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	<title>NDA &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<title>NDA &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>21 राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू करेगी BJP-NDA सरकारें, अमित शाह का बड़ा बयान</title>
		<link>https://swarajvani.com/amit-shah-on-ucc-bjp-nda-govern-in-21/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Sep 2026 07:46:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[National]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160; 21 राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू करेगी BJP-NDA सरकारें, अमित शाह का बड़ा बयान नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को लेकर ... <a title="21 राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू करेगी BJP-NDA सरकारें, अमित शाह का बड़ा बयान" class="read-more" href="https://swarajvani.com/amit-shah-on-ucc-bjp-nda-govern-in-21/" aria-label="Read more about 21 राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू करेगी BJP-NDA सरकारें, अमित शाह का बड़ा बयान">Read more</a>]]></description>
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<h1><strong>21 राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू करेगी BJP-NDA सरकारें, अमित शाह का बड़ा बयान</strong></h1>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> केंद्रीय गृह मंत्री <strong>अमित शाह</strong> ने समान नागरिक संहिता यानी <strong>Uniform Civil Code (UCC)</strong> को लेकर बड़ा बयान दिया है। शाह ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकारें 2029 से पहले सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करेंगी। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में UCC लागू हो चुका है और उन्हें विश्वास है कि 2029 से पहले भाजपा-एनडीए शासित सभी राज्यों में इसे लागू कर दिया जाएगा।</p>
<h2><strong>21 राज्यों में लागू करने का दावा</strong></h2>
<p>मीडिया से चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा कि समान नागरिक संहिता को लेकर सरकार की नीति स्पष्ट है। उन्होंने दावा किया कि कई राज्यों में इसे लागू करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और बाकी भाजपा-एनडीए शासित राज्यों में भी इसे 2029 से पहले लागू किया जाएगा।</p>
<p>UCC का उद्देश्य विभिन्न समुदायों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और परिवार से जुड़े कुछ व्यक्तिगत कानूनों में समान कानूनी प्रावधान लागू करना है। इस मुद्दे को लेकर देश में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस चलती रही है।</p>
<h2><strong>तीन तलाक का भी किया जिक्र</strong></h2>
<p>गृह मंत्री ने <strong>तीन तलाक</strong> के मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तीन तलाक को समाप्त किया गया है और इससे मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार हासिल हुए हैं।</p>
<p>शाह ने इसे सरकार के प्रमुख कानूनी सुधारों में शामिल बताते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों और समानता को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं।</p>
<h2><strong>भारतीय न्याय संहिता से न्याय प्रणाली मजबूत करने का दावा</strong></h2>
<p>अमित शाह ने आपराधिक न्याय प्रणाली में किए गए बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि <strong>भारतीय न्याय संहिता (BNS)</strong> के माध्यम से देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था को मजबूत किया गया है।</p>
<p>उन्होंने दावा किया कि कई राज्यों में एक ही वर्ष में दोषसिद्धि दर के आंकड़ों में करीब 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। शाह के मुताबिक, सरकार का लक्ष्य न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाना है।</p>
<h2><strong>तीन साल में न्याय सुनिश्चित करने की बात</strong></h2>
<p>गृह मंत्री ने कहा कि सरकार ऐसी व्यवस्था तैयार कर रही है, जिसके तहत तीन साल के भीतर न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने और आपराधिक मामलों में प्रभावी कार्रवाई पर जोर दिया।</p>
<p>शाह के अनुसार, नए कानूनी प्रावधानों का उद्देश्य देश की न्याय प्रणाली को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाना है।</p>
<h2><strong>अनुच्छेद 370 और 35A का किया उल्लेख</strong></h2>
<p>राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अमित शाह ने <strong>अनुच्छेद 370 और 35A</strong> का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों को हटाने का फैसला लिया गया और जम्मू-कश्मीर को देश की मुख्यधारा के साथ पूरी तरह जोड़ने की दिशा में कदम उठाया गया।</p>
<p>शाह ने इसे सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल बताया।</p>
<h2><strong>नक्सलवाद पर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं</strong></h2>
<p>गृह मंत्री ने देश में नक्सलवाद के खिलाफ हुई कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि पांच दशकों से चले आ रहे नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में सरकार ने बड़ी सफलता हासिल की है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ विकास और प्रशासनिक पहुंच बढ़ाने से प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव आया है।</p>
<h2><strong>पूर्वोत्तर में शांति समझौतों का जिक्र</strong></h2>
<p>अमित शाह ने पूर्वोत्तर भारत की स्थिति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए सरकार ने 14 से अधिक शांति समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।</p>
<p>उनके मुताबिक, इन समझौतों का उद्देश्य लंबे समय से चले आ रहे विवादों और उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित करना है।</p>
<h2><strong>आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति</strong></h2>
<p>आतंकवाद के मुद्दे पर शाह ने कहा कि सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ <strong>जीरो टॉलरेंस</strong> की नीति अपनाई है। उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और <strong>ऑपरेशन सिंदूर</strong> का उल्लेख करते हुए कहा कि इन कार्रवाइयों के जरिए आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति को स्पष्ट किया गया है।</p>
<p>अमित शाह के बयान के बाद UCC को लेकर राजनीतिक चर्चा एक बार फिर तेज होने की संभावना है। खास तौर पर भाजपा-एनडीए शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले समान नागरिक संहिता लागू करने के दावे को आगामी राजनीतिक और कानूनी कदमों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
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		<title>मध्य प्रदेश में अपना दल (एस) की बड़ी तैयारी, NDA के साथ चुनावी मैदान में बढ़ाएगा ताकत</title>
		<link>https://swarajvani.com/apna-dal-s-madhya-pradesh-election-preparation/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 25 Aug 2026 16:15:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[Anupriya Patel]]></category>
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		<category><![CDATA[मध्य प्रदेश चुनाव]]></category>
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					<description><![CDATA[अपना दल (एस) ने मध्य प्रदेश में आगामी चुनावों को लेकर संगठनात्मक तैयारी तेज करने के संकेत दिए हैं। डॉ. अतुल मलिकराम ने बताया कि पार्टी NDA की सहयोगी रहते ... <a title="मध्य प्रदेश में अपना दल (एस) की बड़ी तैयारी, NDA के साथ चुनावी मैदान में बढ़ाएगा ताकत" class="read-more" href="https://swarajvani.com/apna-dal-s-madhya-pradesh-election-preparation/" aria-label="Read more about मध्य प्रदेश में अपना दल (एस) की बड़ी तैयारी, NDA के साथ चुनावी मैदान में बढ़ाएगा ताकत">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अपना दल (एस) ने मध्य प्रदेश में आगामी चुनावों को लेकर संगठनात्मक तैयारी तेज करने के संकेत दिए हैं। डॉ. अतुल मलिकराम ने बताया कि पार्टी NDA की सहयोगी रहते हुए मालवा-निमाड़, बुंदेलखंड, महाकौशल, विंध्य, चंबल और ग्वालियर तक संगठन मजबूत करेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>भोपाल, 25 अगस्त 2026।</strong> <strong>अपना दल (एस) मध्य प्रदेश</strong> में संगठन विस्तार के साथ आगामी चुनावों को लेकर अपनी राजनीतिक तैयारियां तेज करने के संकेत दे रहा है। पार्टी की ओर से प्रदेश संगठन और विभिन्न मंचों में नई जिम्मेदारियों की घोषणा के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजनीतिक रणनीतिकार <strong>डॉ. अतुल मलिकराम</strong> ने कहा कि पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए की सहयोगी है और वर्ष 2014 से इस गठबंधन का हिस्सा रहते हुए आगे भी सहयोग की भूमिका को मजबूती से निभाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">डॉ. अतुल मलिकराम ने कहा कि <strong>&#8220;अपना दल (एस) हमारी राष्ट्रीय अध्यक्ष केंद्रीय मंत्री दीदी अनुप्रिया पटेल जी के नेतृत्व में एक दशक से अधिक समय से एनडीए का हिस्सा है। एक सहयोगी दल के तौर पर गठबंधन की मजबूती हमारी प्राथमिकता है, लेकिन साथ ही हम आगामी चुनावों के लिए अपनी स्वतंत्र संगठनात्मक और चुनावी तैयारी भी पूरी मजबूती से करेंगे।&#8221;</strong></p>
