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	<title>#MadhyaPradesh #MPNews #Bhind #Dalit #SCST #DigvijaySingh #Congress #BJP &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>भिंड में सवर्ण महापंचायत का दलित बहिष्कार फैसला, दिग्विजय सिंह ने पूछा- &#8220;क्या एमपी में SC/ST एक्ट लागू है?&#8221;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Oct 2025 04:14:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Politics]]></category>
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					<description><![CDATA[मध्यप्रदेश: भिंड में सवर्ण समाज की महापंचायत ने दलितों के बहिष्कार का लिया संकल्प, दिग्विजय सिंह ने सरकार पर दागे सवाल ग्वालियर। मध्यप्रदेश के भिंड जिले में एक गंभीर घटना ने ... <a title="भिंड में सवर्ण महापंचायत का दलित बहिष्कार फैसला, दिग्विजय सिंह ने पूछा- &#8220;क्या एमपी में SC/ST एक्ट लागू है?&#8221;" class="read-more" href="https://swarajvani.com/mahapanchayat-in-bhind/" aria-label="Read more about भिंड में सवर्ण महापंचायत का दलित बहिष्कार फैसला, दिग्विजय सिंह ने पूछा- &#8220;क्या एमपी में SC/ST एक्ट लागू है?&#8221;">Read more</a>]]></description>
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<h3><strong>मध्यप्रदेश: भिंड में सवर्ण समाज की महापंचायत ने दलितों के बहिष्कार का लिया संकल्प, दिग्विजय सिंह ने सरकार पर दागे सवाल</strong></h3>
<p class="ds-markdown-paragraph"><strong>ग्वालियर।</strong> मध्यप्रदेश के भिंड जिले में एक गंभीर घटना ने सामाजिक सौहार्द को गहरा झटका दिया है। सुरपुरा गांव में आयोजित <strong>सवर्ण समाज की महापंचायत</strong> में समाज के लोगों ने दलित समुदाय के खिलाफ <strong>सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार</strong> का एक विवादास्पद संकल्प लिया है। इस महापंचायत में यह आरोप लगाया गया कि दलित समाज द्वारा सवर्णों के खिलाफ &#8220;झूठे मामले&#8221; दर्ज कराए जा रहे हैं। इस घटना ने न केवल गांव की शांति भंग की है, बल्कि यह <strong>एससी/एसटी एक्ट</strong> (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989) के क्रियान्वयन पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।</p>
<p class="ds-markdown-paragraph">इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है, जहाँ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री <strong>दिग्विजय सिंह</strong> ने सोशल मीडिया के माध्यम से राज्य की भाजपा सरकार पर करारा हमला बोला है। उन्होंने सरकार से सीधे सवाल पूछते हुए लिखा है, <strong>&#8220;क्या एमपी में SC/ST एक्ट लागू है या नहीं?&#8221;</strong></p>
<h4><strong>सवर्ण समाज की महापंचायत और बहिष्कार का संकल्प</strong></h4>
<p class="ds-markdown-paragraph">भिंड जिले के सुरपुरा गांव में हुई यह <strong>सवर्ण महापंचायत</strong> स्थानीय स्तर पर एक बड़े सामाजिक संकट का कारण बन गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सवर्ण समुदाय के लोगों ने दलितों (विशेषकर जाटव समाज) पर उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज कराने का आरोप लगाया। इस आरोप के जवाब में, महापंचायत में एकतरफा फैसला सुनाया गया कि दलित समुदाय का पूर्ण <strong>सामाजिक बहिष्कार</strong> किया जाएगा।</p>
<p class="ds-markdown-paragraph">इस बहिष्कार के संकल्प में निम्नलिखित बातें शामिल हैं:</p>
<ol start="1">
<li>
<p class="ds-markdown-paragraph">दलित समाज के साथ किसी भी प्रकार के सामाजिक संबंध समाप्त करना।</p>
</li>
<li>
<p class="ds-markdown-paragraph">उनके साथ किसी भी प्रकार का आर्थिक लेन-देन या व्यवसाय बंद करना।</p>
</li>
<li>
<p class="ds-markdown-paragraph">दलित परिवारों को खेती की जमीन बटाई पर देना पूर्णतः बंद कर दिया जाएगा।</p>
</li>
</ol>
<p class="ds-markdown-paragraph">यह फैसला न केवल संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध है, बल्कि दलित समुदाय की आजीविका और सामाजिक एकीकरण पर एक गंभीर प्रहार है। ऐसी कार्रवाई एससी/एसटी एक्ट सहित कई कानूनों के तहत दंडनीय है, फिर भी आरोप है कि स्थानीय प्रशासन ने अभी तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।</p>
