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	<title>#rakhi &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<title>#rakhi &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>रक्षाबंधन पर बहन ने सोना, स्कूटी या कार नहीं, भाई से माता-पिता की सेवा का अनमोल वचन माँगा।</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Aug 2026 06:49:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[रक्षाबंधन: भाई-बहन के पवित्र प्रेम और माता-पिता की सेवा का संदेश रक्षाबंधन का पावन पर्व रक्षाबंधन भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह केवल भाई की कलाई पर ... <a title="रक्षाबंधन पर बहन ने सोना, स्कूटी या कार नहीं, भाई से माता-पिता की सेवा का अनमोल वचन माँगा।" class="read-more" href="https://swarajvani.com/on-raksha-bandhan-sister-asks-brother-for-parents/" aria-label="Read more about रक्षाबंधन पर बहन ने सोना, स्कूटी या कार नहीं, भाई से माता-पिता की सेवा का अनमोल वचन माँगा।">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>रक्षाबंधन: भाई-बहन के पवित्र प्रेम और माता-पिता की सेवा का संदेश</strong></h1>
<p>रक्षाबंधन का पावन पर्व</p>
<p>रक्षाबंधन भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह केवल भाई की कलाई पर राखी बाँधने और उपहार देने का अवसर नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास, स्नेह और जिम्मेदारी को मजबूत करने वाला पवित्र पर्व है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधकर उसके सुखी, स्वस्थ और सुरक्षित जीवन की मंगलकामना करती है। भाई भी अपनी बहन की रक्षा, सम्मान और हर परिस्थिति में उसका साथ देने का संकल्प करता है।</p>
<p>रक्षाबंधन का त्योहार आते ही घर-आँगन में एक अलग ही उल्लास दिखाई देने लगता है। बाजार रंग-बिरंगी राखियों से सज जाते हैं। मिठाइयों की खुशबू वातावरण में मिठास घोल देती है और बहनें अपने भाइयों के लिए सुंदर राखियाँ चुनती हैं। लेकिन इस पर्व की असली सुंदरता बाहरी सजावट में नहीं, बल्कि उन भावनाओं में छिपी है जो भाई-बहन के हृदय में एक-दूसरे के लिए होती हैं।</p>
<h2><strong>भाई-बहन का पवित्र रिश्ता</strong></h2>
<p>भाई-बहन का रिश्ता संसार के सबसे सुंदर रिश्तों में माना जाता है। इसमें कभी नोकझोंक होती है, कभी रूठना-मनाना होता है और कभी छोटी-छोटी बातों पर विवाद भी हो जाता है, लेकिन इन सबके पीछे गहरा प्रेम छिपा रहता है। बचपन की अनेक यादें, साथ बिताए पल, एक-दूसरे की शरारतों में भागीदारी और कठिन समय में साथ खड़े रहना इस रिश्ते को विशेष बनाते हैं।</p>
<p>बहन जब भाई की कलाई पर राखी बाँधती है, तो वह केवल एक धागा नहीं बाँधती। वह उसमें अपने स्नेह, विश्वास और शुभकामनाओं की भावनाएँ पिरोती है। भाई के लिए भी राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि बहन के विश्वास और प्रेम का प्रतीक होती है।</p>
<h2><strong>राखी में छिपी भावनाएँ</strong></h2>
<p>राखी का धागा बहुत साधारण दिखाई दे सकता है, लेकिन उसके पीछे भावनाओं की गहराई असाधारण होती है। यह धागा भाई को उसकी जिम्मेदारियों की याद दिलाता है और बहन को यह विश्वास देता है कि उसका भाई हर सुख-दुःख में उसके साथ रहेगा।</p>
<p>रक्षाबंधन के अवसर पर बहन भाई का तिलक करती है, आरती उतारती है और उसकी कलाई पर राखी बाँधती है। इसके बाद भाई अपनी बहन को उपहार देता है। परंतु सबसे मूल्यवान उपहार महँगी वस्तु नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान, सहयोग और जीवनभर साथ निभाने का वचन है।</p>
<h2><strong>भाई का उपहार देने का उत्साह</strong></h2>
<p>कवि की कल्पना में भाई अपनी बहन से प्रेमपूर्वक पूछता है कि उसे रक्षाबंधन पर क्या उपहार चाहिए। वह बहन को सोना, स्कूटी या कार जैसी महँगी चीजें देने की बात करता है। इससे भाई के मन का उत्साह और अपनी बहन को खुश करने की इच्छा प्रकट होती है।</p>
<p>आज के समय में त्योहारों पर उपहारों का महत्व बढ़ गया है। लोग अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार कपड़े, आभूषण, मोबाइल, वाहन या अन्य वस्तुएँ उपहार में देते हैं। उपहार प्रेम व्यक्त करने का एक माध्यम हो सकता है, लेकिन क्या वास्तव में किसी रिश्ते की कीमत किसी वस्तु से तय की जा सकती है? यही प्रश्न इस कविता को एक गहरी दिशा देता है।</p>
