<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>MP High Court Order &#8211; Swaraj Vani</title>
	<atom:link href="https://swarajvani.com/tag/mp-high-court-order/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://swarajvani.com</link>
	<description>From politics and jobs to culture and community stories, we deliver timely, unbiased updates that matter.</description>
	<lastBuildDate>Thu, 17 Sep 2026 07:04:32 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.1.3</generator>

<image>
	<url>https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/07/cropped-स्वराज-वाणी-1-32x32.png</url>
	<title>MP High Court Order &#8211; Swaraj Vani</title>
	<link>https://swarajvani.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>MP Probation Employees: प्रोबेशन में पूरा वेतन देने के फैसले को चुनौती, मध्यप्रदेश सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट</title>
		<link>https://swarajvani.com/mp-probation-employees-case-state-government-challenges-full-pay-order-in-supreme-court/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Sep 2026 07:02:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhopal]]></category>
		<category><![CDATA[Class III Employees]]></category>
		<category><![CDATA[Class IV Employees]]></category>
		<category><![CDATA[Direct Recruitment MP]]></category>
		<category><![CDATA[Full Salary During Probation]]></category>
		<category><![CDATA[Government E]]></category>
		<category><![CDATA[Madhya Pradesh government employees]]></category>
		<category><![CDATA[MP Employees Salary Case]]></category>
		<category><![CDATA[MP Government Supreme Court Petition]]></category>
		<category><![CDATA[MP High Court Order]]></category>
		<category><![CDATA[Probation Employees]]></category>
		<category><![CDATA[Probation Period Salary]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=358296</guid>

					<description><![CDATA[MP Probation Employees: प्रोबेशन में पूरा वेतन देने के फैसले को चुनौती, मध्यप्रदेश सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के वेतन का मामला; हाईकोर्ट ने 70-80-90 प्रतिशत ... <a title="MP Probation Employees: प्रोबेशन में पूरा वेतन देने के फैसले को चुनौती, मध्यप्रदेश सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट" class="read-more" href="https://swarajvani.com/mp-probation-employees-case-state-government-challenges-full-pay-order-in-supreme-court/" aria-label="Read more about MP Probation Employees: प्रोबेशन में पूरा वेतन देने के फैसले को चुनौती, मध्यप्रदेश सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>MP Probation Employees: प्रोबेशन में पूरा वेतन देने के फैसले को चुनौती, मध्यप्रदेश सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट</strong></h1>
<h2><strong>तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के वेतन का मामला; हाईकोर्ट ने 70-80-90 प्रतिशत वेतन व्यवस्था को बताया था भेदभावपूर्ण</strong></h2>
<p><strong>भोपाल।</strong> मध्यप्रदेश में सीधी भर्ती के माध्यम से नियुक्त तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि में पूरा वेतन दिए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मध्यप्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के उस निर्णय को चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका दाखिल की है, जिसमें प्रोबेशन के दौरान कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान का 100 प्रतिशत भुगतान करने का निर्देश दिया गया था।</p>
<p>इस मामले का सीधा प्रभाव प्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारियों पर पड़ सकता है। अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह तय होगा कि हाईकोर्ट का आदेश लागू रहेगा या प्रोबेशन अवधि में 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन देने वाली राज्य सरकार की पुरानी व्यवस्था को कानूनी मान्यता मिलेगी।</p>
