भोपाल में शिक्षक भर्ती वर्ग 2-3 के अभ्यर्थियों ने रोका मुख्यमंत्री का काफिला, हाथ जोड़कर की पद बढ़ाने की मांग
नीलम पार्क में करीब 15 दिनों से जारी है धरना, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ज्ञापन लेकर चर्चा का दिया आश्वासन
भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती वर्ग 2 और वर्ग 3 के पदों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने शुक्रवार, 4 सितंबर को भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला रोक लिया। अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री के सामने हाथ जोड़कर अपनी परेशानी बताई और शिक्षक भर्ती में पद वृद्धि करने की मांग की। मुख्यमंत्री ने उनकी बात सुनी, ज्ञापन स्वीकार किया और मामले पर चर्चा करने का आश्वासन दिया।
शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी पिछले करीब 15 दिनों से भोपाल के नीलम पार्क में टेंट लगाकर धरना दे रहे हैं। उनका कहना है कि वर्तमान भर्ती में घोषित पदों की संख्या वास्तविक रिक्तियों की तुलना में बेहद कम है। इसलिए उच्च माध्यमिक, माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाए जाने चाहिए।
नीलम पार्क के सामने सड़क पर आए अभ्यर्थी
शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला नीलम पार्क के सामने से गुजर रहा था। इसी दौरान धरना दे रहे शिक्षक भर्ती वर्ग 2 और वर्ग 3 के अभ्यर्थी अचानक सड़क पर आ गए और मुख्यमंत्री की गाड़ी के सामने खड़े हो गए।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने अभ्यर्थियों की बात सुनी। प्रदर्शनकारियों ने हाथ जोड़कर कहा कि वे लंबे समय से पद वृद्धि की मांग कर रहे हैं और काफी परेशान हैं। अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री से निवेदन किया कि शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाई जाए, जिससे पात्र उम्मीदवारों को नियुक्ति का अवसर मिल सके।
मुख्यमंत्री ने अभ्यर्थियों से ज्ञापन लिया और संकेत दिया कि वह इस विषय पर संबंधित अधिकारियों से चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री से सीधे मुलाकात होने के बाद आंदोलनरत उम्मीदवारों को सरकार की ओर से सकारात्मक कदम उठाए जाने की उम्मीद है।
शिक्षक दिवस से पहले घोषणा की उम्मीद
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद अभ्यर्थियों ने उम्मीद जताई कि सरकार शिक्षक दिवस के अवसर पर उनकी मांगों को लेकर कोई महत्वपूर्ण घोषणा कर सकती है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने पात्रता परीक्षा और चयन प्रक्रिया में कड़ी मेहनत की है, लेकिन कम पदों के कारण बड़ी संख्या में योग्य उम्मीदवार नियुक्ति से वंचित रह सकते हैं।
अभ्यर्थियों ने कहा कि प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के कई पद रिक्त हैं। ऐसे में भर्ती के पद बढ़ाकर योग्य उम्मीदवारों को नियुक्त किया जाना चाहिए। इससे बेरोजगार अभ्यर्थियों को रोजगार मिलने के साथ सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी भी दूर होगी।
विभाग ने पद बढ़ाने में बताई कानूनी अड़चन
मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग वर्तमान भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग को पूरा करने से फिलहाल इनकार कर चुका है। विभाग का कहना है कि किसी भर्ती का परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद उसके विज्ञापन में निर्धारित पदों को बढ़ाया या घटाया नहीं जा सकता।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, परीक्षा परिणाम आने के बाद नई रिक्तियों को पुरानी भर्ती प्रक्रिया में शामिल करना वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं होगा। नए खाली पदों को आगामी शिक्षक भर्ती के विज्ञापन में शामिल किया जा सकता है।