<h2><strong>बहन की अनोखी माँग</strong></h2>
<p>कविता का सबसे सुंदर और प्रेरणादायक पक्ष तब सामने आता है, जब बहन भाई से कहती है कि उसे सोना, स्कूटी या कार में से कुछ भी नहीं चाहिए। उसकी केवल एक इच्छा है और वह चाहती है कि भाई उसकी इस बात को स्वीकार करे।</p>
<p>बहन की यह माँग साधारण होते हुए भी अत्यंत महान है। वह अपने लिए किसी भौतिक सुख की अपेक्षा नहीं करती। वह भाई से ऐसा वचन माँगती है, जिसका संबंध पूरे परिवार की खुशियों से है। उसकी इच्छा है कि भाई अपने माता-पिता की सेवा करे और उनका सम्मान बनाए रखे।</p>
<p>यहाँ बहन का चरित्र त्याग, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों का प्रतीक बनकर सामने आता है। वह भाई को केवल अपना भाई नहीं, बल्कि माता-पिता का बेटा होने की जिम्मेदारी भी याद दिलाती है।</p>
<h2><strong>माता-पिता की सेवा सबसे बड़ा वरदान</strong></h2>
<p>बहन की माँग है—माता-पिता की सेवा करना। यह संदेश भारतीय संस्कृति के मूल संस्कारों से जुड़ा हुआ है। माता-पिता हमारे जीवन के प्रथम गुरु होते हैं। वे अपने बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और भविष्य के लिए अपना जीवन समर्पित कर देते हैं। बच्चे जब बड़े होते हैं, तो उनके प्रति सम्मान और सेवा का भाव रखना उनका नैतिक कर्तव्य बनता है।</p>
<p>माता-पिता की सेवा केवल उनकी आवश्यकताओं को पूरा करना नहीं है। उनकी बात ध्यान से सुनना, उनके साथ समय बिताना, उनकी भावनाओं को समझना, बीमारी और कठिन समय में उनका सहारा बनना तथा उन्हें सम्मान देना भी सेवा का ही रूप है।</p>
<p>आज की तेज गति वाली जिंदगी में लोग अपने काम, करियर और भौतिक सुख-सुविधाओं में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि कभी-कभी अपने माता-पिता के लिए समय निकालना भी कठिन समझते हैं। ऐसे समय में यह कविता हमें याद दिलाती है कि जीवन की सफलता केवल धन और संपत्ति प्राप्त करने में नहीं, बल्कि अपने माता-पिता का आशीर्वाद पाने में भी है।</p>
<h2><strong>माता-पिता भगवान के समान</strong></h2>
<p>कविता में माता-पिता को भगवान के समान बताया गया है। भारतीय परंपरा में भी माता-पिता के प्रति अत्यंत श्रद्धा का भाव रहा है। बच्चे के जीवन में माता-पिता का स्थान सबसे ऊँचा होता है। वे अपनी इच्छाओं का त्याग करके बच्चों की खुशियों को प्राथमिकता देते हैं।</p>
<p>माता-पिता की सेवा करने से मिलने वाला आशीर्वाद किसी भी भौतिक उपहार से अधिक मूल्यवान है। धन-संपत्ति समय के साथ समाप्त हो सकती है, लेकिन माता-पिता का आशीर्वाद जीवनभर मनुष्य को शक्ति और आत्मविश्वास देता है।</p>
<p>जब माता-पिता प्रसन्न होते हैं, तो घर में सकारात्मक वातावरण बनता है। उनके चेहरे की मुस्कान पूरे परिवार के लिए सुख का कारण बनती है। इसलिए बहन का भाई से माता-पिता की सेवा का वचन माँगना वास्तव में पूरे परिवार की खुशियों की कामना करना है।</p>
<h2><strong>बदलते समय में कविता का संदेश</strong></h2>
<p>आज समाज तेजी से बदल रहा है। संयुक्त परिवारों की जगह छोटे परिवार बढ़ रहे हैं। पढ़ाई और रोजगार के कारण बच्चे अपने माता-पिता से दूर रहने लगे हैं। आधुनिक जीवन ने सुविधाएँ तो बढ़ाई हैं, लेकिन कई बार पारिवारिक रिश्तों के लिए समय कम कर दिया है।</p>
<p>ऐसे समय में रक्षाबंधन जैसे त्योहारों का महत्व और भी बढ़ जाता है। ये त्योहार हमें अपनी जड़ों और संस्कारों से जोड़ते हैं। वे याद दिलाते हैं कि आधुनिक बनने का अर्थ अपने पारिवारिक मूल्यों को भूल जाना नहीं है।</p>
<p>रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का दिन नहीं, बल्कि परिवार के प्रत्येक सदस्य के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने का अवसर भी है।</p>
<h2><strong>सच्चा उपहार क्या है?</strong></h2>
<p>कविता एक महत्वपूर्ण प्रश्न हमारे सामने रखती है—सच्चा उपहार आखिर क्या है? क्या सोना, स्कूटी या कार ही खुशी दे सकते हैं? इन वस्तुओं का अपना महत्व है, लेकिन इनसे कहीं अधिक मूल्यवान है प्रेम और जिम्मेदारी।</p>
<p>यदि कोई भाई अपनी बहन की इच्छा पूरी करने के लिए माता-पिता की सेवा का संकल्प लेता है, तो इससे बड़ा उपहार शायद कोई नहीं हो सकता। बहन को अपने भाई पर गर्व होगा और माता-पिता को अपने बेटे के संस्कारों पर संतोष मिलेगा।</p>
