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	<title>Jain Religious Festival &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<title>Jain Religious Festival &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<item>
		<title>लखनऊ में 11 से 16 नवंबर तक भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव, जैन मंदिर की रजत जयंती पर होंगे विशेष आयोजन</title>
		<link>https://swarajvani.com/lucknow-panchkalyanak-pratishtha-mahotsav-2026/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Oct 2026 08:27:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[लखनऊ के आशियाना जैन मंदिर में 11 से 16 नवंबर 2026 तक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव होगा। उपाध्याय विहसंतसागरजी के सान्निध्य में धार्मिक आयोजन होंगे। लखनऊ में 11 से 16 नवंबर ... <a title="लखनऊ में 11 से 16 नवंबर तक भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव, जैन मंदिर की रजत जयंती पर होंगे विशेष आयोजन" class="read-more" href="https://swarajvani.com/lucknow-panchkalyanak-pratishtha-mahotsav-2026/" aria-label="Read more about लखनऊ में 11 से 16 नवंबर तक भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव, जैन मंदिर की रजत जयंती पर होंगे विशेष आयोजन">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;">लखनऊ के आशियाना जैन मंदिर में 11 से 16 नवंबर 2026 तक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव होगा। उपाध्याय विहसंतसागरजी के सान्निध्य में धार्मिक आयोजन होंगे।</p>
<p>लखनऊ में 11 से 16 नवंबर तक भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव, जैन मंदिर की रजत जयंती पर होंगे विशेष आयोजन</p>
<p>उपाध्यायश्री विहसंतसागरजी महाराज के सान्निध्य में होगा छह दिवसीय आयोजन, 13 नवंबर को जन्मकल्याणक पर निकलेगी भव्य शोभायात्रा</p>
<p>मुरैना/लखनऊ (मनोज जैन नायक)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आशियाना क्षेत्र स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर की स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 11 से 16 नवंबर 2026 तक श्री आदिवीर चौबीसी मानस्तंभ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। अहिंसा मार्ग, एम-सेक्टर, आशियाना में आयोजित होने वाले इस छह दिवसीय धार्मिक महोत्सव को लेकर सकल दिगम्बर जैन समाज में उत्साह का वातावरण है।</p>
<p>समाधिस्थ गणाचार्य श्री विरागसागरजी महाराज के परम प्रभावक आज्ञानुवर्ती शिष्य एवं मेडिटेशन गुरु उपाध्यायश्री विहसंतसागरजी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य और निर्देशन में यह धार्मिक आयोजन संपन्न होगा। महोत्सव में देशभर से श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।</p>
<p>छह दिनों तक होंगे पंचकल्याणक के धार्मिक अनुष्ठान</p>
<p>महोत्सव के अंतर्गत 11 नवंबर को गर्भकल्याणक की पूर्व बेला, 12 नवंबर को गर्भकल्याणक, 13 नवंबर को जन्मकल्याणक, 14 नवंबर को तपकल्याणक, 15 नवंबर को ज्ञानकल्याणक और 16 नवंबर को मोक्षकल्याणक के धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।</p>
<p>इन छह दिनों में जिनेंद्र भगवान की आराधना, पूजन, धार्मिक विधान और विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। श्रद्धालुओं को जैन धर्म के अहिंसा, संयम, तप, त्याग और आत्मकल्याण के सिद्धांतों से परिचित कराया जाएगा।</p>
<p>13 नवंबर को जन्मकल्याणक पर निकलेगी भव्य शोभायात्रा</p>
<p>महोत्सव का प्रमुख आकर्षण शुक्रवार, 13 नवंबर को आयोजित जन्मकल्याणक महोत्सव रहेगा। जैन परंपरा के अनुसार भगवान के जन्म के पश्चात सौधर्म इंद्र द्वारा तीर्थंकर बालक को पाण्डुक शिला पर विराजमान कर जलाभिषेक किया जाएगा। इस अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।</p>
<p>इसके बाद 14 नवंबर को तपकल्याणक, 15 नवंबर को ज्ञानकल्याणक तथा 16 नवंबर को मोक्षकल्याणक के धार्मिक कार्यक्रमों के साथ महोत्सव का समापन होगा।</p>
<p>जैन धर्म में पंचकल्याणक का विशेष आध्यात्मिक महत्व</p>
<p>जैन दर्शन में पंचकल्याणक तीर्थंकर भगवान के जीवन की पांच महत्वपूर्ण अवस्थाओं का प्रतीक है। गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान और मोक्षकल्याणक के माध्यम से श्रद्धालुओं को आत्मशुद्धि, संयम, अहिंसा और मोक्षमार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सकल जैन समाज से सहभागिता की अपील</p>
<p>श्री पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति एवं सकल दिगम्बर जैन समाज, लखनऊ ने सभी साधर्मी बंधुओं से सपरिवार एवं इष्ट मित्रों सहित आयोजन में शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त करने की अपील की है।</p>