<h2>अपना दल (एस) मध्य प्रदेश में संगठन विस्तार पर जोर</h2>
<p class="isSelectedEnd">डॉ. अतुल मलिकराम ने कहा कि मध्य प्रदेश में पार्टी का उद्देश्य केवल संगठन का विस्तार करना नहीं, बल्कि उसे जमीनी स्तर तक सक्रिय बनाना है। <strong>राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी आर बी सिंह पटेल</strong> के मार्गदर्शन में प्रदेश संगठन में नई नियुक्तियों के साथ किसान, व्यापार, विधि, चिकित्सा, शिक्षक, आईटी, बौद्धिक तथा अनुसूचित जाति-जनजाति जैसे विभिन्न मंचों को जिम्मेदारी दिया जाना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पार्टी का मानना है कि किसी भी राजनीतिक संगठन की वास्तविक मजबूती उसके जमीनी कार्यकर्ताओं और स्थानीय स्तर पर सक्रिय संगठन से होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए <strong>अपना दल (एस) मध्य प्रदेश</strong> में अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों के बीच अपनी सक्रियता बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।</p>
<h2>आगामी चुनावों के लिए तेज होंगी तैयारियां</h2>
<p class="isSelectedEnd">डॉ. मलिकराम के अनुसार पार्टी आने वाले समय में हर चुनाव को गंभीरता से लेते हुए अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी करेगी और सभी चुनावों में अपने प्रतिनिधियों को मैदान में उतारने की दिशा में काम करेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि चुनावी राजनीति में संगठन की मजबूती, स्थानीय मुद्दों की समझ और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की सक्रियता महत्वपूर्ण होती है। इसी रणनीति के तहत पार्टी प्रदेश में संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और ज्यादा से ज्यादा कार्यकर्ताओं को सक्रिय जिम्मेदारियां सौंपने पर ध्यान केंद्रित करेगी।</p>
<h2>NDA के साथ गठबंधन की प्रतिबद्धता रहेगी कायम</h2>
<p class="isSelectedEnd">डॉ. अतुल मलिकराम ने स्पष्ट किया कि पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए की सहयोगी के रूप में अपनी भूमिका को मजबूती से निभाती रहेगी। पार्टी वर्ष 2014 से गठबंधन का हिस्सा है और आगे भी गठबंधन की मजबूती उसकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके साथ ही पार्टी मध्य प्रदेश में अपनी अलग राजनीतिक पहचान और संगठनात्मक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में भी काम करेगी। पार्टी का प्रयास होगा कि गठबंधन की प्रतिबद्धताओं के साथ प्रदेश में अपने जनाधार का विस्तार किया जाए।</p>
<h2>मालवा-निमाड़ से विंध्य और चंबल तक विस्तार की तैयारी</h2>
<p class="isSelectedEnd">डॉ. मलिकराम ने कहा कि मध्य प्रदेश सामाजिक, भौगोलिक और राजनीतिक रूप से विविध राज्य है। ऐसे में पार्टी का प्रयास <strong>मालवा-निमाड़ से लेकर बुंदेलखंड, महाकौशल, विंध्य, चंबल और ग्वालियर अंचल</strong> तक संगठन को विस्तार देने का रहेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियां अलग हैं। ऐसे में संगठन स्थानीय मुद्दों और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को समझते हुए अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाएगा।</p>
<h2>किसान, युवा, महिला और वंचित वर्गों के मुद्दों पर फोकस</h2>
<p class="isSelectedEnd">पार्टी किसानों, युवाओं, महिलाओं, व्यापारियों और वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दों को अपनी राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र में रखेगी। अलग-अलग मंचों को जिम्मेदारी देने का उद्देश्य भी संबंधित वर्गों से जुड़े मुद्दों को संगठनात्मक स्तर पर प्रमुखता से उठाना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">किसान मंच के जरिए कृषि और किसानों से जुड़े विषय, व्यापार मंच के माध्यम से व्यापारियों की समस्याएं तथा शिक्षक, विधि, चिकित्सा, आईटी और बौद्धिक मंचों के जरिए संबंधित क्षेत्रों के मुद्दों पर पार्टी अपनी सक्रियता बढ़ाने की तैयारी में है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग से जुड़े विषयों को भी संगठन के विस्तार और राजनीतिक गतिविधियों में प्राथमिकता दिए जाने की बात कही गई है।</p>
<h2>बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने की रणनीति</h2>
<p class="isSelectedEnd"><strong>अपना दल (एस) मध्य प्रदेश</strong> में चुनावी तैयारियों के साथ संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की दिशा में काम करेगा। पार्टी का मानना है कि चुनाव में मजबूत उपस्थिति के लिए केवल प्रदेश या जिला स्तर का संगठन पर्याप्त नहीं है, बल्कि बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता भी जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी कारण आगामी समय में संगठन विस्तार, नई जिम्मेदारियां, स्थानीय मुद्दों की पहचान और कार्यकर्ताओं की सक्रियता पार्टी की रणनीति का प्रमुख हिस्सा रहने वाली है।</p>
<h2>राजनीतिक पहचान और जनाधार बढ़ाने का लक्ष्य</h2>
<p class="isSelectedEnd">डॉ. अतुल मलिकराम के मुताबिक <strong>अपना दल (एस)</strong> गठबंधन की प्रतिबद्धता के साथ-साथ अपनी राजनीतिक पहचान और संगठनात्मक क्षमता को भी लगातार मजबूत करेगा। पार्टी का लक्ष्य सहयोगी की भूमिका को प्रभावी ढंग से निभाते हुए मध्य प्रदेश में अपने जनाधार और संगठन का विस्तार करना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पार्टी की हालिया संगठनात्मक गतिविधियों और नई जिम्मेदारियों की घोषणा को भी इसी राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी अब प्रदेश के विभिन्न अंचलों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने और संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने की दिशा में काम करेगी।</p>
<h3>संबंधित खबरें</h3>
<p>अपना दल (एस), मध्य प्रदेश की राजनीति, एनडीए गठबंधन और आगामी चुनावों से जुड़ी अन्य खबरें <strong>दैनिक स्वराज वाणी</strong> पर पढ़ें।</p>
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		<item>
		<title>संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने, राहुल-प्रियंका पर सियासी वार, झारखंड छात्रों के मुद्दे पर बढ़ा राजनीतिक घमासान</title>
		<link>https://swarajvani.com/parliament-campus-sees-protests-by-ruling-party-and/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 07:30:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[NDA]]></category>
		<category><![CDATA[Opposition]]></category>
		<category><![CDATA[Parliament Monsoon Session 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Parliament Protest]]></category>
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					<description><![CDATA[संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष का प्रदर्शन 11 अगस्त को संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों की ओर से अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया गया। ... <a title="संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने, राहुल-प्रियंका पर सियासी वार, झारखंड छात्रों के मुद्दे पर बढ़ा राजनीतिक घमासान" class="read-more" href="https://swarajvani.com/parliament-campus-sees-protests-by-ruling-party-and/" aria-label="Read more about संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने, राहुल-प्रियंका पर सियासी वार, झारखंड छात्रों के मुद्दे पर बढ़ा राजनीतिक घमासान">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div class="h-[var(--last-known-height,var(--estimated-turn-height,50vh))] min-h-14" data-turn-id-container="9e87b928-18da-4f03-b0fd-4c1966a3cb03" data-is-intersecting="false"></div>
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<h1 data-section-id="83by8r" data-start="0" data-end="50"><strong>संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष का प्रदर्शन</strong></h1>
