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	<title>International News &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<description>From politics and jobs to culture and community stories, we deliver timely, unbiased updates that matter.</description>
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	<title>International News &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>संयुक्त राष्ट्र महासभा से जुड़े कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे राज्यसभा सांसद नवीन जैन, न्यूयॉर्क में भारतीय संसदीय दल के साथ होंगे शामिल</title>
		<link>https://swarajvani.com/https-swarajvani-com-rajya-sabha-mp-naveen-jain-unga-new-york-2026/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Oct 2026 13:06:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[JAINS]]></category>
		<category><![CDATA[Agra MP Naveen Jain]]></category>
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					<description><![CDATA[राज्यसभा सांसद नवीन जैन 19 से 30 अक्टूबर 2026 तक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से जुड़े कार्यक्रम में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भाग लेंगे। संयुक्त राष्ट्र महासभा से ... <a title="संयुक्त राष्ट्र महासभा से जुड़े कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे राज्यसभा सांसद नवीन जैन, न्यूयॉर्क में भारतीय संसदीय दल के साथ होंगे शामिल" class="read-more" href="https://swarajvani.com/https-swarajvani-com-rajya-sabha-mp-naveen-jain-unga-new-york-2026/" aria-label="Read more about संयुक्त राष्ट्र महासभा से जुड़े कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे राज्यसभा सांसद नवीन जैन, न्यूयॉर्क में भारतीय संसदीय दल के साथ होंगे शामिल">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>राज्यसभा सांसद नवीन जैन 19 से 30 अक्टूबर 2026 तक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से जुड़े कार्यक्रम में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भाग लेंगे।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासभा से जुड़े कार्यक्रम में भारतीय संसदीय दल के साथ शामिल होंगे सांसद नवीन जैन</p>
<p>19 से 30 अक्टूबर तक अमेरिका प्रवास पर रहेंगे राज्यसभा सांसद, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ करेंगे सहभागिता</p>
<p>मुरैना। (मनोज जैन नायक) दैनिक स्वराज वाणी। आगरा के राज्यसभा सांसद नवीन जैन को न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly–UNGA) से संबंधित कार्यक्रम में भारतीय संसदीय दल के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में सहभागिता करने का अवसर प्राप्त हुआ है। इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में उनकी भागीदारी को भारतीय संसदीय परंपराओं और वैश्विक मंच पर भारत के प्रतिनिधित्व से जुड़े महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p>प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्यसभा सांसद नवीन जैन 19 अक्टूबर से 30 अक्टूबर 2026 तक अमेरिका प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से संबंधित कार्यक्रमों में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ सहभागिता करेंगे।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय मंच पर विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से संवाद का अवसर</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासभा से संबंधित कार्यक्रमों में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच वैश्विक मुद्दों पर चर्चा, विचारों का आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषयों पर संवाद का अवसर मिलता है।</p>
<p>सांसद नवीन जैन की इस सहभागिता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संसदीय प्रतिनिधित्व की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से जनप्रतिनिधियों को वैश्विक परिस्थितियों, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और विभिन्न देशों की नीतियों को समझने का अवसर प्राप्त होता है।</p>
<p>शुभचिंतकों और समर्थकों ने जताई प्रसन्नता</p>
<p>राज्यसभा सांसद नवीन जैन को भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल किए जाने की जानकारी मिलने पर उनके शुभचिंतकों, समर्थकों और सामाजिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों ने हर्ष व्यक्त किया।</p>
<p><a href="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/aa30efd5-2459-4a83-8f25-54efeb4056c7.jpeg"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-368255" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/aa30efd5-2459-4a83-8f25-54efeb4056c7.jpeg" alt="aa30efd5 2459 4a83 8f25 54efeb4056c7" width="712" height="989" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/aa30efd5-2459-4a83-8f25-54efeb4056c7.jpeg 712w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/aa30efd5-2459-4a83-8f25-54efeb4056c7-216x300.jpeg 216w" sizes="(max-width: 712px) 100vw, 712px" /></a></p>
<p>शुभचिंतकों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय संसदीय दल के साथ सहभागिता करना गौरवपूर्ण अवसर है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सांसद नवीन जैन इस कार्यक्रम में भारत के विचारों और संसदीय गरिमा का प्रतिनिधित्व करते हुए देश का गौरव बढ़ाएंगे।</p>
<p>सेवा न्यास परिवार सहित विभिन्न संगठनों ने दी शुभकामनाएं</p>
<p>सांसद नवीन जैन की इस उपलब्धि पर सेवा न्यास परिवार के अध्यक्ष प्रदीप जैन पीएनसी आगरा, कार्याध्यक्ष सीए कमलेश जैन गुरुग्राम, महामंत्री रविन्द्र जैन जमूसर भोपाल, रूपेश जैन उत्तमनगर, कोषाध्यक्ष सीए शैलेन्द्र जैन दिल्ली, जिनेश जैन अम्बाह, सुदीप जैन ग्रीनपार्क, युवा उद्यमी श्रेयांस जैन सन्नी अजमेर, सन्मति फाउंडेशन के महेंद्र जैन मधुवन, गोकुलचंद जैन दिल्ली, अजय जैन शिवपुरी और राजेंद्र भंडारी मुरैना ने हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।</p>
<p>सभी ने सांसद नवीन जैन के सफल अमेरिका प्रवास और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में सार्थक सहभागिता की कामना की।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>BreakingNews : नेपाल में बूढ़ी गंडकी नदी में फ्लैश फ्लड: 45 घर पूरी तरह नष्ट, 5 लोगों की मौत की खबर, 27 घरों को आंशिक नुकसान</title>
		<link>https://swarajvani.com/breakingnews-fresh-flash-flood-in-nepal-budhi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 12 Oct 2026 06:01:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[BreakingNews]]></category>
		<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[Budhi Gandaki]]></category>
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					<description><![CDATA[BreakingNews : नेपाल में बूढ़ी गंडकी नदी में फ्लैश फ्लड: 45 घर पूरी तरह नष्ट, 5 लोगों की मौत की खबर, 27 घरों को आंशिक नुकसान  पहली लहर की चेतावनी ... <a title="BreakingNews : नेपाल में बूढ़ी गंडकी नदी में फ्लैश फ्लड: 45 घर पूरी तरह नष्ट, 5 लोगों की मौत की खबर, 27 घरों को आंशिक नुकसान" class="read-more" href="https://swarajvani.com/breakingnews-fresh-flash-flood-in-nepal-budhi/" aria-label="Read more about BreakingNews : नेपाल में बूढ़ी गंडकी नदी में फ्लैश फ्लड: 45 घर पूरी तरह नष्ट, 5 लोगों की मौत की खबर, 27 घरों को आंशिक नुकसान">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2 dir="ltr"><strong>BreakingNews : नेपाल में बूढ़ी गंडकी नदी में फ्लैश फ्लड: 45 घर पूरी तरह नष्ट, 5 लोगों की मौत की खबर, 27 घरों को आंशिक नुकसान </strong></h2>
<p dir="ltr"><strong>पहली लहर की चेतावनी के बाद सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे लोग, बाद की दो भीषण लहरों में बड़ी जनहानि टली</strong></p>
<p dir="ltr"><strong>BreakingNews काठमांडू, 12 अक्टूबर।</strong> बीते दिनों भारी तबाही मचाने के बाद नेपाल में एक बार फिर बाढ़ ने कहर बरपाया है। बूढ़ी गंडकी नदी में आई फ्लैश फ्लड से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>चेतावनी के बाद समय रहते हटे लोग</strong></h3>
<p dir="ltr">बाढ़ की पहली लहर की चेतावनी मिलते ही नदी किनारे रहने वाले लोग सुरक्षित स्थानों पर चले गए। इसके बाद आई दो भीषण लहरों के दौरान बड़े पैमाने पर जनहानि होने से बच गई।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>45 घर पूरी तरह नष्ट, 5 की मौत की खबर</strong></h3>
<p dir="ltr">खबरों के मुताबिक, बाढ़ में 45 घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। 5 लोगों की मौत भी बताई जा रही है, जबकि 27 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।</p>
<p dir="ltr">
<p dir="ltr">
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>यूक्रेन को ड्रोन देने पर भड़का रूस, ब्रिटेन पर निकाला गुस्सा; कहा—यह साझेदारी नहीं, युद्ध को बढ़ावा</title>
		<link>https://swarajvani.com/russia-summons-uk-diplomat-over-drone-supplies-to-ukraine-accuses-britain-of-escalating/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Sep 2026 07:59:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[Danae Dholakia]]></category>
		<category><![CDATA[Defence News]]></category>
		<category><![CDATA[International News]]></category>
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		<category><![CDATA[Russian Foreign Ministry]]></category>