अभ्यर्थी उच्च माध्यमिक शिक्षक, माध्यमिक शिक्षक और प्राथमिक शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। वहीं, विभाग का तर्क है कि परिणाम घोषित होने के बाद पुराने विज्ञापन में नए पद जोड़ना संभव नहीं है।
विभाग में कुल 72,901 पद रिक्त होने की जानकारी
स्कूल शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, विभाग में विभिन्न श्रेणियों के कुल 72,901 पद रिक्त हैं। इनमें से 59,073 पद पदोन्नति से संबंधित बताए गए हैं। इसलिए इन सभी पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से भरना संभव नहीं है।
विभाग के मुताबिक, पदोन्नति से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्टैंडिंग काउंसिल से कानूनी राय ली गई है। इसमें शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET उत्तीर्ण शिक्षकों को ही पदोन्नति देने का अभिमत मिलने की बात कही गई है।
इस कानूनी और प्रशासनिक स्थिति के कारण पदोन्नति की प्रक्रिया लंबित है। विभाग का कहना है कि पदोन्नति होने के बाद निचले स्तर पर जो पद खाली होंगे, उन्हें नियमानुसार सीधी भर्ती के माध्यम से भरा जा सकता है।
OBC और बैकलॉग के हजारों पद
विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, रिक्त पदों में 3,990 पद OBC आरक्षण से जुड़े 13 प्रतिशत होल्ड के अंतर्गत हैं। इसके अतिरिक्त 8,038 पद बैकलॉग श्रेणी के बताए गए हैं।
आरक्षण और न्यायालय में विचाराधीन मामलों के कारण भी कई पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। विभाग का कहना है कि कानूनी स्थिति स्पष्ट होने और पदोन्नति प्रक्रिया पूरी होने के बाद उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर अगली भर्ती की योजना तैयार की जाएगी।
वहीं, उम्मीदवारों का कहना है कि विभिन्न कारणों से खाली पड़े पदों का बोझ सरकारी विद्यालयों और विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। उनका दावा है कि कई स्कूलों में विषयवार शिक्षकों की कमी है, इसलिए सरकार को जल्द समाधान निकालना चाहिए।
जुलाई 2027 तक की रिक्तियों का हो रहा आकलन
स्कूल शिक्षा विभाग आगामी शिक्षक भर्ती की तैयारी भी कर रहा है। विभाग द्वारा जुलाई 2027 तक संभावित रूप से रिक्त होने वाले पदों का आकलन किया जा रहा है। इसमें सेवानिवृत्ति, पदोन्नति और अन्य कारणों से खाली होने वाले पदों की गणना शामिल होगी।
रिक्तियों का आकलन पूरा होने के बाद नई शिक्षक भर्ती का विज्ञापन जारी किया जा सकता है। विभाग का कहना है कि नए खाली पदों को आगामी भर्ती प्रक्रिया में नियमानुसार शामिल किया जाएगा।
हालांकि, वर्तमान भर्ती में शामिल अभ्यर्थी इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि नई भर्ती की प्रतीक्षा करने से उनकी उम्र, पात्रता और रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए मौजूदा भर्ती में ही यथासंभव अधिक पदों पर नियुक्ति दी जानी चाहिए।
15 दिनों से जारी आंदोलन
नीलम पार्क में धरना दे रहे अभ्यर्थियों ने बताया कि वे करीब 15 दिनों से अपनी मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। धरने के दौरान उम्मीदवारों ने सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग तक अपनी बात पहुंचाने के लिए प्रदर्शन, ज्ञापन और अन्य लोकतांत्रिक माध्यमों का सहारा लिया।
अब मुख्यमंत्री से सीधे मुलाकात और ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अभ्यर्थियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की है कि उनकी समस्या पर जल्द बैठक आयोजित कर स्पष्ट निर्णय लिया जाए।
फिलहाल मुख्यमंत्री ने मामले पर चर्चा करने का भरोसा दिया है। अब शिक्षक भर्ती वर्ग 2 और 3 के उम्मीदवारों की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है। दूसरी ओर, स्कूल शिक्षा विभाग परीक्षा परिणाम के बाद पदों में बदलाव नहीं किए जाने के नियम का हवाला दे रहा है। ऐसे में सरकार अभ्यर्थियों की मांग और वैधानिक प्रावधानों के बीच किस प्रकार समाधान निकालती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
