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	<title>Water Manageme &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>इंदौर में जलसंकट की आशंका, महापौर ने मांगा 50 करोड़ का पैकेज; मंत्रियों ने अधिकारियों के साथ की बैठक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 15 Oct 2026 09:01:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर में जलसंकट की आशंका, महापौर ने मांगा 50 करोड़ का पैकेज; मंत्रियों ने अधिकारियों के साथ की बैठक कमजोर मानसून के बाद इंदौर में आने वाले महीनों के दौरान ... <a title="इंदौर में जलसंकट की आशंका, महापौर ने मांगा 50 करोड़ का पैकेज; मंत्रियों ने अधिकारियों के साथ की बैठक" class="read-more" href="https://swarajvani.com/indore-water-crisis-mayor-seeks-50-crore-package-as-ministers-review-supply/" aria-label="Read more about इंदौर में जलसंकट की आशंका, महापौर ने मांगा 50 करोड़ का पैकेज; मंत्रियों ने अधिकारियों के साथ की बैठक">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>इंदौर में जलसंकट की आशंका, महापौर ने मांगा 50 करोड़ का पैकेज; मंत्रियों ने अधिकारियों के साथ की बैठक</strong></h1>
<p>कमजोर मानसून के बाद इंदौर में आने वाले महीनों के दौरान जलसंकट की आशंका जताई जा रही है। शहर में सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश होती है, जबकि इस बार लगभग 23 इंच वर्षा दर्ज की गई है। संभावित कमी से निपटने के लिए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन के लिए 50 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग की है।</p>
<p>जलसंकट की तैयारी और उपलब्ध जलस्रोतों के बेहतर उपयोग पर चर्चा के लिए नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने संबंधित विभागों तथा नगर निगम के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में शहर की मौजूदा जल उपलब्धता, आगामी जरूरतों और संभावित उपायों पर चर्चा की गई।</p>
<h2><strong>40 लाख की आबादी को रोज चाहिए 800 एमएलडी पानी</strong></h2>
<p>इंदौर की आबादी और विस्तार के साथ पेयजल की मांग भी बढ़ी है। उपलब्ध आकलन के अनुसार शहर की करीब 40 लाख आबादी को प्रतिदिन लगभग 800 एमएलडी पानी की जरूरत है। ऐसे में कम बारिश का असर जलाशयों, भूजल और अन्य स्थानीय स्रोतों पर पड़ सकता है। नगर निगम और संबंधित विभागों के सामने चुनौती यह है कि आने वाले गर्मी के महीनों में सभी क्षेत्रों तक पर्याप्त पानी पहुंचाया जाए।</p>
<p>शहर का बड़ा हिस्सा नर्मदा जल पर निर्भर है, जबकि कुछ क्षेत्रों में नलकूपों और टैंकरों के जरिए पानी की व्यवस्था की जाती है। कम बारिश की स्थिति में इन स्रोतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसी वजह से नगर निगम ने पहले से तैयारी शुरू करने और वार्डवार जरूरतों का आकलन करने पर जोर दिया है।</p>
<h2><strong>50 करोड़ से जल प्रबंधन के कामों की तैयारी</strong></h2>
<p>महापौर ने मुख्यमंत्री से मांगे गए 50 करोड़ रुपये के पैकेज को शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करने के लिए जरूरी बताया है। इस राशि से जलसंकट की आशंका वाले क्षेत्रों में व्यवस्था बेहतर करने, टैंकरों की उपलब्धता बढ़ाने और जरूरी सुविधाएं विकसित करने जैसे काम किए जा सकते हैं। जरूरत के अनुसार हाइड्रेंट और अन्य जल वितरण व्यवस्थाओं पर भी विचार किया जा रहा है।</p>
<p>बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि जिन इलाकों में नियमित जलापूर्ति पहुंचाना कठिन है, वहां स्थानीय जरूरत के अनुसार अलग योजना बनाई जाए। वार्ड और जोन स्तर पर पानी की मांग और उपलब्धता का आकलन कर व्यवस्था तय करने की तैयारी है।</p>
<h2><strong>यशवंत सागर और बिलावली में जल संग्रहण पर जोर</strong></h2>
<p>शहर के जलस्रोतों में पानी का भंडारण बढ़ाने के विकल्पों पर भी चर्चा की गई। यशवंत सागर और बिलावली तालाब में जल संग्रहण बढ़ाने के लिए नर्मदा-गंभीर लिंक परियोजना से पानी उपलब्ध कराने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। इन जलस्रोतों में पर्याप्त पानी रहने से भविष्य में जरूरत पड़ने पर आपूर्ति को संभालने में मदद मिल सकती है।</p>
<p>इसके लिए संबंधित विभागों को उपलब्ध स्रोतों, जल परिवहन और संग्रहण की संभावनाओं का आकलन करना होगा। बैठक में अधिकारियों से कहा गया कि वे अलग-अलग विकल्पों की व्यवहारिकता पर विचार कर आगे की कार्ययोजना तैयार करें।</p>
<h2><strong>लीकेज से पानी की बर्बादी रोकने की जरूरत</strong></h2>
<p>शहर में जल संकट की आशंका के बीच पाइपलाइनों में लीकेज भी चिंता का विषय है। जगह-जगह होने वाले रिसाव से पानी की बर्बादी होती है और आपूर्ति पर असर पड़ता है। इसलिए जल प्रबंधन के साथ वितरण नेटवर्क की निगरानी और लीकेज सुधारने पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई जा रही है।</p>
<p>पानी की खपत कम करने और उपलब्ध पानी का बेहतर उपयोग करने के लिए जागरूकता पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने संभावित कमी से पहले आवश्यक कदम उठाने पर चर्चा की, ताकि बाद में टैंकरों पर निर्भरता और लोगों की परेशानी कम की जा सके।</p>
<h2><strong>समय रहते योजना बनाने की कोशिश</strong></h2>
<p>कम बारिश के कारण जलाशयों और भूजल पर असर पड़ने की आशंका है। इसी को देखते हुए बैठक में जल उपलब्धता की समीक्षा और आपूर्ति बनाए रखने के उपायों पर विचार हुआ। अब प्रस्तावित कार्ययोजना में स्थानीय जलस्रोतों का उपयोग, पाइपलाइन सुधार, टैंकर व्यवस्था और जल संरक्षण जैसे पहलुओं को शामिल किया जा सकता है।</p>
<p>महापौर ने राज्य सरकार से वित्तीय सहयोग मांगा है। आगे की योजना उपलब्ध संसाधनों और संबंधित विभागों के आकलन के आधार पर तय होगी। शहर में नियमित पेयजल आपूर्ति बनाए रखने के लिए निगम और विभागों की तैयारी आने वाले महीनों में अहम रहेगी।</p>
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