<blockquote><p>आयोजकों के अनुसार श्री दिगम्बर जैन मंदिर की 25वीं रजत जयंती पर आयोजित यह महोत्सव धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक साधना और सामाजिक एकता का महत्वपूर्ण अवसर बनेगा।</p></blockquote>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>आर्यिका संगममति माताजी के ससंघ सानिध्य में सिहोनियां महोत्सव पत्रिका का विमोचन</title>
		<link>https://swarajvani.com/sihoniya-mahamastakabhishek-festival-brochure-released-in-the-presence-of-aryika-sangammati/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Sep 2026 10:58:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[JAINS]]></category>
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					<description><![CDATA[आर्यिका संगममति माताजी के ससंघ सानिध्य में सिहोनियां महोत्सव पत्रिका का विमोचन 28 सितंबर को वार्षिक मेला एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव, श्रद्धालुओं से अधिकाधिक सहभागिता का आह्वान संवाददाता; मनोज जैन नायक ... <a title="आर्यिका संगममति माताजी के ससंघ सानिध्य में सिहोनियां महोत्सव पत्रिका का विमोचन" class="read-more" href="https://swarajvani.com/sihoniya-mahamastakabhishek-festival-brochure-released-in-the-presence-of-aryika-sangammati/" aria-label="Read more about आर्यिका संगममति माताजी के ससंघ सानिध्य में सिहोनियां महोत्सव पत्रिका का विमोचन">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>आर्यिका संगममति माताजी के ससंघ सानिध्य में सिहोनियां महोत्सव पत्रिका का विमोचन</strong></h1>
<h2><strong>28 सितंबर को वार्षिक मेला एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव, श्रद्धालुओं से अधिकाधिक सहभागिता का आह्वान</strong></h2>
<p><strong>संवाददाता; मनोज जैन नायक</strong></p>
<p><strong>मुरैना/अम्बाह।</strong> जैन समाज के प्रमुख तीर्थ एवं ऐतिहासिक अतिशय क्षेत्र सिहोनियां में आगामी 28 सितंबर, सोमवार को आयोजित होने वाले वार्षिक मेले एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में महोत्सव की मांगलिक कार्यक्रम पत्रिका का विमोचन बुधवार को जैन बगीची, अम्बाह में किया गया।</p>
<p>पत्रिका का विमोचन आचार्यश्री सिद्धांत सागर महाराज की शिष्या गुरुमां आर्यिका रत्न 105 श्री संगममति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में हुआ। कार्यक्रम में अतिशय क्षेत्र सिहोनियां कमेटी के पदाधिकारी एवं सदस्य सहित अम्बाह जैन समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।</p>
<h2><strong>माताजी से प्राप्त किया मंगल आशीर्वाद</strong></h2>
<p>महोत्सव पत्रिका के विमोचन अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने आर्यिका संगममति माताजी के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। धार्मिक वातावरण में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भगवान के जयकारे लगाए गए और आगामी आयोजन की सफलता की कामना की गई।</p>
<p>इस दौरान 28 सितंबर को होने वाले वार्षिक मेले एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव की तैयारियों को लेकर भी चर्चा की गई। कमेटी के सदस्यों ने आयोजन के विभिन्न पक्षों पर विचार करते हुए इसे व्यवस्थित और भव्य तरीके से संपन्न कराने का संकल्प लिया। समाज के लोगों ने महोत्सव की जानकारी अधिक से अधिक श्रद्धालुओं तक पहुंचाने और आयोजन में व्यापक सहभागिता सुनिश्चित करने का निर्णय लिया।</p>
<h2><strong>प्राचीन प्रतिमाओं का होगा महामस्तकाभिषेक</strong></h2>
<p>वार्षिक मेले के दौरान भगवान शांतिनाथ, कुंथुनाथ एवं अरहनाथ स्वामी की प्राचीन प्रतिमाओं का विधि-विधान के साथ महामस्तकाभिषेक किया जाएगा। यह धार्मिक आयोजन आर्यिका रत्न 105 श्री संगममति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में संपन्न होगा।</p>
<p>महामस्तकाभिषेक के साथ विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, पूजन और मांगलिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजन में स्थानीय क्षेत्र के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। कमेटी द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधाओं और धार्मिक कार्यक्रमों के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।</p>
<h2><strong>जैन समाज का प्रमुख तीर्थ है सिहोनियां</strong></h2>
<p>अतिशय क्षेत्र सिहोनियां मुरैना जिला मुख्यालय से करीब 33 किलोमीटर दूर स्थित है। यह जैन समाज का प्रमुख धार्मिक तीर्थ और ऐतिहासिक अतिशय क्षेत्र माना जाता है। यहां भगवान शांतिनाथ, भगवान कुंथुनाथ और भगवान अरहनाथ स्वामी की अति प्राचीन पाषाण प्रतिमाएं विराजमान हैं।</p>
<p>उपलब्ध ऐतिहासिक और पुरातात्विक विवरणों के अनुसार इन प्रतिमाओं का इतिहास कई शताब्दियों पुराना माना जाता है। अपनी प्राचीनता, भव्यता और धार्मिक महत्व के कारण यह क्षेत्र जैन श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन, पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए पहुंचते हैं।</p>