<p data-start="52" data-end="339">11 अगस्त को संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों की ओर से अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया गया। सुबह एनडीए सांसदों ने परिसर में मार्च निकालकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा, जबकि विपक्षी सांसद पोस्टर और अन्य प्रतीकात्मक सामग्री लेकर सरकार के खिलाफ विरोध करते नजर आए।</p>
<h2 data-section-id="ob78ra" data-start="341" data-end="385"><strong>NDA सांसदों ने राहुल गांधी पर साधा निशाना</strong></h2>
<p data-start="387" data-end="564">संसद का सत्र शुरू होने से पहले एनडीए सांसदों ने परिसर में मार्च निकाला। सांसदों ने आरोप लगाया कि विपक्ष महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय सदन में लगातार हंगामा कर रहा है।</p>
<p data-start="566" data-end="753">एनडीए सांसदों के प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी को लेकर नारे और सवाल उठाए गए। सत्ता पक्ष का कहना है कि संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए विपक्ष को चर्चा में सहयोग करना चाहिए।</p>
<h2 data-section-id="1jla54s" data-start="755" data-end="805"><strong>विपक्षी सांसद पोस्टर और दान पेटियां लेकर पहुंचे</strong></h2>
<p data-start="807" data-end="1020">इसके कुछ देर बाद विपक्षी सांसद भी संसद परिसर में प्रदर्शन करते नजर आए। उनके हाथों में सरकार के खिलाफ संदेश लिखे पोस्टर थे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कार्रवाई और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।</p>
<p data-start="1022" data-end="1213">समाजवादी पार्टी के सांसद अक्षय यादव समेत कुछ विपक्षी सांसद दान पेटियां और गन्ने के पेड़ लेकर भी संसद परिसर पहुंचे। इन प्रतीकों के जरिए विपक्ष ने अलग-अलग मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की।</p>
<h2 data-section-id="1r0dujg" data-start="1215" data-end="1261"><strong>प्रियंका गांधी से बीजेपी सांसद ने पूछा सवाल</strong></h2>
<p data-start="1263" data-end="1469">प्रदर्शन के बीच बीजेपी सांसद मुकेश दलाल ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी से झारखंड के छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सवाल किया। उन्होंने पूछा कि प्रियंका गांधी झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन में क्यों नहीं गईं।</p>
<p data-start="1471" data-end="1619">यह सवाल ऐसे समय में सामने आया जब झारखंड में छात्रों से जुड़े प्रदर्शन और जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा से संबंधित मुद्दे राजनीतिक चर्चा में बने हुए हैं।</p>
<h2 data-section-id="1oos6gr" data-start="1621" data-end="1651"><strong>प्रियंका गांधी ने दिया जवाब</strong></h2>
<p data-start="1653" data-end="1862">मुकेश दलाल के सवाल से पहले प्रियंका गांधी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी झारखंड के छात्रों से मुलाकात कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे से जुड़ी हुई है।</p>
<p data-start="1864" data-end="2075">सत्ता पक्ष के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि उन्होंने पहली बार देखा है कि सत्तारूढ़ दल के सांसद स्वयं प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से संबंधित मुद्दों पर बयान देने की मांग भी की।</p>
<h2 data-section-id="16qjp4l" data-start="2077" data-end="2115"><strong>सुरक्षा कर्मियों ने बनाई ह्यूमन चेन</strong></h2>
<p data-start="2117" data-end="2307">संसद परिसर में दोनों पक्षों के प्रदर्शन के दौरान स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने ह्यूमन चेन बनाई। सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोनों पक्षों के सांसदों ने अपने-अपने मुद्दे उठाए।</p>
<p data-start="2309" data-end="2434">प्रदर्शन के कारण संसद परिसर में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा।</p>
<h2 data-section-id="1ue1obu" data-start="2436" data-end="2467"><strong>सदन की कार्यवाही भी प्रभावित</strong></h2>
<p data-start="2469" data-end="2649">संसद के अंदर भी विपक्ष के विरोध का असर देखने को मिला। पिछले कुछ दिनों से जारी विरोध के कारण प्रश्नकाल पूरी तरह नहीं चल पा रहा है और सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ रही है।</p>
<p data-start="2651" data-end="2831">11 अगस्त को लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई। सत्ता पक्ष लगातार सदन चलाने की मांग कर रहा है, जबकि विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर विरोध कर रहा है।</p>
<h2 data-section-id="ntr5gb" data-start="2833" data-end="2874"><strong>NDA की बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा</strong></h2>
<p data-start="2876" data-end="3088">प्रदर्शन से पहले एनडीए सांसदों की साप्ताहिक बैठक भी हुई। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू सहित एनडीए के सांसद मौजूद रहे।</p>
<p data-start="3090" data-end="3261">बैठक में संसद के मौजूदा सत्र के अंतिम दिनों की रणनीति पर चर्चा की गई। सांसदों से एकजुट रहने और महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार का सहयोग करने की बात कही गई।</p>
<h2 data-section-id="ed95mr" data-start="3263" data-end="3295"><strong>राजनीतिक टकराव बढ़ने के संकेत</strong></h2>
<p data-start="3297" data-end="3545">संसद परिसर में एक ही दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के अलग-अलग प्रदर्शन से राजनीतिक टकराव और तेज होता दिखाई दिया। एक ओर एनडीए सांसद राहुल गांधी और विपक्ष के रवैये पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं विपक्ष छात्रों और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है।</p>
<p data-start="3547" data-end="3676" data-is-last-node="" data-is-only-node="">अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच गतिरोध कम होता है या संसद की कार्यवाही पर इसका असर जारी रहता है।</p>
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		<title>टीएमसी में फूट तेज, महुआ मोइत्रा ने Yusuf Pathan पर बागी गुट से जुड़ने का आरोप लगाया</title>
		<link>https://swarajvani.com/tmc-internal-rift-deepen-mahua-moitra-targets-yusuf/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 10:05:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[West Bengal Election]]></category>
		<category><![CDATA[Bengal Politics]]></category>
		<category><![CDATA[Lok Sabha]]></category>
		<category><![CDATA[Mahua Moitra]]></category>
		<category><![CDATA[Mamata Banerjee]]></category>
		<category><![CDATA[NDA]]></category>
		<category><![CDATA[Parliament]]></category>
		<category><![CDATA[Political Crisis]]></category>
		<category><![CDATA[TMC]]></category>
		<category><![CDATA[Yusuf Pathan]]></category>
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					<description><![CDATA[टीएमसी में अंदरूनी फूट तेज, महुआ मोइत्रा ने Yusuf Pathan पर लगाए गंभीर आरोप सांसदों के अलग गुट बनने से बढ़ा सियासी संकट तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी कलह अब ... <a title="टीएमसी में फूट तेज, महुआ मोइत्रा ने Yusuf Pathan पर बागी गुट से जुड़ने का आरोप लगाया" class="read-more" href="https://swarajvani.com/tmc-internal-rift-deepen-mahua-moitra-targets-yusuf/" aria-label="Read more about टीएमसी में फूट तेज, महुआ मोइत्रा ने Yusuf Pathan पर बागी गुट से जुड़ने का आरोप लगाया">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1 data-section-id="12rvmji" data-start="211" data-end="287"><strong>टीएमसी में अंदरूनी फूट तेज, महुआ मोइत्रा ने Yusuf Pathan पर लगाए गंभीर आरोप</strong></h1>
<h3 data-section-id="1359abs" data-start="289" data-end="336">सांसदों के अलग गुट बनने से बढ़ा सियासी संकट</h3>
<p>तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आने लगी है। हाल ही में पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों के एक अलग गुट बनाने की खबर ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस घटनाक्रम ने न केवल पार्टी नेतृत्व को असहज स्थिति में ला दिया है, बल्कि विपक्षी दलों के बीच भी नई बहस और रणनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया है। पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति और गुटबाजी ने संगठनात्मक एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p>इसी बीच, टीएमसी की वरिष्ठ सांसद महुआ मोइत्रा ने बहरामपुर से सांसद और पूर्व क्रिकेटर Yusuf Pathan पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पठान कथित तौर पर बागी गुट के संपर्क में हैं और उन सांसदों का समर्थन कर रहे हैं, जिन्होंने पार्टी से अलग रुख अपनाया है। मोइत्रा के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है। पार्टी के भीतर बढ़ते विवाद और आरोप-प्रत्यारोप ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि टीएमसी नेतृत्व इस अंदरूनी संकट को कैसे संभालता है।</p>
