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	<title>Vijayadashami 2026 &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<title>Vijayadashami 2026 &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>Sarangpur  में आज दो जगह होगा रावण दहन, बस स्टैंड पर 65 और पुराने दशहरा मैदान में 35 फीट का जलेगा रावण</title>
		<link>https://swarajvani.com/sarangpur-to-celebrate-vijayadashami-with-religio/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Oct 2026 11:13:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Sarangpur]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160; Sarangpur में आज दो जगह होगा रावण दहन, बस स्टैंड पर 65 और पुराने दशहरा मैदान में 35 फीट का जलेगा रावण हिंदू उत्सव समिति निकालेगी भव्य चल समारोह, ... <a title="Sarangpur  में आज दो जगह होगा रावण दहन, बस स्टैंड पर 65 और पुराने दशहरा मैदान में 35 फीट का जलेगा रावण" class="read-more" href="https://swarajvani.com/sarangpur-to-celebrate-vijayadashami-with-religio/" aria-label="Read more about Sarangpur  में आज दो जगह होगा रावण दहन, बस स्टैंड पर 65 और पुराने दशहरा मैदान में 35 फीट का जलेगा रावण">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h1><strong>Sarangpur में आज दो जगह होगा रावण दहन, बस स्टैंड पर 65 और पुराने दशहरा मैदान में 35 फीट का जलेगा रावण</strong></h1>
<p><strong>हिंदू उत्सव समिति निकालेगी भव्य चल समारोह, भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमानजी रथ पर होंगे सवार; आतिशबाजी और अखाड़ा प्रदर्शन रहेंगे आकर्षण का केंद्र</strong></p>
<p><strong>Sarangpur ।</strong> विजयादशमी के पावन अवसर पर 20 अक्टूबर को सारंगपुर में दशहरा पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इस अवसर पर नगर में दो स्थानों पर रावण दहन का आयोजन होगा। बस स्टैंड स्थित नए दशहरा मैदान में 65 फीट ऊंचे, जबकि पुराने दशहरा मैदान में 35 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। आयोजन के दौरान भव्य चल समारोह, अखाड़ा प्रदर्शन और रंगारंग आतिशबाजी आकर्षण का केंद्र रहेंगे। दशहरा उत्सव को लेकर नगर में उत्साह का माहौल है।</p>
<h2><strong>शाम 4 बजे अंबे माता मंदिर से निकलेगा चल समारोह</strong></h2>
<p>हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष ध्रुव भल्ला ने बताया कि मंगलवार शाम 4 बजे पटवावाड़ी स्थित अंबे माता मंदिर में आरती और पूजा-अर्चना के बाद भव्य चल समारोह प्रारंभ होगा। इसमें भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमानजी रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगे। चल समारोह में ढोल, अखाड़े, जनप्रतिनिधि और समाजसेवी शामिल होंगे।</p>
<p>चल समारोह अंबे माता चौक से प्रारंभ होकर मुखर्जी चौक, त्रिपोलिया बाजार, तरुण चौराहा, गांधी चौक, सदर बाजार, मंडाई चौक और गाडरीवाड़ा होते हुए शाम 6 बजे पुराने दशहरा मैदान पहुंचेगा।</p>
<h2><strong>शाम 6:15 बजे पुराने मैदान में होगा रावण दहन</strong></h2>
<p>पुराने दशहरा मैदान में रथ पर विराजित भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमानजी की पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके बाद शाम 6:15 बजे आतिशबाजी के बीच 35 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में नगरवासी दशहरा उत्सव में शामिल होंगे।</p>
<p>रावण दहन के बाद चल समारोह पंचमुखी हनुमान मंदिर पहुंचेगा, जहां पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके पश्चात जुलूस आगे की यात्रा के लिए रवाना होगा।</p>
<h2><strong>रात 8:15 बजे बस स्टैंड मैदान में जलेगा 65 फीट का रावण</strong></h2>
<p>पंचमुखी हनुमान मंदिर से चल समारोह मंडाई चौक, जामा मस्जिद, रंगरेवाड़ी, बागकुआं टंकी, बदलीपुरा और दीनदयाल चौराहे से होते हुए बस स्टैंड स्थित नए दशहरा मैदान पहुंचेगा।</p>
<p>यहां रात 8:15 बजे रंगारंग आतिशबाजी के बीच 65 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। बड़े रावण के दहन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है।</p>
<h2><strong>आयोजन को लेकर नगर में उत्साह</strong></h2>
