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	<title>Madhya Pradesh Property Registration &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>MP Land Registry: कितनी लगेगी फीस और कौन-से दस्तावेज होंगे जरूरी? — दैनिक स्वराज वाणी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 12 Oct 2026 07:25:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[MADHAY PRADESH NEWS]]></category>
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					<description><![CDATA[MP Land Registry: कितनी लगेगी फीस और कौन-से दस्तावेज होंगे जरूरी? — दैनिक स्वराज वाणी मध्य प्रदेश में जमीन या मकान खरीदने-बेचने के लिए बिक्री विलेख यानी सेल डीड का ... <a title="MP Land Registry: कितनी लगेगी फीस और कौन-से दस्तावेज होंगे जरूरी? — दैनिक स्वराज वाणी" class="read-more" href="https://swarajvani.com/mp-land-registry-fees-required-documents-and-registration/" aria-label="Read more about MP Land Registry: कितनी लगेगी फीस और कौन-से दस्तावेज होंगे जरूरी? — दैनिक स्वराज वाणी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>MP Land Registry: कितनी लगेगी फीस और कौन-से दस्तावेज होंगे जरूरी? — दैनिक स्वराज वाणी</strong></h1>
<p>मध्य प्रदेश में जमीन या मकान खरीदने-बेचने के लिए बिक्री विलेख यानी सेल डीड का पंजीयन उप-पंजीयक कार्यालय में कराना जरूरी है। रजिस्ट्री से पहले संपत्ति के दस्तावेजों की जांच, शुल्क का हिसाब और खरीदार-विक्रेता की पहचान का सत्यापन किया जाता है। एक जरूरी बात यह है कि रजिस्ट्री और नामांतरण अलग प्रक्रियाएं हैं। रजिस्ट्री के बाद राजस्व रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज कराने के लिए नामांतरण भी कराना पड़ सकता है।</p>
<h2><strong>मध्य प्रदेश में जमीन की रजिस्ट्री पर कितनी फीस लगती है?</strong></h2>
<p>रजिस्ट्री का खर्च केवल पंजीयन शुल्क से नहीं बनता। इसमें स्टांप ड्यूटी, पंजीयन शुल्क और संपत्ति के स्थान के अनुसार लागू स्थानीय शुल्क शामिल हो सकते हैं। मध्य प्रदेश पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के शुल्क चार्ट में बिक्री विलेख के लिए 5% मूल स्टांप ड्यूटी, 3% नगर निकाय शुल्क, 1% जनपद शुल्क, मूल स्टांप ड्यूटी का 10% उपकर और 3% पंजीयन शुल्क दर्ज हैं। इन मदों को जोड़ने पर कुल शुल्क 12.5% तक हो सकता है, लेकिन किसी खास संपत्ति पर देय रकम दस्तावेज के प्रकार और स्थान के अनुसार विभागीय गणना से तय होगी।</p>
<p>उदाहरण के तौर पर, अगर गणना के लिए संपत्ति का मूल्य ₹20 लाख माना जाए और सभी ऊपर बताई गई दरें लागू हों, तो कुल शुल्क करीब ₹2.5 लाख होगा। यह केवल समझाने के लिए एक अनुमान है। वास्तविक भुगतान संपत्ति के बाजार मूल्य, सरकारी गाइडलाइन मूल्य, स्थानीय निकाय और लागू नियमों के आधार पर अलग हो सकता है। अंतिम रकम जमा करने से पहले मध्य प्रदेश के आधिकारिक स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क कैलकुलेटर पर गणना जांचें। मध्य प्रदेश सरकार की ई-सेवा सूची में यह कैलकुलेटर उपलब्ध है।</p>
<h2><strong>शुल्क किस मूल्य पर तय हो सकता है?</strong></h2>