<h2><strong>16 फुट ऊंची है भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा</strong></h2>
<p>अतिशय क्षेत्र के मुख्य मंदिर में भगवान शांतिनाथ स्वामी की लगभग 16 फुट ऊंची भव्य प्रतिमा विराजमान है, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण और आस्था का प्रमुख केंद्र है। इसके अतिरिक्त भगवान कुंथुनाथ एवं भगवान अरहनाथ स्वामी की लगभग 11-11 फुट ऊंची विशाल पाषाण प्रतिमाएं भी यहां विराजित हैं।</p>
<p>इन प्राचीन प्रतिमाओं की कलात्मकता और विशाल स्वरूप श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं। क्षेत्र में प्रतिमाओं के प्राकट्य से जुड़ी विभिन्न धार्मिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं। इन्हीं मान्यताओं और मंदिर के धार्मिक महत्व के कारण सिहोनियां को अतिशय क्षेत्र के रूप में विशेष पहचान प्राप्त है।</p>
<h2><strong>तैयारियों में जुटी आयोजन कमेटी</strong></h2>
<p>अतिशय क्षेत्र सिहोनियां कमेटी वार्षिक मेले और महामस्तकाभिषेक महोत्सव को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने की तैयारियों में जुटी हुई है। आयोजन के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों के साथ श्रद्धालुओं के आगमन, दर्शन और पूजन से संबंधित व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।</p>
<p>पत्रिका विमोचन कार्यक्रम में टिल्लू जैन, विवेक जैन, नीलेश जैन, संजय जैन, रवि जैन, उमेश जैन, संजू जैन, पिंटू जैन, मुकेश जैन, अनिल जैन, कुशांक जैन और राजीव जैन सिहोनियां सहित कमेटी के सदस्य तथा अम्बाह जैन समाज के श्रद्धालु उपस्थित रहे।</p>
<h2><strong>श्रद्धालुओं से धर्मलाभ लेने की अपील</strong></h2>
<p>कमेटी ने अम्बाह, मुरैना सहित देशभर के जैन समाज और श्रद्धालुओं से 28 सितंबर को आयोजित वार्षिक मेले एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की है। कमेटी ने कहा कि श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर पुण्यार्जन एवं धर्मलाभ प्राप्त करें और आयोजन को सफल बनाने में सहयोग प्रदान करें।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आगरा में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारियां शुरू, जैन समाज के प्रत्येक परिवार को जोड़ने का संकल्प</title>
		<link>https://swarajvani.com/preparations-begin-for-panchkalyanak-pratishtha-mahotsav-in-agra-jain-community-resolves-to-ensure-participation-of-every/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Sep 2026 08:49:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगरा में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारियां शुरू, जैन समाज के प्रत्येक परिवार को जोड़ने का संकल्प 14 से 19 फरवरी 2027 तक उपाध्याय श्री विहसन्त सागर जी महाराज के ... <a title="आगरा में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारियां शुरू, जैन समाज के प्रत्येक परिवार को जोड़ने का संकल्प" class="read-more" href="https://swarajvani.com/preparations-begin-for-panchkalyanak-pratishtha-mahotsav-in-agra-jain-community-resolves-to-ensure-participation-of-every/" aria-label="Read more about आगरा में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारियां शुरू, जैन समाज के प्रत्येक परिवार को जोड़ने का संकल्प">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>आगरा में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारियां शुरू, जैन समाज के प्रत्येक परिवार को जोड़ने का संकल्प</strong></h1>
<h2><strong>14 से 19 फरवरी 2027 तक उपाध्याय श्री विहसन्त सागर जी महाराज के सान्निध्य में होगा आयोजन, प्रथम बैठक में समिति के प्रमुख पदाधिकारी नियुक्त</strong></h2>
<p><strong>रिपोर्टर: मनोज जैन नायक</strong></p>
<p><strong>मुरैना/आगरा।</strong> धर्मनगरी आगरा के अवधपुरी स्थित श्री पद्मप्रभु जिनालय में आगामी 14 से 19 फरवरी 2027 तक आयोजित होने वाले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारियों का विधिवत शुभारंभ हो गया है। यह धार्मिक आयोजन मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसन्त सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में संपन्न होगा। महोत्सव को भव्य, अनुशासित और सर्वसमावेशी स्वरूप प्रदान करने के उद्देश्य से समाज की प्रथम महत्वपूर्ण बैठक नारायण भवन, एमडी जैन इंटर कॉलेज परिसर, हरिपर्वत में आयोजित की गई।</p>
<p>बैठक में ग्रेटर मारुति एस्टेट, श्री पद्मप्रभु जिनालय और आगरा के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े जैन समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। उपस्थित समाजबंधुओं ने महोत्सव की प्रारंभिक रूपरेखा, व्यवस्थाओं, प्रचार-प्रसार और समाज के प्रत्येक परिवार की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विचार-विमर्श किया।</p>