<p>हिंदू उत्सव समिति द्वारा विजयादशमी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर तैयारियां की गई हैं। चल समारोह में धार्मिक झांकियों, ढोल और अखाड़ा प्रदर्शन के साथ नगर में उत्सवी माहौल देखने को मिलेगा। दो अलग-अलग स्थानों पर रावण दहन होने से इस बार दशहरा उत्सव विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।</p>
<p>सारंगपुर में विजयादशमी का पर्व परंपरा, धार्मिक आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। भगवान श्रीराम की आराधना और रावण दहन के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाएगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>Morena  : महाअष्टमी और महानवमी का पूजन 19 अक्टूबर को, दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा</title>
		<link>https://swarajvani.com/morena-astrologers-explain-navratri-calendar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Oct 2026 09:14:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Morena]]></category>
		<category><![CDATA[Dussehra 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Maha Ashtami 2026]]></category>
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					<description><![CDATA[महाअष्टमी और महानवमी का पूजन 19 अक्टूबर को, दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा सप्तमी तिथि में वृद्धि के कारण नवरात्र के अंतिम दिनों की तिथियों में बदलाव, ज्योतिषाचार्य डॉ. ... <a title="Morena  : महाअष्टमी और महानवमी का पूजन 19 अक्टूबर को, दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा" class="read-more" href="https://swarajvani.com/morena-astrologers-explain-navratri-calendar/" aria-label="Read more about Morena  : महाअष्टमी और महानवमी का पूजन 19 अक्टूबर को, दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>महाअष्टमी और महानवमी का पूजन 19 अक्टूबर को, दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा</strong></h1>
<h5>सप्तमी तिथि में वृद्धि के कारण नवरात्र के अंतिम दिनों की तिथियों में बदलाव, ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने दी जानकारी</h5>
<p><strong>Morena ।</strong> शारदीय नवरात्र के अंतिम दिनों में इस वर्ष तिथियों के क्रम को लेकर श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति बन सकती है। सप्तमी तिथि में वृद्धि होने के कारण महाअष्टमी, महानवमी और विजयादशमी के पर्व अलग-अलग तिथियों पर निर्धारित किए गए हैं। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन के अनुसार, महाअष्टमी और महानवमी का पूजन सोमवार, 19 अक्टूबर को किया जाएगा, जबकि दशहरा मंगलवार, 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा।</p>
<h2><strong>19 अक्टूबर को होगा महाअष्टमी और महानवमी पूजन</strong></h2>
<p>डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर को सुबह 5:55 बजे शुरू होकर 18 अक्टूबर को सुबह 8:28 बजे तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी, जो 19 अक्टूबर को सुबह 10:52 बजे तक रहेगी। इसके पश्चात नवमी तिथि शुरू होगी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि तिथियों के संयोग को देखते हुए दुर्गाष्टमी, महाअष्टमी और महानवमी के धार्मिक अनुष्ठान 19 अक्टूबर को किए जाएंगे। इसी दिन कन्या पूजन, कन्या भोज और सरस्वती विसर्जन भी किया जाएगा।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="size-medium wp-image-366907 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-14-at-2.09.51-am-1-248x300.jpeg" alt="whatsapp image 2026 10 14 at 2.09.51 am 1" width="248" height="300" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-14-at-2.09.51-am-1-248x300.jpeg 248w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-14-at-2.09.51-am-1.jpeg 505w" sizes="(max-width: 248px) 100vw, 248px" /></p>
<p>ज्योतिषाचार्य के अनुसार, शास्त्रीय नियमों के तहत अष्टमी और नवमी तिथि का संधिकाल एक ही दिन पड़ने पर दोनों तिथियों का पूजन उसी दिन किया जाता है। इस वर्ष भी इसी आधार पर दोनों पर्वों के अनुष्ठान एक ही दिन संपन्न होंगे।</p>
<h2><strong>20 अक्टूबर को मनाई जाएगी विजयादशमी</strong></h2>
