रिश्वतकांड में फंसी SDM पूजा सोनी, स्टेनो गिरफ्तार, 30 हजार रिश्वत मामले में EOW जांच तेज
तेंदूखेड़ा SDM कार्यालय में 30 हजार रुपये रिश्वत का बड़ा मामला
नरसिंहपुर (मध्यप्रदेश), 16 मई 2026।
मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा SDM कार्यालय में सामने आए 30 हजार रुपये के कथित रिश्वत कांड ने पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मचा दी है। इस मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की कार्रवाई के बाद एसडीएम पूजा सोनी और उनके कार्यालय के स्टेनो सौरभ यादव का नाम चर्चा में आ गया है। हालांकि अब तक मुख्य रूप से कार्रवाई स्टेनो के खिलाफ हुई है, लेकिन जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब प्रशासनिक पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर सख्ती की बात लगातार की जा रही है। इसी बीच इस घटना ने एक बार फिर सरकारी दफ्तरों में लेन-देन की प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
EOW की कार्रवाई में स्टेनो गिरफ्तार
जानकारी के अनुसार, 14 मई 2026 को EOW की टीम ने तेंदूखेड़ा एसडीएम कार्यालय में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। इस कार्रवाई में स्टेनो सौरभ यादव को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई शिकायत के आधार पर की गई थी, जिसमें लंबे समय से रिश्वत मांगने की बात सामने आ रही थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, ट्रैप के दौरान जो बयान और बातचीत रिकॉर्ड की गई, उसमें कथित रूप से यह संकेत मिला कि रिश्वत की राशि में 5 हजार रुपये स्टेनो और 25 हजार रुपये एसडीएम के हिस्से के बताए गए हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का हिस्सा है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
शिकायतकर्ता की भूमिका और बातचीत का खुलासा
मामले में शिकायतकर्ता की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जानकारी के अनुसार, ट्रैप से पहले शिकायतकर्ता ने एसडीएम पूजा सोनी से मुलाकात की थी और कथित रूप से पूछा था कि “मैडम आपकी क्या सेवा करें?” इस पर एसडीएम ने सीधे कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया था।
इसके बाद जब बाबू या स्टेनो से संबंधित कार्य की बात आई तो कथित रूप से एसडीएम द्वारा कहा गया कि “जितनी श्रद्धा है आप कर दीजिए।” यह बातचीत भी रिकॉर्ड होने की बात सामने आई है, जिसे जांच एजेंसी ने अपने रिकॉर्ड में शामिल किया है।
इस पूरी बातचीत ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है क्योंकि इससे प्रशासनिक प्रक्रिया और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
ऑडियो रिकॉर्डिंग बनी अहम सबूत
EOW अधिकारियों के अनुसार इस मामले में ऑडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्डिंग से यह संकेत मिलता है कि कार्यालय स्तर पर पैसों के लेन-देन को लेकर बातचीत हुई थी।
हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। सभी रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच की जाएगी और उसके बाद ही अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
एसडीएम पूजा सोनी की सफाई
इस पूरे मामले में एसडीएम पूजा सोनी ने खुद को निर्दोष बताया है और आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि जब जिस काम को लेकर रिश्वत की बात की जा रही है, उसकी NOC पहले ही जारी हो चुकी थी, तो फिर रिश्वत लेने या देने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
एसडीएम के अनुसार, संबंधित केस 27 अप्रैल को शुरू हुआ था और 12 मई 2026 को उसकी NOC जारी कर दी गई थी। ऐसे में 14 मई को किसी प्रकार की रिश्वत की आवश्यकता नहीं बचती थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी तो फिर आरोप कैसे लगाए जा सकते हैं।
NOC जारी होने का दावा और टाइमलाइन
एसडीएम के अनुसार पूरे मामले की टाइमलाइन इस प्रकार है—
- 27 अप्रैल 2026 को केस की शुरुआत
- 12 मई 2026 को NOC जारी
- 14 मई 2026 को रिश्वत ट्रैप की कार्रवाई
इस टाइमलाइन के आधार पर एसडीएम का दावा है कि मामला पूरी तरह से खत्म हो चुका था और किसी प्रकार के लेन-देन का कोई औचित्य नहीं था।
EOW जांच का दायरा बढ़ा
EOW अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच केवल स्टेनो तक सीमित नहीं है। मामले में एसडीएम, चपरासी और अन्य संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, सभी डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स, ऑडियो क्लिप और दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में किसकी कितनी भूमिका है।
प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप
इस घटना के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और राज्य स्तर पर भी हलचल मच गई है। एक ओर जहां स्टेनो की गिरफ्तारी ने मामले को गंभीर बना दिया है, वहीं दूसरी ओर एसडीएम स्तर तक जांच पहुंचने से प्रशासनिक हलकों में चिंता बढ़ गई है।
कई अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के मामलों से सरकारी सिस्टम की छवि पर असर पड़ता है और आम जनता का भरोसा भी प्रभावित होता है।
रिश्वत के आरोप और राजनीतिक चर्चा
हालांकि यह मामला पूरी तरह से प्रशासनिक जांच के दायरे में है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसको लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सोशल मीडिया और स्थानीय क्षेत्रों में इस घटना को लेकर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
कुछ लोग इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष निकालने को जल्दबाजी बता रहे हैं।
फॉरेंसिक जांच पर टिकी आगे की कार्रवाई
EOW अब इस पूरे मामले की फॉरेंसिक जांच की तैयारी कर रही है। ऑडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल सबूतों को लैब भेजा जाएगा ताकि उनकी सत्यता और प्रामाणिकता की पुष्टि की जा सके।
इसके बाद ही तय होगा कि आरोप कितने मजबूत हैं और आगे किन अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कानूनी प्रक्रिया और संभावित कार्रवाई
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसमें गिरफ्तारी, निलंबन और विभागीय जांच जैसी प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं।
हालांकि फिलहाल किसी भी अधिकारी पर अंतिम कार्रवाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगी।
निष्कर्ष
तेंदूखेड़ा SDM कार्यालय का यह रिश्वतकांड केवल एक गिरफ्तारी का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह अब एक व्यापक प्रशासनिक जांच का विषय बन चुका है। स्टेनो की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का दायरा एसडीएम और अन्य कर्मचारियों तक पहुंच गया है।
एसडीएम पूजा सोनी ने आरोपों से इनकार किया है और NOC पहले ही जारी होने का दावा किया है, जबकि जांच एजेंसियां ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्यों की जांच में जुटी हैं।
आने वाले दिनों में EOW की रिपोर्ट यह तय करेगी कि इस मामले में वास्तविक जिम्मेदारी किसकी है और क्या यह केवल एक कर्मचारी तक सीमित मामला है या इसके पीछे कोई बड़ा प्रशासनिक नेटवर्क शामिल है।