<h2><strong>पूरे आगरा जैन समाज का होगा महोत्सव</strong></h2>
<p>बैठक में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव किसी एक मंदिर, क्षेत्र अथवा संस्था का आयोजन बनकर सीमित नहीं रहे। इसे आगरा के संपूर्ण जैन समाज का साझा धार्मिक महोत्सव बनाया जाए।</p>
<p>समाजबंधुओं ने संकल्प लिया कि आगरा के प्रत्येक क्षेत्र, जिनालय और परिवार तक व्यक्तिगत रूप से पहुंचकर उन्हें आयोजन की जानकारी दी जाएगी। महिलाओं, युवाओं, बच्चों और वरिष्ठजनों सहित समाज के प्रत्येक वर्ग को महोत्सव की गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।</p>
<p>आयोजकों ने कहा कि समाज की व्यापक सहभागिता से ही महोत्सव को अपेक्षित भव्यता प्रदान की जा सकती है। इसके लिए आगरा के अलग-अलग क्षेत्रों में संपर्क अभियान चलाने और धार्मिक संस्थाओं के पदाधिकारियों से समन्वय स्थापित करने की योजना बनाई जाएगी।</p>
<h2><strong>आयोजन समिति के प्रमुख पदाधिकारी नियुक्त</strong></h2>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="wp-image-357970 alignright" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/hkhj-300x193.jpeg" alt="hkhj" width="546" height="351" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/hkhj-300x193.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/hkhj-768x493.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/hkhj.jpeg 782w" sizes="(max-width: 546px) 100vw, 546px" /><span style="font-size: inherit;">महोत्सव की व्यवस्थाओं का सुचारु संचालन करने के लिए पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के मुख्य पदाधिकारियों की घोषणा भी बैठक में की गई। सर्वसम्मति से रोहित जैन ‘अहिंसा’ को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। पारस जैन को उपाध्यक्ष और सुनील जैन ‘ठेकेदार’ को महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई।</span></p>
<p>इन्द्र प्रकाश जैन को कोषाध्यक्ष तथा अनंत जैन को मुख्य संयोजक बनाया गया। महिला मंडल की ओर से रश्मि जैन और करुणा जैन को मुख्य संयोजिका का दायित्व दिया गया है। समिति की शेष कार्यकारिणी और विभिन्न उपसमितियों का गठन शीघ्र किया जाएगा।</p>
<p>पदाधिकारियों ने कहा कि आयोजन से संबंधित प्रत्येक व्यवस्था को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। अलग-अलग कार्यों के लिए योग्य और सक्रिय समाजबंधुओं को जिम्मेदारियां देकर तैयारियों को आगे बढ़ाया जाएगा।</p>
<h2><strong>व्यवस्थाओं के लिए बनाई जाएंगी अलग-अलग समितियां</strong></h2>
<p>आगामी बैठकों में आवास, भोजन, यातायात, अतिथि सत्कार, मंच, धार्मिक अनुष्ठान, प्रचार-प्रसार, चिकित्सा, सुरक्षा, स्वच्छता और स्वयंसेवक व्यवस्था के लिए अलग-अलग समितियों का गठन किया जा सकता है। इन समितियों के माध्यम से महोत्सव के प्रत्येक कार्यक्रम का व्यवस्थित संचालन सुनिश्चित किया जाएगा।</p>
<p>बाहर से आने वाले साधु-संतों, विद्वानों, अतिथियों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तैयारियां पहले से करने पर भी जोर दिया गया। आयोजन स्थल और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई, पेयजल तथा यातायात व्यवस्था के लिए संबंधित पक्षों से समन्वय किया जाएगा।</p>
<h2><strong>तन-मन-धन से सहयोग का आह्वान</strong></h2>
<p>बैठक में जैन समाज के सभी परिवारों से सपरिवार महोत्सव में सहभागी बनने की अपील की गई। समाजबंधुओं से आयोजन को सफल बनाने के लिए तन, मन और धन से सहयोग प्रदान करने का आह्वान किया गया।</p>
<p>पदाधिकारियों ने कहा कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन नहीं है, बल्कि यह समाज को एकजुट करने, नई पीढ़ी को धर्म एवं संस्कारों से जोड़ने और भगवान के पंचकल्याणकों का आध्यात्मिक महत्व समझाने का अवसर भी है।</p>
<p>युवाओं को आयोजन की व्यवस्थाओं और सेवा कार्यों में सक्रिय भूमिका देने की योजना बनाई जा रही है। महिला मंडल को धार्मिक, सांस्कृतिक और सेवा गतिविधियों से संबंधित महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। बच्चों के लिए भी धर्म और संस्कार से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करने पर विचार किया जाएगा।</p>
<h2><strong>बड़ी संख्या में समाजबंधु रहे उपस्थित</strong></h2>
<p>बैठक में श्री पद्मप्रभु जिनालय के अध्यक्ष प्रवीण जैन, महामंत्री विवेक जैन, कला कुंज मंदिर के अध्यक्ष रविन्द्र जैन, उपमंत्री आदित्य जैन, वीरेंद्र जैन ‘इक्के वाले’, अजीत जैन ‘चांदी’, अंकेश जैन, विपिन जैन-जैन सर्जिकल, अजय जैन, रवि जैन, नरेंद्र जैन, सुबोध जैन और राकेश जैन उपस्थित रहे।</p>
<p>इस अवसर पर नवकार युवा मंडल के अध्यक्ष संजय जैन के साथ उद्भव जैन, पीयूष जैन, सौरभ जैन, जितेंद्र जैन और दमन जैन सहित बड़ी संख्या में समाजबंधुओं ने सहभागिता की। सभी ने आयोजन को सफल बनाने के लिए हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया।</p>
