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	<title>Mohankheda Teerth &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>बंधु बेलड़ी मुनिश्री पीयूषचन्द्र व रजतचन्द्र विजयजी 14 जून को मोहनखेड़ा महातीर्थ में भव्य मंगल प्रवेश करेंगे श्रद्धालु उत्साहित</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 10:07:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[JAINS]]></category>
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		<category><![CDATA[Jain Saints]]></category>
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		<category><![CDATA[Rajatchandra Vijayji]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रेस नोट बंधु बेलड़ी मुनिश्री पीयूषचन्द्र विजयजी म.सा. एवं मुनिश्री रजतचन्द्र विजयजी म.सा. का श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ में मंगल आगमन धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक वातावरण के बीच एक महत्वपूर्ण धार्मिक ... <a title="बंधु बेलड़ी मुनिश्री पीयूषचन्द्र व रजतचन्द्र विजयजी 14 जून को मोहनखेड़ा महातीर्थ में भव्य मंगल प्रवेश करेंगे श्रद्धालु उत्साहित" class="read-more" href="https://swarajvani.com/munishree-peeyushchandra-vijayji-rajatchandra/" aria-label="Read more about बंधु बेलड़ी मुनिश्री पीयूषचन्द्र व रजतचन्द्र विजयजी 14 जून को मोहनखेड़ा महातीर्थ में भव्य मंगल प्रवेश करेंगे श्रद्धालु उत्साहित">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2>प्रेस नोट</h2>
<h1><strong>बंधु बेलड़ी मुनिश्री पीयूषचन्द्र विजयजी म.सा. एवं मुनिश्री रजतचन्द्र विजयजी म.सा. का श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ में मंगल आगमन</strong></h1>
<p>धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक वातावरण के बीच एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन के अंतर्गत परोपकार सम्राट मोहनखेड़ा महातीर्थ विकास प्रेरक पूज्य आचार्यप्रवर श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्र सूरीश्वरजी महाराजा साहेब के सुशिष्य अष्टम वर्षीतप तपस्वी पूज्य मुनिराज श्री पीयूषचन्द्र विजयजी म.सा. एवं प्रवचनदक्ष मुनिराज श्री रजतचन्द्र विजयजी म.सा. (बंधु बेलड़ी) का आगामी 14 जून को श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ में मंगल प्रवेश होने जा रहा है। यह अवसर जैन समाज के लिए अत्यंत पुण्यकारी एवं श्रद्धा से परिपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<h2><strong>बांसवाड़ा में भव्य मिलन समारोह का आयोजन</strong></h2>
<p>इस मंगल यात्रा से पूर्व बांसवाड़ा नगर में 1 जून को बंधु बेलड़ी का छह माह बाद पुनर्मिलन समारोह बड़े ही भव्य और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नगर में श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति देखने को मिली। भक्तों ने संतों का स्वागत पुष्पवर्षा, जयकारों और भक्ति गीतों के साथ किया।</p>
<p>इसके पश्चात 2 से 4 जून तक पूज्य सुरि ऋषभ गुरुदेव का 69वां जन्मोत्सव एवं पुण्यतिथि स्मरण महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ मनाया गया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और गुरुदेव के जीवन, उनके त्याग, साधना और समाज के प्रति योगदान को स्मरण किया गया।</p>
<h2><strong>सुरि ऋषभ गुरुदेव के योगदान का स्मरण</strong></h2>
<p>इस अवसर पर मुनिश्री पीयूषचन्द्र विजयजी म.सा. ने अपने उद्बोधन में कहा कि उनके जीवन के उपकारी सुरि ऋषभ गुरुदेव अत्यंत उदारमना संत थे, जिन्होंने सदैव सभी संतों को आगे बढ़ाने का कार्य किया। उन्होंने शासन प्रभावना के कार्यों को विभिन्न प्रांतों में संतों के माध्यम से संपन्न कराया और धर्म प्रचार के लिए निरंतर प्रेरित किया।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि गुरुदेव का जीवन त्याग, तपस्या और सेवा का अद्भुत उदाहरण है, जिसने अनेक संतों और श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर किया।</p>
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<h2><strong>मुनिश्री रजतचन्द्र विजयजी के विचार</strong></h2>
<p>मुनिश्री रजतचन्द्र विजयजी म.सा. ने अपने प्रवचन में कहा कि सुरि ऋषभ गुरुदेव ने अपने पुरुषार्थ और तपोबल से तीर्थ भूमि में ऐसे कार्य किए, जिनका प्रभाव आज भी समाज में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि गुरुदेव द्वारा स्थापित धार्मिक व्यवस्था और साधना परंपरा आज भी श्रद्धालुओं को सुरक्षा, शांति और आध्यात्मिक मार्ग प्रदान कर रही है।</p>
<p>उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि गुरुदेव का जीवन संत समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है और उनके आदर्शों का पालन करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।</p>
<h2><strong>विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों का उल्लेख</strong></h2>