<p>इस प्रकार एक छोटी-सी राखी पूरे परिवार को प्रेम, सम्मान और जिम्मेदारी के सूत्र में बाँध सकती है।</p>
<h2><strong>बहन के संस्कारों की सुंदर मिसाल</strong></h2>
<p>कविता की बहन हमें यह भी सिखाती है कि सच्चा प्रेम केवल अपने सुख की इच्छा नहीं करता। वह अपने प्रिय व्यक्ति के जीवन में अच्छे संस्कार और सही दिशा देखना चाहता है। बहन चाहती तो कोई महँगा उपहार माँग सकती थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।</p>
<p>उसने ऐसी माँग रखी, जिससे भाई का जीवन भी बेहतर बने और माता-पिता का जीवन भी सुखी हो। यह निस्वार्थ प्रेम की सुंदर मिसाल है। उसके लिए भाई का धनवान होना महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि संस्कारी और जिम्मेदार होना महत्वपूर्ण है।</p>
<h2><strong>रक्षाबंधन का वास्तविक अर्थ</strong></h2>
<p>रक्षाबंधन का वास्तविक अर्थ केवल रक्षा का वचन देना नहीं, बल्कि रिश्तों की रक्षा करना भी है। भाई अपनी बहन की रक्षा करे, बहन भाई के सुख की कामना करे और दोनों मिलकर माता-पिता के सम्मान तथा परिवार की एकता को बनाए रखें—यही इस पर्व की वास्तविक भावना है।</p>
<p>राखी का धागा हमें यह संदेश देता है कि रिश्ते विश्वास से मजबूत होते हैं। परिवार तभी खुशहाल रहता है, जब उसके सदस्य एक-दूसरे के सुख-दुःख में सहभागी बनें।</p>
<h2><strong>निष्कर्ष</strong></h2>
<p>रक्षाबंधन प्रेम, विश्वास, त्याग और पारिवारिक संस्कारों का त्योहार है। प्रस्तुत कविता इस पर्व को एक नई और अत्यंत सुंदर दृष्टि देती है। इसमें बहन महँगे उपहारों को ठुकराकर भाई से माता-पिता की सेवा का वचन माँगती है। उसकी यह माँग बताती है कि जीवन में सबसे बड़ी संपत्ति धन नहीं, बल्कि अच्छे संस्कार, पारिवारिक प्रेम और माता-पिता का आशीर्वाद है।</p>
<p>हमें रक्षाबंधन के अवसर पर केवल राखी बाँधने और उपहार देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। हमें यह संकल्प भी लेना चाहिए कि हम अपने परिवार के सदस्यों का सम्मान करेंगे, माता-पिता की सेवा करेंगे और भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम एवं विश्वास को हमेशा बनाए रखेंगे।</p>
<p>बहन की इस सुंदर भावना को यदि हर भाई अपने जीवन में उतार ले, तो वास्तव में रक्षाबंधन का त्योहार सार्थक हो जाएगा। सोना, स्कूटी और कार जैसी वस्तुएँ जीवन में कभी भी खरीदी जा सकती हैं, लेकिन माता-पिता का आशीर्वाद और परिवार का स्नेह अनमोल है। यही इस कविता का सबसे बड़ा संदेश है और यही रक्षाबंधन की सच्ची भावना भी है।</p>
<p>कवि: छगनलाल मुथा-सान्डेराव, मुंबई</p>
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		<title>‘धागों का त्योहार’ में भाई-बहन के अमर प्रेम, विश्वास, संस्कार और सीमा पर तैनात सैनिकों के त्याग का सुंदर चित्रण</title>
		<link>https://swarajvani.com/festival-of-threads-celebrates-the-eternal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 25 Aug 2026 07:32:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Festival]]></category>
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					<description><![CDATA[‘धागों का त्योहार’ में भाई-बहन के प्रेम और देशभक्ति का भाव राखी के पावन पर्व को समर्पित भावपूर्ण रचना‘  रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और अटूट रिश्ते का पर्व है। ... <a title="‘धागों का त्योहार’ में भाई-बहन के अमर प्रेम, विश्वास, संस्कार और सीमा पर तैनात सैनिकों के त्याग का सुंदर चित्रण" class="read-more" href="https://swarajvani.com/festival-of-threads-celebrates-the-eternal/" aria-label="Read more about ‘धागों का त्योहार’ में भाई-बहन के अमर प्रेम, विश्वास, संस्कार और सीमा पर तैनात सैनिकों के त्याग का सुंदर चित्रण">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>‘धागों का त्योहार’ में भाई-बहन के प्रेम और देशभक्ति का भाव</strong></h1>
<h2>राखी के पावन पर्व को समर्पित भावपूर्ण रचना<strong>‘ </strong></h2>
<p>रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और अटूट रिश्ते का पर्व है। इसी पवित्र भावना को कवि डॉ. भेरूसिंह चौहान ‘तरंग’ ने अपनी रचना <strong>‘धागों का त्योहार’</strong> में सरल और सहज शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त किया है। कविता में राखी के रंग-बिरंगे धागों के साथ भाई-बहन के प्रेम, जिम्मेदारी, विश्वास और देश की रक्षा करने वाले सैनिकों के प्रति सम्मान को भी स्थान दिया गया है।</p>