<p>महिला मंडल की ओर से अध्यक्ष श्रीमती कविता जैन, मंत्री श्रीमती हेमलता जैन, वंदना जैन, रंजना जैन, पुष्पा जैन, रीता जैन, शालू जैन, अंजू जैन और ममता जैन सहित अनेक महिलाओं ने बैठक में भाग लिया। महिला सदस्यों ने महोत्सव के प्रचार, धार्मिक कार्यक्रमों और सेवा व्यवस्थाओं में सक्रिय योगदान देने का संकल्प व्यक्त किया।</p>
<h2><strong>आत्मकल्याण और धर्म प्रभावना का बनेगा माध्यम</strong></h2>
<p><img decoding="async" class="wp-image-357973 alignright" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/jhkhjkh-300x185.jpeg" alt="jhkhjkh" width="542" height="334" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/jhkhjkh-300x185.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/jhkhjkh-768x475.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/jhkhjkh.jpeg 838w" sizes="(max-width: 542px) 100vw, 542px" /><span style="font-size: inherit;">प्रथम बैठक के साथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारियों ने औपचारिक रूप से गति पकड़ ली है। आगामी दिनों में नियमित बैठकों के माध्यम से कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा तैयार की जाएगी और विभिन्न व्यवस्थाओं की जिम्मेदारियां तय की जाएंगी।</span></p>
<p>आयोजकों का लक्ष्य है कि आगरा का प्रत्येक जिनालय, प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक जैन परिवार इस धर्ममय आयोजन से जुड़े। समाज को विश्वास है कि उपाध्याय श्री विहसन्त सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में होने वाला यह पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव आत्मकल्याण, सामाजिक एकता और व्यापक धर्म प्रभावना का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।</p>
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		<title>जैन बगीची में दस लक्षण महापर्व की रहेगी धूम, आर्यिका संगममति माताजी के सान्निध्य में होगी धर्माराधना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Sep 2026 10:51:43 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Ambah Jain Samaj]]></category>
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					<description><![CDATA[जैन बगीची में दस लक्षण महापर्व की रहेगी धूम, आर्यिका संगममति माताजी के सान्निध्य में होगी धर्माराधना दस दिनों तक उत्तम क्षमा से उत्तम ब्रह्मचर्य तक धर्म के दस लक्षणों ... <a title="जैन बगीची में दस लक्षण महापर्व की रहेगी धूम, आर्यिका संगममति माताजी के सान्निध्य में होगी धर्माराधना" class="read-more" href="https://swarajvani.com/dashlakshan-mahaparva-to-be-celebrated-at-jain-bagichi-in-the-presence-of-aryika-sangammati-mataji/" aria-label="Read more about जैन बगीची में दस लक्षण महापर्व की रहेगी धूम, आर्यिका संगममति माताजी के सान्निध्य में होगी धर्माराधना">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>जैन बगीची में दस लक्षण महापर्व की रहेगी धूम, आर्यिका संगममति माताजी के सान्निध्य में होगी धर्माराधना</strong></h1>
<h2><strong>दस दिनों तक उत्तम क्षमा से उत्तम ब्रह्मचर्य तक धर्म के दस लक्षणों की होगी आराधना, अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय और मंगल प्रवचन में शामिल होंगे श्रद्धालु</strong></h2>
<p><strong>संवाददाता: मनोज जैन नायक</p>
<p>मुरैना।</strong> जैन धर्म के पावन दस लक्षण महापर्व को लेकर अम्बाह के जैन समाज में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का वातावरण बना हुआ है। जैन बगीची परिसर में परम पूज्य गणिनी आर्यिका श्री 105 संगममति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में महापर्व मनाया जाएगा। इस दौरान दस दिनों तक विभिन्न धार्मिक क्रियाएं, पूजन, स्वाध्याय और धर्माराधना के कार्यक्रम आयोजित होंगे।</p>
<p>प्रतिदिन बड़ी संख्या में समाजजन जैन बगीची पहुंचकर भगवान जिनेंद्र देव का अभिषेक, पूजन और आराधना करेंगे। आर्यिका संगममति माताजी अपने मंगल प्रवचनों के माध्यम से दस लक्षण धर्म का आध्यात्मिक महत्व समझाते हुए श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देंगी।</p>
<p>पर्व के दौरान महिला-पुरुषों के साथ युवा और बच्चे भी धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे। समाज की ओर से आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।</p>
<h2><strong>दस दिनों में दस धर्मों की आराधना</strong></h2>
<p>दस लक्षण महापर्व के प्रत्येक दिन एक विशेष धर्म की आराधना की जाती है। दस दिनों में क्रमशः उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन्य और उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का चिंतन किया जाएगा।</p>