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					<description><![CDATA[यूक्रेन को ड्रोन देने पर भड़का रूस, ब्रिटेन पर निकाला गुस्सा; कहा—यह साझेदारी नहीं, युद्ध को बढ़ावा ब्रिटिश प्रभारी राजदूत डाने धोलाकिया को रूसी विदेश मंत्रालय ने किया तलब; हथियारों ... <a title="यूक्रेन को ड्रोन देने पर भड़का रूस, ब्रिटेन पर निकाला गुस्सा; कहा—यह साझेदारी नहीं, युद्ध को बढ़ावा" class="read-more" href="https://swarajvani.com/russia-summons-uk-diplomat-over-drone-supplies-to-ukraine-accuses-britain-of-escalating/" aria-label="Read more about यूक्रेन को ड्रोन देने पर भड़का रूस, ब्रिटेन पर निकाला गुस्सा; कहा—यह साझेदारी नहीं, युद्ध को बढ़ावा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>यूक्रेन को ड्रोन देने पर भड़का रूस, ब्रिटेन पर निकाला गुस्सा; कहा—यह साझेदारी नहीं, युद्ध को बढ़ावा</strong></h1>
<h2><strong>ब्रिटिश प्रभारी राजदूत डाने धोलाकिया को रूसी विदेश मंत्रालय ने किया तलब; हथियारों और UAV की बढ़ती आपूर्ति पर दर्ज कराया कड़ा विरोध</strong></h2>
<p><strong>मॉस्को।</strong> रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मॉस्को और लंदन के संबंधों में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। रूस ने यूक्रेन को मानव रहित विमान यानी ड्रोन और अन्य हथियार प्रणालियों की लगातार आपूर्ति किए जाने को लेकर ब्रिटेन के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इसी सिलसिले में ब्रिटेन की प्रभारी राजदूत यानी चार्ज डी’अफेयर्स (CDA) डाने धोलाकिया को शुक्रवार, 18 सितंबर को मॉस्को स्थित रूसी विदेश मंत्रालय में तलब किया गया।</p>
<p>रूसी विदेश मंत्रालय ने धोलाकिया को बताया कि यूक्रेन को ब्रिटिश सैन्य सहायता लगातार बढ़ाए जाने को मॉस्को गंभीर उकसावे के रूप में देखता है। रूस ने आरोप लगाया कि ब्रिटेन की ओर से कीव को उपलब्ध कराए जा रहे ड्रोन और अन्य हथियार युद्ध को लंबा खींचने के साथ-साथ क्षेत्रीय तनाव भी बढ़ा रहे हैं।</p>
<p>मॉस्को ने ब्रिटेन पर यूक्रेन संघर्ष में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होने का आरोप लगाते हुए कहा कि लंदन की नीति शांति स्थापित करने के बजाय सैन्य टकराव को बढ़ावा दे रही है। रूसी पक्ष के अनुसार, यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति और सैन्य सहयोग को केवल द्विपक्षीय साझेदारी नहीं माना जा सकता, क्योंकि इन हथियारों का इस्तेमाल रूस के खिलाफ किया जा रहा है।</p>
<h3><strong>ब्रिटेन पर लगाए गंभीर आरोप</strong></h3>
<p>रूसी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में ब्रिटेन पर यूक्रेनी सरकार की कथित कार्रवाइयों को समर्थन देने का आरोप लगाया। मंत्रालय का दावा है कि ब्रिटिश हथियारों और तकनीक का इस्तेमाल रूसी क्षेत्रों एवं नागरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने में किया जा सकता है। हालांकि, इन आरोपों पर ब्रिटेन की ओर से तत्काल कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।</p>
<p>रूस ने चेतावनी दी कि ब्रिटेन द्वारा यूक्रेन को दी जा रही सैन्य सहायता के परिणामों की जिम्मेदारी लंदन को भी उठानी पड़ सकती है। मॉस्को इससे पहले भी कह चुका है कि पश्चिमी देशों से मिले हथियारों के माध्यम से रूसी क्षेत्र पर हमला किए जाने पर वह जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।</p>
<p>रूस ने ब्रिटेन की विदेश नीति को अत्यधिक टकरावपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह के कदम दोनों देशों के बीच पहले से खराब संबंधों को और नुकसान पहुंचा रहे हैं। मॉस्को का कहना है कि लंदन को ऐसे निर्णयों से बचना चाहिए, जिनसे युद्ध का दायरा बढ़ने या रूस और नाटो देशों के बीच सीधे टकराव का खतरा पैदा हो।</p>
<h3><strong>यूक्रेन को समर्थन जारी रखेगा ब्रिटेन</strong></h3>
<p>दूसरी ओर, ब्रिटेन लगातार यह कहता रहा है कि यूक्रेन को अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने का अधिकार है। लंदन के अनुसार, वह यूक्रेन को रूसी हमलों से बचाव के लिए आवश्यक सैन्य एवं मानवीय सहायता उपलब्ध करा रहा है। ब्रिटेन ने यूक्रेन को ड्रोन, मिसाइल प्रणाली, वायु रक्षा उपकरण और अन्य सैन्य संसाधन देने की प्रतिबद्धता जताई है।</p>
<p>ब्रिटिश सरकार का तर्क है कि यूक्रेन को दी जा रही सैन्य सहायता का उद्देश्य उसे अपनी रक्षा करने में सक्षम बनाना है। ब्रिटेन और उसके पश्चिमी सहयोगी रूस से युद्ध समाप्त करने तथा यूक्रेनी क्षेत्र से अपनी सेनाएं वापस बुलाने की मांग करते रहे हैं। वहीं रूस इस संघर्ष के लिए नाटो के विस्तार और पश्चिमी देशों की नीतियों को जिम्मेदार ठहराता है।</p>
<h3><strong>रूस-ब्रिटेन संबंधों में बढ़ी तल्खी</strong></h3>
<p>फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर व्यापक सैन्य हमला शुरू किए जाने के बाद से मॉस्को और लंदन के संबंध बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। ब्रिटेन ने रूस पर अनेक आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं और यूक्रेन के प्रमुख सैन्य समर्थकों में शामिल है। रूस भी ब्रिटेन पर संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप लगाता रहा है।</p>
<p>ब्रिटिश राजनयिक को तलब किए जाने की ताजा घटना से साफ है कि यूक्रेन को पश्चिमी हथियारों की आपूर्ति अब केवल सैन्य ही नहीं, बल्कि गंभीर कूटनीतिक विवाद का विषय भी बन चुकी है। रूस की चेतावनी के बावजूद ब्रिटेन ने यूक्रेन को अपना समर्थन जारी रखने के संकेत दिए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के संबंधों में तनाव और बढ़ने की आशंका है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ड्रोन हमले से सऊदी की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को नुकसान, सैटेलाइट तस्वीरों में दिखे जले हुए हिस्से</title>
		<link>https://swarajvani.com/satellite-images-reveal-damage-to-saudi-arabias-east-west-oil-pipeline-after-drone/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Sep 2026 07:20:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[Brent Crude Oil]]></category>
		<category><![CDATA[Crude Oil Prices]]></category>
		<category><![CDATA[Dainik Swaraj Vani]]></category>
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					<description><![CDATA[ड्रोन हमले से सऊदी की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को नुकसान, सैटेलाइट तस्वीरों में दिखे जले हुए हिस्से मरम्मत की अवधि को लेकर अलग-अलग अनुमान; पाइपलाइन बंद रहने से वैश्विक तेल ... <a title="ड्रोन हमले से सऊदी की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को नुकसान, सैटेलाइट तस्वीरों में दिखे जले हुए हिस्से" class="read-more" href="https://swarajvani.com/satellite-images-reveal-damage-to-saudi-arabias-east-west-oil-pipeline-after-drone/" aria-label="Read more about ड्रोन हमले से सऊदी की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को नुकसान, सैटेलाइट तस्वीरों में दिखे जले हुए हिस्से">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>ड्रोन हमले से सऊदी की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को नुकसान, सैटेलाइट तस्वीरों में दिखे जले हुए हिस्से</strong></h1>
<h2><strong>मरम्मत की अवधि को लेकर अलग-अलग अनुमान; पाइपलाइन बंद रहने से वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर बढ़ सकता है दबाव</strong></h2>
<p><strong>वर्ल्ड डेस्क।</strong> सऊदी अरब की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमले के बाद सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों ने नुकसान की गंभीरता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। तस्वीरों में पाइपलाइन के एक पंपिंग स्टेशन के आसपास बड़े जले हुए हिस्से, काली पड़ी जमीन और ढांचागत क्षति दिखाई दे रही है। हमले के बाद सऊदी अरब ने सुरक्षा कारणों से पाइपलाइन का संचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।</p>
<p>पाइपलाइन के दोबारा पूरी क्षमता से शुरू होने की समयसीमा को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है। कुछ उद्योग सूत्रों ने मरम्मत में पांच से छह सप्ताह लगने की आशंका जताई है, जबकि अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा है कि पाइपलाइन कुछ दिनों में फिर शुरू हो सकती है। आंशिक संचालन पूर्ण मरम्मत से पहले शुरू होने की संभावना भी जताई जा रही है। सऊदी अरब या सरकारी तेल कंपनी अरामको ने मरम्मत की अंतिम समयसीमा सार्वजनिक नहीं की है।</p>
<h2><strong>हमले से पहले और बाद की तस्वीरों में बड़ा अंतर</strong></h2>
<p>Copernicus और अन्य वाणिज्यिक उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों में हमले से पहले और बाद की स्थिति का अंतर दिखाई देता है। सात और नौ सितंबर की तस्वीरों में संबंधित पंपिंग स्टेशन तथा आसपास का क्षेत्र सामान्य नजर आ रहा था।</p>
<p>10 सितंबर को ली गई तस्वीर में उसी इलाके से गहरे रंग के धुएं का बड़ा गुबार उठता दिखाई दिया। उपग्रह आधारित अग्नि निगरानी प्रणाली ने भी क्षेत्र में असामान्य तापीय गतिविधि दर्ज की। 11 और 12 सितंबर की तस्वीरों में धुएं का गुबार दिखाई नहीं दिया, लेकिन पंपिंग स्टेशन के आसपास जमीन का बड़ा हिस्सा काला और जला हुआ नजर आया।</p>
<p>सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से आग और सतही नुकसान की पुष्टि होती है, लेकिन केवल तस्वीरों के आधार पर भूमिगत पाइप, पंप और नियंत्रण व्यवस्था को हुए पूरे नुकसान का आकलन करना संभव नहीं है।</p>
<h2><strong>1,200 किलोमीटर लंबी है महत्वपूर्ण पाइपलाइन</strong></h2>
<p>ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को पेट्रोलाइन के नाम से भी जाना जाता है। यह करीब 1,200 किलोमीटर लंबी है और सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों को लाल सागर तट पर स्थित यानबू बंदरगाह से जोड़ती है।</p>
<p>इस पाइपलाइन का सबसे बड़ा रणनीतिक महत्व यह है कि इसके माध्यम से सऊदी अरब अपना कच्चा तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजारे बिना लाल सागर तक पहुंचा सकता है। क्षेत्रीय संघर्ष के कारण होर्मुज मार्ग पर दबाव बढ़ने के बाद सऊदी अरब ने इस पाइपलाइन के माध्यम से तेल भेजने की मात्रा बढ़ा दी थी।</p>
<p>हमले से पहले पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन करीब 40 से 50 लाख बैरल कच्चे तेल का परिवहन किए जाने की रिपोर्ट है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लगभग चार से पांच प्रतिशत के बराबर है। पाइपलाइन की अधिकतम क्षमता करीब 70 लाख बैरल प्रतिदिन बताई जाती है।</p>