<h2><strong>क्या है 70-80-90 प्रतिशत वेतन व्यवस्था?</strong></h2>
<p>मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2019 में सीधी भर्ती से नियुक्त होने वाले कुछ कर्मचारियों के लिए तीन वर्ष की प्रोबेशन अवधि निर्धारित की थी। इसके तहत चयनित कर्मचारी को पहले वर्ष न्यूनतम वेतनमान का 70 प्रतिशत, दूसरे वर्ष 80 प्रतिशत और तीसरे वर्ष 90 प्रतिशत भुगतान करने का प्रावधान किया गया था।</p>
<p>तीन वर्ष की प्रोबेशन अवधि सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद कर्मचारी को निर्धारित वेतनमान का पूरा लाभ मिलना था। यह व्यवस्था प्रमुख रूप से उन तृतीय और चतुर्थ श्रेणी पदों पर लागू की गई थी, जिनकी भर्ती मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की अनुशंसा से नहीं होती थी।</p>
<p>सामान्य प्रशासन विभाग ने दिसंबर 2019 में इससे संबंधित निर्देश जारी किए थे। इसके बाद फरवरी 2020 में मूलभूत नियमों में भी बदलाव किया गया। इस व्यवस्था के कारण नियुक्त कर्मचारियों को नियमित पद का पूरा कार्य करने के बावजूद शुरुआती तीन वर्षों तक पूरा वेतन नहीं मिल रहा था।</p>
<h2><strong>कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में दी थी चुनौती</strong></h2>
<p>प्रोबेशन अवधि में कम वेतन मिलने से प्रभावित कर्मचारियों ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। कर्मचारियों की ओर से दलील दी गई कि वे नियमित कर्मचारियों के समान पूरा काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें पूरा वेतन नहीं दिया जा रहा है।</p>
<p>याचिकाकर्ताओं ने इसे समानता के संवैधानिक अधिकार के विरुद्ध बताया। उनका कहना था कि प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों पर इस प्रकार की वेतन कटौती लागू नहीं की गई, जबकि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को कम वेतन दिया गया। इस तरह एक ही सरकारी व्यवस्था के अंतर्गत कर्मचारियों की अलग-अलग श्रेणियां बनाकर भेदभाव किया गया।</p>
<p>कर्मचारियों ने यह भी कहा कि प्रोबेशन का उद्देश्य उनके कार्य और आचरण का मूल्यांकन करना हो सकता है, लेकिन इसके आधार पर निर्धारित वेतन से कम भुगतान करना उचित नहीं है।</p>
<h2><strong>हाईकोर्ट ने पूरा वेतन देने का दिया आदेश</strong></h2>
<p>मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद 70-80-90 प्रतिशत वेतन देने वाली व्यवस्था को अनुचित और भेदभावपूर्ण माना। अदालत ने कहा कि जब किसी कर्मचारी से नियमित कर्मचारी के समान 100 प्रतिशत कार्य कराया जा रहा है तो उसे पूरा वेतन क्यों नहीं दिया जाना चाहिए।</p>
<p>हाईकोर्ट ने यह भी माना कि प्रोबेशन अवधि दो अथवा तीन वर्ष रखने का उद्देश्य कर्मचारी की कार्यक्षमता का मूल्यांकन करना हो सकता है, लेकिन इस दौरान वेतन कम करने का पर्याप्त औचित्य नहीं है। अदालत ने सरकार के संबंधित निर्णय, परिपत्र और नियमों को निरस्त करते हुए प्रभावित कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि का पूरा वेतन दिए जाने का निर्देश दिया था।</p>
<p>खंडपीठ ने यह तथ्य भी महत्वपूर्ण माना कि ऐसी शर्त तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों पर लगाई गई, जबकि प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों पर लागू नहीं थी। हाईकोर्ट के विस्तृत निर्णय में 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन वाली व्यवस्था को समानता के अधिकार के विपरीत बताया गया।  उपलब्ध है।</p>
<h2><strong>कई कर्मचारियों को मिला पूरा वेतन और एरियर का आदेश</strong></h2>
<p>हाईकोर्ट के मुख्य निर्णय के बाद इसी तरह के कई मामलों में कर्मचारियों को राहत दी गई। अलग-अलग याचिकाओं में अदालत ने कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि के दौरान न्यूनतम वेतनमान का 100 प्रतिशत भुगतान करने के निर्देश दिए।</p>