<p>ज्योतिषाचार्य एवं इंजीनियर हिमांशु जैन ने बताया कि इस वर्ष विजयादशमी यानी दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि दशहरा पर्व के निर्धारण में अपराह्न काल के दौरान दशमी तिथि की उपस्थिति और श्रवण नक्षत्र के संयोग का विशेष महत्व है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12:51 बजे शुरू होकर 21 अक्टूबर को दोपहर 2:21 बजे तक रहेगी। मंगलवार को अपराह्न काल में दशमी तिथि और श्रवण नक्षत्र का संयोग मिलने के कारण 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाना शास्त्रसम्मत रहेगा।</p>
<p>इस प्रकार श्रद्धालु 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी के पूजन तथा 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व मनाएंगे।</p>
<p><strong>रिपोर्ट: मनोज जैन नायक, मुरैना</strong></p>
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		<title>शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू, 19 को अष्टमी-नवमी के अनुष्ठान और 20 को विजयादशमी</title>
		<link>https://swarajvani.com/shardiya-navratri-2026-begins-october-11-ashtami-navami-rituals-on-october-19-dussehra-on-20/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 07 Oct 2026 13:23:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Morena]]></category>
		<category><![CDATA[Ashtami Navami]]></category>
		<category><![CDATA[Dainik Swaraj Vani]]></category>
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					<description><![CDATA[शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू, 19 को अष्टमी-नवमी के अनुष्ठान और 20 को विजयादशमी संवाददाता:  मनोज जैन नायक मुरैना  मां दुर्गा की साधना और आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र ... <a title="शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू, 19 को अष्टमी-नवमी के अनुष्ठान और 20 को विजयादशमी" class="read-more" href="https://swarajvani.com/shardiya-navratri-2026-begins-october-11-ashtami-navami-rituals-on-october-19-dussehra-on-20/" aria-label="Read more about शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू, 19 को अष्टमी-नवमी के अनुष्ठान और 20 को विजयादशमी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू, 19 को अष्टमी-नवमी के अनुष्ठान और 20 को विजयादशमी</strong></h1>
<p><strong>संवाददाता:  मनोज जैन नायक</p>
<p>मुरैना </strong> मां दुर्गा की साधना और आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र इस वर्ष 11 अक्टूबर, रविवार से प्रारंभ होगा। घटस्थापना के साथ श्रद्धालु मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करेंगे। नवरात्र के प्रमुख अनुष्ठानों के बाद 20 अक्टूबर, मंगलवार को विजयादशमी मनाई जाएगी। इस बार सप्तमी तिथि में वृद्धि तथा 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी के प्रमुख अनुष्ठानों का संयोग रहेगा। श्रद्धालुओं के लिए घटस्थापना की तिथि, पूजा का क्रम और शुभ मुहूर्त विशेष महत्व रखेंगे।</p>
<h2><strong>उदया तिथि के अनुसार 11 अक्टूबर को होगी घटस्थापना</strong></h2>
<p>वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार 11 अक्टूबर को नवरात्र का पहला दिन माना जाएगा। इसी दिन घटस्थापना के साथ मां शैलपुत्री की आराधना की जाएगी।</p>
<p>वर्ष में शारदीय और वासंतिक नवरात्र के अवसर पर मां दुर्गा की विशेष साधना की जाती है। शारदीय नवरात्र में श्रद्धालु देवी के नौ स्वरूपों के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हैं। प्रत्येक स्वरूप की आराधना अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी है। इनमें स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि, साहस, पारिवारिक कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति की कामना प्रमुख है।</p>
<h2><strong>हाथी की सवारी पर आगमन, घोड़े पर विदाई की मान्यता</strong></h2>
<p>डॉ. हुकुमचंद जैन के अनुसार इस वर्ष रविवार से नवरात्र प्रारंभ होने के कारण धार्मिक मान्यता के अनुसार मां दुर्गा का आगमन हाथी की सवारी पर होगा। वहीं विदाई घोड़े की सवारी पर मानी जाएगी।</p>
<p>धार्मिक परंपरा में हाथी पर देवी के आगमन को अच्छी वर्षा, बेहतर फसल और जनजीवन में सुख-समृद्धि का संकेत माना जाता है। देवी के आगमन और प्रस्थान की सवारी का उल्लेख नवरात्र से जुड़ी मान्यताओं में किया जाता है। श्रद्धालु इन परंपराओं के साथ मां दुर्गा की पूजा करते हैं।</p>