<h2 data-section-id="1icpgmt" data-start="869" data-end="911"><strong>महुआ मोइत्रा का Yusuf Pathan पर तीखा हमला</strong></h2>
<h3 data-section-id="dfff07" data-start="913" data-end="950">सोशल मीडिया पर खुलकर जताई नाराजगी</h3>
<p data-start="951" data-end="1129">महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यूसुफ पठान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पठान उन सांसदों के साथ जुड़े हैं जिन्होंने पार्टी से अलग होकर एक नया समूह बनाया है।</p>
<p data-start="1131" data-end="1294">मोइत्रा ने यह भी कहा कि बागी सांसदों के समूह में शामिल लोग NDA को समर्थन देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है।</p>
<h2 data-section-id="18ki6jp" data-start="1301" data-end="1337"><strong>बागी सांसदों के दावे से बढ़ी हलचल</strong></h2>
<h3 data-section-id="qmtxh0" data-start="1339" data-end="1372">20 सांसदों के अलग गुट का दावा</h3>
<p data-start="1373" data-end="1585">टीएमसी के 20 सांसदों के एक अलग गुट बनाने की खबर ने पहले ही पार्टी में हलचल पैदा कर दी थी। इस गुट की ओर से दावा किया गया कि वे संसद में एक स्वतंत्र समूह के रूप में काम करेंगे और NDA के साथ सहयोगात्मक रुख अपनाएंगे।</p>
<p data-start="1587" data-end="1787">सूत्रों के अनुसार, इस समूह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। हालांकि, इन सांसदों ने अभी तक औपचारिक रूप से पार्टी नहीं छोड़ी है, जिससे राजनीतिक स्थिति और जटिल हो गई है।</p>
<h2 data-section-id="16m8m6k" data-start="1794" data-end="1833"><strong>Yusuf Pathan का नाम विवाद में कैसे आया</strong></h2>
<h3 data-section-id="7ap60x" data-start="1835" data-end="1875">काकोली घोष के बयान से शुरू हुआ विवाद</h3>
<p data-start="1876" data-end="2041">इस पूरे विवाद में नया मोड़ तब आया जब सांसद काकोली घोष ने दावा किया कि यूसुफ पठान भी इस बागी समूह का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि कुल 20 सांसदों में पठान भी शामिल हैं।</p>
<p data-start="2043" data-end="2190">इस दावे के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई और मीडिया में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या पठान वास्तव में किसी अलग राजनीतिक समूह का हिस्सा हैं।</p>
<h2 data-section-id="ievjpp" data-start="2197" data-end="2228"><strong>दिल्ली दौरे को लेकर उठे सवाल</strong></h2>
<h3 data-section-id="1nv6b09" data-start="2230" data-end="2263">अमित शाह से मुलाकात की अटकलें</h3>
<p data-start="2264" data-end="2419">महुआ मोइत्रा ने यूसुफ पठान के दिल्ली दौरे को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बुलाए जाने के बाद पठान दिल्ली जा रहे हैं।</p>
<p data-start="2421" data-end="2594">मोइत्रा ने इस पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जिन लोगों को जनता ने चुना है, उन्हें अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीर रहना चाहिए और किसी भी तरह की राजनीतिक हड़बड़ी से बचना चाहिए।</p>
<h2 data-section-id="31xttk" data-start="2601" data-end="2629"><strong>महुआ मोइत्रा का कड़ा बयान</strong></h2>
<h3 data-section-id="977fku" data-start="2631" data-end="2665">“थोड़ी शर्म करो और साहस दिखाओ”</h3>
<p data-start="2666" data-end="2835">मोइत्रा ने अपने बयान में लिखा कि जनता ने यूसुफ पठान को भारी बहुमत से चुनकर संसद भेजा है। उन्होंने कहा कि ऐसे में उनका दायित्व है कि वे जनता के विश्वास के साथ न्याय करें।</p>
<p data-start="2837" data-end="2943">उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि “थोड़ी शर्म करो और थोड़ा साहस दिखाओ”, जो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो गया।</p>
<h2 data-section-id="11m2rho" data-start="2950" data-end="2975"><strong>TMC के भीतर बढ़ता संकट</strong></h2>
<h3 data-section-id="12r168z" data-start="2977" data-end="3010">पार्टी में गहरी दरार के संकेत</h3>
<p data-start="3011" data-end="3177">यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब टीएमसी पहले से ही आंतरिक संकट से जूझ रही है। 1998 में गठन के बाद से पार्टी को सबसे बड़े संगठनात्मक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p data-start="3179" data-end="3283">पार्टी के भीतर गुटबाजी और असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं, जिससे नेतृत्व पर दबाव बढ़ता जा रहा है।</p>
<h2 data-section-id="13cd3za" data-start="3290" data-end="3315"><strong>बागी सांसदों की रणनीति</strong></h2>
<h3 data-section-id="1e2m5f0" data-start="3317" data-end="3354">NDA समर्थन पर नया राजनीतिक समीकरण</h3>
<p data-start="3355" data-end="3504">सूत्रों के अनुसार, बागी सांसदों ने अभी पार्टी छोड़ने की घोषणा नहीं की है। वे एक अलग संसदीय समूह बनाकर NDA को समर्थन देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।</p>
<p data-start="3506" data-end="3615">इस कदम को दलबदल विरोधी कानून से बचने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, ताकि उनकी सदस्यता पर कोई खतरा न आए।</p>
<h2 data-section-id="lknmfe" data-start="3622" data-end="3661"><strong>यूसुफ पठान का राजनीतिक सफर और स्थिति</strong></h2>
<h3 data-section-id="186bj26" data-start="3663" data-end="3700">कांग्रेस को हराकर बनी थी बड़ी जीत</h3>
<p data-start="3701" data-end="3916">यूसुफ पठान ने 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी को हराकर बहरामपुर सीट से जीत दर्ज की थी। यह जीत टीएमसी के लिए ऐतिहासिक मानी गई थी क्योंकि पार्टी लंबे समय से इस सीट पर संघर्ष कर रही थी।</p>
<p data-start="3918" data-end="4004">हालांकि अब उनके नाम को लेकर उठे विवाद ने उनकी राजनीतिक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<h2 data-section-id="i0ypar" data-start="4011" data-end="4046"><strong>सौरव गांगुली और इस्तीफे की चर्चा</strong></h2>
<h3 data-section-id="1npq255" data-start="4048" data-end="4073">पहले भी उठे थे अटकलें</h3>
<p data-start="4074" data-end="4276">इससे पहले एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि टीएमसी ने पूर्व क्रिकेटर सौरव गांगुली की मदद से यूसुफ पठान को इस्तीफा देने के लिए मनाने की कोशिश की थी, ताकि ममता बनर्जी के लिए उपचुनाव का रास्ता साफ हो सके।</p>
<p data-start="4278" data-end="4380">हालांकि, सौरव गांगुली ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया था और यूसुफ पठान ने भी इसे अफवाह बताया था।</p>
<h2 data-section-id="nri9ry" data-start="4387" data-end="4421"><strong>विधायकों में भी असंतोष की खबरें</strong></h2>
<h3 data-section-id="1tqhnir" data-start="4423" data-end="4457">टीएमसी में अंदरूनी असहमति बढ़ी</h3>
<p data-start="4458" data-end="4620">सिर्फ सांसद ही नहीं, बल्कि विधायकों के स्तर पर भी असंतोष की खबरें सामने आई हैं। कुछ निष्कासित विधायकों ने दावा किया है कि उन्हें 60 विधायकों का समर्थन प्राप्त है।</p>
<p data-start="4622" data-end="4714">यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह टीएमसी के संगठनात्मक ढांचे के लिए बड़ा झटका हो सकता है।</p>
<h2 data-section-id="8o42ra" data-start="4721" data-end="4752"><strong>दलबदल विरोधी कानून की भूमिका</strong></h2>
<h3 data-section-id="yneivq" data-start="4754" data-end="4784">कानूनी पेच में फंसी स्थिति</h3>
<p data-start="4785" data-end="4988">बागी सांसदों द्वारा अलग समूह बनाने का कदम दलबदल विरोधी कानून के दायरे में जांच का विषय बन सकता है। हालांकि, वे औपचारिक रूप से पार्टी छोड़ने से बच रहे हैं, जिससे उनकी स्थिति कानूनी रूप से जटिल बनी हुई है।</p>
<p data-start="4990" data-end="5064">विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राजनीतिक सुरक्षा की रणनीति भी हो सकता है।</p>
<h2 data-section-id="1jlfzbf" data-start="5071" data-end="5103"><strong>ममता बनर्जी के नेतृत्व पर असर</strong></h2>
<h3 data-section-id="b3t3i4" data-start="5105" data-end="5134">पार्टी की एकजुटता पर सवाल</h3>