<p>कुछ मामलों में सरकार को बकाया राशि यानी एरियर का भुगतान करने के लिए निश्चित समय भी दिया गया। 10 सितंबर 2026 के एक आदेश में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को प्रोबेशन अवधि के वेतन का अंतर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 90 दिनों में देने का निर्देश दिया।  में इसका विवरण दर्ज है।</p>
<p>एक अन्य मामले में न्यायालय ने प्रभावित कर्मचारियों को 100 प्रतिशत वेतन का लाभ दो महीने के भीतर देने का निर्देश दिया था। इससे समान परिस्थितियों में नियुक्त अन्य कर्मचारियों की उम्मीद भी बढ़ गई थी।</p>
<h2><strong>अब सुप्रीम कोर्ट पहुंची मध्यप्रदेश सरकार</strong></h2>
<p>हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ मध्यप्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। सरकार सर्वोच्च न्यायालय के सामने हाईकोर्ट के फैसले और प्रोबेशन वेतन से संबंधित कानूनी प्रश्नों पर अपना पक्ष रखेगी।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट पहले यह तय कर सकता है कि राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार की जाए या नहीं। यदि याचिका स्वीकार होती है तो हाईकोर्ट के निर्णय, राज्य सरकार की वेतन नीति, संबंधित नियमों और कर्मचारियों के अधिकारों पर विस्तार से सुनवाई हो सकती है।</p>
<p>केवल याचिका दाखिल होने से हाईकोर्ट का आदेश स्वतः निरस्त या स्थगित नहीं माना जाएगा। आदेश के क्रियान्वयन की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि सुप्रीम कोर्ट किसी प्रकार की रोक लगाता है या नहीं। इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का स्पष्ट आदेश सबसे महत्वपूर्ण होगा।</p>
<h2><strong>कर्मचारियों पर क्या पड़ेगा प्रभाव?</strong></h2>
<p>इस प्रकरण का फैसला उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें प्रोबेशन अवधि में 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन दिया गया। यदि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट का निर्णय बरकरार रखता है तो प्रभावित कर्मचारियों के लिए पूरे वेतन और बकाया राशि का दावा मजबूत हो सकता है।</p>
<p>यदि सर्वोच्च न्यायालय हाईकोर्ट के फैसले में बदलाव करता है या उसे निरस्त करता है तो कर्मचारियों को मिलने वाले आर्थिक लाभ पर असर पड़ सकता है। मामले के व्यापक वित्तीय प्रभाव को देखते हुए प्रदेश सरकार की ओर से इस निर्णय को चुनौती दी गई है।</p>
<h2><strong>अंतिम फैसला आने तक बनी रहेगी कानूनी स्थिति पर नजर</strong></h2>
<p>मध्यप्रदेश में प्रोबेशन अवधि के दौरान पूरा कार्य करने वाले तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पूरा वेतन मिलना चाहिए या चरणबद्ध तरीके से 70, 80 और 90 प्रतिशत भुगतान किया जा सकता है—अब इस कानूनी प्रश्न पर सुप्रीम कोर्ट विचार करेगा।</p>
<p>फिलहाल कर्मचारियों को किसी सोशल मीडिया संदेश के आधार पर वेतन अथवा एरियर मिलने या रुकने का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के आगामी आदेश और राज्य सरकार द्वारा जारी आधिकारिक निर्देशों के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पर्युषण पर्व पर जैन धर्मावलंबी कर्मचारियों को दो घंटे की छूट, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश</title>
		<link>https://swarajvani.com/madhya-pradesh-high-court-grants-two-hour-relaxation-to-jain-employees-during-paryushan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Sep 2026 08:05:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[JAINS]]></category>
		<category><![CDATA[Dashlakshan Mahaparva]]></category>
		<category><![CDATA[Gwalior Bench]]></category>
		<category><![CDATA[igh Court]]></category>
		<category><![CDATA[Indore Bench]]></category>
		<category><![CDATA[Jabalpur High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Employees]]></category>
		<category><![CDATA[MP High Court Order]]></category>
		<category><![CDATA[National Jinshasan Ekta Sangh]]></category>
		<category><![CDATA[Paryushan Parva]]></category>
		<category><![CDATA[Religious Accommodation]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=357650</guid>