<p>संपत्ति की कीमत तय करते समय केवल खरीदार और विक्रेता के बीच लिखी गई रकम पर निर्भर न रहें। रजिस्ट्री की गणना में सरकारी गाइडलाइन के अनुसार मूल्य और दस्तावेज में बताई गई कीमत प्रासंगिक हो सकती है। संपत्ति का सही क्षेत्र, नगर निकाय या ग्राम पंचायत की सीमा और विलेख का प्रकार भी शुल्क को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए भुगतान से पहले संबंधित संपत्ति का विवरण भरकर आधिकारिक कैलकुलेटर से रकम निकलवाएं या उप-पंजीयक कार्यालय से पुष्टि करें।</p>
<h2><strong>रजिस्ट्री के लिए कौन-से दस्तावेज तैयार रखें?</strong></h2>
<p>आमतौर पर खरीदार और विक्रेता की पहचान व पते के प्रमाण, PAN कार्ड, पासपोर्ट आकार के फोटो और पहचान बताने वाले गवाहों के दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। संपत्ति से जुड़े कागजात में पहले की रजिस्ट्री या मालिकाना दस्तावेज, खसरा, बी-1/खतौनी और जमीन का नक्शा उपयोगी होते हैं। संपत्ति की स्थिति के अनुसार ऋण या बंधक की जानकारी, अनापत्ति प्रमाणपत्र, डायवर्जन आदेश, संपत्ति कर की रसीद या अन्य अनुमति भी जरूरी हो सकती है।</p>
<p>हर सौदे में दस्तावेजों की सूची एक जैसी नहीं होती। कृषि भूमि, प्लॉट, मकान, विरासत में मिली संपत्ति या पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए होने वाले सौदे में अतिरिक्त कागजात मांगे जा सकते हैं। मध्य प्रदेश सरकार की सेवाओं में खसरा, बी-1, नक्शा और भू-अधिकार पुस्तिका की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने की सुविधा भी सूचीबद्ध है।</p>
<h2><strong>रजिस्ट्री से पहले मालिकाना हक की जांच करें</strong></h2>
<p>सौदे से पहले विक्रेता के मालिकाना हक और संपत्ति पर किसी कर्ज, बंधक या कानूनी रोक की जांच करें। पुराने दस्तावेजों की कड़ी देखें और जमीन का खसरा, बी-1 तथा नक्शा उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलाएं। मध्य प्रदेश की ई-सेवा सूची में संपत्ति पर ऋण या बंधक की स्थिति जांचने के लिए एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (EC) की सेवा भी दी गई है। केवल रजिस्ट्री दस्तावेज देखकर यह न मानें कि संपत्ति पर कोई विवाद या दावा नहीं है। बड़ी खरीद में दस्तावेजों की वकील से जांच कराना उपयोगी रहता है।</p>
<h2><strong>रजिस्ट्री की प्रक्रिया कैसे पूरी होती है?</strong></h2>
<p>सबसे पहले बिक्री विलेख तैयार कराया जाता है और उसमें खरीदार-विक्रेता, संपत्ति का विवरण तथा बिक्री की शर्तें दर्ज की जाती हैं। इसके बाद सरकारी गाइडलाइन मूल्य और विलेख के प्रकार के अनुसार स्टांप ड्यूटी व पंजीयन शुल्क की गणना कर भुगतान किया जाता है। मध्य प्रदेश में ई-पंजीयन और दस्तावेज सत्यापन की सेवाएं उपलब्ध हैं। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार खरीदार, विक्रेता और गवाहों को पहचान सत्यापन तथा हस्ताक्षर के लिए उपस्थित होना पड़ सकता है।</p>
<h2><strong>रजिस्ट्री के बाद नामांतरण कराना न भूलें</strong></h2>
<p>रजिस्ट्री होने के बाद राजस्व रिकॉर्ड में मालिक का नाम बदलवाने के लिए नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कराएं। रजिस्ट्री संपत्ति के हस्तांतरण का पंजीकृत दस्तावेज है, जबकि नामांतरण राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव दर्ज करने की अलग प्रक्रिया है। नामांतरण की स्थिति और आवश्यक दस्तावेज मध्य प्रदेश के राजस्व सेवा पोर्टल या संबंधित कार्यालय से जांचे जा सकते हैं।</p>
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