<p data-start="5135" data-end="5328">इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नेतृत्व क्षमता पर पड़ रहा है। विपक्षी दल इस स्थिति को पार्टी में कमजोरी के संकेत के रूप में देख रहे हैं।</p>
<p data-start="5330" data-end="5420">हालांकि पार्टी के भीतर अभी भी एक बड़ा वर्ग ममता बनर्जी के समर्थन में खड़ा बताया जा रहा है।</p>
<h2 data-section-id="1j8d2pj" data-start="5427" data-end="5438"><strong>निष्कर्ष</strong></h2>
<p>टीएमसी के भीतर चल रहा मौजूदा विवाद अब केवल सामान्य आंतरिक असहमति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पार्टी के लिए एक गंभीर संगठनात्मक संकट का संकेत बनता जा रहा है। महुआ मोइत्रा द्वारा लगाए गए आरोपों और यूसुफ पठान के नाम को लेकर उठे राजनीतिक विवाद ने स्थिति को और अधिक जटिल और संवेदनशील बना दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर मौजूद गुटबाजी और असंतोष को भी उजागर कर दिया है, जिससे नेतृत्व के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह स्थिति समय रहते नियंत्रित नहीं की गई तो इसका असर न केवल टीएमसी की एकजुटता पर पड़ेगा, बल्कि बंगाल की व्यापक राजनीति में भी नए समीकरण उभर सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी नेतृत्व इस संकट को कैसे संभालता है और क्या सभी असंतुष्ट धड़ों को एक मंच पर लाकर स्थिति को स्थिर किया जा सकता है या नहीं। अन्यथा यह दरार और गहरी होकर पार्टी के लिए बड़े राजनीतिक नुकसान का कारण बन सकती है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>महिला आरक्षण बिल पर बड़ा नंबर गेम: NDA के सामने 360 वोट जुटाने की चुनौती, संसद में सियासी तनाव तेज</title>
		<link>https://swarajvani.com/nda-faces-challenge-of-securing-360-votes/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 08:54:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PM NARENDRA MODI]]></category>
		<category><![CDATA[Constitutional Amendment]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Parliament]]></category>
		<category><![CDATA[Lok Sabha]]></category>
		<category><![CDATA[Narendra Modi]]></category>
		<category><![CDATA[NDA]]></category>
		<category><![CDATA[Political News]]></category>
		<category><![CDATA[Women Reservation Bill]]></category>
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					<description><![CDATA[महिला आरक्षण बिल पर NDA के सामने बड़ा नंबर गेम, 360 वोट का गणित बना चुनौती नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के सामने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल ... <a title="महिला आरक्षण बिल पर बड़ा नंबर गेम: NDA के सामने 360 वोट जुटाने की चुनौती, संसद में सियासी तनाव तेज" class="read-more" href="https://swarajvani.com/nda-faces-challenge-of-securing-360-votes/" aria-label="Read more about महिला आरक्षण बिल पर बड़ा नंबर गेम: NDA के सामने 360 वोट जुटाने की चुनौती, संसद में सियासी तनाव तेज">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>महिला आरक्षण बिल पर NDA के सामने बड़ा नंबर गेम, 360 वोट का गणित बना चुनौती</strong></h1>
<p>नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के सामने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को पास कराने के लिए कठिन अंकगणितीय चुनौती खड़ी हो गई है। शुक्रवार को होने वाली वोटिंग से पहले संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।</p>
<h2><strong>दो-तिहाई बहुमत का गणित बना सबसे बड़ी बाधा</strong></h2>
<p>लोकसभा में कुल 540 सांसदों की संख्या को देखते हुए संविधान संशोधन बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी लगभग 360 वोटों की जरूरत है।</p>
<p>वर्तमान में NDA के पास लगभग 293 सांसद हैं, यानी सरकार को कम से कम 67 अतिरिक्त वोटों की जरूरत है। यही आंकड़ा अब पूरे राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है।</p>
<h2><strong>विपक्ष की मजबूत स्थिति ने बढ़ाई मुश्किल</strong></h2>
<p>दूसरी ओर विपक्षी दलों के पास भी मजबूत संख्या है, जिससे सरकार के लिए समर्थन जुटाना आसान नहीं दिख रहा है।</p>
<ul>
<li>कांग्रेस: 98 सांसद</li>
<li>समाजवादी पार्टी: 37 सांसद</li>
<li>तृणमूल कांग्रेस: 28 सांसद</li>
<li>डीएमके: 22 सांसद</li>
<li>अन्य विपक्षी दलों को मिलाकर लगभग 234 सांसद</li>
</ul>
<p>इस स्थिति ने सरकार के लिए संख्या का संतुलन और भी जटिल बना दिया है।</p>
<h2><strong>गुरुवार की वोटिंग ने दिखाया वास्तविक स्थिति</strong></h2>
<p>गुरुवार को बिल पर हुई प्रारंभिक वोटिंग में 251 सांसदों ने समर्थन में और 185 ने विरोध में वोट दिया। कुल 436 सांसद उपस्थित रहे।</p>
<p>यह आंकड़ा साफ संकेत देता है कि सरकार अभी भी 360 के जादुई आंकड़े से काफी दूर है और उसे अतिरिक्त समर्थन की सख्त जरूरत है।</p>
<h2><strong>रात भर चली रणनीतिक बैठकों की चर्चा</strong></h2>
<p>सूत्रों के अनुसार, वोटिंग से पहले सरकार और सत्तारूढ़ गठबंधन में देर रात तक नंबर गेम को लेकर मंथन चलता रहा।</p>
<p>राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि सरकार विपक्षी दलों से संपर्क साधकर समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है, ताकि बिल को पारित कराया जा सके।</p>
<h2><strong>2023 के कानून को लेकर नया मोड़</strong></h2>
<p>इस पूरे घटनाक्रम में एक नया मोड़ तब आया जब सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर कहा कि 2023 का महिला आरक्षण कानून 16 अप्रैल 2026 से लागू माना जाएगा।</p>
<p>यह वही कानून है जिसे पहले राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद सितंबर 2023 में गजट किया गया था।</p>
<p>इस फैसले को लेकर विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।</p>
<h2><strong>विपक्ष का आरोप: सरकार दबाव में</strong></h2>
<p>मनीष तिवारी ने इस नोटिफिकेशन को सरकार की राजनीतिक रणनीति बताया। उनका कहना है कि यह कदम इस आशंका से उठाया गया है कि यदि नया बिल पास नहीं हुआ तो पहले के कानून को सुरक्षित रखा जा सके।</p>
<p>विपक्ष का दावा है कि सरकार स्थिति को संभालने के लिए वैकल्पिक रास्ते तैयार कर रही है।</p>
<h2><strong>सरकार के सामने तीन संभावित विकल्प</strong></h2>
<p>पूर्व लोकसभा महासचिव पीडीटी आचार्य के अनुसार सरकार के पास फिलहाल तीन रास्ते हैं—</p>
<ol>
<li>सीधे वोटिंग कराकर परिणाम स्वीकार करना</li>
<li>बिल को चयन समिति (Select Committee) के पास भेजना</li>
<li>विपक्ष से सहमति बनाकर सर्वसम्मति से पास कराना</li>
</ol>
<p>इनमें से किसी भी विकल्प पर अंतिम निर्णय राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।</p>
<h2><strong>सहयोगी दलों की शर्तों ने बढ़ाई मुश्किल</strong></h2>
<p>कुछ सहयोगी दलों ने भी इस बिल को लेकर शर्तें रख दी हैं। YSRCP ने स्पष्ट कहा है कि यदि सरकार आंध्र प्रदेश की सीटों पर परिसीमन से कोई प्रभाव न पड़ने की लिखित गारंटी देती है, तभी वे समर्थन करेंगे।</p>
<p>इस शर्त ने सरकार की रणनीति को और जटिल बना दिया है।</p>
<h2><strong>दक्षिण भारत में असहजता की स्थिति</strong></h2>
<p>दक्षिण भारत के कुछ भाजपा सांसदों और सहयोगी दलों में भी इस बिल को लेकर असहजता देखी जा रही है।</p>
<p>उनका कहना है कि परिसीमन और क्षेत्रीय संतुलन जैसे मुद्दों को लेकर जल्दबाजी में लिया गया फैसला भविष्य में राजनीतिक विवाद पैदा कर सकता है।</p>
<h2><strong>प्रधानमंत्री का सख्त संदेश</strong></h2>
<p>नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में कहा कि देश की महिलाएं सांसदों के निर्णय के साथ-साथ उनकी नीयत पर भी नजर रख रही हैं।</p>
<p>उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि महिला आरक्षण जैसे ऐतिहासिक मुद्दे पर किसी भी प्रकार की गलत मंशा को जनता स्वीकार नहीं करेगी।</p>
<h2><strong>विपक्ष का पलटवार</strong></h2>
<p>विपक्षी दलों ने इस बिल को जल्दबाजी में लाया गया कदम बताया है। उनका आरोप है कि सरकार ने क्षेत्रीय संतुलन और संघीय ढांचे से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज किया है।</p>
<p>कई विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह बिल राजनीतिक दबाव बनाने का माध्यम बन सकता है।</p>
<h3><strong>निष्कर्ष: नंबर गेम पर टिकी सियासत</strong></h3>
<p>लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का भविष्य पूरी तरह से संख्या बल पर निर्भर करता दिख रहा है।</p>
<p>NDA को जहां अतिरिक्त समर्थन जुटाने की चुनौती है, वहीं विपक्ष भी अपनी स्थिति मजबूत बनाए हुए है।</p>