<p>मुनिश्री ने जानकारी दी कि बड़े भ्राता पीयूषचन्द्र विजयजी म.सा. की सहमति से अनेक धार्मिक और शासन प्रभावना के कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किए गए हैं। इन आयोजनों ने विभिन्न राज्यों में धर्म प्रभावना को नई दिशा दी है।</p>
<p>इन प्रमुख आयोजनों में शामिल हैं—</p>
<ul>
<li>रानीबैन्नुर नगरे नागेश्वर मोहनखेड़ा तीर्थधाम अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव</li>
<li>रानीबैन्नुर गांव में चल प्रतिष्ठा महोत्सव</li>
<li>बेलगांव में मुनिसुव्रत दादा महामहोत्सव</li>
<li>कराड श्रीसंघ में नवपद ओलीजी आराधना सह सिद्धाचल तीर्थ भावयात्रा त्रिदिवसीय उत्सव</li>
<li>तलेगांव दाभाड़े में अक्षय तृतीया पर सामूहिक वर्षीतप पारणोत्सव</li>
<li>पुणे के समीप दौंड नगरे श्री विमलनाथ दादा का रजत पंचान्हिका महोत्सव</li>
</ul>
<p>इन सभी आयोजनों में श्रद्धालुओं की व्यापक भागीदारी रही और धर्म प्रभावना का वातावरण निरंतर बना रहा।</p>
<h2><strong>सात माह की विहार यात्रा का सफल समापन</strong></h2>
<p>मुनिश्री ने बताया कि पिछले सात महीनों के दौरान दोनों संतों ने पांच राज्यों की विहार यात्रा पूर्ण की है। इस यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर धार्मिक प्रवचन, साधना शिविर, तप कार्यक्रम और समाज सुधार से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।</p>
<p>इस विहार यात्रा ने अनेक स्थानों पर जैन धर्म की शिक्षाओं और सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। श्रद्धालुओं ने संतों के दर्शन कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।</p>
<p><img decoding="async" class="size-medium wp-image-327863 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/06/13b-222x300.jpg" alt="13b" width="222" height="300" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/06/13b-222x300.jpg 222w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/06/13b.jpg 543w" sizes="(max-width: 222px) 100vw, 222px" /></p>
<h2><strong>4 जून को मोहनखेड़ा महातीर्थ में मंगल प्रवेश</strong></h2>
<p>अब यह पावन यात्रा अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर रही है, जिसके तहत मुनिश्री पीयूषचन्द्र विजयजी म.सा. एवं मुनिश्री रजतचन्द्र विजयजी म.सा. 14 जून को प्रातः 8 बजे श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ में मंगल प्रवेश करेंगे। यह अवसर जैन समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण एवं आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था और उत्साह का वातावरण बना हुआ है।</p>
<p>इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, श्रीसंघ सदस्यों एवं विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले भक्तों की उपस्थिति की संभावना जताई जा रही है। दूर-दराज से लोग इस मंगल प्रवेश के साक्षी बनने हेतु मोहनखेड़ा पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं।</p>
<p>महातीर्थ परिसर में इस अवसर पर विशेष धार्मिक कार्यक्रमों, प्रवचन सभाओं, भक्ति संध्याओं एवं स्वागत समारोहों का आयोजन भी प्रस्तावित है। मंदिर प्रशासन एवं स्थानीय श्रद्धालु मिलकर भव्य व्यवस्था सुनिश्चित करने में जुटे हुए हैं, ताकि यह आयोजन सुव्यवस्थित और भव्य रूप में संपन्न हो सके।</p>
<h2><strong>श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल</strong></h2>
<p>इस मंगल प्रवेश को लेकर जैन समाज में अत्यंत उत्साह और गहरी भक्ति का वातावरण देखा जा रहा है। श्रद्धालु इस पावन अवसर को अत्यंत पुण्यकारी एवं दुर्लभ अवसर मानते हुए इसकी तैयारियों में पूरे मनोयोग से जुटे हुए हैं। समाज के विभिन्न वर्गों में इस आयोजन को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है और लोग इसे आध्यात्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण अवसर मान रहे हैं।</p>
<p>देश के अलग-अलग क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। कई स्थानों पर भक्तगण समूहों के रूप में यात्रा की तैयारी कर रहे हैं ताकि वे इस मंगल प्रवेश के साक्षी बन सकें। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भी आयोजन को लेकर विशेष व्यवस्था और सजावट की तैयारियां की जा रही हैं।</p>
<p>श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसे संतों का सानिध्य मिलना जीवन को नई दिशा और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है। यही कारण है कि इस आयोजन को लेकर हर वर्ग में विशेष श्रद्धा और उत्साह का वातावरण बना हुआ है।</p>
<h2><strong>निष्कर्ष</strong></h2>
<p>बंधु बेलड़ी मुनिश्री पीयूषचन्द्र विजयजी म.सा. एवं मुनिश्री रजतचन्द्र विजयजी म.सा. का मोहनखेड़ा महातीर्थ में मंगल प्रवेश केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा, धर्म प्रभावना और समाज में आध्यात्मिक चेतना के विस्तार का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। यह आयोजन जैन धर्म की परंपरा, साधना और गुरु भक्ति की भावना को और अधिक सुदृढ़ करने वाला सिद्ध होगा।</p>
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