					<description><![CDATA[पर्युषण पर्व पर जैन धर्मावलंबी कर्मचारियों को दो घंटे की छूट, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश 15 से 26 सितंबर तक सुबह 10 के स्थान पर दोपहर 12 बजे ... <a title="पर्युषण पर्व पर जैन धर्मावलंबी कर्मचारियों को दो घंटे की छूट, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश" class="read-more" href="https://swarajvani.com/madhya-pradesh-high-court-grants-two-hour-relaxation-to-jain-employees-during-paryushan/" aria-label="Read more about पर्युषण पर्व पर जैन धर्मावलंबी कर्मचारियों को दो घंटे की छूट, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>पर्युषण पर्व पर जैन धर्मावलंबी कर्मचारियों को दो घंटे की छूट, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश</strong></h1>
<h2><strong>15 से 26 सितंबर तक सुबह 10 के स्थान पर दोपहर 12 बजे कार्यालय आने की अनुमति, नियमित कामकाज प्रभावित नहीं होने की रखी गई शर्त</strong></h2>
<p><strong>प्रस्तुति: राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ, भारत</strong><br />
<strong>रिपोर्ट: राजेश जैन दद्दू, इंदौर</strong></p>
<p>जैन समाज के प्रमुख धार्मिक पर्व पर्युषण एवं दशलक्षण महापर्व को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जैन धर्मावलंबी कर्मचारियों को कार्यालय आने के समय में दो घंटे की विशेष छूट प्रदान की है। हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से 14 सितंबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार यह सुविधा 15 सितंबर से 26 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी।</p>
<p>इस अवधि में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में कार्यरत जैन धर्म के अनुयायी कर्मचारी सुबह 10 बजे के निर्धारित समय के स्थान पर दोपहर 12 बजे तक कार्यालय में उपस्थित हो सकेंगे। हालांकि इस विशेष अनुमति के साथ यह स्पष्ट शर्त रखी गई है कि कर्मचारियों के देर से कार्यालय आने के कारण न्यायालय के नियमित कामकाज पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।</p>
<p>आदेश को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्यपीठ के साथ इंदौर और ग्वालियर खंडपीठों के संबंधित अधिकारियों को भी भेजे जाने की जानकारी दी गई है।</p>
<h2><strong>मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर जारी हुआ निर्देश</strong></h2>
<p>राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू और मयंक जैन ने बताया कि जैन धर्मावलंबी कर्मचारियों को दी गई यह विशेष अनुमति मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर प्रदान की गई है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल धर्मेन्द्र सिंह के हस्ताक्षर से आदेश जारी किया गया है।</p>
<p>संघ के प्रमुख राकेश गोहिल ने आदेश की प्रति का उल्लेख करते हुए बताया कि इसका क्रमांक <strong>A/3339/जबलपुर</strong> और जारी होने की तारीख 14 सितंबर 2026 है। आदेश में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में पदस्थ जैन धर्म के अनुयायी कर्मचारियों को पर्युषण पर्व के दौरान दो घंटे विलंब से कार्यालय आने की अनुमति दी गई है।</p>
<p>आदेश में कहा गया है कि जैन धर्म का पालन करने वाले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के कर्मचारी 15 सितंबर से 26 सितंबर 2026 तक पर्युषण पर्व के दौरान सुबह 10 बजे के बजाय दोपहर 12 बजे तक कार्यालय में उपस्थित हो सकते हैं। यह अनुमति इस शर्त के अधीन रहेगी कि उनके देर से आने के कारण कार्यालय का नियमित कार्य प्रभावित नहीं हो।</p>
<h2><strong>जबलपुर के साथ इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ को भेजा आदेश</strong></h2>
<p>प्राप्त जानकारी के अनुसार हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा जारी आदेश को जबलपुर स्थित मुख्यपीठ के अतिरिक्त इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ के संबंधित अधिकारियों को भी भेजा गया है। इससे तीनों पीठों में पदस्थ पात्र जैन धर्मावलंबी कर्मचारी निर्धारित अवधि में इस सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।</p>