<p>कवि ने राखी को केवल एक त्योहार के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे प्रेम और सुरक्षा के अमर बंधन का प्रतीक बताया है। कविता की शुरुआती पंक्तियां ही पाठक को त्योहार के उल्लास और पारिवारिक प्रेम से जोड़ देती हैं।</p>
<h2><strong>रंग-बिरंगी राखियों से सजा बाजार</strong></h2>
<p>रक्षाबंधन आते ही बाजार रंग-बिरंगी राखियों से सज जाते हैं। बहनों में भाई की कलाई पर प्रेम का धागा बांधने का उत्साह दिखाई देता है। कवि ने इसी दृश्य को आधार बनाते हुए राखी के वातावरण का सुंदर चित्रण किया है।</p>
<p>राखी का धागा देखने में भले ही साधारण हो, लेकिन उसके पीछे भावनाओं की गहराई बहुत बड़ी होती है। यह धागा भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहने का संदेश देता है।</p>
<p>कविता में राखी को <strong>‘अमर-प्रेम का बंधन’</strong> कहा गया है। यह भाव बताता है कि भाई-बहन का रिश्ता समय और परिस्थितियों से परे होता है।</p>
<h2><strong>संकट में बहन के साथ खड़ा भाई</strong></h2>
<p>कविता में भाई के उस दायित्व को भी रेखांकित किया गया है, जो वह अपनी बहन के प्रति निभाता है। जब भी बहन के जीवन में कोई संकट आता है, भाई उसके पास पहुंचने का प्रयास करता है।</p>
<p>यह भावना भारतीय पारिवारिक संस्कारों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भाई केवल राखी के दिन बहन के साथ नहीं होता, बल्कि उसके जीवन के सुख-दुख में सहभागी बनने का संकल्प भी रखता है।</p>
<p>कवि के अनुसार, भाई अपने दिए हुए वचन को निभाता है और बहन के जीवन में खुशियों की बगिया महकाने का प्रयास करता है। इस तरह कविता में राखी का धागा जिम्मेदारी और भरोसे से जुड़ जाता है।</p>
<h2><strong>राखी की पारंपरिक रस्मों का सुंदर चित्रण</strong></h2>
<p>रचना में रक्षाबंधन के पारंपरिक स्वरूप को भी बेहद सहज तरीके से प्रस्तुत किया गया है। बहन सज-धजकर भाई के घर आती है और पूजा की थाली तैयार करती है।</p>
<p>कुमकुम, अक्षत और श्रीफल से सजी थाली भारतीय संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों का प्रतीक बनती है। बहन भाई को आसन पर बैठाकर मंगल तिलक लगाती है और उसकी कलाई पर राखी बांधती है।</p>
<p>इसके बाद आरती की जाती है और भाई बहन को उपहार देता है। इन छोटी-छोटी रस्मों के माध्यम से कवि ने रक्षाबंधन की आत्मीयता और पारिवारिक उल्लास को जीवंत कर दिया है।</p>
<h2><strong>राखी के धागे में छिपा भावनाओं का संसार</strong></h2>
<p>राखी केवल सूत या धागे से बनी वस्तु नहीं है। उसके साथ बहन की शुभकामनाएं और भाई के प्रति विश्वास जुड़ा होता है। यही कारण है कि एक छोटा-सा धागा भी भावनात्मक रूप से बहुत महत्वपूर्ण बन जाता है।</p>
<p>कविता में बार-बार आने वाली पंक्ति भाई-बहन के प्रेम को और अधिक मजबूती देती है। यह दोहराव रचना को गीतात्मकता प्रदान करता है और पाठक के मन में मुख्य भाव को गहराई से स्थापित करता है।</p>
<h2><strong>परिवार से देश की सीमा तक पहुंचती भावना</strong></h2>
<p>कविता का सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली पक्ष इसका देशभक्ति से जुड़ना है। कवि ने रक्षाबंधन के भाव को केवल परिवार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे देश की सीमाओं तक पहुंचाया है।</p>
<p>सीमा पर तैनात सैनिक भी किसी के भाई, बेटे और परिवार के सदस्य होते हैं। वे अपने परिवार से दूर रहकर देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हैं। त्योहारों के अवसर पर जब पूरा देश अपने परिवार के साथ खुशियां मनाता है, तब सैनिक सीमा पर अपनी ड्यूटी निभा रहे होते हैं।</p>
<p>कवि ने सैनिक के त्याग और कर्तव्य को विशेष महत्व दिया है। सर्दी, गर्मी और बरसात जैसी कठिन परिस्थितियों में भी सैनिक देश की रक्षा के लिए सीमा पर डटा रहता है।</p>
<h2><strong>सैनिकों के प्रति सम्मान का संदेश</strong></h2>
<p>कविता का अंतिम हिस्सा पाठक को एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि रक्षाबंधन की भावना केवल अपने भाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। देश की रक्षा करने वाले हर सैनिक को भी सम्मान और स्नेह मिलना चाहिए।</p>