<p>अब सभी की नजर शुक्रवार की वोटिंग पर टिकी है, जो यह तय करेगी कि यह ऐतिहासिक बिल पास होगा या फिर संसद में और राजनीतिक मंथन का रास्ता खुलेगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>Tamil Nadu विधानसभा चुनाव 2026: स्टालिन की साख पर दांव, थलपति विजय की पहली राजनीतिक परीक्षा, EPS और NDA की तैयारी</title>
		<link>https://swarajvani.com/tamil-nadu-election-stalins-credibility-at-stake/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 11:10:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चुनाव की तारीखें और महत्व Tamil Nadu  विधानसभा चुनाव 2026 की घोषणा हो चुकी है। चुनाव आयोग ने मतदान की तारीख 23 अप्रैल 2026 निर्धारित की है, जबकि मतगणना और ... <a title="Tamil Nadu विधानसभा चुनाव 2026: स्टालिन की साख पर दांव, थलपति विजय की पहली राजनीतिक परीक्षा, EPS और NDA की तैयारी" class="read-more" href="https://swarajvani.com/tamil-nadu-election-stalins-credibility-at-stake/" aria-label="Read more about Tamil Nadu विधानसभा चुनाव 2026: स्टालिन की साख पर दांव, थलपति विजय की पहली राजनीतिक परीक्षा, EPS और NDA की तैयारी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>चुनाव की तारीखें और महत्व</strong></h1>
<p>Tamil Nadu  विधानसभा चुनाव 2026 की घोषणा हो चुकी है। चुनाव आयोग ने मतदान की तारीख <strong>23 अप्रैल 2026</strong> निर्धारित की है, जबकि मतगणना और परिणाम घोषित होने की तारीख <strong>4 मई 2026</strong> रखी गई है। इस चुनाव की राजनीतिक महत्ता इसलिए भी अधिक है क्योंकि राज्य में सत्ता का संतुलन, जनता की प्राथमिकताएँ और नई राजनीतिक ताकतों का उदय इसमें निर्णायक भूमिका निभाएंगे।</p>
<p>इस बार का चुनाव कई मायनों में विशेष है। मुख्यमंत्री <strong>एमके स्टालिन</strong> की साख दांव पर है, वहीं अभिनेता से नेता बने <strong>थलपति विजय</strong> अपनी नई पार्टी <strong>तमिलगा वेट्री कझगम</strong> के साथ पहली बार विधानसभा चुनाव में उतर रहे हैं। इसके अलावा, <strong>AIADMK</strong> के नेता <strong>ई.के. पलानीस्वामी (EPS)</strong> और <strong>NDA</strong> की राजनीतिक तैयारियाँ चुनाव को और भी रोचक बनाती हैं।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह चुनाव केवल सरकार की समीक्षा नहीं है, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति के भविष्य की दिशा भी तय करेगा। इस चुनाव में सामाजिक विकास, बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं की प्राथमिकताओं को बड़े पैमाने पर देखा जाएगा।</p>
<h2><strong>थलपति विजय: राजनीति में पहला कदम</strong></h2>
<p>अभिनेता से नेता बने <strong>थलपति विजय</strong> की राजनीति में यह पहला बड़ा परीक्षण है। विजय की नई पार्टी <strong>तमिलगा वेट्री कझगम</strong> विशेष रूप से युवाओं के बीच लोकप्रिय मानी जा रही है। उनके चुनावी अभियान का फोकस युवाओं, शहरी मतदाताओं और नए विचारों पर आधारित है।</p>
<p>विजय का यह राजनीतिक कदम तमिलनाडु के लिए एक नया विकल्प प्रस्तुत करता है। राज्य में माना जा रहा है कि वे युवा मतदाताओं के बीच एक महत्वपूर्ण शक्ति बन सकते हैं। हालांकि, पहली बार चुनाव लड़ रहे विजय के लिए यह चुनौतीपूर्ण है क्योंकि उन्हें न केवल अपने नेतृत्व को स्थापित करना है, बल्कि जनता के सामने अपनी राजनीतिक योग्यता भी प्रदर्शित करनी है।</p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि विजय की लोकप्रियता और स्टार पावर उन्हें शुरुआती बढ़त दे सकती है, लेकिन वास्तविक चुनौती यह होगी कि वे चुनावी रणनीति और स्थानीय मुद्दों में संतुलन कैसे बनाए रखते हैं। उनके लिए यह परीक्षा केवल वोट पाने की नहीं, बल्कि राजनीतिक स्थिरता और नीति निर्धारण क्षमता साबित करने की भी है।</p>
<h3><strong>DMK और स्टालिन की चुनौती</strong></h3>
<p>तमिलनाडु के मुख्यमंत्री <strong>एमके स्टालिन</strong> इस चुनाव में अपनी साख बचाने के लिए चुनावी मैदान में हैं। स्टालिन <strong>DMK</strong> पार्टी के अध्यक्ष भी हैं और राज्य में उनकी सरकार कार्यरत है। स्टालिन ने अपने चुनावी अभियान में <strong>जनकल्याण योजनाओं, आर्थिक सुधारों, शिक्षा और स्वास्थ्य सुधारों</strong> पर जोर दिया है।</p>
<p>स्टालिन ने पिछले कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण योजनाएँ लागू की हैं, जैसे कि ग्रामीण और शहरी विकास, महिला सशक्तिकरण, और युवा रोजगार सृजन। इन योजनाओं का असर इस चुनाव में उनकी जीत या हार पर निर्णायक हो सकता है।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार स्टालिन के लिए चुनौती यह है कि उन्हें जनता के बीच यह संदेश स्पष्ट करना है कि DMK की सरकार ने राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास में ठोस परिणाम दिए हैं। यदि जनता को यह भरोसा होता है कि उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है, तो स्टालिन को मजबूती मिल सकती है।</p>
<h3><strong>AIADMK और EPS की चुनौती</strong></h3>
<p>पूर्व मुख्यमंत्री <strong>ई.के. पलानीस्वामी (EPS)</strong> अपनी पार्टी <strong>AIADMK</strong> के साथ इस चुनाव में DMK को टक्कर देने के लिए मैदान में हैं। EPS ने महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मुद्दों को चुनावी एजेंडा बनाया है।</p>
<p>AIADMK का पिछले कुछ वर्षों में प्रदर्शन मिश्रित रहा है। जयललिता के निधन के बाद पार्टी ने अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने में कठिनाई महसूस की। EPS के लिए यह अवसर है कि वे खुद को पार्टी के प्रमुख नेता के रूप में स्थापित करें और जनता को यह दिखाएँ कि वे राज्य के लिए एक सक्षम विकल्प हैं।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि EPS की सफलता उनके चुनावी रणनीति, स्थानीय मुद्दों को संबोधित करने और ग्रामीण व शहरी मतदाताओं के बीच संतुलन बनाने की क्षमता पर निर्भर करेगी। AIADMK के लिए यह चुनाव उनके भविष्य की दिशा निर्धारित करेगा।</p>
<h3><strong>NDA की रणनीति और तैयारी</strong></h3>
<p>NDA तमिलनाडु में क्षेत्रीय पार्टियों के प्रभुत्व के बावजूद चुनाव में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए तैयार है। <strong>भाजपा</strong> और अन्य NDA दल विशेष रूप से शहरी और युवा मतदाताओं को लक्षित कर रहे हैं।</p>
<p>NDA का उद्देश्य इस बार पिछली बार की तुलना में अधिक सीटें और वोट प्रतिशत हासिल करना है। इसके लिए पार्टी ने विभिन्न चुनावी रणनीतियाँ बनाई हैं, जिसमें डिजिटल प्रचार, युवा नेताओं को बढ़ावा, और स्थानीय मुद्दों पर फोकस शामिल है।</p>
<p>विश्लेषकों का कहना है कि NDA का यह प्रयास राज्य में अपनी पैठ मजबूत करने और भविष्य की राजनीतिक स्थिति के लिए जमीन तैयार करने का संकेत है। यदि NDA युवा और शहरी मतदाताओं का समर्थन हासिल करने में सफल होती है, तो वे विधानसभा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।</p>
<h3><strong>राजनीतिक समीकरण और जनता की भूमिका</strong></h3>
<p>तमिलनाडु का राजनीतिक परिदृश्य इस बार बहुत जटिल और गतिशील है। मुख्यमंत्री स्टालिन की साख, थलपति विजय की नई पार्टी, EPS की चुनौती और NDA की तैयारी मिलकर चुनाव को रोमांचक बना रही हैं।</p>
<p>मतदाता इस बार विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय करेंगे। युवा मतदाता, महिला मतदाता, और शहरी क्षेत्र के लोग निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। चुनाव में आर्थिक मुद्दे, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण महत्वपूर्ण कारक होंगे।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी परिणाम राज्य में राजनीतिक स्थिरता और विकास के मार्ग को प्रभावित करेगा। मतदाता यह तय करेंगे कि कौन अगली सरकार बनायेगा और कौन राज्य के नेतृत्व के लिए सबसे उपयुक्त है।</p>
<h3><strong>चुनौतियाँ और भविष्य की दिशा</strong></h3>
<p>इस चुनाव से यह भी स्पष्ट होगा कि तमिलनाडु की जनता किसे अपना नेता मानती है। चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा तय करने का अवसर भी है।</p>
<p>मुख्यमंत्री स्टालिन की जनकल्याण योजनाओं और प्रशासनिक सुधारों का प्रभाव, थलपति विजय की लोकप्रियता और युवा समर्थन, EPS की चुनौती और NDA की रणनीति राज्य की राजनीति में स्थिरता या अस्थिरता का निर्धारण करेगी।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु के मतदाता अब केवल पार्टी के नाम से मतदान नहीं करेंगे, बल्कि उम्मीदवारों की क्षमता, नीति, विकास योजना और भविष्य की दृष्टि को ध्यान में रखेंगे।</p>
<h3><strong>निष्कर्ष</strong></h3>
<p>Tamil Nadu विधानसभा चुनाव 2026 केवल एक चुनाव नहीं, बल्कि राज्य के राजनीतिक भविष्य की परीक्षा है। मुख्यमंत्री स्टालिन की साख, थलपति विजय की पहली राजनीतिक परीक्षा, EPS की चुनौती और NDA की तैयारियाँ इसे रोमांचक बनाती हैं।</p>