<h2><strong>किसने किया हमला, स्थिति अभी स्पष्ट नहीं</strong></h2>
<p>सऊदी अधिकारियों ने कहा है कि ड्रोन इराक की दिशा से आए थे। इराकी अधिकारियों ने घटना की जांच शुरू की और कथित लॉन्च क्षेत्र से जुड़े कुछ प्रशासनिक कदम भी उठाए। हालांकि किसी संगठन ने सार्वजनिक रूप से इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।</p>
<p>अमेरिका ने ईरान समर्थित समूहों की भूमिका को लेकर संदेह जताया है, लेकिन ईरान ने प्रत्यक्ष संलिप्तता से इनकार किया है। हमले के लिए जिम्मेदारी तय करने का प्रश्न अभी विवादित है और स्वतंत्र जांच पूरी होने तक किसी एक देश या संगठन को निश्चित रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।</p>
<h2><strong>वैश्विक तेल कीमतों में आया उछाल</strong></h2>
<p>पाइपलाइन बंद होने की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा। ब्रेंट क्रूड एक समय 108 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। यूरोपीय बाजार में कुछ वास्तविक तेल कार्गो की कीमतें इससे भी ऊपर जाने की रिपोर्ट सामने आई।</p>
<p>कारोबारियों को आशंका है कि यदि पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रही तो यानबू बंदरगाह पर उपलब्ध तेल भंडार तेजी से कम हो सकता है। इससे यूरोप और एशिया के खरीदारों को मिलने वाली आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है।</p>
<p>कुछ सितंबर कार्गो रद्द या विलंबित होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि आपूर्ति में वास्तविक कमी का स्तर इस बात पर निर्भर करेगा कि पाइपलाइन का आंशिक संचालन कितनी जल्दी शुरू होता है और सऊदी अरब वैकल्पिक मार्गों से कितनी मात्रा भेज पाता है।</p>
<h2><strong>वैकल्पिक रास्तों से तेल भेजने की कोशिश</strong></h2>
<p>पाइपलाइन में व्यवधान के बाद सऊदी अरब खाड़ी क्षेत्र के रास तनूरा और जुअयमा बंदरगाहों से तेल लोडिंग बढ़ा रहा है। इसके अलावा ओमान के सोहार तट के पास जहाज से जहाज में तेल स्थानांतरित कर एशियाई खरीदारों को आपूर्ति करने के विकल्प का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।</p>
<p>ये वैकल्पिक व्यवस्थाएं तत्काल संकट कम कर सकती हैं, लेकिन उनकी क्षमता और लागत सीमित हो सकती है। यानबू बंदरगाह से तेल भेजना इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि इससे होर्मुज जलडमरूमध्य से बचा जा सकता था।</p>
<p>यदि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब अल-मंदेब—तीनों मार्गों पर एक साथ दबाव बना रहता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए जोखिम काफी बढ़ सकता है।</p>
<h2><strong>भारत पर भी पड़ सकता है असर</strong></h2>
<p>भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है। यदि ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं तो पेट्रोलियम उत्पादों की लागत, परिवहन खर्च और महंगाई पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।</p>
<p>हालांकि घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर प्रभाव कई कारकों पर निर्भर करता है। इनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की औसत कीमत, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, सरकारी कर तथा तेल विपणन कंपनियों का मूल्य निर्धारण शामिल है।</p>
<p>फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि पाइपलाइन का आंशिक या पूर्ण संचालन कितनी जल्दी बहाल होता है। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री ने कुछ दिनों में संचालन शुरू होने की उम्मीद जताई है, लेकिन उद्योग सूत्रों का अनुमान इससे अधिक समय का है। आधिकारिक क्षति आकलन आने तक मरम्मत अवधि और वैश्विक आपूर्ति पर वास्तविक प्रभाव अनिश्चित बना रहेगा।</p>
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		<title>BRICS Summit 2026 LIVE: शी जिनपिंग ने दिया शांति का संदेश, बोले—इतिहास के सही पक्ष में खड़े हों</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Sep 2026 10:46:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[BRICS Summit 2026 LIVE: शी जिनपिंग ने दिया शांति का संदेश, बोले—इतिहास के सही पक्ष में खड़े हों BRICS Summit 2026 Live Updates: भारत की अध्यक्षता में 18वां ब्रिक्स शिखर ... <a title="BRICS Summit 2026 LIVE: शी जिनपिंग ने दिया शांति का संदेश, बोले—इतिहास के सही पक्ष में खड़े हों" class="read-more" href="https://swarajvani.com/brics-summit-2026-live-xi-jinping-calls-for-peace-in-middle-east-urges-nations-to-stand-on-the-right-side-of-history/" aria-label="Read more about BRICS Summit 2026 LIVE: शी जिनपिंग ने दिया शांति का संदेश, बोले—इतिहास के सही पक्ष में खड़े हों">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>BRICS Summit 2026 LIVE: शी जिनपिंग ने दिया शांति का संदेश, बोले—इतिहास के सही पक्ष में खड़े हों</strong></h1>
<p><strong>BRICS Summit 2026 Live Updates:</strong> भारत की अध्यक्षता में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू हो गया है। दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। सम्मेलन में ब्रिक्स के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ साझेदार और आउटरीच देशों के प्रतिनिधि भी हिस्सा ले रहे हैं। बैठक के दौरान वैश्विक संघर्ष, आर्थिक सहयोग, व्यापार, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है।</p>
<p>सम्मेलन को संबोधित करते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दुनिया से शांति और सहयोग का रास्ता अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में ब्रिक्स देशों को इतिहास के सही पक्ष में खड़ा होना चाहिए। जिनपिंग ने खास तौर पर पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का उल्लेख करते हुए संबंधित पक्षों से संघर्ष रोकने और शांति स्थापित करने की दिशा में कदम उठाने का आग्रह किया।</p>
<h2><strong>मिडिल ईस्ट में शांति की जरूरत: जिनपिंग</strong></h2>
<p>शी जिनपिंग ने कहा कि मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी तनाव का असर केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं है। संघर्ष से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्ग, खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होती है। ऐसे में संबंधित पक्षों को संयम बरतते हुए बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी शांति प्रयासों का समर्थन करने की अपील की। चीनी राष्ट्रपति का जोर इस बात पर रहा कि सैन्य कार्रवाई किसी संकट का स्थायी समाधान नहीं हो सकती। देशों को संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों, अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सिद्धांतों का सम्मान करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।</p>
<h2><strong>‘इतिहास के सही पक्ष में खड़े हों’</strong></h2>
<p>अपने संबोधन में जिनपिंग ने ब्रिक्स देशों की बढ़ती वैश्विक भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में उभरती अर्थव्यवस्थाओं और ग्लोबल साउथ के देशों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।</p>
<p>जिनपिंग के मुताबिक, ब्रिक्स को संघर्ष और टकराव के स्थान पर संवाद, विकास और साझेदारी को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने सदस्य देशों से संरक्षणवाद, एकतरफा प्रतिबंधों और शक्ति की राजनीति का मुकाबला करने के लिए सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि ब्रिक्स देशों को विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की आवाज मजबूत करने के लिए मिलकर काम करना होगा।</p>
<h2><strong>पीएम मोदी ने किया सम्मेलन का उद्घाटन</strong></h2>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम में आयोजित सम्मेलन का शुभारंभ किया। उन्होंने ब्रिक्स नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों का भारत में स्वागत करते हुए संगठन को वैश्विक सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बताया।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स किसी देश या समूह के खिलाफ काम करने वाला संगठन नहीं है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना और वैश्विक चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान तलाशना है। उन्होंने मौजूदा संघर्षों को बातचीत और कूटनीति से सुलझाने पर जोर दिया।</p>
<p>सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों के नेताओं से बातचीत की। इन बैठकों में पश्चिम एशिया की स्थिति, ऊर्जा सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा हुई।  के अनुसार, वैश्विक युद्धों और व्यापारिक अस्थिरता के बीच शांति, ऊर्जा और सप्लाई चेन जैसे विषय सम्मेलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।</p>
<h2><strong>क्या है भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम?</strong></h2>
<p>भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम <strong>“Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability”</strong> रखी है। इसका हिंदी अर्थ लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए मिलकर निर्माण करना है। इसे प्रधानमंत्री मोदी की “ह्यूमैनिटी फर्स्ट” सोच से भी जोड़ा गया है।</p>
<p>इस थीम के तहत विकास को आम लोगों तक पहुंचाने, डिजिटल तकनीक का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और सतत विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।</p>
<p>भारत की अध्यक्षता में अलग-अलग शहरों में सैकड़ों बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इनके माध्यम से राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग, आर्थिक और वित्तीय साझेदारी तथा सांस्कृतिक एवं जनसंपर्क को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है।</p>
<h2><strong>सम्मेलन में तीन प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस</strong></h2>
