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	<title>Muni Pungav Sudhasagar Ji Maharaj &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>भीड़ को देखकर मंजिल तय मत करो, रास्ता कहाँ जाता है यह देखो -निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 07 Oct 2026 06:31:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[JAINS]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Monk]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Religion]]></category>
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		<category><![CDATA[Spiritual Discourse]]></category>
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					<description><![CDATA[*भीड़ को देखकर मंजिल तय मत करो, रास्ता कहाँ जाता है यह देखो -निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज* *धर्म को केवल जानना नहीं, जीवन में उतारना ही सच्ची साधना ... <a title="भीड़ को देखकर मंजिल तय मत करो, रास्ता कहाँ जाता है यह देखो -निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज" class="read-more" href="https://swarajvani.com/do-not-choose-your-destination-by-the-crowd/" aria-label="Read more about भीड़ को देखकर मंजिल तय मत करो, रास्ता कहाँ जाता है यह देखो -निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>*भीड़ को देखकर मंजिल तय मत करो, रास्ता कहाँ जाता है यह देखो -निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज*</strong></h1>
<p>*धर्म को केवल जानना नहीं, जीवन में उतारना ही सच्ची साधना है<br />
राजेश जैन दद्दू<br />
*इंदौर, 06 अक्टूबर 2026।* पूज्य मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने दलालबाग स्थित विध्या सुधा देशना मंडप में धर्मसभा में प्रेरणादायी प्रवचन देते हुए कहा कि *&#8221;भीड़ को देखकर अपनी मंजिल तय नहीं करनी चाहिए। संसार में जिस रास्ते पर सबसे अधिक लोग चल रहे हों, जरूरी नहीं कि वह रास्ता मंजिल तक पहुँचाता हो। मंजिल तक पहुँचने वाले लोगों की संख्या हमेशा कम होती है।&#8221;*धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि गुरु देव ने आगे कहा कि धर्म के मार्ग में भी अनेक लोग चलते हैं, लेकिन वास्तविक मंजिल तक पहुँचने वाले विरले ही होते हैं। सबसे बड़ा आश्चर्य यह नहीं है कि किसी जीव ने अनादिकाल से धर्म नहीं किया, बल्कि आश्चर्य तो यह है कि सम्यक दर्शन प्राप्त करने के बाद भी वह मिथ्यात्व की ओर लौट जाए।</p>
<h2><strong>*किसान और हीरे की कथा से दिया बोध -*</strong></h2>
<p>गुरुदेव ने किसान और हीरे की कथा के माध्यम से समझाया कि जिसे किसी वस्तु की वास्तविक कीमत पता नहीं, उसकी भूल समझ में आती है; लेकिन जिसे कीमत पता है और फिर भी वह उसे छोड़ देता है, उसकी भूल और भी बड़ी है। यही स्थिति हमारे जीवन में भी है। हमें धर्म का महत्व पता है, अहिंसा, संयम, सदाचार और त्याग का महत्व पता है, फिर भी यदि हम उसे अपने आचरण में नहीं उतारते तो केवल ज्ञान प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है।</p>
<h5><strong>उन्होंने कहा &#8211; &#8220;जानना अलग बात है, मानना अलग बात है और उस ज्ञान को जीवन में उतारना अलग बात है।&#8221;</strong></h5>
<p>गुरुदेव ने समाजजनों को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें यह नहीं देखना चाहिए कि कितने लोग किसी रास्ते पर चल रहे हैं, बल्कि यह देखना चाहिए कि वह रास्ता हमें कहाँ लेकर जा रहा है। भीड़ का अनुसरण करने के बजाय सत्य, धर्म और मोक्ष की मंजिल को सामने रखकर जीवन की दिशा निर्धारित करनी चाहिए। मनुष्य जन्म, जैन धर्म और सम्यक दर्शन का अवसर अनमोल रत्न के समान है। इसे संसार के आकर्षणों में गंवाने के बजाय आत्मकल्याण की दिशा में लगाना चाहिए। इस अवसर पर समाज श्रेष्ठीयो की उपस्थिति धर्म सभा में</p>
<p>* मनीष सपना गोधा,नवीन आनंद गोधा, अशोक डोशी, हर्ष जैन, विजय पाटोदी, आकाश आलोक प्रिंसपाल टोंग्या, संजय पाटोदी, राहुल सेठी, अरविंद अखिलेश सोधीया महेंद्र सीमा जैन पाली भूपेन्द्र भोपाली* सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी समाजजन उपस्थित रहे।</p>
<p>प्रचार प्रमुख संजय जी पाटोदी ने बताया कि पूज्य गुरुदेव के प्रवचन ने समाजजनों को आत्मचिंतन की प्रेरणा देते हुए यह संदेश दिया कि धर्म को केवल सुनना या जानना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे अपने जीवन में उतारना ही वास्तविक धर्मसाधना है।</p>
<p>*संदेश -*<br />
*&#8221;भीड़ जिस दिशा में जा रही है, उस दिशा को मंजिल मत समझो। रास्ते पर कितने लोग चल रहे हैं, यह मत देखो; रास्ता कहाँ पहुँचता है, यह देखो। हाथ में आए धर्मरूपी हीरे को पहचानो और उसे संसार के कंचों में मत गंवाओ।&#8221;*</p>
<p><em><strong>*- राजेश जैन दद्दू, प्रचार प्रमुख</strong></em></p>
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