<h2><strong>पहले चार दिन शैलपुत्री से कूष्मांडा तक की आराधना</strong></h2>
<p><strong>11 अक्टूबर, रविवार—मां शैलपुत्री:</strong> प्रतिपदा पर घटस्थापना के साथ नवरात्र की शुरुआत होगी। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। धार्मिक मान्यता में इन्हें स्वास्थ्य, स्थिरता और सौभाग्य की देवी माना जाता है।</p>
<p><strong>12 अक्टूबर, सोमवार—मां ब्रह्मचारिणी:</strong> द्वितीया पर मां ब्रह्मचारिणी की साधना होगी। देवी का यह स्वरूप तप और संयम से जुड़ा माना जाता है। श्रद्धालु मनोकामना पूर्ति की भावना से इनकी आराधना करते हैं।</p>
<p><strong>13 अक्टूबर, मंगलवार—मां चंद्रघंटा:</strong> तृतीया पर मां चंद्रघंटा की पूजा होगी। इनकी आराधना साहस, शांति और भय से मुक्ति की कामना के साथ की जाती है।</p>
<p><strong>14 अक्टूबर, बुधवार—मां कूष्मांडा:</strong> चतुर्थी पर मां कूष्मांडा की पूजा की जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार देवी का यह स्वरूप आरोग्य, ऊर्जा और समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है।</p>
<h2><strong>स्कंदमाता, कात्यायनी और कालरात्रि की होगी पूजा</strong></h2>
<p><strong><br />
<img decoding="async" class="wp-image-364929 alignright" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/aaaaaaaaaas-257x300.jpg" alt="aaaaaaaaaas" width="309" height="361" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/aaaaaaaaaas-257x300.jpg 257w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/aaaaaaaaaas.jpg 651w" sizes="(max-width: 309px) 100vw, 309px" /></strong><strong style="font-size: inherit;">15 अक्टूबर, गुरुवार—मां स्कंदमाता:</strong><span style="font-size: inherit;"> पंचमी तिथि पर मां स्कंदमाता की आराधना होगी। इनकी पूजा संतान सुख तथा परिवार के कल्याण की कामना से की जाती है।</span></p>
<p><strong>16 अक्टूबर, शुक्रवार—मां कात्यायनी:</strong> षष्ठी पर मां कात्यायनी की साधना होगी। देवी के इस स्वरूप को विवाह, दांपत्य सुख और मनोकामना पूर्ति से जोड़ा जाता है।</p>
<p><strong>17 अक्टूबर, शनिवार—मां कालरात्रि:</strong> बताए गए पूजा क्रम के अनुसार षष्ठी-सप्तमी के दौरान मां कालरात्रि की आराधना होगी। श्रद्धालु भय, बाधाओं और नकारात्मकता से रक्षा की भावना के साथ देवी की साधना करेंगे।</p>
<h2><strong>19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी के प्रमुख अनुष्ठान</strong></h2>
<p><strong>18 अक्टूबर, रविवार—मां महागौरी:</strong> सप्तमी पर मां महागौरी की पूजा होगी। देवी का यह स्वरूप शांति, पवित्रता और सुख प्रदान करने वाला माना जाता है। इस बार सप्तमी तिथि में वृद्धि होने से पूजा क्रम में यह विशेष स्थिति रहेगी।</p>
<p><strong>19 अक्टूबर, सोमवार—मां सिद्धिदात्री:</strong> अष्टमी-नवमी के संयोग में मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाएगी। इनकी साधना सिद्धि, पूर्णता और आध्यात्मिक उन्नति की कामना से जुड़ी मानी जाती है। डॉ. जैन के अनुसार इसी दिन अष्टमी और नवमी के प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे।</p>
<p><strong>20 अक्टूबर, मंगलवार—विजयादशमी:</strong> दशमी तिथि पर विजयादशमी अर्थात दशहरा मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता में यह पर्व विजय तथा शुभ कार्यों में सफलता का प्रतीक माना जाता है।</p>
<h2><strong>घटस्थापना के लिए लाभ, अमृत और अभिजीत मुहूर्त</strong></h2>
<p>इंजीनियर हिमांशु जैन ने बताया कि 11 अक्टूबर को घटस्थापना के लिए चौघड़िया के अनुसार लाभ मुहूर्त सुबह <strong>9:14 बजे से 10:41 बजे तक</strong> रहेगा। इसके बाद अमृत मुहूर्त सुबह <strong>10:41 बजे से दोपहर 12:08 बजे तक</strong> होगा।</p>
<p>वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह <strong>11:45 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक</strong> रहेगा। इसे घटस्थापना के लिए विशेष शुभ बताया गया है। इस प्रकार नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना के लिए लाभ, अमृत और अभिजीत मुहूर्त के समय उपलब्ध रहेंगे। घटस्थापना के साथ शुरू होने वाली देवी आराधना में श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करेंगे।</p>
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