शिक्षिका भावना वैष्णव को मिला ‘संस्कार साधिका एवं साहित्य-सरस्वती सम्मान’
मुकेश सोलंकी, संवाददाता
जालोर। शिक्षा, साहित्य, कला और समाज सेवा के क्षेत्र में योगदान के लिए शिक्षिका भावना वैष्णव को ‘संस्कार साधिका एवं साहित्य-सरस्वती सम्मान’ से सम्मानित किया गया। विप्र फाउंडेशन के तत्वावधान में उनके जालोर स्थित गृह निवास पर आयोजित समारोह में अभिनंदन पत्र, स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र, पारंपरिक शॉल और पुष्पमाला भेंट की गई। कार्यक्रम में संगठन के पदाधिकारियों तथा परिजनों की उपस्थिति में उनके शैक्षणिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यों का उल्लेख किया गया।
शिक्षा के साथ संस्कार निर्माण में योगदान
समारोह में वक्ताओं ने भावना वैष्णव के अध्यापन और विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण से जुड़े कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान देना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार विकसित करना और उनके व्यक्तित्व को संवारना भी है। वक्ताओं के अनुसार, वैष्णव ने अपने अध्यापन में ज्ञान के साथ मानवीय मूल्यों को महत्व दिया और विद्यार्थियों को इनसे जोड़ने का प्रयास किया।
वक्ताओं ने उनके योगदान को एक दीप से अनेक दीप प्रज्वलित करने की परंपरा से जोड़ते हुए बताया कि शिक्षक का कार्य समाज में ज्ञान का प्रसार करना है। उन्होंने कहा कि भावना वैष्णव ने शिक्षा को संस्कार निर्माण का माध्यम बनाया। उनके कार्यों की सराहना करते हुए वक्ताओं ने उन्हें आधुनिक युग की गार्गी और मैत्रेयी सदृश विदुषी बताया।
छात्राओं में मानवीय मूल्यों के विकास का प्रयास
कार्यक्रम में बताया गया कि भावना वैष्णव का कार्यक्षेत्र कक्षा में अध्यापन तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने सह-शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से भी विद्यार्थियों को सीखने और अपनी प्रतिभा व्यक्त करने के अवसरों से जोड़ा। वक्ताओं ने विशेष रूप से छात्राओं में चारित्रिक दृढ़ता, राष्ट्रभक्ति, प्रकृति के प्रति प्रेम और मानवीय मूल्यों के विकास में उनकी भूमिका का उल्लेख किया।
समारोह में उनके शैक्षणिक योगदान की चर्चा करते हुए कहा गया कि विद्यार्थियों के विकास में विषयों की जानकारी के साथ जीवन मूल्यों की समझ भी आवश्यक है। वैष्णव के प्रयासों को इसी व्यापक शैक्षणिक दृष्टि से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। उनके अध्यापन और सह-शैक्षणिक कार्यों को सम्मान प्रदान करने के प्रमुख आधारों में शामिल किया गया।
काव्य-सृजन और मंच संचालन की सराहना
शिक्षा के अलावा साहित्य और कला के क्षेत्र में भावना वैष्णव की सक्रियता का भी समारोह में उल्लेख हुआ। वक्ताओं ने उनके काव्य-सृजन, प्रभावशाली वक्तृत्व और मंच संचालन की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि विभिन्न अभिव्यक्ति माध्यमों के जरिए वैष्णव ने सांस्कृतिक गतिविधियों में योगदान दिया है। उनकी साहित्यिक रचनात्मकता और प्रस्तुति क्षमता को उनके बहुआयामी व्यक्तित्व का हिस्सा बताया गया।
नृत्य-कला के माध्यम से उनकी भावपूर्ण अभिव्यक्ति की भी सराहना की गई। वक्ताओं के अनुसार, साहित्य, वाणी और कला से जुड़े उनके कार्य जालोर की सांस्कृतिक गतिविधियों में योगदान देते हैं। कार्यक्रम में इन उपलब्धियों को शिक्षा और समाज सेवा के साथ जोड़ते हुए उनके समग्र कार्यों के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया।
विपरीत परिस्थितियों में रचनात्मकता बनाए रखने का उल्लेख
समारोह में वक्ताओं ने विपरीत परिस्थितियों के बीच भी भावना वैष्णव की रचनात्मक सक्रियता बनाए रखने की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि चुनौतियों में अवसर तलाशने की उनकी इच्छाशक्ति युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है। उनके निरंतर लेखन, संस्कार निर्माण और सामाजिक योगदान के प्रति विप्र फाउंडेशन की ओर से कृतज्ञता व्यक्त की गई।
सम्मान के दौरान उनके कार्यों को सार्वजनिक रूप से रेखांकित किया गया। अभिनंदन पत्र तथा अन्य सम्मान सामग्री भेंट कर शिक्षा, साहित्य और कला में उनकी सेवाओं का वंदन किया गया।
संगठन के पदाधिकारी और परिजन रहे उपस्थित
कार्यक्रम में विप्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य दिनेश कुमार दवे और जालोर के जिला महामंत्री संगठन डॉ. घनश्याम व्यास मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। संगठन के राष्ट्रीय एवं प्रांतीय पदाधिकारियों तथा भावना वैष्णव के परिजनों की उपस्थिति में सम्मान समारोह संपन्न हुआ।
उपस्थित लोगों ने भावना वैष्णव के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर रचनात्मक सक्रियता की कामना की। साथ ही शिक्षा, साहित्य, संस्कार निर्माण और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान के आगे भी जारी रहने की शुभकामनाएं दीं।
