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शहडोल में अंधविश्वास की खौफनाक तस्वीर: जादू-टोने के शक में तांत्रिक की कुल्हाड़ी से हत्या, आरोपी फरार

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Published On: 23 July 2026
Police investigate the murder of a tantrik in Shahdol after an alleged attack linked to suspicion of witchcraft and superstition
— Police investigate the murder of a tantrik in Shahdol after an alleged attack linked to suspicion of witchcraft and superstition

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शहडोल में अंधविश्वास की खौफनाक तस्वीर: जादू-टोने के शक में तांत्रिक की कुल्हाड़ी से हत्या, आरोपी फरार

रिपोर्ट: सुनील रैदास, संभागीय ब्यूरो प्रमुख, दैनिक स्वराज वाणी
शहडोल।
मध्य प्रदेश के शहडोल जिले से अंधविश्वास की एक और दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां जादू-टोने के संदेह ने एक व्यक्ति की जान ले ली। जिले के सीधी थाना क्षेत्र के चंदौरा गांव में झाड़-फूंक के लिए बुलाए गए एक तांत्रिक की कुल्हाड़ी से हमला कर हत्या कर दी गई। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई, जबकि पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपी को संदेह था कि तांत्रिक उसके परिवार पर जादू-टोना कर रहा है। इसी शक के चलते उसने गुस्से में आकर तांत्रिक पर कुल्हाड़ी से कई वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना एक बार फिर समाज में व्याप्त अंधविश्वास और उससे जुड़ी हिंसक मानसिकता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

झाड़-फूंक के लिए बुलाया गया था तांत्रिक

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, चंदौरा गांव निवासी बुद्धसेन की बेटी पिछले कुछ समय से बीमार थी। परिवार ने बीमारी के उपचार के लिए चिकित्सकीय इलाज के साथ-साथ झाड़-फूंक का सहारा लेने का निर्णय लिया।

इसी उद्देश्य से सीधी निवासी राज बहोर, जो तांत्रिक के रूप में झाड़-फूंक का कार्य करता था, को घर बुलाया गया। घर में धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार झाड़-फूंक की प्रक्रिया चल रही थी।

इसी दौरान अचानक ऐसी घटना हुई जिसने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया।

कुल्हाड़ी से किया ताबड़तोड़ हमला

बताया जा रहा है कि झाड़-फूंक के दौरान बुद्धसेन का भाई भीमसेन वहां पहुंचा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उसे यह संदेह था कि तांत्रिक उसके परिवार पर जादू-टोना कर रहा है।

गुस्से में उसने बिना किसी चेतावनी के तांत्रिक पर कुल्हाड़ी से कई वार कर दिए।

हमला इतना गंभीर था कि तांत्रिक राज बहोर को संभलने का मौका तक नहीं मिला। गंभीर चोटों के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना के समय मौजूद लोग अचानक हुए हमले से घबरा गए और किसी को समझ नहीं आया कि क्या किया जाए।

घटना के बाद गांव में फैली सनसनी

हत्या की खबर फैलते ही पूरे चंदौरा गांव में दहशत और सनसनी का माहौल बन गया।

ग्रामीण बड़ी संख्या में घटनास्थल पर एकत्र हो गए। घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई।

मौके पर पहुंची पुलिस ने क्षेत्र को सुरक्षित करते हुए शव को अपने कब्जे में लिया और पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

आरोपी वारदात के बाद फरार

घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी भीमसेन मौके से फरार हो गया।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसकी गिरफ्तारी के लिए विभिन्न स्थानों पर दबिश देना शुरू कर दिया है।

अधिकारियों का कहना है कि आरोपी की तलाश जारी है और उसे जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

पुलिस कर रही है मामले की जांच

पुलिस अधिकारियों के अनुसार घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि—

  • घटना पूर्व नियोजित थी या नहीं।
  • आरोपी और मृतक के बीच पहले से कोई विवाद था या नहीं।
  • हत्या केवल अंधविश्वास के कारण हुई या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी था।

पुलिस ने आसपास के लोगों के बयान भी दर्ज करना शुरू कर दिया है।

पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा जाएगा शव

पुलिस ने मृतक का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद हत्या के कारणों और हमले की प्रकृति को लेकर और स्पष्ट जानकारी सामने आने की संभावना है।

रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हाल के दिनों में सामने आई दूसरी बड़ी घटना

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब कुछ समय पहले ही जयसिंहनगर क्षेत्र में भी जादू-टोने के संदेह में एक बुजुर्ग महिला की हत्या का मामला सामने आया था।

लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी अंधविश्वास और झाड़-फूंक जैसी मान्यताओं का प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक जागरूकता के अभाव में लोग कई बार कानून अपने हाथ में ले लेते हैं, जिसके गंभीर परिणाम सामने आते हैं।

अंधविश्वास बना हिंसा का कारण

भारत में समय-समय पर जादू-टोने, टोना-टोटका और झाड़-फूंक से जुड़े विवाद सामने आते रहे हैं।

कई मामलों में लोगों को बीमारी, पारिवारिक संकट या आर्थिक समस्याओं का कारण किसी व्यक्ति को मानकर उसके साथ हिंसा की जाती है।

ऐसी घटनाएं न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि समाज की सोच और शिक्षा के स्तर पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं।

विशेषज्ञों की राय

सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि अंधविश्वास की जड़ें शिक्षा के अभाव, वैज्ञानिक सोच की कमी और सामाजिक जागरूकता की कमी से जुड़ी होती हैं।

यदि लोगों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी और कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाए, तो ऐसी घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।

वे यह भी मानते हैं कि किसी भी बीमारी या समस्या का समाधान चिकित्सकीय उपचार और वैज्ञानिक पद्धतियों से ही किया जाना चाहिए।

कानून अपने हाथ में लेना अपराध

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति पर संदेह होने की स्थिति में कानून अपने हाथ में लेना गंभीर अपराध है।

यदि किसी व्यक्ति पर आपराधिक गतिविधि का संदेह हो, तो इसकी सूचना पुलिस को देना ही उचित और कानूनी तरीका है।

हिंसा या हत्या किसी भी परिस्थिति में समस्या का समाधान नहीं हो सकती।

समाज के लिए गंभीर चेतावनी

शहडोल की यह घटना केवल एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि समाज के सामने एक गंभीर चेतावनी भी है।

आज विज्ञान और तकनीक के युग में भी यदि लोग अंधविश्वास के कारण किसी की जान लेने पर उतारू हो जाते हैं, तो यह सामाजिक चिंतन का विषय है।

ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज में वैज्ञानिक सोच, शिक्षा और जागरूकता को भी मजबूत करना आवश्यक है।

जागरूकता ही है समाधान

विशेषज्ञों का मानना है कि अंधविश्वास से जुड़ी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सरकार, प्रशासन, सामाजिक संगठनों और शिक्षण संस्थानों को मिलकर जागरूकता अभियान चलाने चाहिए।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर उपलब्धता, वैज्ञानिक सोच का प्रचार-प्रसार और कानूनी जागरूकता बढ़ाकर ही ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

शहडोल की यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि अंधविश्वास केवल सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसलिए समाज को तर्क, शिक्षा और कानून के रास्ते पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।

 

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