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	<title>VIP Vehicle Number &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>Indore-e-auction में थे 0001 और 9999 व्हीकल नंबर, सिस्टम में गड़बड़ी के चलते नहीं बिक पाए</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Sep 2026 09:16:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[Indore-e-auction में थे 0001 और 9999 व्हीकल नंबर, सिस्टम में गड़बड़ी के चलते नहीं बिक पाए इंदौर शहर में वाहनों पर वीआईपी और मनपसंद नंबर लगवाने का क्रेज लगातार बढ़ता ... <a title="Indore-e-auction में थे 0001 और 9999 व्हीकल नंबर, सिस्टम में गड़बड़ी के चलते नहीं बिक पाए" class="read-more" href="https://swarajvani.com/indore-e-auction-glitch-vip-vehicle-numbers/" aria-label="Read more about Indore-e-auction में थे 0001 और 9999 व्हीकल नंबर, सिस्टम में गड़बड़ी के चलते नहीं बिक पाए">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>Indore-e-auction में थे 0001 और 9999 व्हीकल नंबर, सिस्टम में गड़बड़ी के चलते नहीं बिक पाए</strong></h1>
<p>इंदौर शहर में वाहनों पर वीआईपी और मनपसंद नंबर लगवाने का क्रेज लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रेज के बीच इस बार हुए Indore-e-auction में दो सबसे चर्चित वीआईपी नंबर 0001 और 9999 बिना बिके ही रह गए। इसकी मुख्य वजह यह रही कि सिस्टम में इन दोनों नंबरों पर ऑनलाइन बोली लगाने का ऑप्शन ही दिखाई नहीं दे रहा था।</p>
<p>कई दावेदार इन दोनों प्रीमियम नंबरों को हासिल करने के लिए पूरी तरह तैयार थे और बोली लगाने के इच्छुक भी थे, लेकिन तकनीकी गड़बड़ी की वजह से यह दोनों नंबर बिना किसी दावेदार के ही रह गए। इस समस्या को लेकर कुछ लोगों ने परिवहन विभाग में शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन शिकायत के चार दिन बीत जाने के बाद भी ऑनलाइन सिस्टम में यह परेशानी जस की तस बनी रही।</p>
<h2><strong>एमपी 09 बीटी सीरीज के हैं दोनों नंबर</strong></h2>
<p>जानकारी के अनुसार, इंदौर में वीआईपी व्हीकल नंबर की इस बोली प्रक्रिया में शामिल ये दोनों नंबर एमपी 09 बीटी सीरीज के बताए जा रहे हैं। गुरुवार को जब बिड की पूरी प्रक्रिया संपन्न हुई, तो पता चला कि दोनों नंबर बिना किसी बोली के ही रह गए, जिससे कई इच्छुक खरीदार निराश हुए।</p>
<p>इंदौर में वीआईपी व्हीकल नंबर की बोली प्रक्रिया में शामिल दोनों चर्चित नंबर एमपी 09 बीटी सीरीज के बताए जा रहे हैं। यह सीरीज हाल ही में जारी की गई नई सीरीज है, जिसमें कई आकर्षक और खास नंबर शामिल थे। इसी सीरीज में 0001 और 9999 जैसे प्रीमियम नंबर भी उपलब्ध थे, जिन्हें लेकर वाहन मालिकों में शुरू से ही खासा उत्साह देखा जा रहा था।</p>
<p>गुरुवार को जब निर्धारित समय पर बिड की पूरी प्रक्रिया संपन्न हुई और परिणाम सामने आए, तो यह जानकारी सामने आई कि दोनों प्रतिष्ठित नंबर बिना किसी बोली के ही रह गए। यह नतीजा कई लोगों के लिए चौंकाने वाला रहा, क्योंकि इन नंबरों को लेकर पहले से ही कई दावेदार रुचि दिखा रहे थे।</p>
<p>इस अप्रत्याशित परिणाम से कई इच्छुक खरीदार खासे निराश हुए, जो लंबे समय से इन नंबरों को हासिल करने की योजना बना रहे थे। कई लोगों ने इसे सिस्टम की कमी बताते हुए जल्द सुधार की मांग की है।</p>
<h2><strong>आरटीओ अधिकारियों ने मानी गड़बड़ी</strong></h2>
<p>इंदौर आरटीओ के अधिकारियों ने भी इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों नंबरों के न बिक पाने का मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में तकनीकी टीम को सूचित कर दिया गया है और उन्हें सिस्टम में आई गड़बड़ी को जल्द से जल्द सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, जल्द ही यह दोनों वीआईपी नंबर दोबारा ऑक्शन में उपलब्ध कराए जा सकते हैं, ताकि इच्छुक लोग इन्हें प्राप्त करने के लिए बोली लगा सकें।</p>
<h2><strong>त्योहारी सीजन में बढ़ जाती है वीआईपी नंबरों की डिमांड</strong></h2>
<p>इंदौर में गणेश उत्सव, नवरात्र, दशहरा और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोग नए वाहन खरीदते हैं। ऐसे में त्योहारी सीजन नजदीक आते ही वाहनों पर वीआईपी और पसंदीदा नंबर लगवाने के शौकीन लोगों की डिमांड भी स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। यही वजह है कि इस बार भी वीआईपी नंबरों को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा था।</p>
<h2><strong>इस बार बिकी कम संख्या में नंबरें</strong></h2>
<p>वाहन नंबरों की नई सीरीज में भले ही कई आकर्षक वीआईपी नंबर शामिल थे, लेकिन इस बार महज 35 नंबरों पर ही बोली लगाई गई, जो सामान्य से काफी कम है। जानकारी के मुताबिक, आमतौर पर एक नीलामी प्रक्रिया में 150 से अधिक नंबर बिक जाते हैं, लेकिन इस बार इतनी कम संख्या में नंबरों की बिक्री होना एक असामान्य और पहली बार सामने आया मामला है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि सिस्टम में आई गड़बड़ी ने कई संभावित खरीदारों को बोली लगाने से रोका, जिसका सीधा असर नीलामी की कुल बिक्री पर पड़ा।</p>
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