<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Seva Sankalp Pakhwada &#8211; Swaraj Vani</title>
	<atom:link href="https://swarajvani.com/tag/seva-sankalp-pakhwada/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://swarajvani.com</link>
	<description>From politics and jobs to culture and community stories, we deliver timely, unbiased updates that matter.</description>
	<lastBuildDate>Mon, 12 Oct 2026 11:39:25 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.1.3</generator>

<image>
	<url>https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/07/cropped-स्वराज-वाणी-1-32x32.png</url>
	<title>Seva Sankalp Pakhwada &#8211; Swaraj Vani</title>
	<link>https://swarajvani.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>Harda : प्रदर्शनी में सीएम की तस्वीर न होने पर उठे सवाल, जमीनी पड़ताल में सामने आया वृद्धाश्रम का असली सच</title>
		<link>https://swarajvani.com/politicising-old-photos-ground-report-from-harda/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 12 Oct 2026 11:39:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[HARDA]]></category>
		<category><![CDATA[Harda News]]></category>
		<category><![CDATA[MOHAN YADAV]]></category>
		<category><![CDATA[Old Age Home]]></category>
		<category><![CDATA[Photo Exhibition]]></category>
		<category><![CDATA[Sarthak Seva Samiti]]></category>
		<category><![CDATA[Seva Sankalp Pakhwada]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=366444</guid>

					<description><![CDATA[वृद्धाश्रम की तस्वीरों पर सियासत से पहले जानिए हकीकत: हरदा में सार्थक सेवा समिति के वृद्धाश्रम की जमीनी पड़ताल में सामने आई सेवा और समर्पण की कहानी मुख्यमंत्री के हरदा ... <a title="Harda : प्रदर्शनी में सीएम की तस्वीर न होने पर उठे सवाल, जमीनी पड़ताल में सामने आया वृद्धाश्रम का असली सच" class="read-more" href="https://swarajvani.com/politicising-old-photos-ground-report-from-harda/" aria-label="Read more about Harda : प्रदर्शनी में सीएम की तस्वीर न होने पर उठे सवाल, जमीनी पड़ताल में सामने आया वृद्धाश्रम का असली सच">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2 dir="ltr"><strong>वृद्धाश्रम की तस्वीरों पर सियासत से पहले जानिए हकीकत: हरदा में सार्थक सेवा समिति के वृद्धाश्रम की जमीनी पड़ताल में सामने आई सेवा और समर्पण की कहानी</strong></h2>
<p dir="ltr"><strong>मुख्यमंत्री के हरदा प्रवास के दौरान प्रदर्शनी के छायाचित्रों पर उठे सवालों के बीच दैनिक स्वराज वाणी रिपोर्टर ने मौके पर पहुंचकर जाना संस्था का वास्तविक पक्ष</strong></p>
<p dir="ltr"><strong>Harda ।</strong> मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हरदा प्रवास के दौरान सेवा संकल्प पखवाड़े के तहत लगाई गई प्रदर्शनी के छायाचित्रों को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठे थे। कुछ टिप्पणियों में कहा गया कि प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री का एक भी छायाचित्र नहीं था और इसी आधार पर जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली तथा मुख्यमंत्री के कथित हाव-भाव पर सवाल उठाए गए। इसके बाद दैनिक स्वराज वाणी, हरदा के जिला रिपोर्टर राजकुमार मौर्य ने मौके पर जाकर संस्था के तथ्य जाने।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>क्या जानने पहुंचे रिपोर्टर</strong></h3>