<p>ब्रिक्स सम्मेलन के एजेंडे को मोटे तौर पर तीन क्षेत्रों में बांटा गया है। पहला क्षेत्र राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग से जुड़ा है। इसमें क्षेत्रीय संघर्ष, आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे शामिल हैं।</p>
<p>दूसरा क्षेत्र आर्थिक और वित्तीय सहयोग का है। इसमें सदस्य देशों के बीच व्यापार बढ़ाने, स्थानीय मुद्राओं में भुगतान, डिजिटल पेमेंट सिस्टम, निवेश और सप्लाई चेन की मजबूती पर चर्चा हो रही है।</p>
<p>तीसरा क्षेत्र सांस्कृतिक और लोगों के बीच संपर्क से जुड़ा है। इसके अंतर्गत शिक्षा, पर्यटन, खेल, युवा संवाद, स्वास्थ्य और वैज्ञानिक अनुसंधान में सहयोग बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।</p>
<h2><strong>सात साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग</strong></h2>
<p>चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग लगभग सात साल बाद भारत आए हैं। उनकी इस यात्रा को भारत-चीन संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई दिल्ली पहुंचने पर उनका औपचारिक स्वागत किया गया। <a href="https://www.mea.gov.in/media-advisory?dtl%2F41762=" rel="nofollow noopener" target="_blank"> </a> में जिनपिंग सहित सम्मेलन में भाग लेने वाले विदेशी नेताओं और प्रतिनिधियों की जानकारी दी गई है।</p>
<p>सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी निर्धारित है। इसमें वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिरता, सीमा प्रबंधन, व्यापार घाटा, निवेश, वीजा, सीधी उड़ानों और दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क जैसे विषय उठ सकते हैं। हालांकि किसी समझौते की अंतिम जानकारी दोनों पक्षों के आधिकारिक बयान के बाद ही स्पष्ट होगी।</p>
<h2><strong>ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने पर जोर</strong></h2>
<p>ब्रिक्स का विस्तार होने के बाद संगठन की वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक भूमिका बढ़ी है। सम्मेलन में सदस्य देशों के साथ साझेदार देशों की मौजूदगी इस मंच के व्यापक होते दायरे को दिखाती है। भारत चाहता है कि ब्रिक्स विकासशील देशों की चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभावी ढंग से रखे।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्थाओं में सुधार भी लंबे समय से ब्रिक्स के एजेंडे में शामिल रहा है। भारत का मानना है कि वैश्विक संस्थाओं की संरचना में आज की आर्थिक और राजनीतिक वास्तविकताओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।</p>
<h2><strong>संयुक्त घोषणापत्र पर दुनिया की नजर</strong></h2>
<p>सम्मेलन के अंत में जारी होने वाले संयुक्त घोषणापत्र पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी। इसमें मिडिल ईस्ट और यूक्रेन संघर्ष, आतंकवाद, व्यापारिक प्रतिबंध, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक शासन सुधार जैसे मुद्दों पर ब्रिक्स देशों का साझा रुख सामने आ सकता है।</p>
<p>शी जिनपिंग के शांति और “इतिहास के सही पक्ष” वाले संदेश ने सम्मेलन में वैश्विक संघर्षों की चर्चा को प्रमुखता दे दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ब्रिक्स देश अपने मतभेदों के बावजूद साझा घोषणापत्र में मिडिल ईस्ट और अन्य अंतरराष्ट्रीय संकटों को लेकर किस तरह की भाषा पर सहमत होते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>Chinmoy Krishna Das Case: TMC का भाजपा पर निशाना, कुणाल घोष बोले—सत्ता मिलने के बाद बांग्लादेशी हिंदू संत को भूल गई पार्टी</title>
		<link>https://swarajvani.com/tmc-targets-bjp-over-chinmoy-krishna-das-kunal-ghosh-alleges-party-forgot-jailed-bangladeshi-hindu-monk-after-coming-to-power/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Sep 2026 10:41:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[Chinmoy Krishna Das Case: TMC का भाजपा पर निशाना, कुणाल घोष बोले—सत्ता मिलने के बाद बांग्लादेशी हिंदू संत को भूल गई पार्टी दैनिक स्वराज वाणी, कोलकाता। बांग्लादेश में जेल में ... <a title="Chinmoy Krishna Das Case: TMC का भाजपा पर निशाना, कुणाल घोष बोले—सत्ता मिलने के बाद बांग्लादेशी हिंदू संत को भूल गई पार्टी" class="read-more" href="https://swarajvani.com/tmc-targets-bjp-over-chinmoy-krishna-das-kunal-ghosh-alleges-party-forgot-jailed-bangladeshi-hindu-monk-after-coming-to-power/" aria-label="Read more about Chinmoy Krishna Das Case: TMC का भाजपा पर निशाना, कुणाल घोष बोले—सत्ता मिलने के बाद बांग्लादेशी हिंदू संत को भूल गई पार्टी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>Chinmoy Krishna Das Case: TMC का भाजपा पर निशाना, कुणाल घोष बोले—सत्ता मिलने के बाद बांग्लादेशी हिंदू संत को भूल गई पार्टी</strong></h1>
<p><strong>दैनिक स्वराज वाणी, कोलकाता।</strong> बांग्लादेश में जेल में बंद हिंदू धार्मिक नेता चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। तृणमूल कांग्रेस नेता एवं विधायक कुणाल घोष ने भारतीय जनता पार्टी पर इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने विपक्ष में रहते हुए चिन्मय कृष्ण दास की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किए, लेकिन सत्ता में आने के बाद उनकी स्थिति पर चुप्पी साध ली।</p>
<p>कुणाल घोष का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब चिन्मय कृष्ण दास की मां संध्या रानी धर का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। बांग्लादेश प्रशासन ने उन्हें मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए केवल पांच घंटे की पैरोल दी थी। अंतिम संस्कार के बाद उन्हें दोबारा जेल ले जाया गया।</p>
<h2><strong>कुणाल घोष ने भाजपा से पूछा सवाल</strong></h2>
<p>टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कहा कि जब भाजपा पश्चिम बंगाल में विपक्ष की भूमिका में थी, तब उसके नेताओं ने चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी और बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की स्थिति को प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाया था।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने उस समय संत की रिहाई की मांग को लेकर धरने और विरोध प्रदर्शन किए, लेकिन सत्ता में आने के बाद इस विषय को भुला दिया। घोष ने भाजपा नेतृत्व से पूछा कि चिन्मय कृष्ण दास की रिहाई और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए अब तक क्या कूटनीतिक पहल की गई।</p>
<p>ये सभी आरोप कुणाल घोष और तृणमूल कांग्रेस का राजनीतिक पक्ष हैं। भाजपा की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भाजपा का पक्ष आने पर ही इस राजनीतिक विवाद की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।</p>
<h2><strong>मां के निधन के बाद मिली पांच घंटे की पैरोल</strong></h2>
<p>चिन्मय कृष्ण दास की मां संध्या रानी धर का 10 सितंबर को बांग्लादेश के चटगांव स्थित हथाजारी क्षेत्र में निधन हो गया था। वह करीब 70 वर्ष की थीं और लंबे समय से कैंसर सहित दूसरी बीमारियों से पीड़ित थीं।</p>
<p>परिवार ने उनकी मृत्यु से पहले चिन्मय कृष्ण दास को मां से मिलवाने के लिए पैरोल का आवेदन किया था, लेकिन उस समय अनुमति नहीं मिली। मां के निधन के बाद परिवार ने दोबारा आवेदन किया। इसके बाद चटगांव जिला प्रशासन ने चिन्मय दास को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पांच घंटे की पैरोल मंजूर की।</p>
<p>इस सीमित अवधि के दौरान उन्हें हथाजारी स्थित पुंडरीक धाम ले जाया गया। अंतिम संस्कार पूरा होने के बाद चिन्मय कृष्ण दास को वापस चटगांव केंद्रीय जेल पहुंचाया गया। बांग्लादेशी मीडिया ने जिला प्रशासन के अधिकारियों के हवाले से इसकी पुष्टि की है।</p>
<h2><strong>कौन हैं चिन्मय कृष्ण दास?</strong></h2>
<p>चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोत के प्रवक्ता रहे हैं। वह बांग्लादेश में हिंदू समुदाय और दूसरे धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं।</p>
<p>उनका पारिवारिक नाम चंदन कुमार धर बताया जाता है। धार्मिक दीक्षा लेने के बाद उन्होंने चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी नाम अपनाया। वह हथाजारी स्थित पुंडरीक धाम से भी जुड़े रहे हैं।</p>
<p>वर्ष 2024 में बांग्लादेश की राजनीतिक परिस्थितियां बदलने के बाद अल्पसंख्यक समुदायों पर कथित हमलों के विरोध में उन्होंने कई कार्यक्रमों और रैलियों में हिस्सा लिया। उनकी सभाओं में हिंदू समुदाय की सुरक्षा, मंदिरों की रक्षा और अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जुड़ी मांगें उठाई गईं।</p>
<h2><strong>नवंबर 2024 में हुई थी गिरफ्तारी</strong></h2>
<p>बांग्लादेश पुलिस ने चिन्मय कृष्ण दास को 25 नवंबर 2024 को ढाका के शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान से जुड़ा राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया था।</p>
<p>उनकी गिरफ्तारी के अगले दिन चटगांव की अदालत ने जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया। इसके बाद अदालत परिसर के बाहर उनके समर्थकों और पुलिस के बीच तनाव तथा हिंसक झड़पें हुई थीं।</p>
<p>इन झड़पों के दौरान वकील सैफुल इस्लाम अलीफ की हत्या हो गई थी। बाद में पुलिस जांच में चिन्मय कृष्ण दास का नाम भी इस मामले में आरोपी के रूप में शामिल किया गया। हालांकि उनके खिलाफ आरोपों पर अदालत में सुनवाई जारी है और दोष सिद्ध होने तक उन्हें दोषी नहीं माना जा सकता।</p>
<h2><strong>कई मामलों में मिली जमानत, फिर भी जेल में</strong></h2>
<p>बांग्लादेशी मीडिया की नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार चिन्मय कृष्ण दास के खिलाफ कई आपराधिक मामले लंबित हैं। उन्हें कुछ मामलों में हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है, लेकिन शेष मामलों में गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया जारी होने के कारण वह जेल से स्थायी रूप से रिहा नहीं हुए हैं।</p>
<p>वकील सैफुल इस्लाम अलीफ की हत्या से जुड़े मामले में चिन्मय दास सहित कई लोगों के खिलाफ आरोपपत्र पेश किया गया है। यह मामला चटगांव के स्पीडी ट्रायल ट्रिब्यूनल में विचाराधीन बताया गया है।</p>
