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		<title>India-US  संबंधों पर अमेरिकी राजदूत का बड़ा बयान: नाम बदलने के विवाद को बताया “बेअसर मुद्दा”</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Jun 2026 10:13:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[India-US संबंधों पर अमेरिकी राजदूत का बड़ा बयान: नाम बदलने के विवाद को बताया “बेअसर मुद्दा” परिचय India-US : भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इंडो-पैसिफिक कमांड के नाम ... <a title="India-US  संबंधों पर अमेरिकी राजदूत का बड़ा बयान: नाम बदलने के विवाद को बताया “बेअसर मुद्दा”" class="read-more" href="https://swarajvani.com/us-ambassador-sergio-gor-dismisses-indo-pacific/" aria-label="Read more about India-US  संबंधों पर अमेरिकी राजदूत का बड़ा बयान: नाम बदलने के विवाद को बताया “बेअसर मुद्दा”">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>India-US संबंधों पर अमेरिकी राजदूत का बड़ा बयान: नाम बदलने के विवाद को बताया “बेअसर मुद्दा”</strong></h1>
<h3>परिचय</h3>
<p>India-US : भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इंडो-पैसिफिक कमांड के नाम बदलने को लेकर उठे विवाद को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि “लेटरहेड पर क्या लिखा है” यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह देखना चाहिए कि अमेरिका वास्तविक स्तर पर क्या कर रहा है। उनके इस बयान को भारत-अमेरिका संबंधों पर चल रही अटकलों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।</p>
<h2><strong>नाम बदलने के विवाद पर प्रतिक्रिया</strong></h2>
<p>सर्जियो गोर ने कहा कि हाल ही में जिस तरह इंडो-पैसिफिक कमांड के नाम में बदलाव को लेकर चर्चा हुई, वह वास्तविक मुद्दा नहीं है। उनके अनुसार, केवल नाम या औपचारिक शब्दों में बदलाव से किसी रणनीतिक साझेदारी पर कोई असर नहीं पड़ता।</p>
<p>उन्होंने साफ कहा कि यह धारणा गलत है कि इस तरह के प्रशासनिक बदलाव से भारत और अमेरिका के रिश्ते कमजोर हो रहे हैं।</p>
<h2><strong>भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों पर जोर</strong></h2>
<p>US-India Strategic Partnership Forum Leadership Summit को संबोधित करते हुए गोर ने कहा कि भारत आज भी अमेरिका के साथ सबसे अधिक सैन्य अभ्यास करने वाले देशों में से एक है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच:</p>
<ul>
<li>नियमित रक्षा अभ्यास होते हैं</li>
<li>सैन्य अधिकारियों के लगातार द्विपक्षीय दौरे होते हैं</li>
<li>रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है</li>
</ul>
<h2><strong>इंडो-पैसिफिक कमांड का इतिहास</strong></h2>
<p>गौरतलब है कि 1947 में स्थापित US Pacific Command अमेरिका की सबसे पुरानी यूनिफाइड कमांड्स में से एक है। इसका दायरा अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला हुआ है।</p>
<p>पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में इस कमांड का नाम बदलकर “Indo-Pacific Command” किया गया था, ताकि क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका को दर्शाया जा सके। हाल ही में अमेरिका ने फिर से इसका पुराना नाम बहाल कर दिया, जिससे विवाद शुरू हुआ।</p>
<h2><strong>“लेटरहेड से फर्क नहीं पड़ता”</strong></h2>
<p>राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लोग सिर्फ नाम पर ध्यान दे रहे हैं, जबकि असली मुद्दा सहयोग और साझेदारी का है।</p>
<p>उन्होंने कहा, “मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता कि लेटरहेड पर क्या लिखा है, महत्वपूर्ण यह है कि हम जमीन पर क्या कर रहे हैं।”</p>
<h2><strong>भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर स्पष्ट संदेश</strong></h2>
<p>गोर ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते कमजोर नहीं हो रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही उन चर्चाओं को खारिज किया, जिनमें संबंधों में तनाव की बात कही जा रही थी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि:</p>
<ul>
<li>व्यापार</li>
<li>रक्षा</li>
<li>और लोगों के बीच संबंध</li>
</ul>
<p>इन सभी क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत बनी हुई है।</p>
<h2><strong>सैन्य सहयोग और अभ्यास</strong></h2>
<p>अमेरिकी राजदूत ने यह भी बताया कि भारत और अमेरिका के बीच सैन्य सहयोग बेहद सक्रिय है। उन्होंने कहा कि भारत हर वर्ष अमेरिका के साथ सबसे अधिक संयुक्त सैन्य अभ्यास करने वाले देशों में शामिल है।</p>
<p>उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आने वाले दिनों में भारतीय नौसेना का एक प्रतिनिधिमंडल अमेरिका का दौरा करेगा, जो दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ते रक्षा संबंधों का संकेत है।</p>
<h2><strong>ट्रंप और मोदी का उदाहरण</strong></h2>
<p>अपने संबोधन में सर्जियो गोर ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने एक घटना का उल्लेख किया जिसमें ट्रंप ने मियामी में UFC इवेंट के दौरान अचानक मोदी को फोन करने की इच्छा जताई थी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह उदाहरण दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत स्तर पर मजबूत संबंधों को दर्शाता है।</p>
<h2><strong>भविष्य की दिशा</strong></h2>
<p>गोर ने कहा कि आने वाले दो वर्ष भारत-अमेरिका संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने कहा कि यह समय दोनों देशों के बीच लंबे समय तक चलने वाली साझेदारी की दिशा तय करेगा।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि यह कोई अल्पकालिक सहयोग नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों तक असर डालने वाला रणनीतिक संबंध है।</p>
<h2><strong>निष्कर्ष</strong></h2>
<p>अमेरिकी राजदूत के बयान से यह स्पष्ट होता है कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत बनी हुई है, और प्रशासनिक या नाम संबंधी विवादों का इस रिश्ते पर कोई वास्तविक प्रभाव नहीं पड़ता। दोनों देश रक्षा, व्यापार और तकनीकी सहयोग के स्तर पर लगातार एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं, और आने वाले वर्षों में यह साझेदारी और भी मजबूत होने की संभावना है।</p>
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