<h4><strong>दिग्विजय सिंह का सरकार पर निशाना: &#8216;पुलिस कार्यवाही क्यों नहीं?&#8217;</strong></h4>
<p class="ds-markdown-paragraph">इस पूरे प्रकरण पर कांग्रेस नेता <strong>दिग्विजय सिंह</strong> ने सोशल मीडिया पर एक तीखा बयान जारी कर सार्वजनिक बहस छेड़ दी है। अपने पोस्ट में उन्होंने न केवल भिंड की घटना का जिक्र किया, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी प्रहार किया।</p>
<p class="ds-markdown-paragraph">दिग्विजय सिंह ने लिखा, <strong>&#8220;स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने पहले मुसलमानों को बहिष्कार करने की शपथ ली। अब दलित SC समाज को बहिष्कार करने की शपथ ली।&#8221;</strong> इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने सामाजिक बहिष्कार की इस घटना को एक बड़ी विचारधारात्मक समस्या से जोड़ने का प्रयास किया है।</p>
<p class="ds-markdown-paragraph">लेकिन उनकी सबसे महत्वपूर्ण और सीधी चुनौती राज्य सरकार और प्रशासन के लिए थी। उन्होंने सवाल किया, <strong>&#8220;क्या एमपी में SC/ST एक्ट लागू है या नहीं है? पुलिस कार्यवाही क्यों नहीं करती है?&#8221;</strong> यह सवाल सीधे तौर पर मध्यप्रदेश सरकार की कानून-व्यवस्था और दलित अधिकारों के संरक्षण की प्रतिबद्धता पर संदेह उठाता है।</p>
<p class="ds-markdown-paragraph">दिग्विजय सिंह ने आगे कहा, <strong>&#8220;इस प्रकार के पुलिस कर्मियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए जिसका कानून में प्रावधान है।&#8221;</strong> इसके जरिए उन्होंने उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जो ऐसे मामलों में निष्क्रियता बरतते हैं या एससी/एसटी एक्ट के प्रावधानों को सही ढंग से लागू नहीं करते।</p>
<h4><strong>कानूनी परिप्रेक्ष्य और सामाजिक प्रतिक्रिया</strong></h4>
<p class="ds-markdown-paragraph"><strong>एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989</strong> विशेष रूप से अनुसूचित जातियों और जनजातियों के खिलाफ होने वाले अपराधों, अत्याचारों और सामाजिक भेदभाव को रोकने के लिए बनाया गया एक शक्तिशाली कानून है। किसी समुदाय विशेष का सामाजिक या आर्थिक बहिष्कार करना इस कानून के तहत एक गंभीर अपराध माना जा सकता है।</p>
<p class="ds-markdown-paragraph">भिंड की इस <strong>सवर्ण महापंचायत</strong> में लिए गए संकल्प स्पष्ट रूप से कानून का उल्लंघन करते हैं। कानून के मुताबिक, ऐसी घटनाओं पर त्वरित एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि, अभी तक इस मामले में पुलिस की ओर से क्या कार्रवाई हुई है, इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है।</p>
<p class="ds-markdown-paragraph">सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि प्रशासन की कोताही ऐसे तत्वों को हिम्मत देती है। जब तक कानून का डंडा चमकता नहीं दिखता, सामाजिक सौहार्द को ठेस पहुंचाने वाली ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। इस घटना ने पूरे मध्यप्रदेश में एक चिंताजनक सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राज्य में दलित समुदाय की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने वाले कानूनी ढांचे का सम्मान किया जा रहा है।</p>
<h4><strong>निष्कर्ष</strong></h4>
<p class="ds-markdown-paragraph">भिंड की <strong>सवर्ण समाज की महापंचायत</strong> और <strong>दलित बहिष्कार</strong> का मामला केवल एक स्थानीय घटना नहीं रह गई है। यह एक राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है, जिसने राज्य सरकार की जवाबदेही, पुलिस की निष्क्रियता और <strong>एससी/एसटी एक्ट</strong> के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। दिग्विजय सिंह के सवाल – <strong>&#8220;क्या एमपी में SC/ST एक्ट लागू है?&#8221;</strong> – ने इस मुद्दे को राजनीतिक केंद्र में ला खड़ा किया है। अब निगाहें मध्यप्रदेश सरकार और प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस चुनौती का जवाब कैसे देती है और भिंड के दलित समुदाय को न्याय दिलाने के साथ-साथ राज्य में कानून का शासन बहाल करने के लिए क्या कदम उठाती है।</p>
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