<p>चिन्मय दास की पांच घंटे की पैरोल केवल उनकी मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए दी गई थी। इसे किसी मामले में जमानत या स्थायी रिहाई नहीं माना जा सकता।</p>
<h2><strong>बंगाल की राजनीति में क्यों बना मुद्दा?</strong></h2>
<p>चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद भारत, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में इसका राजनीतिक असर दिखाई दिया था। भाजपा ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर कथित अत्याचार और चिन्मय दास की गिरफ्तारी को लेकर विरोध प्रदर्शन किए थे।</p>
<p>उस समय भाजपा नेताओं ने केंद्र सरकार से बांग्लादेश के सामने यह मामला मजबूती से उठाने की मांग की थी। तृणमूल कांग्रेस ने भी अल्पसंख्यकों पर हमलों की निंदा की, लेकिन साथ ही कहा था कि बांग्लादेश से जुड़ा विषय अंतरराष्ट्रीय मामला है और इस पर कार्रवाई का अधिकार केंद्र सरकार के पास है।</p>
<p>दिसंबर 2024 में कुणाल घोष बांग्लादेश में चिन्मय दास का मुकदमा लड़ रहे अधिवक्ता रवींद्र घोष से भी मिले थे। उन्होंने उस समय हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता जताई थी।</p>
<h2><strong>टीएमसी ने भाजपा की राजनीतिक मंशा पर उठाए सवाल</strong></h2>
<p>कुणाल घोष का कहना है कि भाजपा ने पश्चिम बंगाल की तत्कालीन राजनीति में बांग्लादेश और चिन्मय दास के मुद्दे का इस्तेमाल किया था। अब उन्होंने भाजपा से पूछा है कि सत्ता मिलने के बाद पार्टी ने संत की रिहाई के लिए कौन-से कदम उठाए।</p>
<p>टीएमसी का आरोप है कि विपक्ष में रहते हुए भाजपा ने धार्मिक और भावनात्मक मुद्दों पर बड़े प्रदर्शन किए, लेकिन सरकार में आने के बाद उन्हीं विषयों पर उसका रुख बदल गया।</p>
<p>हालांकि विदेश नीति, दूसरे देश में चल रही न्यायिक प्रक्रिया और किसी भारतीय राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र अलग-अलग विषय हैं। बांग्लादेश में बंद किसी व्यक्ति की रिहाई का फैसला वहां की अदालत और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा है। भारत सरकार कूटनीतिक स्तर पर चिंता या अनुरोध दर्ज करा सकती है, लेकिन कानूनी आदेश बांग्लादेश की न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है।</p>
<h2><strong>भारत ने गिरफ्तारी पर जताई थी चिंता</strong></h2>
<p>चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद भारत ने बांग्लादेश में हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। भारत की ओर से बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके धार्मिक स्थलों की रक्षा करने की अपील की गई थी।</p>
<p>बांग्लादेश ने इसे अपना आंतरिक मामला बताते हुए वहां की न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करने की बात कही थी। इसके बाद भी दोनों देशों के बीच अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का विषय विभिन्न कूटनीतिक वार्ताओं में उठता रहा है।</p>
<h2><strong>भाजपा के जवाब का इंतजार</strong></h2>
<p>कुणाल घोष के आरोपों के बाद अब भाजपा की प्रतिक्रिया का इंतजार है। पार्टी यह स्पष्ट कर सकती है कि चिन्मय कृष्ण दास की रिहाई और बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर उसने सरकार या कूटनीतिक स्तर पर क्या प्रयास किए हैं।</p>
<p>यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता, मानवाधिकार और भारत-बांग्लादेश संबंधों से जुड़ा होने के साथ पश्चिम बंगाल की घरेलू राजनीति का भी हिस्सा बन गया है। चिन्मय कृष्ण दास के विरुद्ध चल रहे मामलों का अंतिम फैसला बांग्लादेश की अदालत करेगी। ऐसे में राजनीतिक दलों के दावों से अलग न्यायिक प्रक्रिया और प्रमाणित तथ्यों पर ध्यान देना आवश्यक होगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>BRICS Summit 2026: दिल्ली में वैश्विक नेताओं का जमावड़ा, पुरी की रेत कला से विदेशी मेहमानों का स्वागत</title>
		<link>https://swarajvani.com/brics-summit-2026-global-leaders-gather-in-delhi-puri-sand-art-welcomes-foreign-delegates-amid-tight-security/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Sep 2026 06:04:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[New Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Dainik Swaraj Vani]]></category>
		<category><![CDATA[Global South]]></category>
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		<category><![CDATA[New Delhi Declaration]]></category>
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					<description><![CDATA[BRICS Summit 2026: दिल्ली में वैश्विक नेताओं का जमावड़ा, पुरी की रेत कला से विदेशी मेहमानों का स्वागत भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को होगा मुख्य शिखर सम्मेलन; ... <a title="BRICS Summit 2026: दिल्ली में वैश्विक नेताओं का जमावड़ा, पुरी की रेत कला से विदेशी मेहमानों का स्वागत" class="read-more" href="https://swarajvani.com/brics-summit-2026-global-leaders-gather-in-delhi-puri-sand-art-welcomes-foreign-delegates-amid-tight-security/" aria-label="Read more about BRICS Summit 2026: दिल्ली में वैश्विक नेताओं का जमावड़ा, पुरी की रेत कला से विदेशी मेहमानों का स्वागत">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>BRICS Summit 2026: दिल्ली में वैश्विक नेताओं का जमावड़ा, पुरी की रेत कला से विदेशी मेहमानों का स्वागत</strong></h1>
<h2><strong>भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को होगा मुख्य शिखर सम्मेलन; रूसी राष्ट्रपति पुतिन पहुंचे, शी जिनपिंग के दौरे पर भी दुनिया की नजर</strong></h2>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारत की मेजबानी में आयोजित होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली पूरी तरह तैयार है। मुख्य सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा। इससे पहले 11 सितंबर से विदेशी नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों का आगमन तथा द्विपक्षीय बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया है। सम्मेलन को देखते हुए राजधानी में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है और कई प्रमुख मार्गों पर यातायात में बदलाव किया गया है।</p>
<p>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी करीब सात वर्ष बाद भारत की यात्रा पर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS देशों के नेताओं का स्वागत करते हुए सम्मेलन की तैयारियों से जुड़ा वीडियो साझा किया और संदेश लिखा—<strong>“All set for BRICS 2026!”</strong></p>
<h2><strong>पुरी के समुद्र तट पर रेत कला से स्वागत</strong></h2>
<p>BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले विदेशी नेताओं और प्रतिनिधियों के स्वागत के लिए ओडिशा के पुरी समुद्र तट पर विशेष रेत कला तैयार की गई है। प्रसिद्ध रेत कलाकार पद्मश्री सुदर्शन पटनायक ने अपनी कलाकृति के माध्यम से BRICS प्रतिनिधियों का भारत में अभिनंदन किया है।</p>
<p>पुरी की रेत कला भारत की सांस्कृतिक और रचनात्मक पहचान को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करती है। कला के माध्यम से अतिथियों का स्वागत करने की यह पहल भारत की ‘अतिथि देवो भवः’ परंपरा का संदेश देती है। रेत से तैयार कलाकृति में BRICS सम्मेलन और भारत की मेजबानी को केंद्र में रखा गया है।</p>
<p>सुदर्शन पटनायक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवसरों पर रेत से कलाकृतियां बनाकर सामाजिक, सांस्कृतिक तथा वैश्विक संदेश देते रहे हैं। BRICS सम्मेलन के अवसर पर तैयार की गई उनकी कलाकृति भी भारत की मेजबानी और सदस्य देशों के बीच सहयोग की भावना को प्रदर्शित करती है। आकाशवाणी समाचार ने भी पुरी में प्रतिनिधियों के स्वागत के लिए उनकी रेत कला तैयार किए जाने की जानकारी साझा की है।</p>
<h2><strong>मुख्य सम्मेलन 12 सितंबर से</strong></h2>
<p>BRICS नेताओं का मुख्य कार्यक्रम शनिवार, 12 सितंबर से शुरू होगा। सम्मेलन में सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शासन प्रमुख वैश्विक शासन व्यवस्था, बहुपक्षीय सहयोग, व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।</p>
<p>13 सितंबर को BRICS सदस्य देशों के साथ साझेदार और विशेष आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भी अलग-अलग सत्रों में हिस्सा लेंगे। दो दिवसीय कार्यक्रम के समापन पर <strong>नई दिल्ली घोषणा-पत्र</strong> जारी किए जाने की संभावना है। इसमें सम्मेलन के दौरान बनी सहमति और भविष्य के सहयोग की प्राथमिकताओं का उल्लेख किया जाएगा।</p>
<h2><strong>‘मानवता प्रथम’ दृष्टिकोण पर जोर</strong></h2>
<p>भारत ने वर्ष 2026 में BRICS की अध्यक्षता संभाली है। भारत की अध्यक्षता की थीम <strong>“Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability”</strong> है। इसका उद्देश्य मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के आधार पर सदस्य देशों के बीच साझेदारी को आगे बढ़ाना है।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी के ‘मानवता प्रथम’ दृष्टिकोण को सम्मेलन में विशेष महत्व मिलने की उम्मीद है। भारत BRICS को केवल आर्थिक सहयोग के समूह के रूप में नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने और विकासशील देशों की समस्याओं को वैश्विक मंच पर उठाने के माध्यम के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।</p>
<h2><strong>डिजिटल भुगतान और व्यापार पर अहम चर्चा संभव</strong></h2>
<p>सम्मेलन में BRICS देशों के बीच सीमा पार भुगतान प्रणाली को सरल बनाने और केंद्रीय बैंकों की डिजिटल मुद्राओं को आपस में जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा हो सकती है। भारत का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय भुगतान को तेज, सस्ता और सुगम बनाना है।</p>
<p>इसके अतिरिक्त व्यापार, निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप, MSME और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है। न्यू डेवलपमेंट बैंक की भूमिका, विकास परियोजनाओं की फंडिंग और वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में सुधार भी एजेंडे का हिस्सा रह सकते हैं।</p>
