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	<title>Navgraha Yagya &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>भक्ति में सामर्थ्य हो तो ईश्वर की प्राप्ति संभव है — दैनिक स्वराज वाणी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 Oct 2026 13:58:02 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Bhagwat Katha]]></category>
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					<description><![CDATA[भक्ति में सामर्थ्य हो तो ईश्वर की प्राप्ति संभव है — दैनिक स्वराज वाणी मनावर, नि.प्र.। वेदांत दर्शन सेवा समिति तपोवन धाम के संचालक एवं संस्थापक श्री अखंडानंद जी महाराज ... <a title="भक्ति में सामर्थ्य हो तो ईश्वर की प्राप्ति संभव है — दैनिक स्वराज वाणी" class="read-more" href="https://swarajvani.com/true-devotion-can-lead-to-god-bhagwat-katha-concludes-at-tapovan-dham-in/" aria-label="Read more about भक्ति में सामर्थ्य हो तो ईश्वर की प्राप्ति संभव है — दैनिक स्वराज वाणी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>भक्ति में सामर्थ्य हो तो ईश्वर की प्राप्ति संभव है — दैनिक स्वराज वाणी</strong></h1>
<p><strong>मनावर, नि.प्र.।</strong> वेदांत दर्शन सेवा समिति तपोवन धाम के संचालक एवं संस्थापक श्री अखंडानंद जी महाराज के तत्वावधान में सप्त ऋषि गौशाला, तपोवन धाम सुलीबयड़ी में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का आयोजन किया गया। कथा के सातवें और अंतिम दिवस कथावाचिका सुश्री जयादेवी ने भक्तिभाव और धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को संबोधित किया। कथा का शुभारंभ उन्होंने श्री हनुमान जी महाराज के मंत्र और स्तुति के साथ किया।</p>
<p>कथावाचिका ने कहा कि यदि भक्ति में सामर्थ्य और सच्ची श्रद्धा हो, तो भगवान की प्राप्ति संभव है। उन्होंने दीपक का उदाहरण देते हुए कहा कि दीपक स्वयं जलकर पूरे संसार को प्रकाश देता है। इसी तरह व्यक्ति को भी अपने जीवन में सेवा, समर्पण और सद्भाव के भाव अपनाने चाहिए। कथा के दौरान भक्ति, सनातन परंपरा और लोकाचार से जुड़े प्रसंगों पर भी चर्चा हुई।</p>
<h2><strong>भांजे के प्रति सम्मान का प्रसंग</strong></h2>
<p>कथा में सुश्री जयादेवी ने मामा और भांजे के संबंध से जुड़ी लोक परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सनातन धर्म, शास्त्रों और लोक परंपराओं में भांजे को देवी-देवताओं का प्रतीक मानने की मान्यता प्रचलित है। इसी कारण मामा द्वारा भांजे के पैर छूने की परंपरा का उल्लेख किया जाता है।</p>
<p>उन्होंने भगवान कृष्ण और उनके भांजे अभिमन्यु से जुड़ा प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान कृष्ण ने अभिमन्यु के पैर छुए थे। कथावाचिका के अनुसार, इसी प्रसंग से मामा द्वारा भांजे के पैर छूने की परंपरा को समझा जाता है, जो चारों युगों से चली आ रही है। कथा में इस प्रसंग को रिश्तों में सम्मान और परंपराओं के महत्व से जोड़कर बताया गया।</p>
<h2><strong>शुक्ल और कृष्ण पक्ष की जानकारी</strong></h2>
<p>कथावाचिका ने हिंदू पंचांग में महीने के दो पक्षों—शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष—के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि शुक्ल पक्ष में चंद्रमा की रोशनी बढ़ती है और रातें उजली होती जाती हैं, जबकि कृष्ण पक्ष में चंद्रमा का प्रकाश घटता है और रातें अपेक्षाकृत अंधेरी होती हैं। इस जानकारी के माध्यम से श्रद्धालुओं को हिंदू पंचांग की परंपरा से परिचित कराया गया।</p>
<h2><strong>सात दिवसीय नवग्रह यज्ञ भी हुआ</strong></h2>
<p>कथा आयोजन के दौरान प्रतिदिन वेदोक्त प्रवचन दिए गए। प्रातःकालीन समय में सात दिवसीय नवग्रह यज्ञ भी संपन्न हुआ। यज्ञाचार्य आचार्य रविकांत अवस्थी, वृंदावन ने वैदिक विधि-विधान से यज्ञ कराया। मुख्य यजमान ऋतु-मुकेश पाटीदार रहे। आयोजन में श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर कथा और यज्ञ का लाभ लिया।</p>
<p>श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के आयोजन में वरिष्ठ हिंदू नागरिक महासंघ समिति का सहयोग रहा। समिति अध्यक्ष रामेश्वर जी पाटीदार चौघड़िया ने आयोजन में सहयोग देने वाले समिति के सभी सदस्यों का धन्यवाद किया। उन्होंने धार्मिक कार्यक्रम को सफल बनाने में जुड़े लोगों के योगदान की सराहना की।</p>
<h2><strong>संचालन और आभार</strong></h2>
<p>कार्यक्रम का संचालन देवजी छबाया ने किया। अंत में टीकाराम राय ने आभार व्यक्त किया। सात दिवसीय कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने कथावाचिका सुश्री जयादेवी, यज्ञाचार्य आचार्य रविकांत अवस्थी, मुख्य यजमान ऋतु-मुकेश पाटीदार और आयोजन में सहयोग देने वाले सभी सदस्यों के प्रति आभार जताया। तपोवन धाम में आयोजित कथा और नवग्रह यज्ञ के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक जीवन से जुड़े संदेश दिए गए।</p>
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