<p>आर्यिका संगममति माताजी इन धर्मों के वास्तविक अर्थ और जीवन में उनके व्यावहारिक महत्व को सरल भाषा में समझाएंगी। श्रद्धालुओं को बताया जाएगा कि दस लक्षण धर्म केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि ये सिद्धांत मनुष्य को अपने विचार, व्यवहार और आचरण को शुद्ध बनाने की प्रेरणा देते हैं।</p>
<p>समाजजनों के अनुसार महापर्व का उद्देश्य व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद दोषों की पहचान करने और उन्हें दूर करने का अवसर देना है। इसके माध्यम से मनुष्य क्षमा, विनम्रता, सरलता, सत्य, संयम और त्याग जैसे सद्गुणों को जीवन में अपनाने का संकल्प लेता है।</p>
<h2><strong>आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का अवसर</strong></h2>
<p>आर्यिका संगममति माताजी ने कहा कि दस लक्षण महापर्व केवल धार्मिक क्रियाओं का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का महत्वपूर्ण अवसर है। व्यक्ति को इस दौरान बाहरी गतिविधियों से अधिक अपने आंतरिक भावों पर ध्यान देना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मनुष्य के भीतर मौजूद क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे विकार आत्मिक शांति में बाधा बनते हैं। इन कषायों को कम करके क्षमा, सरलता, सत्य, संयम, त्याग और तप जैसे गुणों को धारण करना ही धर्माराधना की वास्तविक दिशा है।</p>
<p>धार्मिक अनुष्ठानों की सार्थकता तभी है, जब उनके माध्यम से व्यक्ति के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन आए। पूजा-अर्चना के साथ मन, वचन और कर्म की शुद्धता पर भी ध्यान देना आवश्यक है।</p>
<h2><strong>प्रातःकाल से बनेगा भक्तिमय वातावरण</strong></h2>
<p>दस लक्षण महापर्व के दौरान जैन बगीची परिसर में प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं की उपस्थिति शुरू हो जाएगी। भगवान जिनेंद्र देव के अभिषेक और पूजन के साथ दिन के धार्मिक कार्यक्रम प्रारंभ होंगे।</p>
<p>श्रद्धालु स्वाध्याय के माध्यम से जैन आगम एवं धर्म के सिद्धांतों को समझेंगे। इसके बाद आर्यिका संगममति माताजी के मंगल प्रवचनों का लाभ प्राप्त करेंगे। प्रवचनों में आत्मसंयम, अहिंसा, क्षमा, सत्य, तपस्या और सदाचार से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा।</p>
<p>समाज के वरिष्ठजन भी बच्चों और युवाओं को धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व समझाएंगे। उन्हें पूजा की विधि, जैन धर्म के मूल सिद्धांत और दस लक्षण धर्म के व्यावहारिक स्वरूप से परिचित कराया जाएगा।</p>
<h2><strong>महिला, पुरुष, युवा और बच्चे करेंगे सहभागिता</strong></h2>
<p><img decoding="async" class="wp-image-357729 alignright" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dfdd-284x300.jpeg" alt="dfdd" width="320" height="338" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dfdd-284x300.jpeg 284w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dfdd-970x1024.jpeg 970w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dfdd-768x811.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dfdd.jpeg 1079w" sizes="(max-width: 320px) 100vw, 320px" /><span style="font-size: inherit;">महापर्व में जैन समाज के सभी वर्गों की सहभागिता रहेगी। महिलाएं पूजा और धार्मिक गतिविधियों में भाग लेंगी, जबकि युवा एवं बच्चे भी स्वाध्याय और अन्य कार्यक्रमों से जुड़ेंगे।</span></p>
<p>समाजजनों का कहना है कि नई पीढ़ी को धार्मिक संस्कारों से जोड़ना वर्तमान समय की आवश्यकता है। यदि बच्चों को प्रारंभ से ही अहिंसा, सत्य, क्षमा, करुणा और संयम का महत्व समझाया जाए तो वे जिम्मेदार एवं संवेदनशील नागरिक बन सकते हैं।</p>
<p>दस लक्षण महापर्व इसके लिए उपयुक्त अवसर है। दस दिनों तक चलने वाली धर्माराधना से युवाओं को जैन दर्शन को जानने और उसके सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाने की प्रेरणा मिलेगी।</p>
<h2><strong>क्षमा और विनम्रता का संदेश देता है पर्व</strong></h2>
<p>पर्व के प्रथम धर्म उत्तम क्षमा के माध्यम से मनुष्य को क्रोध और प्रतिशोध की भावना छोड़ने की प्रेरणा मिलती है। उत्तम मार्दव अहंकार से दूर रहकर विनम्र बनने का संदेश देता है, जबकि उत्तम आर्जव मन, वचन और कर्म में सरलता अपनाने की प्रेरणा देता है।</p>
<p>उत्तम शौच आंतरिक पवित्रता, उत्तम सत्य सत्यपूर्ण जीवन और उत्तम संयम इंद्रियों पर नियंत्रण का महत्व बताता है। उत्तम तप आत्मशुद्धि, उत्तम त्याग आसक्ति कम करने और उत्तम आकिंचन्य बाहरी वस्तुओं के प्रति मोह छोड़ने का संदेश देता है। उत्तम ब्रह्मचर्य आत्मा में स्थिर रहने और सदाचारी जीवन जीने की प्रेरणा देता है।</p>
<p>इन दस धर्मों का चिंतन मनुष्य को अपने जीवन का मूल्यांकन करने और गलतियों को सुधारने का अवसर प्रदान करता है।</p>
<h2><strong>समापन पर होंगे विशेष धार्मिक कार्यक्रम</strong></h2>
<p>दस दिवसीय महापर्व के समापन अवसर पर जैन बगीची परिसर में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा समाज की ओर से तैयार की जा रही है।</p>