<p>4 मई 2026 को परिणाम घोषित होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि तमिलनाडु की जनता किसे अपना नेतृत्व देने का निर्णय लेती है। युवा मतदाता, शहरी क्षेत्र और विभिन्न सामाजिक वर्ग इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।</p>
<p>इस चुनाव का परिणाम न केवल वर्तमान सरकार के लिए, बल्कि राज्य की राजनीति और विकास के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण होगा। तमिलनाडु की जनता इस बार अपने मत से तय करेगी कि अगली सरकार किसे नेतृत्व करने का अवसर देगी।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पीएम मोदी 11 दिसंबर को एनडीए सांसदों के लिए विशेष रात्रिभोज का आयोजन करेंगे</title>
		<link>https://swarajvani.com/11-dec-nda-dinnermeeting/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Dec 2025 06:01:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[PM NARENDRA MODI]]></category>
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					<description><![CDATA[11 दिसंबर प्रधानमंत्री मोदी के आवास पर एनडीए सांसदों के लिए विशेष रात्रिभोज नई दिल्ली — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 दिसंबर को अपने आधिकारिक आवास पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ... <a title="पीएम मोदी 11 दिसंबर को एनडीए सांसदों के लिए विशेष रात्रिभोज का आयोजन करेंगे" class="read-more" href="https://swarajvani.com/11-dec-nda-dinnermeeting/" aria-label="Read more about पीएम मोदी 11 दिसंबर को एनडीए सांसदों के लिए विशेष रात्रिभोज का आयोजन करेंगे">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1>11 दिसंबर प्रधानमंत्री मोदी के आवास पर एनडीए सांसदों के लिए विशेष रात्रिभोज</h1>
<p><strong>नई दिल्ली</strong> — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 दिसंबर को अपने आधिकारिक आवास पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सांसदों के लिए विशेष रात्रिभोज का आयोजन करेंगे। यह आयोजन न केवल एक औपचारिक मुलाक़ात का अवसर होगा, बल्कि गठबंधन के भीतर आपसी संवाद और तालमेल मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कार्यक्रम में एनडीए के सभी सहयोगी दलों के सांसद, केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता शामिल होने की संभावना है।</p>
<h2>शीतकालीन सत्र में समन्वय और विधायी रणनीति</h2>
<p>इस बैठक का मुख्य उद्देश्य संसद के जारी शीतकालीन सत्र के दौरान एनडीए घटक दलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है और ऐसे में गठबंधन साथी दलों की भूमिकाओं और अपेक्षाओं पर स्पष्टता आवश्यक मानी जा रही है। रात्रिभोज के दौरान विधायी एजेंडे, चर्चा योग्य मुद्दों और सदन में रणनीतिक सहयोग पर विस्तार से विचार-विमर्श किए जाने की संभावना है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class=" wp-image-295767 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/12/nda-300x169.jpg" alt="nda" width="369" height="208" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/12/nda-300x169.jpg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/12/nda.jpg 768w" sizes="(max-width: 369px) 100vw, 369px" /></p>
<h3>आगामी विधानसभा चुनावों पर चर्चा</h3>
<p>सूत्रों के अनुसार, बैठक का दूसरा बड़ा फोकस आने वाले महीनों में विभिन्न राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेतृत्व चुनावी रणनीति, क्षेत्रीय समीकरण, उम्मीदवार चयन, प्रमुख मुद्दों और प्रचार योजनाओं पर सहयोगी दलों से चर्चा कर सकते हैं। गठबंधन की एकजुटता और चुनावी तैयारियों को मजबूती देना इस मुलाकात का अहम हिस्सा रहेगा।</p>
<h4>कार्यक्रम की तैयारी और प्रतिभागियों के इंतजाम</h4>
<p>डिनर कार्यक्रम शाम 6 बजे निर्धारित है। सभी सांसदों को पहले संसद भवन की लाइब्रेरी में एकत्र होने के निर्देश दिए गए हैं। वहां से उन्हें बस या कार के माध्यम से प्रधानमंत्री आवास ले जाया जाएगा। यह आयोजन न केवल औपचारिक बातचीत का मंच प्रदान करेगा, बल्कि नेताओं के बीच अनौपचारिक संपर्क और समझ को भी बढ़ावा देगा, जो आने वाले राजनीतिक और विधायी सत्रों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बिहार का नया अध्याय शुरू : नीतीश कुमार समेत 25 मंत्री लेंगे शपथ</title>
		<link>https://swarajvani.com/bihar-government-formation/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Nov 2025 06:19:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[BJP]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार में एनडीए की ऐतिहासिक जीत के बाद नई सरकार के गठन की होने जा रहा है। बता दे की नीतीश कुमार दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा ... <a title="बिहार का नया अध्याय शुरू : नीतीश कुमार समेत 25 मंत्री लेंगे शपथ" class="read-more" href="https://swarajvani.com/bihar-government-formation/" aria-label="Read more about बिहार का नया अध्याय शुरू : नीतीश कुमार समेत 25 मंत्री लेंगे शपथ">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>बिहार में एनडीए की ऐतिहासिक जीत के बाद नई सरकार के गठन की होने जा रहा है। बता दे की नीतीश कुमार दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। उनकी नई कैबिनेट में बीजेपी कोटे से दो डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा शामिल होंगे, जो पहले भी इस पद पर रह चुके हैं।</p>
<p><strong>नए मंत्रिमंडल का स्वरूप</strong></p>
<p>नीतीश सरकार में मंत्री बनने वाले सभी नेताओं की सूची तय हो चुकी है। नई कैबिनेट में बीजेपी के 14, जेडीयू के 7, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के एक-एक तथा लोक जनशक्ति पार्टी के दो नेता शामिल होंगे। कुल 25 संभावित मंत्री सीएम के साथ शपथ लेंगे।</p>
<p><img decoding="async" class=" wp-image-291437 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/11/nitish-300x169.webp" alt="nitish" width="492" height="277" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/11/nitish-300x169.webp 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/11/nitish-1024x576.webp 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/11/nitish-768x432.webp 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/11/nitish.webp 1200w" sizes="(max-width: 492px) 100vw, 492px" /></p>
<p><strong>पार्टी कोटे से चुने गए मंत्री</strong></p>
<p>एचएएम से जीतनराम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन और आरएलएम से उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश मंत्री पद की शपथ लेंगे। एलजेपी के दो नेताओं को भी मंत्रिपद मिलने जा रहा है, जबकि बीजेपी और जेडीयू के अपने-अपने बड़े कोटे से कई नए और पुराने चेहरों को मौका मिलेगा।</p>
<p><strong>शपथ समारोह में पीएम मोदी और दिग्गजों की मौजूदगी</strong></p>
<p>शपथ ग्रहण समारोह के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गांधी मैदान पहुंच चुके हैं। उनके साथ गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार समेत कई दिग्गज नेता कार्यक्रम स्थल पर मौजूद हैं।</p>
<p><strong>चिराग पासवान और अन्य नेताओं का आगमन</strong></p>
<p>चिराग पासवान अपनी मां के साथ गांधी मैदान पहुंच चुके हैं, जबकि बीजेपी विधायक दल के उपनेता विजय कुमार सिन्हा भी समारोह में मौजूद हैं और वे एक बार फिर डिप्टी सीएम पद की शपथ लेने की तैयारी में हैं। संभावित मंत्रियों और नेताओं का मैदान में पहुंचना लगातार जारी है।</p>
<p><strong>निशांत कुमार का बयान</strong></p>
<p>सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने एनडीए के कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि जनता ने उम्मीद से कहीं ज्यादा समर्थन दिया है। उन्होंने इस जीत को बीस वर्षों की मेहनत और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा डेढ़ साल में किए गए कार्यों का संयुक्त परिणाम बताया।</p>
<p><strong>लोजपा का वक्तव्य</strong></p>
<p>लोजपा के सांसद राजेश वर्मा ने कहा कि उनकी पार्टी के दो विधायक शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे और एनडीए को विशाल जनादेश देने के लिए वे बिहार की जनता के आभारी हैं। उन्होंने कहा कि गांधी मैदान से उनकी पार्टी जनता की सेवा का नया संकल्प लेगी।</p>
<p><strong>नीतीश की अमित शाह से मुलाकात और अंतिम तैयारियाँ</strong></p>
<p><img decoding="async" class=" wp-image-291549 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/11/delhi-bihar-cm-nitish-kumar-meets-union-home-minister-amit-shah-300x225.jpg" alt="delhi bihar cm nitish kumar meets union home minister amit shah" width="404" height="303" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/11/delhi-bihar-cm-nitish-kumar-meets-union-home-minister-amit-shah-300x225.jpg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/11/delhi-bihar-cm-nitish-kumar-meets-union-home-minister-amit-shah.jpg 600w" sizes="(max-width: 404px) 100vw, 404px" /></p>