<p>सैनिकों की बहनें भी रक्षाबंधन पर अपने भाइयों की सलामती की कामना करती हैं। कई सैनिक ऐसे होते हैं, जो त्योहार के दिन अपने परिवार से दूर रहते हैं। उनके लिए देश की सुरक्षा ही सर्वोच्च कर्तव्य होती है।</p>
<p>कवि ने सैनिक की भावना को इस रूप में प्रस्तुत किया है कि वह जहां भी हो, अपनी बहन के लिए खुशियों की कामना करता है। यह भाव कविता को संवेदनशील और देशभक्ति से ओतप्रोत बना देता है।</p>
<h2><strong>सरल भाषा में गहरी भावनाएं</strong></h2>
<p>‘धागों का त्योहार’ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरल और सहज भाषा है। कविता में कठिन शब्दों का अधिक प्रयोग नहीं किया गया है। इसी कारण इसका भाव सीधे पाठक के मन तक पहुंचता है।</p>
<p>कवि ने पारिवारिक प्रेम, भाई का दायित्व, बहन का स्नेह और सैनिक का त्याग जैसे विषयों को सामान्य बोलचाल के शब्दों में प्रस्तुत किया है। गीतात्मक शैली के कारण रचना को पढ़ते समय लय और भाव दोनों का अनुभव होता है।</p>
<p><em><strong>डॉ.भेरूसिंह चौहान &#8220;तरंग&#8221;</strong></em><br />
<em><strong>४ रोहिदास मार्ग,झाबुआ</strong></em><br />
<em><strong>जिला : झाबुआ (मध्य प्रदेश )</strong></em><br />
<em><strong>पिन : ४५७६६१</strong></em><br />
<em><strong>मो.नंबर : ७७७३८६९८५८</strong></em></p>
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			</item>
		<item>
		<title>रक्षाबंधन पर इस बार केवल 3 घंटे 51 मिनट का शुभ मुहूर्त, 28 अगस्त को सुबह 5:57 से 9:48 तक राखी बांधें</title>
		<link>https://swarajvani.com/raksha-bandhan-2026-only-3-hours-51-minutes-of/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Aug 2026 10:18:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[MADHAY PRADESH NEWS]]></category>
		<category><![CDATA[#rakhi]]></category>
		<category><![CDATA[Auspicious Muhurat]]></category>
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		<category><![CDATA[Raksha Bandhan]]></category>
		<category><![CDATA[Raksha Bandhan 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Raksha Bandhan Muhurat]]></category>
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					<description><![CDATA[रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए केवल 3 घंटे 51 मिनट का शुभ मुहूर्त 28 अगस्त को सुबह 5:57 से 9:48 बजे तक रहेगा राखी बांधने का श्रेष्ठ समय, भद्रा ... <a title="रक्षाबंधन पर इस बार केवल 3 घंटे 51 मिनट का शुभ मुहूर्त, 28 अगस्त को सुबह 5:57 से 9:48 तक राखी बांधें" class="read-more" href="https://swarajvani.com/raksha-bandhan-2026-only-3-hours-51-minutes-of/" aria-label="Read more about रक्षाबंधन पर इस बार केवल 3 घंटे 51 मिनट का शुभ मुहूर्त, 28 अगस्त को सुबह 5:57 से 9:48 तक राखी बांधें">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong style="font-family: inherit; font-size: 42px; font-style: inherit;">रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए केवल 3 घंटे 51 मिनट का शुभ मुहूर्त</strong></p>
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<h6 data-section-id="1l8j5os" data-start="70" data-end="179">28 अगस्त को सुबह 5:57 से 9:48 बजे तक रहेगा राखी बांधने का श्रेष्ठ समय, भद्रा के कारण शुभ मुहूर्त हुआ सीमित</h6>
<p data-start="181" data-end="536"><strong data-start="181" data-end="208">मुरैना (मनोज जैन नायक)।</strong> भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन इस वर्ष <strong data-start="275" data-end="297">28 अगस्त, शुक्रवार</strong> को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रक्षाबंधन पर बहनों द्वारा शुभ मुहूर्त में भाइयों की कलाई पर राखी बांधना विशेष फलदायी माना जाता है। इस वर्ष तिथि परिवर्तन और भद्रा के संयोग के कारण राखी बांधने के लिए शुभ समय अपेक्षाकृत कम रहेगा।</p>
<p data-start="538" data-end="789">वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य <strong data-start="559" data-end="587">डॉ. हुकुमचंद हिमांशु जैन</strong> के अनुसार इस बार रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए केवल <strong data-start="642" data-end="660">3 घंटे 51 मिनट</strong> का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। उन्होंने बताया कि बहनें 28 अगस्त को सुबह <strong data-start="728" data-end="752">5:57 बजे से 9:48 बजे</strong> के बीच भाइयों को राखी बांध सकती हैं।</p>