<p dir="ltr">रिपोर्टर ने यह समझने का प्रयास किया कि वृद्धाश्रम में छायाचित्र किस उद्देश्य से लगाए जाते हैं, यहां किन गतिविधियों का आयोजन होता है और संस्था के संचालन में किन लोगों की भूमिका रही है।</p>
<p dir="ltr">जमीनी जानकारी के बाद सामने आया कि सार्थक सेवा समिति द्वारा संचालित वृद्धाश्रम में लगे छायाचित्रों को केवल राजनीतिक दृष्टि से देखना उचित नहीं है। इन तस्वीरों के पीछे संस्था के नियमित कार्यक्रमों, वृद्धजनों के साथ मनाए जाने वाले त्योहारों, सेवा गतिविधियों और संस्था से लंबे समय से जुड़े लोगों के योगदान का संदर्भ है।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>वृद्धाश्रम में क्या-क्या होता है</strong></h3>
<p dir="ltr">वृद्धाश्रम में वृद्धजन दिवस, होली, दीपावली और अन्य त्योहारों के साथ जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ और पुण्यतिथि जैसे अवसरों पर कार्यक्रम होते हैं। इन मौकों पर वृद्धजनों को भोजन कराया जाता है और उनके साथ समय बिताकर खुशियां साझा की जाती हैं।</p>
<p dir="ltr">इन कार्यक्रमों के छायाचित्र स्मृति के रूप में प्रदर्शित किए जाते हैं। साथ ही संस्था की शुरुआत से जुड़े सेवादारों, सेवा कार्यों में निरंतर योगदान देने वालों और संस्था को प्रेरणा व संरक्षण देने वालों के चित्र भी लगाए जाते हैं। यानी तस्वीरों का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का प्रचार करना नहीं, बल्कि संस्था की गतिविधियों और सेवा परंपरा को याद रखना है।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>सेवा की परंपरा को राजनीतिक चश्मे से देखना कितना उचित</strong></h3>
<p dir="ltr">रिपोर्ट के अनुसार किसी सामाजिक संस्था में उसके कार्यों से जुड़े लोगों की तस्वीरें होना सामान्य बात है। केवल इस आधार पर सवाल उठाना कि प्रदर्शनी में किसका चित्र लगा और किसका नहीं, संस्था के उद्देश्य को समझे बिना निष्कर्ष निकालने जैसा है।</p>
<p dir="ltr">मुख्यमंत्री का हरदा प्रवास महत्वपूर्ण था, लेकिन उनका चित्र न होने भर से यह मान लेना कि वे नाराज हुए या प्रशासन ने उनका समय बर्बाद किया, तथ्यों से परे अनुमान हो सकता है। किसी के चेहरे के भाव से उसके मन की बात निश्चित रूप से नहीं जानी जा सकती। भविष्य में मुख्यमंत्री किसी कार्यक्रम में शामिल होते हैं तो उसके चित्र भी संस्था की स्मृतियों का हिस्सा बन सकते हैं।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>पत्रकारिता में सवाल जरूरी, जमीनी सच्चाई भी उतनी ही जरूरी</strong></h3>
<p dir="ltr">रिपोर्ट में कहा गया कि पत्रकारिता का दायित्व व्यवस्था से सवाल करना है, लेकिन किसी विषय को विवाद बनाने से पहले संस्था का पक्ष जानना, मौके पर जाकर स्थिति समझना और तथ्यों की पुष्टि करना भी जिम्मेदारी है। संस्थाओं के कामकाज में कोई वास्तविक कमी हो तो सवाल उठने चाहिए, पर सेवा कार्यों को बिना आधार राजनीतिक विवाद से जोड़ना उचित नहीं। भाजपा, कांग्रेस या किसी अन्य विचारधारा का व्यक्ति वृद्धजनों की सेवा करे, तो उसका योगदान सेवा के नजरिए से देखा जाना चाहिए।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>वृद्धाश्रम सेवा का केंद्र, राजनीतिक अखाड़ा नहीं</strong></h3>
<p dir="ltr">सार्थक सेवा समिति जैसे संस्थान समाज की संवेदनशीलता के प्रतीक हैं, जहां केंद्र में वृद्धजन हैं, राजनीतिक प्रतिस्पर्धा नहीं। निष्कर्ष यही है कि तस्वीरों पर सवाल उठाने से पहले यह जानना जरूरी है कि वे किस अवसर की हैं और किनके योगदान को दर्शाती हैं।</p>
<p dir="ltr"><strong><em>(प्रस्तुति: राजकुमार मौर्य, हरदा सिटी रिपोर्टर, दैनिक स्वराज वाणी)</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
