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	<title>Shardiya Navratri 2026 &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<title>Shardiya Navratri 2026 &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि में अर्गला स्तोत्र के पाठ का महत्व, जानें पूजा का पारंपरिक क्रम</title>
		<link>https://swarajvani.com/shardiya-navratri-2026-significance-and-traditional-recitation-order-of-the-argala/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Oct 2026 13:26:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[religious]]></category>
		<category><![CDATA[Argala Stotram]]></category>
		<category><![CDATA[Durga Saptashati]]></category>
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					<description><![CDATA[Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि में अर्गला स्तोत्र के पाठ का महत्व, जानें पूजा का पारंपरिक क्रम धर्म डेस्क। शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के लिए व्रत और पूजा ... <a title="Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि में अर्गला स्तोत्र के पाठ का महत्व, जानें पूजा का पारंपरिक क्रम" class="read-more" href="https://swarajvani.com/shardiya-navratri-2026-significance-and-traditional-recitation-order-of-the-argala/" aria-label="Read more about Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि में अर्गला स्तोत्र के पाठ का महत्व, जानें पूजा का पारंपरिक क्रम">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि में अर्गला स्तोत्र के पाठ का महत्व, जानें पूजा का पारंपरिक क्रम</strong></h1>
<p><strong>धर्म डेस्क।</strong> शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के लिए व्रत और पूजा के साथ भक्त विभिन्न मंत्रों और स्तोत्रों का पाठ करते हैं। इन्हीं में अर्गला स्तोत्र को दुर्गा सप्तशती के महत्वपूर्ण अंगों में गिना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और एकाग्रता से इसका पाठ करने पर भक्त मां से शक्ति, विजय, यश और बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। नवरात्रि 11 से 19 अक्टूबर तक मनाई जा रही है।</p>
<h2><strong>दुर्गा सप्तशती का महत्वपूर्ण अंग</strong></h2>
<p>अर्गला स्तोत्र देवी माहात्म्य या दुर्गा सप्तशती की पाठ परंपरा से जुड़ा स्तोत्र है। इसके श्लोकों में देवी के विभिन्न स्वरूपों और उनकी विजय का स्मरण करते हुए उनसे कृपा की प्रार्थना की जाती है। स्तोत्र में भक्त देवी से जीवन में शुभता, साहस और सफलता देने तथा शत्रुता और बाधाओं को दूर करने की विनती करते हैं। यह धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ा पाठ है; इसके फल को भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार देखते हैं।</p>
<p>अर्गला स्तोत्र को कई पाठ-पुस्तकों में दुर्गा सप्तशती के मुख्य अध्यायों से पहले पढ़े जाने वाले अंगों में शामिल किया गया है। प्रचलित क्रम में पहले देवी कवच, फिर अर्गला स्तोत्र और उसके बाद कीलक स्तोत्र का पाठ किया जाता है। इसके बाद दुर्गा सप्तशती के अध्याय पढ़े जाते हैं। हालांकि, अलग-अलग परंपराओं और पाठ-विधियों में क्रम के कुछ अंतर मिल सकते हैं। इसलिए संपूर्ण पाठ करने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा या गुरु के निर्देशों का पालन कर सकते हैं।</p>
<h2><strong>नवरात्रि में कैसे करें पाठ?</strong></h2>
<p>भक्त नवरात्रि में सुबह या शाम की पूजा के समय अर्गला स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। पूजा-स्थल को स्वच्छ कर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप प्रज्ज्वलित करें। इसके बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजन और ध्यान करके स्तोत्र का पाठ करें। यदि दुर्गा सप्तशती का संपूर्ण पाठ किया जा रहा हो, तो उसके साथ प्रचलित पाठ-विधि और क्रम का ध्यान रखा जाता है।</p>
<p>संस्कृत पाठ में उच्चारण और श्लोकों के क्रम को लेकर संदेह हो, तो किसी विश्वसनीय पाठ-पुस्तक, जानकार पुरोहित या गुरु से मार्गदर्शन लिया जा सकता है। पाठ करते समय जल्दबाजी के बजाय शांत मन और एकाग्रता बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। जो श्रद्धालु पूरा स्तोत्र नहीं पढ़ पाते, वे अपनी क्षमता और समय के अनुसार पूजा कर सकते हैं।</p>
<h2><strong>स्तोत्र में देवी से की जाती है प्रार्थना</strong></h2>
<p>अर्गला स्तोत्र के भाव में भक्त देवी से सौंदर्य, विजय, यश और विरोध से रक्षा की याचना करते हैं। यहां विजय को केवल बाहरी सफलता तक सीमित न मानकर आत्मबल और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति के रूप में भी देखा जाता है। भक्त प्रार्थना करते हैं कि मां उनके जीवन से नकारात्मकता और बाधाएं दूर करें तथा उन्हें धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें। यह व्याख्या धार्मिक परंपरा पर आधारित है।</p>