<h2 data-section-id="1ai39j3" data-start="791" data-end="827"><strong>28 अगस्त को मनाया जाएगा रक्षाबंधन</strong></h2>
<p data-start="829" data-end="1086">भारतीय संस्कृति में रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना करती हैं। भाई भी बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हुए उन्हें उपहार देते हैं।</p>
<p data-start="1088" data-end="1282">इस वर्ष रक्षाबंधन को लेकर शुभ मुहूर्त की अवधि को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार तिथि और भद्रा के संयोग के कारण राखी बांधने के लिए उपयुक्त समय सीमित रहेगा।</p>
<h2 data-section-id="1fyqhfo" data-start="1284" data-end="1322"><strong>27 अगस्त से शुरू होगी पूर्णिमा तिथि</strong></h2>
<p data-start="1324" data-end="1549">डॉ. जैन के अनुसार <strong data-start="1342" data-end="1394">पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त, गुरुवार को सुबह 9:09 बजे</strong> से प्रारंभ होगी और <strong data-start="1414" data-end="1453">28 अगस्त, शुक्रवार को सुबह 9:48 बजे</strong> समाप्त हो जाएगी। पूर्णिमा समाप्त होने के बाद भाद्रपद कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी।</p>
<p data-start="1551" data-end="1716">रक्षाबंधन पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इसलिए 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहने के कारण उसी दिन प्रातःकाल राखी बांधने का शुभ समय माना गया है।</p>
<h2 data-section-id="whu8ph" data-start="1718" data-end="1759"><strong>सुबह 5:57 से 9:48 तक रहेगा शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<p data-start="1761" data-end="1928">ज्योतिषाचार्य के मुताबिक 28 अगस्त को सूर्योदय <strong data-start="1807" data-end="1824">सुबह 5:57 बजे</strong> होगा और पूर्णिमा तिथि <strong data-start="1847" data-end="1864">सुबह 9:48 बजे</strong> समाप्त होगी। इस अवधि में रक्षाबंधन का पर्व मनाना श्रेष्ठ रहेगा।</p>
<p data-start="1930" data-end="2002">इस प्रकार राखी बांधने के लिए कुल <strong data-start="1963" data-end="1981">3 घंटे 51 मिनट</strong> का समय उपलब्ध रहेगा।</p>
<p data-start="2004" data-end="2111"><strong data-start="2004" data-end="2020">शुभ मुहूर्त:</strong><br data-start="2020" data-end="2023" /><strong data-start="2023" data-end="2045">28 अगस्त, शुक्रवार</strong><br data-start="2045" data-end="2048" /><strong data-start="2048" data-end="2080">सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक</strong><br data-start="2080" data-end="2083" /><strong data-start="2083" data-end="2111">कुल अवधि: 3 घंटे 51 मिनट</strong></p>
<h2 data-section-id="vk6sk2" data-start="2113" data-end="2148"><strong>भद्रा के कारण समय का विशेष महत्व</strong></h2>
<p data-start="2150" data-end="2324">डॉ. जैन ने बताया कि <strong data-start="2170" data-end="2224">27 अगस्त को सुबह 9:09 बजे से रात 9:21 बजे तक भद्रा</strong> रहेगी। धार्मिक मान्यताओं में भद्रा काल के दौरान रक्षाबंधन जैसे शुभ कार्य करने से बचने की परंपरा है।</p>
<p data-start="2326" data-end="2515">इसी कारण इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त की सुबह शुभ मुहूर्त में मनाना अधिक उचित माना जा रहा है। भद्रा की स्थिति और पूर्णिमा तिथि के समय को देखते हुए सुबह का मुहूर्त विशेष महत्व रखता है।</p>
<p data-start="2326" data-end="2515"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="size-medium wp-image-347137 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-18-at-3.14.01-AM-296x300.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026 08 18 at 3.14.01 AM" width="296" height="300" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-18-at-3.14.01-AM-296x300.jpeg 296w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-18-at-3.14.01-AM-1011x1024.jpeg 1011w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-18-at-3.14.01-AM-768x778.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-18-at-3.14.01-AM.jpeg 1019w" sizes="(max-width: 296px) 100vw, 296px" /></p>
