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	<title>Namami Gange &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>उज्जैन में सिंहस्थ-2028 से पहले Namami Gange Project पूरी करना बड़ी चुनौती, विकास कार्यों के बीच समय पर निष्पादन की परीक्षा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 11:28:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Ujjain]]></category>
		<category><![CDATA[Bhairavgarh]]></category>
		<category><![CDATA[Environmental Protection]]></category>
		<category><![CDATA[Namami Gange]]></category>
		<category><![CDATA[river conservation]]></category>
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		<category><![CDATA[Water Pollution]]></category>
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					<description><![CDATA[उज्जैन में सिंहस्थ-2028 से पहले Namami Gange Project पूरी करना बड़ी चुनौती,  उज्जैन। शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से लंबे समय से प्रतीक्षित Namami Gange Project को ... <a title="उज्जैन में सिंहस्थ-2028 से पहले Namami Gange Project पूरी करना बड़ी चुनौती, विकास कार्यों के बीच समय पर निष्पादन की परीक्षा" class="read-more" href="https://swarajvani.com/namami-gange-project-aims-to-stop-polluted-water/" aria-label="Read more about उज्जैन में सिंहस्थ-2028 से पहले Namami Gange Project पूरी करना बड़ी चुनौती, विकास कार्यों के बीच समय पर निष्पादन की परीक्षा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>उज्जैन में सिंहस्थ-2028 से पहले Namami Gange Project पूरी करना बड़ी चुनौती, </strong></h1>
<p>उज्जैन। शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से लंबे समय से प्रतीक्षित Namami Gange Project को आखिरकार केंद्र सरकार की स्वीकृति मिल गई है। हालांकि अब प्रशासन और निर्माण एजेंसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती निर्धारित समय सीमा के भीतर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा करने की है। सिंहस्थ-2028 को देखते हुए यह परियोजना उज्जैन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।</p>
<h2><strong>तीन साल की देरी के बाद मिली गति</strong></h2>
<p>शिप्रा शुद्धिकरण से जुड़ी यह परियोजना करीब तीन वर्षों तक विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से अटकी रही। अब गाजियाबाद की सोमवंशी एनवायरो फर्म को लगभग 81 करोड़ रुपये का ठेका मिलने के बाद परियोजना को नई गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि देरी के कारण अब उपलब्ध समय काफी सीमित हो गया है।</p>
<p>टेंडर की शर्तों के अनुसार परियोजना को पूरा करने के लिए 18 महीने का समय निर्धारित किया गया है। लेकिन पिछले वर्षों में हुई देरी के चलते अब प्रशासन पर समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने का दबाव बढ़ गया है।</p>
<h2><strong>सिंहस्थ-2028 से पहले पूरा करना होगा काम</strong></h2>
<p>उज्जैन में आगामी सिंहस्थ महाकुंभ को लेकर तैयारियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं। शहर में सड़क चौड़ीकरण, घाट निर्माण, पुल, सीवरेज नेटवर्क और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट एक साथ संचालित किए जा रहे हैं।</p>
<p>ऐसे में नमामि गंगे मिशन के कार्यों को अन्य विकास परियोजनाओं के साथ समन्वय बनाकर पूरा करना आसान नहीं होगा। प्रशासन को विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना होगा ताकि किसी भी परियोजना का काम दूसरी परियोजना में बाधा न बने।</p>
<p>यदि परियोजना समय पर पूरी नहीं हो पाती है तो सिंहस्थ के दौरान शिप्रा नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने का लक्ष्य प्रभावित हो सकता है।</p>
<h2><strong>महापौर परिषद की मंजूरी का इंतजार</strong></h2>
<p>केंद्र सरकार की मंजूरी और ठेकेदार के चयन के बाद भी परियोजना की कुछ औपचारिकताएं अभी शेष हैं। महापौर परिषद (एमआईसी) से अंतिम स्वीकृति मिलना बाकी है। इसके बाद ही कार्य आदेश जारी होगा और निर्माण कार्य का औपचारिक शुभारंभ किया जा सकेगा।</p>
<p>फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि एमआईसी की स्वीकृति कब मिलेगी और कार्य प्रारंभ होने में कितना समय लगेगा।</p>
<h2><strong>92.78 करोड़ की स्वीकृति, 81 करोड़ में हुआ ठेका</strong></h2>
<p>केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने मई 2023 में इस परियोजना के लिए 92.78 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की थी। इसके बाद निविदा प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें कई कंपनियों ने भाग लिया।</p>
