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	<title>Vijayji Muni &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>राष्ट्रसंत पुण्यसम्राट गुरुदेव के शिष्यरत्नों का मंगलमय विहार: रतलाम, शिवपुर और कमठाना में धर्म-भक्ति का दिव्य वातावरण</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 12:44:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रसंत पुण्यसम्राट गुरुदेव के शिष्यरत्नों का मंगलमय विहार भाटपचलाना  – युगप्रभावक पुण्यसम्राट गुरुदेव श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी महाराजा के शिष्यरत्न द्विशतावधानी परमरस मुनिराज प्रत्यक्षरत्न विजयजी म.सा. और पवित्ररत्न विजयजी म.सा. ... <a title="राष्ट्रसंत पुण्यसम्राट गुरुदेव के शिष्यरत्नों का मंगलमय विहार: रतलाम, शिवपुर और कमठाना में धर्म-भक्ति का दिव्य वातावरण" class="read-more" href="https://swarajvani.com/auspicious-pilgrimage-of-gurudevs-disciples-divine/" aria-label="Read more about राष्ट्रसंत पुण्यसम्राट गुरुदेव के शिष्यरत्नों का मंगलमय विहार: रतलाम, शिवपुर और कमठाना में धर्म-भक्ति का दिव्य वातावरण">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>राष्ट्रसंत पुण्यसम्राट गुरुदेव के शिष्यरत्नों का मंगलमय विहार</strong></h1>
<p>भाटपचलाना  – युगप्रभावक पुण्यसम्राट गुरुदेव श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी महाराजा के शिष्यरत्न द्विशतावधानी परमरस मुनिराज प्रत्यक्षरत्न विजयजी म.सा. और पवित्ररत्न विजयजी म.सा. का मंगलमय विहार शहर और आसपास के क्षेत्रों में आयोजित किया गया। इस पावन यात्रा का उद्देश्य धर्म, भक्ति और साधना के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक जागरूकता फैलाना है। विहार के प्रत्येक स्थल पर मुनिराजों के सान्निध्य से धार्मिक और साधना संबंधी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें भजन, प्रवचन और साधना सत्र शामिल हैं।</p>
<h2><strong>विहार कार्यक्रम:</strong></h2>
<ul>
<li><strong>27 फरवरी (शाम):</strong> नवीन नेमि विहारधाम से विहार कर <em>कमठाना</em> गाँव में रात्रि विश्राम।</li>
<li><strong>28 फरवरी (प्रातःकाल):</strong> विहार कर <em>शिवपुर</em> में रात्रि विश्राम।</li>
<li><strong>1 मार्च (प्रातःकाल):</strong> विहार मंगलम सिटी, रतलाम में पधारेंगे।</li>
<li><strong>2 मार्च:</strong> नीमवाला उपाश्रय, रतलाम में मंगलमय प्रवेश।</li>
</ul>
<p>अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद् के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी ब्रजेश बोहरा ने बताया कि विहार सेवा में लगे सभी सेवकों की परिषद परिवार की ओर से हार्दिक अनुमोदना की जाती है। उन्होंने कहा कि विहार सेवा अनमोल सेवा है और मुनिराजों के पावन सान्निध्य से प्रत्येक स्थल पर धर्म, भक्ति और साधना का दिव्य वातावरण बनता है।</p>
<p>विहार के दौरान मुनिराजों ने उपस्थित लोगों को जीवन में धर्म, सेवा और साधना के महत्व के बारे में मार्गदर्शन दिया। प्रत्येक स्थान पर धार्मिक प्रवचन आयोजित किए गए, जिनमें मुनिराजों ने आचार्यों और संतों के अनुभवों को साझा करते हुए आध्यात्मिक चेतना और समाजिक जिम्मेदारी पर जोर दिया। भक्तजन और स्थानीय समुदाय ने इस अवसर पर सक्रिय भागीदारी दिखाई और मुनिराजों से आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p>इस पावन यात्रा में प्रत्येक विहार स्थल पर अनुशासन, सेवा भाव और सामूहिक प्रयासों का विशेष ध्यान रखा गया। स्थानीय समाज के लोगों ने भी सेवा में सहयोग किया, जैसे कि सफाई व्यवस्था, आयोजन स्थल की सजावट, भोजन और पानी की व्यवस्था, ताकि सभी कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो सकें। यह विहार सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण साबित हो रहा है, क्योंकि लोगों में धर्म और अध्यात्म के प्रति रुचि और श्रद्धा का संवर्धन हो रहा है।</p>
<p>संवाददाता जीवनलाल जैन, नागदा के अनुसार, मुनिराजों का यह विहार न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि शिक्षा और सामाजिक चेतना के प्रसार के लिए भी महत्वपूर्ण है। प्रत्येक स्थान पर आयोजित कार्यक्रमों में युवा, महिला और बच्चों की भागीदारी अधिक रही, जिससे आगामी पीढ़ी में आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों की समझ विकसित हो रही है।</p>
<p>मुनिराजों ने अपने प्रवचनों में जीवन के उच्च आदर्शों, आत्मनियंत्रण, साधना और सेवा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत जीवन में धर्म, साधना और सेवा के मार्ग पर चलना ही समाज और देश की उन्नति के लिए आवश्यक है। भक्तजन और अनुयायियों ने उनके निर्देशों का पालन करने का संकल्प लिया।</p>
<p>यह विहार 2 मार्च तक जारी रहेगा और प्रत्येक पड़ाव पर उपस्थित लोगों को आशीर्वाद, धार्मिक शिक्षा और साधना का लाभ प्रदान किया जाएगा। इस दौरान स्थानीय समाज और भक्तजन मिलकर विहार की सफलता सुनिश्चित कर रहे हैं। इस पावन कार्यक्रम से सामाजिक एकता, आध्यात्मिक चेतना और धर्म के प्रचार में वृद्धि होगी। विहार की प्रत्येक गतिविधि धर्म, भक्ति और सेवा के मूल मंत्र पर आधारित है।</p>
<p>मुनिराजों का यह विहार लोगों में आत्मिक शांति, अनुशासन और आध्यात्मिक चेतना बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा। इस विहार के माध्यम से नगर और आसपास के क्षेत्रों में धर्म, भक्ति और साधना का व्यापक प्रसार होगा और लोगों में अपने जीवन को धार्मिक मूल्यों के अनुरूप ढालने की प्रेरणा मिलेगी।</p>
<p>विहार सेवा के लिए उपस्थित सेवकों और स्थानीय समुदाय के प्रयासों को विशेष रूप से सराहा गया। प्रत्येक स्थल पर धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनसे स्थानीय लोग लाभान्वित हुए। मुनिराजों के सान्निध्य और उनके प्रवचनों से प्रत्येक उपस्थित व्यक्ति आध्यात्मिक ऊर्जा और आस्था से परिपूर्ण हुआ।</p>
<p>इस प्रकार, राष्ट्रसंत पुण्यसम्राट गुरुदेव के शिष्यरत्नों का यह मंगलमय विहार धर्म, भक्ति, साधना और सेवा के पथ पर चलने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत बना है।</p>
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