<h2 data-section-id="qruaaq" data-start="2517" data-end="2552"><strong>सुबह जल्दी राखी बांधने की चुनौती</strong></h2>
<p data-start="2554" data-end="2755">आधुनिक जीवनशैली में भाई-बहनों के लिए सुबह जल्दी उठकर रक्षाबंधन की रस्म पूरी करना कुछ कठिन हो सकता है। नौकरी, व्यवसाय और अन्य जिम्मेदारियों के कारण कई परिवारों के लिए सुबह का समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है।</p>
<p data-start="2757" data-end="2930">इसके बावजूद धार्मिक मान्यताओं में शुभ तिथि और मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है। इसी वजह से ज्योतिषाचार्य ने निर्धारित समय के भीतर ही राखी बांधने और बंधवाने की सलाह दी है।</p>
<h2 data-section-id="10x3bv1" data-start="2932" data-end="2978"><strong>शुभ मुहूर्त में राखी बांधना शुभता का प्रतीक</strong></h2>
<p data-start="2980" data-end="3195">भारतीय परंपरा में राखी केवल भाई की कलाई पर बांधा जाने वाला धागा नहीं, बल्कि भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक मानी जाती है। बहन राखी बांधते समय भाई की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती है।</p>
<p data-start="3197" data-end="3361">धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य सकारात्मकता और शुभता का प्रतीक माने जाते हैं। इसलिए रक्षाबंधन पर भी शुभ समय का ध्यान रखने की परंपरा रही है।</p>
<h2 data-section-id="1wylkjc" data-start="3363" data-end="3408"><strong>बहनें भाई की सुख-समृद्धि की करें मंगलकामना</strong></h2>
<p data-start="3410" data-end="3622">डॉ. जैन ने कहा कि बहनों को निर्धारित शुभ मुहूर्त में भाइयों को राखी बांधकर उनके सुख, समृद्धि और दीर्घायु की मंगलकामना करनी चाहिए। वहीं भाइयों को भी बहनों के प्रति अपने स्नेह और जिम्मेदारी का संकल्प दोहराना चाहिए।</p>
<p data-start="3624" data-end="3812">रक्षाबंधन का वास्तविक उद्देश्य भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और आत्मीयता को मजबूत करना है। ऐसे में शुभ मुहूर्त के साथ परिवार के सभी सदस्यों को मिलकर पर्व की खुशियां साझा करनी चाहिए।</p>
<h2 data-section-id="1ia8u0h" data-start="3814" data-end="3845"><strong>इस बार सुबह का समय रहेगा खास</strong></h2>
<p data-start="3847" data-end="4091">इस वर्ष रक्षाबंधन पर शुभ मुहूर्त सीमित होने के कारण परिवारों को पहले से तैयारी करने की सलाह दी जा रही है। राखी, पूजा सामग्री और अन्य आवश्यक सामान पहले से तैयार रखने पर सुबह के शुभ समय में आसानी से पूजा और राखी बांधने की रस्म पूरी की जा सकती है।</p>
<p data-start="4093" data-end="4277"><strong data-start="4093" data-end="4184">28 अगस्त को सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक का समय रक्षाबंधन के लिए प्रमुख शुभ अवधि रहेगा।</strong> धार्मिक मान्यताओं का पालन करने वाले परिवार इस अवधि में राखी बांधने की रस्म पूरी कर सकते हैं।</p>
<p data-start="4279" data-end="4318" data-is-last-node="" data-is-only-node=""><strong data-start="4279" data-end="4318" data-is-last-node="">मुरैना से मनोज जैन नायक की रिपोर्ट।</strong></p>
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		<title>राखी कितने दिन पहनना है शुभ? जानें धार्मिक मान्यताएं और विसर्जन की सही विधि</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Aug 2025 16:59:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[Raksha Bandhan 2025: राखी कितने दिन तक बांधना है शुभ? जानें धार्मिक मान्यताएं और विसर्जन की सही विधि रक्षाबंधन का त्योहार केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि भाई-बहन के ... <a title="राखी कितने दिन पहनना है शुभ? जानें धार्मिक मान्यताएं और विसर्जन की सही विधि" class="read-more" href="https://swarajvani.com/for-how-many-days-is-it-auspicious-to-tie-rakhi-know-the-religious-beliefs-and-the-correct-method-of-immersion/" aria-label="Read more about राखी कितने दिन पहनना है शुभ? जानें धार्मिक मान्यताएं और विसर्जन की सही विधि">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h3 data-start="156" data-end="264"><strong data-start="160" data-end="264">Raksha Bandhan 2025: राखी कितने दिन तक बांधना है शुभ? जानें धार्मिक मान्यताएं और विसर्जन की सही विधि</strong></h3>