<p>शपथ से पहले नीतीश कुमार पटना के मौर्य होटल पहुंचे, जहां उन्होंने अमित शाह से मुलाकात की। इसके बाद वे गांधी मैदान के लिए रवाना होंगे। नीतीश कुमार के साथ 25 संभावित मंत्री भी पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। सूची के अनुसार बीजेपी के दो डिप्टी सीएम और 12 मंत्री, जेडीयू के सात, एलजेपी के दो और एचएएम व आरएमएल के एक-एक नेता नई सरकार में शामिल होंगे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>JDUऔर BJP में  छिड़ी बहस , गृह मंत्रालय पर होगा किसका कब्जा ?</title>
		<link>https://swarajvani.com/bjp-vs-jdu-on-home-ministry/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 19 Nov 2025 07:29:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[BJP]]></category>
		<category><![CDATA[Bihar Cabinet]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार में नई सरकार का गठन अपने अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री पद के लिए नीतीश कुमार का नाम लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन मंत्रिमंडल के गठन को ... <a title="JDUऔर BJP में  छिड़ी बहस , गृह मंत्रालय पर होगा किसका कब्जा ?" class="read-more" href="https://swarajvani.com/bjp-vs-jdu-on-home-ministry/" aria-label="Read more about JDUऔर BJP में  छिड़ी बहस , गृह मंत्रालय पर होगा किसका कब्जा ?">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>बिहार में नई सरकार का गठन अपने अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री पद के लिए नीतीश कुमार का नाम लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन मंत्रिमंडल के गठन को लेकर जेडीयू और बीजेपी के बीच मंथन जारी है। खासकर गृह मंत्रालय को लेकर दोनों पक्षों में खींचतान देखने को मिल रही है।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, बीजेपी इस विभाग को अपने पास रखना चाहती है, जबकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसे जेडीयू के पास ही रखने पर अड़े हुए हैं। बता दे की 2005 से मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार के कार्यकाल में गृह मंत्रालय हमेशा जेडीयू के खाते में रहा है, और वह इसे किसी भी कीमत में नहीं छोड़ना चाहते।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-291338 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/11/NITISH_PTI_2_1200x768-300x169.webp" alt="NITISH PTI 2 1200x768" width="458" height="258" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/11/NITISH_PTI_2_1200x768-300x169.webp 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/11/NITISH_PTI_2_1200x768-1024x576.webp 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/11/NITISH_PTI_2_1200x768-768x432.webp 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/11/NITISH_PTI_2_1200x768.webp 1200w" sizes="auto, (max-width: 458px) 100vw, 458px" /></p>
<p><strong>स्पीकर पद पर दोनों ही पार्टियों के बीच आपसी सहमती :</strong></p>
<p>हालांकि, सरकार गठन के दौरान स्पीकर के पद को लेकर पहले खींचतान की खबरें आई थीं, लेकिन अब इस मामले में दोनों दलों ने सहमति का रास्ता निकाल लिया है। नई योजना के तहत विधानसभा अध्यक्ष का पद बीजेपी के पास रहेगा, जबकि गृह मंत्रालय जेडीयू के पास ही रहेगा। यह फॉर्मूला दोनों दलों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश है।</p>
<p><strong>शपथ समारोह जल्द होगा आयोजित :</strong></p>
<p>राजधानी पटना में जेडीयू और बीजेपी दोनों दल अपने-अपने विधायकों के साथ बैठक कर मंत्रियों के नाम पर अंतिम रूप देने में जुटे हैं। सूत्रों का कहना है कि शपथ समारोह जल्द ही आयोजित होने की संभावना है, और सरकार गठन की प्रक्रिया अगले कुछ दिनों में पूरी हो जाएगी।</p>
<p>इससे पहले भी नीतीश कुमार और बीजेपी के बीच अन्य विभागों को लेकर चर्चाएँ चल रही थीं, लेकिन गृह मंत्रालय पर अड़चन ने दोनों दलों के बीच हल्की तनातनी पैदा कर दी थी। अब जिस तरह से बीच का फॉर्मूला निकला है, उसके बाद नई सरकार जल्द ही स्थिर स्थिति में दिखाई देगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>“नीतीश कुमार का बड़ा कदम: जीविका दीदी योजना से महिलाओं को मिलेगा नया सशक्त भविष्य, हर लाभार्थी को 10,000 रुपये सहायता”</title>
		<link>https://swarajvani.com/women-welfare-scheme/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 08:57:00 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[DIDI KARYKRAM YOJNA]]></category>
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		<category><![CDATA[NDA]]></category>
		<category><![CDATA[Nitish Kumar]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार की जनता ने लोकतंत्र के इस पर्व में भारी मतों से प्रदेश की कमान NDA को सोप दी है। जनता ने अगले 5 सालो के लिए NDA की सरकार ... <a title="“नीतीश कुमार का बड़ा कदम: जीविका दीदी योजना से महिलाओं को मिलेगा नया सशक्त भविष्य, हर लाभार्थी को 10,000 रुपये सहायता”" class="read-more" href="https://swarajvani.com/women-welfare-scheme/" aria-label="Read more about “नीतीश कुमार का बड़ा कदम: जीविका दीदी योजना से महिलाओं को मिलेगा नया सशक्त भविष्य, हर लाभार्थी को 10,000 रुपये सहायता”">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>बिहार की जनता ने लोकतंत्र के इस पर्व में भारी मतों से प्रदेश की कमान NDA को सोप दी है। जनता ने अगले 5 सालो के लिए NDA की सरकार को चुना है।<br />
ऐसा बताया जा रहा है की इस बार एनडीए की शानदार जीत के पीछे महिला मतदाताओं की रिकॉर्ड भागीदारी, एक मज़बूत सामाजिक गठबंधन और विपक्ष की बिखरी रणनीति को बताया जा रहा है।</p>
<p><strong>महिला मतदाताओं की भागीदारी से मिला देश को समर्थन</strong></p>
<p>बिहार के चुनाव में जनता ने इतिहास रच दिया। बता दे की इस विधानसभा चुनाव में आज तक की सबसे ज्यादा वोटिंग हुई है। इस चुनाव में महिलाओ ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। जिससे NDA की सरकार को बहुत फायदा हुआ। NDA ने जिन जिलों में जीत हासिल की वहां के अनेक जिलों में महिला मतदान प्रतिशत पुरुषों से कहीं आगे रहा, और इसका सीधा असर परिणामों पर दिखा।</p>
<p>7 जिलों में महिला मतदान पुरुषों से 14% से अधिक रहा , वही किशनगंज विधान सभा सीट में यह अंतर 19.5% हो गया , मधुबनी में 18.4% और गोपालगंज में 17.72% दर्ज किया गया है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-290708 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/11/JIVIKA-DIDI-246x300.jpg" alt="JIVIKA DIDI" width="334" height="407" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/11/JIVIKA-DIDI-246x300.jpg 246w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/11/JIVIKA-DIDI.jpg 497w" sizes="auto, (max-width: 334px) 100vw, 334px" /></p>
<p><strong>नीतीश कुमार की सरकार देगी महिलाओ को 10,000 रुपये की सहायता</strong></p>
<p>नीतीश सरकार ने महिलाओ के लिए , जीविका दीदी कार्यक्रम योजना की घोषणा की थी, जिसमे महिलाओ को 10,000 रुपये की सहायता मिलेगी। इसके चलते नीतीश सरकार ने महिलाओ के बीच भरोसा मजबूत किया, जो वोटों में स्पष्ट रूप से झलक गया।</p>
<p><strong>एनडीए का मजबूत जातीय और सामाजिक गठबंधन</strong></p>
<p>एनडीए ने इस चुनाव में एक व्यापक और प्रभावी सामाजिक समीकरण तैयार किया।<br />
परंपरागत सवर्णों के साथ-साथ ओबीसी, ईबीसी, और दलित समुदायों का बड़ा हिस्सा एनडीए के साथ मजबूती से खड़ा रहा। इस व्यापक सोशल गठजोड़ ने महागठबंधन के पारंपरिक मुस्लिम–यादव (M-Y) समीकरण को काफी कमजोर कर दिया।</p>
<p><strong>महागठबंधन की आंतरिक कमजोरियाँ और वोटों का बिखराव</strong></p>
<p>दूसरी ओर, महागठबंधन एकजुटता और स्पष्ट रणनीति के अभाव से जूझता रहा। कई सीटों पर सहयोगी दलों में तालमेल की कमी दिखाई दी , वही महागठबंधन की सरकार उम्मीदवारों को लेकर आंतरिक सहमति करने में भी विफल हो गयी।</p>
<p><strong>इन सबने विपक्ष को नुकसान पहुँचाया।</strong></p>
<p>सीमांचल क्षेत्र में AIMIM की एंट्री ने मुस्लिम वोटों का बंटवारा कर दिया, जिससे महागठबंधन को अपने ही पारंपरिक गढ़ में नुकसान हुआ। यादव वोटों में भी बिखराव देखने को मिला, जिसका लाभ एनडीए को मिला।</p>
<p>&nbsp;</p>
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