज्य श्री धर्मलता मण्डल ने पूर्ण सहयोग किया। श्रीसंघ की ओर से अध्यक्ष प्रदीप गादिया और कोषाध्यक्ष रजनीकांत शाहजी ने तप आराधना की अनुमोदना करते हुए उपस्थित तपस्वियों की सुखसाता पूछी।
छोटी बहन प्रिंसी ने की आधुनिक अंदाज में अनुमोदना
शाहजी परिवार की ओर से तपस्वी की छोटी बहन प्रिंसी शाहजी ने आधुनिक शैली में अपनी बड़ी दीदी डॉ. गोल्डी शाहजी की तपस्या की अनुमोदना की। उन्होंने उनके दृढ़ संकल्प और त्याग की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। प्रिंसी के भावपूर्ण उद्गारों ने धर्मसभा में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
संघ प्रवक्ता पवन नाहर ने बताया कि धर्मोत्कर्ष वर्षावास के दौरान तप आराधना का क्रम निरंतर जारी है। उन्होंने कहा कि तपस्वियों के त्याग और साधना से पूरा श्रीसंघ आध्यात्मिक रूप से गौरवान्वित है। इस प्रेरणादायी अवसर पर ताल, खिरकिया सहित अनेक स्थानों से बड़ी संख्या में संघजन पहुंचे। तपस्वियों के नाती-रिश्तेदार और श्रद्धालु भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे और उन्होंने तप की अनुमोदना करते हुए तपस्वी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
संघ सेवा में नवयुवक मंडल की सक्रिय सहभागिता
गुरु दर्शन और वार्षिक क्षमायाचना के लिए पहुंचे गुरुभक्तों के आतिथ्य और सेवा व्यवस्था में श्री ललित जैन नवयुवक मंडल की सक्रिय भूमिका रही। मंडल के अध्यक्ष प्रांजल लोढ़ा, सचिव प्रांजल भंसाली, व्यवस्थापक अनिल भंसाली, पूर्वाध्यक्ष रवि लोढ़ा, प्रवक्ता पवन नाहर, युवा कोषाध्यक्ष अंकित लोढ़ा और वेदांत श्रीमाल सहित पूरी टीम ने सहयोग देकर संघ सेवा का लाभ लिया।
तप अनुमोदना के अवसर पर शाहजी परिवार की ओर से आए साधर्मी बंधुओं के लिए स्वामी वात्सल्य का आयोजन भी किया गया। धर्मसभा का संचालन श्रीसंघ के अध्यक्ष प्रदीप गादिया ने किया।