<h2><strong>पुतिन और जिनपिंग की मौजूदगी से बढ़ा महत्व</strong></h2>
<p>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और तकनीकी सहयोग पर द्विपक्षीय बातचीत होने की संभावना है।</p>
<p>वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा पर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर है। प्रधानमंत्री मोदी और जिनपिंग की संभावित बैठक में भारत-चीन सीमा, व्यापार और दोनों देशों के संबंधों से जुड़े विषय उठ सकते हैं।</p>
<p>BRICS सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया का संकट वैश्विक राजनीति तथा अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। इन मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहमति बनाना सम्मेलन की बड़ी चुनौती होगी। मुख्य शिखर सम्मेलन की तारीख 12 और 13 सितंबर होने की पुष्टि अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में भी की गई है।</p>
<h2><strong>भारत मंडपम की सुरक्षा कड़ी</strong></h2>
<p>सम्मेलन स्थल भारत मंडपम को बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे में रखा गया है। विदेशी मेहमानों के ठहरने वाले होटल, पालम एयरपोर्ट, राजनयिक क्षेत्र और प्रतिनिधिमंडलों के आवागमन वाले मार्गों पर विशेष निगरानी की जा रही है।</p>
<p>दिल्ली पुलिस, अर्धसैनिक बल और यातायात पुलिस के हजारों कर्मचारियों को सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया है। CCTV कैमरे, ड्रोन और अन्य आधुनिक उपकरणों की मदद से संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है। होटल कर्मचारियों और सम्मेलन से जुड़े लोगों का सत्यापन भी कराया गया है।</p>
<h2><strong>कई मार्गों पर बदली यातायात व्यवस्था</strong></h2>
<p>विदेशी नेताओं के काफिलों की आवाजाही को देखते हुए नई दिल्ली और मध्य दिल्ली के कई मार्गों पर यातायात नियंत्रित रहेगा। सुरक्षा कारणों से कुछ सड़कों पर अस्थायी प्रतिबंध या डायवर्जन लागू किए जा सकते हैं।</p>
<p>नागरिकों को यात्रा शुरू करने से पहले दिल्ली यातायात पुलिस की आधिकारिक एडवाइजरी देखने और संभव होने पर मेट्रो का उपयोग करने की सलाह दी गई है। एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों से अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलने को कहा गया है। आपातकालीन सेवाओं के वाहनों को यातायात प्रतिबंधों के दौरान प्राथमिकता दी जाएगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>दिल्ली में BRICS का पावर शो, वैश्विक नेताओं के स्वागत के लिए तैयार भारत; PM मोदी ने दिया खास संदेश</title>
		<link>https://swarajvani.com/brics-power-show-in-new-delhi-pm-modi-welcomes-global-leaders-amid-security/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Sep 2026 06:00:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[New Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Bharat Mandapam]]></category>
		<category><![CDATA[Breakin]]></category>
		<category><![CDATA[BRICS Power Show]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi Security]]></category>
		<category><![CDATA[Global Leaders in Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Global South]]></category>
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		<category><![CDATA[India BRICS Presidency]]></category>
		<category><![CDATA[India Foreign Policy]]></category>
		<category><![CDATA[International News]]></category>
		<category><![CDATA[PM Narendra Modi]]></category>
		<category><![CDATA[Vladimir Putin]]></category>
		<category><![CDATA[Xi Jinping]]></category>
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					<description><![CDATA[दिल्ली में BRICS का पावर शो, वैश्विक नेताओं के स्वागत के लिए तैयार भारत; PM मोदी ने दिया खास संदेश भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को होगा 18वां ... <a title="दिल्ली में BRICS का पावर शो, वैश्विक नेताओं के स्वागत के लिए तैयार भारत; PM मोदी ने दिया खास संदेश" class="read-more" href="https://swarajvani.com/brics-power-show-in-new-delhi-pm-modi-welcomes-global-leaders-amid-security/" aria-label="Read more about दिल्ली में BRICS का पावर शो, वैश्विक नेताओं के स्वागत के लिए तैयार भारत; PM मोदी ने दिया खास संदेश">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>दिल्ली में BRICS का पावर शो, वैश्विक नेताओं के स्वागत के लिए तैयार भारत; PM मोदी ने दिया खास संदेश</strong></h1>
<h2><strong>भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को होगा 18वां BRICS शिखर सम्मेलन, सुरक्षा के लिए हजारों पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बल तैनात</strong></h2>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारत की राजधानी नई दिल्ली 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका और ईरान सहित सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधि भाग लेंगे। विभिन्न देशों के नेताओं का दिल्ली पहुंचना शुरू हो गया है और उनके स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन की तैयारियों से जुड़ा एक वीडियो साझा करते हुए लिखा, <strong>“All set for BRICS 2026!”</strong> वीडियो में रोशनी और विशेष सजावट से सजे भारत मंडपम की झलक दिखाई गई है। इसके माध्यम से भारत ने सदस्य देशों के नेताओं और प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन के लिए अपनी तैयारियों का संदेश दिया है।</p>
<h2><strong>भारत मंडपम में जुटेंगे वैश्विक नेता</strong></h2>
<p>सम्मेलन का मुख्य आयोजन नई दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में किया जाएगा। यही परिसर वर्ष 2023 में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन का भी प्रमुख केंद्र था। BRICS सम्मेलन के लिए पूरे परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है। विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के स्वागत, बैठकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं।</p>
<p>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अन्य देशों के नेताओं के भी सम्मेलन में भाग लेने की जानकारी सामने आई है।</p>
<p>सदस्य देशों के अलावा BRICS के साझेदार देशों और विशेष रूप से आमंत्रित राष्ट्रों के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्य नेताओं का कार्यक्रम शनिवार, 12 सितंबर से प्रारंभ होगा, जबकि 13 सितंबर को सदस्य, साझेदार और आउटरीच देशों के प्रतिनिधि विभिन्न बैठकों में भाग लेंगे।</p>
<h2><strong>‘All Set for BRICS 2026’ के साथ स्वागत संदेश</strong></h2>
<p>प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा किए गए वीडियो में भारत मंडपम की तैयारियों और सम्मेलन की थीम की झलक प्रस्तुत की गई। वीडियो के अंत में <strong>“India is gearing up for BRICS 2026”</strong> का संदेश दिखाई देता है। प्रधानमंत्री ने इसे साझा करते हुए भारत के तैयार होने की घोषणा की।</p>
<p>भारत ने अपनी BRICS अध्यक्षता की थीम <strong>“Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability”</strong> रखी है। इसका हिंदी अर्थ मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए मिलकर निर्माण करना है। सम्मेलन में भारत के ‘मानवता प्रथम’ दृष्टिकोण को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किए जाने की संभावना है।</p>
<h2><strong>वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद पर होगी चर्चा</strong></h2>
<p>सम्मेलन के पहले दिन BRICS सदस्य देशों के नेता समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत बनाने के विषय पर बंद कमरे में विचार-विमर्श करेंगे। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाओं में सुधार, विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया को अधिक संतुलित बनाने जैसे विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है।</p>
<p>व्यापार, निवेश, ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, आपदा प्रबंधन और महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत बनाना भी बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल रह सकता है। सदस्य देशों के बीच सीमा पार भुगतान, स्थानीय मुद्राओं के अधिक उपयोग और डिजिटल कारोबार को बढ़ावा देने पर भी विचार किया जा सकता है।</p>
<p>कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक, MSME, जलवायु परिवर्तन और न्यू डेवलपमेंट बैंक की भूमिका जैसे विषयों को भी सम्मेलन के एजेंडे में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<h2><strong>रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया संकट पर रहेगी दुनिया की नजर</strong></h2>
<p>BRICS सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हो रहा है, जब दुनिया रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया में जारी तनाव जैसी गंभीर परिस्थितियों का सामना कर रही है। इन मुद्दों पर सदस्य देशों के विचार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए सम्मेलन के संयुक्त घोषणा-पत्र को लेकर भी दुनिया की नजर बनी हुई है।</p>
<p>भारत के सामने सदस्य देशों के बीच सहमति तैयार करने के साथ अपने रणनीतिक संबंधों में संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी। भारत BRICS को किसी देश या समूह के विरुद्ध मंच के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय ग्लोबल साउथ की आवाज और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग का माध्यम मानता है।</p>
<h2><strong>भारत की नवाचार क्षमता से रूबरू होंगे नेता</strong></h2>
<p>कार्यक्रम के दौरान सदस्य देशों के नेता ‘भारत इनोवेट्स’ प्रदर्शनी का भ्रमण कर सकते हैं। इसमें भारत की तकनीकी उपलब्धियों, डिजिटल सार्वजनिक ढांचे, स्टार्टअप, औद्योगिक विकास और नवाचार से जुड़ी परियोजनाओं को प्रदर्शित किए जाने की संभावना है।</p>