<p>प्रारंभिक चरण में तकनीकी कारणों से कई प्रस्ताव निरस्त कर दिए गए। बाद में संशोधित दरों के साथ दोबारा टेंडर जारी किया गया। अंततः गाजियाबाद की सोमवंशी एनवायरो फर्म का चयन किया गया और लगभग 81 करोड़ रुपये में ठेका स्वीकृत हुआ।</p>
<h2><strong>शिप्रा में मिलने वाले प्रदूषित पानी को रोका जाएगा</strong></h2>
<p>परियोजना का मुख्य उद्देश्य उज्जैन की जीवनरेखा मानी जाने वाली शिप्रा नदी को प्रदूषण से मुक्त बनाना और उसके जल की गुणवत्ता में सुधार करना है। वर्तमान में भैरवगढ़ और पीलियाखाल क्षेत्र से बड़ी मात्रा में दूषित पानी सीधे शिप्रा नदी में पहुंच रहा है, जिससे नदी का प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो रहा है। लंबे समय से यह समस्या स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।</p>
<p>विशेष रूप से भैरवगढ़ क्षेत्र में संचालित बाटिक प्रिंट उद्योगों से निकलने वाला रासायनिक युक्त अपशिष्ट जल बिना पर्याप्त उपचार के नदी में मिल जाता है। इसके अलावा घरेलू सीवेज और अन्य गंदा पानी भी शिप्रा के प्रदूषण को बढ़ाने का काम करता है। इससे न केवल नदी के जल की गुणवत्ता खराब होती है, बल्कि जलीय जीवों और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।</p>
<p>नई परियोजना के तहत अत्याधुनिक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे, जिनकी मदद से गंदे पानी का शोधन कर उसे नदी में जाने से पहले सुरक्षित बनाया जाएगा। इससे शिप्रा नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।</p>
<h2><strong>स्थापित होंगे अत्याधुनिक ट्रीटमेंट प्लांट</strong></h2>
<p>परियोजना के अंतर्गत पीलियाखाल क्षेत्र में 22.06 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा भैरवगढ़ क्षेत्र में 2.38 एमएलडी क्षमता का एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) बनाया जाएगा।</p>
<p>इन संयंत्रों के माध्यम से घरेलू और औद्योगिक अपशिष्ट जल का उपचार किया जाएगा, जिससे शिप्रा नदी में केवल शुद्ध जल ही पहुंच सकेगा।</p>
<h2><strong>आधुनिक तकनीक से होगी निगरानी</strong></h2>
<p>पूरी परियोजना को अत्याधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा। जल की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए पीएलसी-स्काडा आधारित रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा।</p>
<p>इस प्रणाली के माध्यम से अधिकारियों को जल शुद्धिकरण प्रक्रिया की लगातार जानकारी मिलती रहेगी और किसी भी तकनीकी समस्या का तुरंत समाधान किया जा सकेगा।</p>
<h2><strong>सौर ऊर्जा आधारित होगी व्यवस्था</strong></h2>
<p>पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए परियोजना में सौर ऊर्जा आधारित सुविधाओं को भी शामिल किया गया है। इससे ऊर्जा की बचत होगी और संचालन लागत में कमी आएगी।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल भविष्य में अन्य शहरों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।</p>
<h2><strong>15 वर्षों तक रखरखाव की जिम्मेदारी</strong></h2>
<p>परियोजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी संबंधित एजेंसी अगले 15 वर्षों तक इसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी निभाएगी।</p>
<p>इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि संयंत्र केवल बनकर तैयार न हो जाएं, बल्कि लंबे समय तक प्रभावी ढंग से संचालित भी होते रहें।</p>
<h2><strong>प्रशासन के सामने अग्निपरीक्षा</strong></h2>
<p>नमामि गंगे परियोजना को लेकर लोगों की अपेक्षाएं काफी बढ़ गई हैं। शिप्रा नदी धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से उज्जैन की पहचान है। सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान लाखों श्रद्धालु शिप्रा में स्नान करते हैं, इसलिए नदी की स्वच्छता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।</p>
<p>ऐसे में प्रशासन, नगर निगम और निर्माण एजेंसी के लिए आने वाले 18 महीने किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होंगे। यदि सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करते हैं तो सिंहस्थ-2028 से पहले शिप्रा को प्रदूषण मुक्त बनाने का सपना साकार हो सकता है।</p>
<p><iframe title="जंतर-मंतर पर युवाओं का बड़ा प्रदर्शन! सरकार पर बढ़ा दबाव? 🔥" width="563" height="1000" src="https://www.youtube.com/embed/7DMjdIV1iEw?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe></p>
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