<p>समाजजनों ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से दस लक्षण महापर्व के कार्यक्रमों में शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त करने की अपील की है। उनका कहना है कि सामूहिक धर्माराधना से समाज में एकता, सद्भाव और धार्मिक संस्कार मजबूत होते हैं।</p>
<p>आर्यिका संगममति माताजी ससंघ के सान्निध्य में आयोजित होने वाला दस लक्षण महापर्व अम्बाह के जैन समाज के लिए विशेष धार्मिक अवसर होगा। श्रद्धालु दस दिनों तक आत्मसंयम, त्याग, तप और सदाचार की साधना करते हुए भगवान जिनेंद्र देव की आराधना करेंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>सिहोनियांजी में 28 सितंबर को लगेगा वार्षिक मेला, अतिप्राचीन प्रतिमाओं का होगा महामस्तकाभिषेक</title>
		<link>https://swarajvani.com/annual-fair-and-mahamastakabhishek-festival-to-be-held-at-sihoniyaji-on-september-28/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Sep 2026 13:37:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[सिहोनियांजी में 28 सितंबर को लगेगा वार्षिक मेला, अतिप्राचीन प्रतिमाओं का होगा महामस्तकाभिषेक भगवान शांतिनाथ, कुंथनाथ एवं अरहनाथ स्वामी की प्रतिमाओं का होगा अभिषेक, आर्यिका संगममति माताजी ससंघ का मिलेगा ... <a title="सिहोनियांजी में 28 सितंबर को लगेगा वार्षिक मेला, अतिप्राचीन प्रतिमाओं का होगा महामस्तकाभिषेक" class="read-more" href="https://swarajvani.com/annual-fair-and-mahamastakabhishek-festival-to-be-held-at-sihoniyaji-on-september-28/" aria-label="Read more about सिहोनियांजी में 28 सितंबर को लगेगा वार्षिक मेला, अतिप्राचीन प्रतिमाओं का होगा महामस्तकाभिषेक">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>सिहोनियांजी में 28 सितंबर को लगेगा वार्षिक मेला, अतिप्राचीन प्रतिमाओं का होगा महामस्तकाभिषेक</strong></h1>
<h2><strong>भगवान शांतिनाथ, कुंथनाथ एवं अरहनाथ स्वामी की प्रतिमाओं का होगा अभिषेक, आर्यिका संगममति माताजी ससंघ का मिलेगा पावन सान्निध्य</strong></h2>
<p><strong>मनोज जैन नायक</strong></p>
<p><strong>मुरैना/सिहोनियांजी।</strong> जैन धर्मावलंबियों के प्रमुख तीर्थ एवं ऐतिहासिक अतिशय क्षेत्र श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र सिहोनियांजी में सोमवार, 28 सितंबर 2026 को वार्षिक मेला एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव आयोजित किया जाएगा। क्वार वदी दोज के अवसर पर होने वाले इस आयोजन में भगवान शांतिनाथ स्वामी सहित मूलनायक भगवान कुंथनाथ और अरहनाथ स्वामी की अतिप्राचीन प्रतिमाओं का श्रद्धापूर्वक महामस्तकाभिषेक किया जाएगा।</p>
<p>महोत्सव के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश सहित आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कमेटी ने सभी साधर्मी बंधुओं से महोत्सव में शामिल होकर धर्मलाभ लेने की अपील की है।</p>
<h2><strong>ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व का प्रमुख तीर्थ</strong></h2>
<p>मुरैना जिला मुख्यालय से करीब 33 किलोमीटर दूर स्थित सिहोनियांजी जैन समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र है। धार्मिक महत्व के साथ यह क्षेत्र ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक दृष्टि से भी विशेष स्थान रखता है। यहां भूगर्भ से प्रकट हुईं अतिप्राचीन और अतिशयकारी जैन प्रतिमाएं आज भी उसी स्थान पर विराजमान हैं, जहां से वे प्राप्त हुई थीं।</p>
<p>क्षेत्र में मिले शिलालेखों, साहित्यिक प्रमाणों और पुरातात्विक अध्ययनों के आधार पर इन प्रतिमाओं का इतिहास 11वीं शताब्दी से जुड़ा माना जाता है। प्रतिमाओं के दर्शन करने के लिए वर्षभर देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु सिहोनियांजी पहुंचते हैं।</p>
<h2><strong>16 फुट ऊंची भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा</strong></h2>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-355696 alignright" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/erter-300x225.jpeg" alt="erter" width="353" height="265" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/erter-300x225.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/erter-1024x768.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/erter-768x576.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/erter-1536x1152.jpeg 1536w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/erter.jpeg 1600w" sizes="auto, (max-width: 353px) 100vw, 353px" /><span style="font-size: inherit;">मुख्य मंदिर के विशाल एवं भव्य हॉल में तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ स्वामी की 16 फुट ऊंची मनोहारी पाषाण प्रतिमा विराजमान है। उनके दोनों ओर भगवान कुंथनाथ स्वामी और भगवान अरहनाथ स्वामी की 11-11 फुट ऊंची प्रतिमाएं स्थापित हैं।</span></p>