<p>नेताओं का सामूहिक फोटो सत्र और संयुक्त पौधारोपण कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। प्रधानमंत्री मोदी सम्मेलन में शामिल राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों के सम्मान में विशेष रात्रिभोज की मेजबानी करेंगे। इसके अतिरिक्त अलग-अलग देशों के नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठकें भी होंगी।</p>
<h2><strong>दिल्ली में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था</strong></h2>
<p>वैश्विक नेताओं की मौजूदगी को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। भारत मंडपम, विदेशी मेहमानों के होटल, एयरपोर्ट और प्रतिनिधिमंडलों के आवागमन वाले मार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात हैं। रिपोर्टों के अनुसार लगभग 15 हजार पुलिसकर्मियों के साथ अर्धसैनिक बलों की करीब 200 कंपनियां सुरक्षा व्यवस्था में लगाई गई हैं।</p>
<p>सम्मेलन स्थल के आसपास बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया गया है। होटल कर्मचारियों और कार्यक्रम से जुड़े लोगों का सत्यापन किया गया है। प्रमुख स्थानों पर CCTV कैमरों, ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से निगरानी की जा रही है।</p>
<h2><strong>यातायात मार्गों पर लागू रहेंगे प्रतिबंध</strong></h2>
<p>विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की आवाजाही के कारण नई दिल्ली और मध्य दिल्ली के कई मार्गों पर यातायात नियंत्रित किया गया है। कुछ स्थानों पर वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जा सकता है। दिल्ली पुलिस ने नागरिकों को यात्रा से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी देखने और संभव होने पर मेट्रो का उपयोग करने की सलाह दी है।</p>
<p>बस, ऑटो, टैक्सी और ऐप आधारित कैब सेवाएं जारी रहेंगी, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के कारण कुछ मार्गों पर देरी हो सकती है। एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को निर्धारित समय से पहले निकलने और अतिरिक्त समय लेकर यात्रा की योजना बनाने की सलाह दी गई है।</p>
<p>भारत की मेजबानी में आयोजित यह सम्मेलन बदलती वैश्विक व्यवस्था में BRICS की भूमिका और विकासशील देशों की सामूहिक ताकत प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>BRICS सम्मेलन के लिए नई दिल्ली पहुंचे रूसी राष्ट्रपति पुतिन, आज प्रधानमंत्री मोदी के साथ अहम बैठक</title>
		<link>https://swarajvani.com/russian-president-vladimir-putin-arrives-in-new-delhi-for-brics-summit-set-to-meet-pm-modi-today/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Sep 2026 05:45:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[New Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Dainik Swara]]></category>
		<category><![CDATA[Energy Cooperation]]></category>
		<category><![CDATA[India Russia Trade]]></category>
		<category><![CDATA[International News]]></category>
		<category><![CDATA[Missile System]]></category>
		<category><![CDATA[Su-57 Fighter Jet]]></category>
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					<description><![CDATA[BRICS सम्मेलन के लिए नई दिल्ली पहुंचे रूसी राष्ट्रपति पुतिन, आज प्रधानमंत्री मोदी के साथ अहम बैठक रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और तकनीकी सहयोग पर हो सकती है चर्चा; 12 और ... <a title="BRICS सम्मेलन के लिए नई दिल्ली पहुंचे रूसी राष्ट्रपति पुतिन, आज प्रधानमंत्री मोदी के साथ अहम बैठक" class="read-more" href="https://swarajvani.com/russian-president-vladimir-putin-arrives-in-new-delhi-for-brics-summit-set-to-meet-pm-modi-today/" aria-label="Read more about BRICS सम्मेलन के लिए नई दिल्ली पहुंचे रूसी राष्ट्रपति पुतिन, आज प्रधानमंत्री मोदी के साथ अहम बैठक">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>BRICS सम्मेलन के लिए नई दिल्ली पहुंचे रूसी राष्ट्रपति पुतिन, आज प्रधानमंत्री मोदी के साथ अहम बैठक</strong></h1>
<h2><strong>रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और तकनीकी सहयोग पर हो सकती है चर्चा; 12 और 13 सितंबर को भारत की मेजबानी में आयोजित होगा 18वां BRICS शिखर सम्मेलन</strong></h2>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए शुक्रवार, 11 सितंबर को नई दिल्ली पहुंच गए। भारत आगमन पर केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने पालम एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। पुतिन की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। दोनों नेताओं के बीच रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश और आधुनिक तकनीक सहित कई रणनीतिक विषयों पर बातचीत होने की संभावना है।</p>
<p>यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया में तनाव और ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता जैसे विषय वैश्विक राजनीति को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की वार्ता को द्विपक्षीय संबंधों के साथ वैश्विक कूटनीति की दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। पुतिन के आगमन और स्वागत की पुष्टि अन्य राष्ट्रीय रिपोर्टों में भी हुई है।</p>
<h2><strong>आज होगी मोदी-पुतिन द्विपक्षीय बैठक</strong></h2>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 11 सितंबर को होने वाली बातचीत में भारत-रूस विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की जा सकती है। दोनों नेताओं के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने, आपसी निवेश बढ़ाने और भुगतान व्यवस्था को सरल बनाने जैसे विषय उठने की उम्मीद है।</p>
<p>बैठक में वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हो सकता है। रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया की स्थिति और BRICS देशों के बीच बेहतर समन्वय जैसे विषय प्रमुखता से सामने आ सकते हैं। भारत लगातार बातचीत और कूटनीति के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान निकालने की आवश्यकता पर जोर देता रहा है।</p>
<h2><strong>रक्षा सहयोग रहेगा बातचीत का प्रमुख विषय</strong></h2>
<p>भारत और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत रक्षा संबंध रहे हैं। मोदी-पुतिन बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग के विस्तार पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p>रिपोर्टों के अनुसार, ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना, S-400 वायु रक्षा प्रणाली, सुखोई विमानों के आधुनिकीकरण और भविष्य की लड़ाकू विमान तकनीक से जुड़े विषय बातचीत में शामिल हो सकते हैं। रूस की ओर से Su-57 लड़ाकू विमान और अतिरिक्त S-400 प्रणालियों से संबंधित प्रस्तावों की भी चर्चा है। हालांकि, किसी नए रक्षा समझौते की अंतिम घोषणा आधिकारिक बातचीत के बाद ही स्पष्ट होगी।</p>
<p>दोनों देश भारत में रक्षा उपकरणों का निर्माण बढ़ाने और तकनीक हस्तांतरण की संभावनाओं पर भी विचार कर सकते हैं। भारत के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नीति को देखते हुए संयुक्त उत्पादन का विषय विशेष महत्व रखता है।</p>
<h2><strong>ऊर्जा और व्यापारिक संबंधों पर भी नजर</strong></h2>
<p>रूस भारत के प्रमुख ऊर्जा साझेदारों में शामिल है। दोनों देशों के बीच कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, परमाणु ऊर्जा और अन्य ऊर्जा संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ा है। द्विपक्षीय वार्ता में दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति, कीमतों की स्थिरता और नए निवेश के अवसरों पर विचार किया जा सकता है।</p>
<p>भारत और रूस आपसी व्यापार को अधिक संतुलित बनाने के उपायों पर भी चर्चा कर सकते हैं। वर्तमान व्यापार में ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र की बड़ी हिस्सेदारी है। दोनों देश दवा, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, उर्वरक, डिजिटल तकनीक और औद्योगिक उत्पादन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं।</p>
<h2><strong>12 और 13 सितंबर को BRICS शिखर सम्मेलन</strong></h2>
<p>भारत की मेजबानी में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होगा। सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अन्य सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष तथा सरकार प्रमुख शामिल हो रहे हैं।</p>
<p>सम्मेलन के दौरान वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, विकासशील देशों की भूमिका, व्यापार, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल सार्वजनिक ढांचा, स्वास्थ्य, वित्तीय सहयोग और ग्लोबल साउथ से जुड़े विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है। विस्तारित BRICS में अब मूल पांच देशों के अलावा कई नए सदस्य भी शामिल हैं, जिससे संगठन का वैश्विक प्रभाव और प्रतिनिधित्व बढ़ा है।</p>
<p>BRICS सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हो रहा है, जब सदस्य देशों के सामने कई अंतरराष्ट्रीय मतभेद भी मौजूद हैं। इसके बावजूद भारत इस मंच को सहयोग, संवाद और विकासशील देशों की आवाज मजबूत करने के माध्यम के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।</p>
<h2><strong>दिल्ली में कड़ी सुरक्षा और यातायात प्रतिबंध</strong></h2>
<p>विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की मौजूदगी को देखते हुए नई दिल्ली में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। एयरपोर्ट, राजनयिक क्षेत्र, राष्ट्राध्यक्षों के ठहरने वाले होटल और सम्मेलन स्थल के आसपास अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। कई प्रमुख सड़कों पर यातायात नियंत्रित किया गया है और कुछ मार्गों पर डायवर्जन लागू किया गया है।</p>
<p>दिल्ली पुलिस ने नागरिकों को आवश्यक यात्रा के लिए मेट्रो का उपयोग करने और सड़क मार्ग से निकलने से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी देखने की सलाह दी है। आपातकालीन सेवाओं से संबंधित वाहनों को प्राथमिकता दी जाएगी।</p>
<h2><strong>तीन दिवसीय यात्रा में अन्य कार्यक्रम भी संभावित</strong></h2>