<p>यह आदेश मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के कर्मचारियों के लिए जारी किया गया है। इसे प्रदेश सरकार के सभी विभागों अथवा समस्त सरकारी कर्मचारियों पर स्वतः लागू आदेश नहीं माना जाएगा। राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने मांग की है कि इसी व्यवस्था को मध्यप्रदेश शासन के अन्य विभागों, कलेक्टर कार्यालयों और केंद्र सरकार के कार्यालयों में कार्यरत जैन कर्मचारियों के लिए भी लागू किया जाए।</p>
<h2><strong>पर्युषण में धार्मिक आराधना के लिए मिलेगा समय</strong></h2>
<p>पर्युषण और दशलक्षण महापर्व जैन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में शामिल हैं। इस पर्व के दौरान जैन धर्मावलंबी आत्मशुद्धि, संयम, त्याग, तप, क्षमा और धार्मिक साधना को विशेष महत्व देते हैं। श्रद्धालु प्रातःकाल मंदिरों एवं जिनालयों में पहुंचकर अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, प्रवचन, सामायिक और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं।</p>
<p>सुबह आयोजित होने वाली इन धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने के कारण नौकरीपेशा श्रद्धालुओं को समय संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा प्रदान की गई दो घंटे की छूट से जैन धर्मावलंबी कर्मचारी धार्मिक आराधना पूरी करने के बाद कार्यालय पहुंच सकेंगे।</p>
<p>हालांकि कर्मचारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इस सुविधा के कारण न्यायालय अथवा कार्यालय की नियमित कार्यप्रणाली प्रभावित न हो। इस प्रकार आदेश में धार्मिक भावनाओं के सम्मान के साथ प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता का भी ध्यान रखा गया है।</p>
<h2><strong>जैन समाज ने निर्णय का किया स्वागत</strong></h2>
<p>वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि पर्युषण और दशलक्षण महापर्व जैन धर्म में आत्मशुद्धि, क्षमा, तप तथा साधना का पर्व है। इन पवित्र दिनों में जैन धर्मावलंबी प्रातःकाल मंदिर जाकर अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, प्रवचन और सामायिक जैसे धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट प्रशासन का यह निर्णय कर्मचारियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने वाला है। इससे नौकरी के साथ धार्मिक परंपराओं का पालन करने वाले कर्मचारियों को सुविधा मिलेगी। आदेश की जानकारी सामने आने के बाद जैन समाज के लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त की है।</p>
<h2><strong>राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने जताया आभार</strong></h2>
<p>राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने मुख्य न्यायाधीश और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल धर्मेन्द्र सिंह के प्रति आभार व्यक्त किया है। संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि यह निर्णय धार्मिक आस्था के सम्मान और सर्वधर्म समभाव की भावना का उदाहरण है।</p>
<p>संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि जैन धर्मावलंबी कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के साथ पर्युषण पर्व की धार्मिक आराधना में भी शामिल हो सकेंगे। कार्यालय का नियमित कामकाज प्रभावित न होने की शर्त इस व्यवस्था को संतुलित बनाती है।</p>
<h2><strong>अन्य सरकारी विभागों में भी सुविधा देने की मांग</strong></h2>
<p>राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने मध्यप्रदेश सरकार से मांग की है कि हाईकोर्ट की इस व्यवस्था की तर्ज पर प्रदेश के सभी सरकारी विभागों और कलेक्टर कार्यालयों में कार्यरत जैन धर्मावलंबी कर्मचारियों को भी पर्युषण पर्व के दौरान दो घंटे की छूट प्रदान की जाए।</p>
<p>इसके साथ ही केंद्र सरकार के अधीन कार्यालयों में कार्यरत जैन कर्मचारियों के लिए भी ऐसी व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। संघ का कहना है कि इससे कर्मचारी अपनी धार्मिक परंपराओं और कार्यालयीन दायित्वों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सकेंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