<p>इन तीनों विशाल एवं प्राचीन प्रतिमाओं के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। सिहोनियांजी की प्रमुख विशेषता यह है कि भूगर्भ से प्राप्त इन प्रतिमाओं को उनके प्राकट्य स्थल पर ही प्रतिष्ठित कर विराजमान किया गया है।</p>
<h2><strong>परिसर में अनेक प्राचीन जिनालय</strong></h2>
<p>मुख्य मंदिर के परकोटे में श्री समवसरण जिनालय, श्री पार्श्वनाथ जिनालय, श्री पद्मप्रभु जिनालय और श्री नेमीनाथ जिनालय स्थित हैं। इन जिनालयों में अनेक प्राचीन जैन प्रतिमाएं विराजमान हैं।</p>
<p>मुख्य मंदिर परिसर के बाहर विशाल एवं भव्य श्री कमल मंदिर, श्री नेमीनाथ जिनालय और भगवान शांतिनाथ स्वामी की 31 फुट ऊंची मनोहारी प्रतिमा भी स्थापित की गई है। श्री समवसरण जिनालय और कमल मंदिर में श्री चौबीसी का निर्माण कराया गया है। विशाल परकोटे में स्थापित पांच भव्य मानस्तंभों का समूह तीर्थ क्षेत्र की सुंदरता एवं धार्मिक गरिमा को और बढ़ाता है।</p>
<h2><strong>प्रातःकाल से शुरू होंगे धार्मिक अनुष्ठान</strong></h2>
<p>वार्षिक मेले के अवसर पर परम पूज्य आर्यिका संगममति माताजी ससंघ का पावन सान्निध्य प्राप्त होगा। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकाल भगवान के अभिषेक, शांतिधारा और नित्यमह पूजन से होगा। इसके बाद श्री शांतिनाथ महामंडल विधान का भव्य आयोजन किया जाएगा।</p>
<p>दोपहर 2 बजे से मूलनायक भगवान शांतिनाथ, कुंथनाथ और अरहनाथ स्वामी की प्रतिमाओं का महामस्तकाभिषेक प्रारंभ होगा। श्रद्धालु भक्तिभाव के साथ भगवान का अभिषेक कर पुण्यार्जन करेंगे।</p>
<p>विधान एवं महामस्तकाभिषेक सहित सभी धार्मिक अनुष्ठान प्रतिष्ठाचार्य पंडित राजेंद्र जैन शास्त्री मगरौनी और संजय शास्त्री सिहोनियां के निर्देशन में मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ संपन्न कराए जाएंगे। कार्यक्रम के समापन के बाद आगंतुक साधर्मी बंधुओं के लिए आयोजकों की ओर से वात्सल्य भोज की व्यवस्था की जाएगी।</p>
<h2><strong>स्वप्न के बाद हुई थी प्रतिमाओं की खोज</strong></h2>
<p>सिहोनियांजी अतिशय क्षेत्र में विराजमान प्रतिमाओं के प्राकट्य का इतिहास अत्यंत रोचक बताया जाता है। स्थानीय ब्रह्मचारी श्री गुमानीलाल जैन भैयाजी को वर्ष 1937 में एक स्वप्न आया था। इसके बाद अम्बाह, मुरैना और आसपास के क्षेत्रों के समाजजनों ने संबंधित टीले की खुदाई कराई।</p>
<p>खुदाई के दौरान भूगर्भ से भगवान शांतिनाथ स्वामी की 16 फुट ऊंची तथा भगवान कुंथनाथ एवं अरहनाथ स्वामी की 11-11 फुट ऊंची पाषाण प्रतिमाएं प्राप्त हुईं। इन प्रतिमाओं को 11वीं शताब्दी से संबंधित माना जाता है।</p>
<p>खुदाई में अनेक खंडित प्रतिमाएं और अन्य पुरातात्विक सामग्री भी प्राप्त हुई थीं। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए क्षेत्र में संग्रहालय बनाया गया है। यहां आने वाले श्रद्धालु प्राचीन प्रतिमाओं के साथ क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत का भी अवलोकन कर सकते हैं।</p>
<h2><strong>श्रद्धालुओं के लिए आवास और भोजन की व्यवस्था</strong></h2>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-355697 alignright" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/rete-300x225.jpeg" alt="rete" width="477" height="358" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/rete-300x225.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/rete-1024x768.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/rete-768x576.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/rete-1536x1152.jpeg 1536w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/rete.jpeg 1600w" sizes="auto, (max-width: 477px) 100vw, 477px" /><span style="font-size: inherit;">तीर्थ क्षेत्र में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवास सहित विभिन्न आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। परिसर में एसी एवं डीलक्स कमरे, धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए हॉल, भोजनालय तथा कैंटीन की व्यवस्था है।</span></p>
<p>सिहोनियांजी ग्वालियर-भिंड राजमार्ग पर मालनपुर एवं वाराहेट मार्ग से ग्वालियर से करीब 55 किलोमीटर और मुरैना से लगभग 33 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मुरैना रेलवे स्टेशन के आसपास से सिहोनियांजी पहुंचने के लिए बस और टैक्सी जैसे परिवहन साधन उपलब्ध रहते हैं।</p>
<p>श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कमेटी ने जैन समाज और सभी साधर्मी बंधुओं से 28 सितंबर को आयोजित वार्षिक मेले एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर भगवान के दर्शन, पूजन और अभिषेक का धर्मलाभ लेने का आग्रह किया है।</p>
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