<p>राष्ट्रपति पुतिन अपनी भारत यात्रा के दौरान BRICS की मुख्य बैठकों के साथ द्विपक्षीय कार्यक्रमों में भी शामिल हो सकते हैं। उनके BRICS बिजनेस फोरम और भारत-रूस औद्योगिक सहयोग से संबंधित कार्यक्रमों में भाग लेने की संभावना बताई गई है।</p>
<p>मोदी-पुतिन बैठक के बाद दोनों देशों की ओर से संयुक्त बयान या प्रमुख समझौतों की जानकारी जारी की जा सकती है। रक्षा और ऊर्जा से जुड़े संभावित समझौतों के कारण इस वार्ता पर भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अन्य प्रमुख देशों की भी नजर बनी हुई है।</p>
<p><strong>तथ्य-सुधार:</strong> उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्ट के अनुसार पुतिन का स्वागत केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री <strong>कीर्ति वर्धन सिंह</strong> ने किया है, न कि राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>गलवान झड़प के बाद पहली बार भारत आ सकते हैं शी जिनपिंग, BRICS सम्मेलन में मोदी से मुलाकात की उम्मीद</title>
		<link>https://swarajvani.com/xi-jinping-may-visit-india-for-first-time-since-galwan-clash-meeting-with-pm-modi-expected-at-brics-summit/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Sep 2026 07:17:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गलवान झड़प के बाद पहली बार भारत आ सकते हैं शी जिनपिंग, BRICS सम्मेलन में मोदी से मुलाकात की उम्मीद नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होगा BRICS ... <a title="गलवान झड़प के बाद पहली बार भारत आ सकते हैं शी जिनपिंग, BRICS सम्मेलन में मोदी से मुलाकात की उम्मीद" class="read-more" href="https://swarajvani.com/xi-jinping-may-visit-india-for-first-time-since-galwan-clash-meeting-with-pm-modi-expected-at-brics-summit/" aria-label="Read more about गलवान झड़प के बाद पहली बार भारत आ सकते हैं शी जिनपिंग, BRICS सम्मेलन में मोदी से मुलाकात की उम्मीद">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>गलवान झड़प के बाद पहली बार भारत आ सकते हैं शी जिनपिंग, BRICS सम्मेलन में मोदी से मुलाकात की उम्मीद</strong></h1>
<h2><strong>नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होगा BRICS शिखर सम्मेलन, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी</strong></h2>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आ सकते हैं। यदि उनकी यात्रा होती है तो वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। जिनपिंग के 12 सितंबर को नई दिल्ली पहुंचने की संभावना जताई गई है। हालांकि, चीन की ओर से उनकी यात्रा की औपचारिक पुष्टि का इंतजार है।</p>
<p>BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की भी उम्मीद जताई जा रही है। दोनों नेता यदि आमने-सामने बातचीत करते हैं तो भारत-चीन सीमा, वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC, व्यापार, निवेश, वीजा, सीधी उड़ानों और आपसी विश्वास बहाली जैसे विषय चर्चा में आ सकते हैं।</p>
<p>भारत की अध्यक्षता में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन 12 सितंबर से नई दिल्ली में आयोजित किया जाना है। सम्मेलन में शामिल होने वाले विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधिमंडलों की सुरक्षा के लिए राजधानी में व्यापक तैयारियां की गई हैं।</p>
<h2><strong>सात वर्ष बाद भारत आ सकते हैं चीनी राष्ट्रपति</strong></h2>
<p>शी जिनपिंग की संभावित यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह करीब सात वर्ष बाद उनका भारत दौरा होगा। दोनों देशों के रिश्ते वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे।</p>
<p>गलवान की घटना के बाद राजनीतिक संवाद, कारोबारी सहयोग और आपसी विश्वास में कमी आई थी। सीमा पर तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई। हाल के वर्षों में संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयास धीरे-धीरे आगे बढ़े हैं।</p>
<p>विश्लेषकों का मानना है कि जिनपिंग की भारत यात्रा दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर बन सकती है। हालांकि, सीमा विवाद और आर्थिक रिश्तों से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दे अभी भी बने हुए हैं।</p>
<h2><strong>मोदी-जिनपिंग द्विपक्षीय बैठक पर नजर</strong></h2>
<p>BRICS सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की संभावित द्विपक्षीय बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच बातचीत होती है तो इससे भारत-चीन संबंधों की आगामी दिशा निर्धारित हो सकती है।</p>
<p>मीडिया रिपोर्टों में बैठक की संभावना जताई गई है, लेकिन इसके कार्यक्रम और एजेंडे पर आधिकारिक स्तर से पूर्ण विवरण सामने आना अभी बाकी है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार जिनपिंग की यात्रा व्यापक रूप रूप से अपेक्षित है, लेकिन चीन ने खबर प्रकाशित होने तक इसकी पुष्टि नहीं की थी और मोदी के साथ बैठक पर भी औपचारिक घोषणा नहीं हुई थी।</p>
<p>दोनों नेताओं की मुलाकात में सीमा पर शांति और स्थिरता बहाल करने के प्रयासों पर जोर दिया जा सकता है। भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि द्विपक्षीय संबंधों की सामान्य प्रगति के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति आवश्यक है।</p>
<h2><strong>LAC और सीमा तनाव रह सकता है प्रमुख मुद्दा</strong></h2>
<p>भारत और चीन के संबंधों में LAC की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है। गलवान झड़प के बाद दोनों देशों ने सीमावर्ती इलाकों में बड़ी संख्या में सैनिकों और सैन्य संसाधनों की तैनाती की थी।</p>
<p>सैन्य कमांडर स्तर की वार्ताओं और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए कुछ स्थानों पर तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाए गए। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी बनी हुई है।</p>
<p>संभावित मोदी-जिनपिंग बैठक में सीमा पर स्थिति सामान्य करने, सैन्य तनाव कम करने और भविष्य में टकराव रोकने की व्यवस्थाओं पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, बातचीत में कौन-से मुद्दे शामिल होंगे, इसकी पुष्टि आधिकारिक कार्यक्रम सामने आने के बाद ही होगी।</p>
<h2><strong>व्यापारिक रिश्तों में भी बनी हुई हैं चुनौतियां</strong></h2>
<p>भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार का आकार बड़ा है, लेकिन निवेश, तकनीक और बाजार तक पहुंच से जुड़े कई विवाद मौजूद हैं। गलवान झड़प के बाद भारत ने चीनी कंपनियों और निवेश प्रस्तावों की जांच कड़ी कर दी थी।</p>
<p>दोनों देशों की कंपनियों को नियामकीय मंजूरी, वीजा और औद्योगिक उपकरणों की आपूर्ति से जुड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में शीर्ष नेतृत्व की बैठक आर्थिक संबंधों को अधिक स्थिर बनाने की दिशा में संवाद का रास्ता खोल सकती है।</p>
<p>इसके बावजूद व्यापारिक सहयोग में तत्काल बड़े बदलाव की संभावना सीमित मानी जा रही है। सीमा विवाद और रणनीतिक अविश्वास आर्थिक रिश्तों को भी प्रभावित करते हैं।</p>
<h2><strong>12 सितंबर से शुरू होगा BRICS सम्मेलन</strong></h2>
<p>भारत की मेजबानी में आयोजित होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की शुरुआत 12 सितंबर को होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदस्य देशों के नेताओं का स्वागत करेंगे। सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम में किए जाने की जानकारी सामने आई है।</p>
<p>सम्मेलन की बंद कमरे में आयोजित होने वाली बैठक का विषय समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना रहेगा। भारत स्टार्टअप, मजबूत आपूर्ति शृंखला, हरित ऊर्जा, नवाचार और वैश्विक संस्थानों में सुधार जैसे विषयों को आगे बढ़ा सकता है।</p>
<p>BRICS उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक प्रमुख वैश्विक मंच है। सदस्य देशों की बढ़ती संख्या और वैश्विक अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी के कारण इस सम्मेलन को अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<h2><strong>दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम</strong></h2>
<p>विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के आगमन को देखते हुए नई दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है। शी जिनपिंग के 12 सितंबर और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 11 सितंबर को पहुंचने की संभावना है।</p>
<p>रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली पुलिस के करीब 30 हजार जवानों को सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया है। चाणक्यपुरी और सम्मेलन स्थल के आसपास विशेष सतर्कता बरती जा रही है। होटल कर्मचारियों का सत्यापन किया गया है और विदेशी सुरक्षा दल भी तैयारियों में शामिल हैं।</p>
<p>सम्मेलन के कारण 11 से 13 सितंबर तक दिल्ली के कई मार्गों पर यातायात प्रतिबंध और डायवर्जन लागू रह सकते हैं। रेलवे स्टेशन या हवाई अड्डे जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने और संभव हो तो मेट्रो का उपयोग करने की सलाह दी गई है।</p>
<h2><strong>भारत-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण अवसर</strong></h2>
<p>शी जिनपिंग का संभावित भारत दौरा दोनों देशों के रिश्तों में जारी तनाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर साबित हो सकता है। हालांकि, केवल एक बैठक से सीमा और आर्थिक विवादों का समाधान होना कठिन है।</p>
<p>यदि मोदी और जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बातचीत होती है तो इससे संवाद बनाए रखने, सीमा पर स्थिरता बढ़ाने और आपसी मतभेदों को नियंत्रित करने का संदेश मिल सकता है। BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच पर दोनों नेताओं की मौजूदगी वैश्विक राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण होगी।</p>
<p>फिलहाल जिनपिंग की यात्रा और मोदी के साथ उनकी बैठक के आधिकारिक कार्यक्रम का इंतजार है। औपचारिक पुष्टि होने के बाद ही यात्रा, बैठक के समय और एजेंडे की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।</p>
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