<p data-start="266" data-end="538">रक्षाबंधन का त्योहार केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। हर साल यह सवाल मन में जरूर आता है—<strong data-start="401" data-end="456">राखी कितने दिनों तक कलाई पर बांधे रखना शुभ होता है?</strong> आइए जानते हैं इस प्रश्न का उत्तर धर्म, परंपराओं और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार।</p>
<h4 data-start="540" data-end="601">🔸 राखी: सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि रक्षा का पवित्र सूत्र</h4>
<p data-start="603" data-end="779">सनातन धर्म में राखी को <strong data-start="626" data-end="643">&#8216;रक्षा सूत्र&#8217;</strong> कहा गया है। यह एक साधारण धागा नहीं, बल्कि बहन के स्नेह और भाई की रक्षा का प्रतीक है। इसे बांधने के तुरंत बाद उतारना शुभ नहीं माना जाता</p>
<h4 data-start="1847" data-end="1892"><img decoding="async" class=" wp-image-282242 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/08/ick-650_082221062720-300x185.webp" alt="ick 650 082221062720" width="501" height="309" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/08/ick-650_082221062720-300x185.webp 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/08/ick-650_082221062720.webp 650w" sizes="(max-width: 501px) 100vw, 501px" /></h4>
<p data-start="603" data-end="779">।🔸 कम से कम 15 दिन तक बांधे रखना माना जाता है शुभ</p>
<p data-start="837" data-end="1047">मान्यताओं के अनुसार, <strong data-start="858" data-end="939">राखी को पूर्णिमा के दिन बांधने के बाद कम से कम 15 दिनों तक कलाई पर रखना चाहिए</strong>। इसे &#8220;पंद्रह दिन का पर्व&#8221; भी कहा जाता है। इस अवधि में राखी एक अदृश्य सुरक्षा कवच बनकर भाई की रक्षा करती है।</p>
<h4 data-start="1049" data-end="1096">🔸 जन्माष्टमी तक राखी रखना है विशेष फलदायी</h4>
<p data-start="1098" data-end="1336">कुछ परंपराओं में राखी को <strong data-start="1123" data-end="1163">जन्माष्टमी तक बांधकर रखना अत्यंत शुभ</strong> माना गया है। साल 2025 में रक्षाबंधन 9 अगस्त को और जन्माष्टमी 15 अगस्त को है। ऐसे में अगर भाई राखी को इस दिन तक पहनकर रखते हैं, तो यह धार्मिक दृष्टि से विशेष फलदायी होता है।</p>
<h4 data-start="1338" data-end="1389">🔸 दशहरे तक राखी पहनने की परंपरा भी है प्रचलित</h4>
<p data-start="1391" data-end="1578">भारत के कुछ क्षेत्रों में राखी को <strong data-start="1425" data-end="1453">दशहरे तक पहनने की परंपरा</strong> है। दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, और इस दिन तक राखी बांधकर रखने से भाई के जीवन में नकारात्मकता से बचाव होता है।</p>
<h4 data-start="1580" data-end="1631">🔸 16वें दिन करें राखी का सम्मानपूर्वक विसर्जन</h4>
<p data-start="1633" data-end="1845">ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, <strong data-start="1660" data-end="1774">राखी को </strong></p>
<p data-start="1633" data-end="1845"><strong data-start="1660" data-end="1774">16 दिन बाद पवित्र जल में प्रवाहित करना या किसी धार्मिक वृक्ष (जैसे पीपल या तुलसी) के नीचे रख देना उचित</strong> माना गया है। यह प्रक्रिया नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने का प्रतीक है।</p>
<h4 data-start="1847" data-end="1892">🔸 राखी को न फेंके, करें आदरपूर्वक विदाई</h4>
<p data-start="1894" data-end="2089">राखी कोई साधारण वस्तु नहीं है। इसे कभी भी कूड़ेदान में फेंकना अशुभ माना गया है। अगर जल स्रोत उपलब्ध नहीं है, तो राखी को तुलसी के पौधे के पास रखकर प्रार्थना करें और सम्मानपूर्वक उसका विसर्जन करें।</p>
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