<p>नवरात्रि आत्मचिंतन, साधना और भक्ति का पर्व है। ऐसे में स्तोत्र-पाठ के साथ संयम, सद्भाव और सेवा जैसे व्यवहारों को अपनाने का संकल्प भी लिया जा सकता है। भक्तों के लिए अर्गला स्तोत्र मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और उनसे आशीर्वाद की कामना करने का एक पारंपरिक माध्यम है।</p>
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		<title>Morena  : महाअष्टमी और महानवमी का पूजन 19 अक्टूबर को, दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा</title>
		<link>https://swarajvani.com/morena-astrologers-explain-navratri-calendar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Oct 2026 09:14:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Morena]]></category>
		<category><![CDATA[Dussehra 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Maha Ashtami 2026]]></category>
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		<category><![CDATA[Shardiya Navratri 2026]]></category>
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					<description><![CDATA[महाअष्टमी और महानवमी का पूजन 19 अक्टूबर को, दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा सप्तमी तिथि में वृद्धि के कारण नवरात्र के अंतिम दिनों की तिथियों में बदलाव, ज्योतिषाचार्य डॉ. ... <a title="Morena  : महाअष्टमी और महानवमी का पूजन 19 अक्टूबर को, दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा" class="read-more" href="https://swarajvani.com/morena-astrologers-explain-navratri-calendar/" aria-label="Read more about Morena  : महाअष्टमी और महानवमी का पूजन 19 अक्टूबर को, दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>महाअष्टमी और महानवमी का पूजन 19 अक्टूबर को, दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा</strong></h1>
<h5>सप्तमी तिथि में वृद्धि के कारण नवरात्र के अंतिम दिनों की तिथियों में बदलाव, ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने दी जानकारी</h5>
<p><strong>Morena ।</strong> शारदीय नवरात्र के अंतिम दिनों में इस वर्ष तिथियों के क्रम को लेकर श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति बन सकती है। सप्तमी तिथि में वृद्धि होने के कारण महाअष्टमी, महानवमी और विजयादशमी के पर्व अलग-अलग तिथियों पर निर्धारित किए गए हैं। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन के अनुसार, महाअष्टमी और महानवमी का पूजन सोमवार, 19 अक्टूबर को किया जाएगा, जबकि दशहरा मंगलवार, 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा।</p>
<h2><strong>19 अक्टूबर को होगा महाअष्टमी और महानवमी पूजन</strong></h2>
<p>डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर को सुबह 5:55 बजे शुरू होकर 18 अक्टूबर को सुबह 8:28 बजे तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी, जो 19 अक्टूबर को सुबह 10:52 बजे तक रहेगी। इसके पश्चात नवमी तिथि शुरू होगी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि तिथियों के संयोग को देखते हुए दुर्गाष्टमी, महाअष्टमी और महानवमी के धार्मिक अनुष्ठान 19 अक्टूबर को किए जाएंगे। इसी दिन कन्या पूजन, कन्या भोज और सरस्वती विसर्जन भी किया जाएगा।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="size-medium wp-image-366907 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-14-at-2.09.51-am-1-248x300.jpeg" alt="whatsapp image 2026 10 14 at 2.09.51 am 1" width="248" height="300" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-14-at-2.09.51-am-1-248x300.jpeg 248w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-14-at-2.09.51-am-1.jpeg 505w" sizes="(max-width: 248px) 100vw, 248px" /></p>
<p>ज्योतिषाचार्य के अनुसार, शास्त्रीय नियमों के तहत अष्टमी और नवमी तिथि का संधिकाल एक ही दिन पड़ने पर दोनों तिथियों का पूजन उसी दिन किया जाता है। इस वर्ष भी इसी आधार पर दोनों पर्वों के अनुष्ठान एक ही दिन संपन्न होंगे।</p>
<h2><strong>20 अक्टूबर को मनाई जाएगी विजयादशमी</strong></h2>
<p>ज्योतिषाचार्य एवं इंजीनियर हिमांशु जैन ने बताया कि इस वर्ष विजयादशमी यानी दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि दशहरा पर्व के निर्धारण में अपराह्न काल के दौरान दशमी तिथि की उपस्थिति और श्रवण नक्षत्र के संयोग का विशेष महत्व है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12:51 बजे शुरू होकर 21 अक्टूबर को दोपहर 2:21 बजे तक रहेगी। मंगलवार को अपराह्न काल में दशमी तिथि और श्रवण नक्षत्र का संयोग मिलने के कारण 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाना शास्त्रसम्मत रहेगा।</p>
<p>इस प्रकार श्रद्धालु 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी के पूजन तथा 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व मनाएंगे।</p>
<p><strong>रिपोर्ट: मनोज जैन नायक, मुरैना</strong></p>
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