<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Indore District Court &#8211; Swaraj Vani</title>
	<atom:link href="https://swarajvani.com/tag/indore-district-court/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://swarajvani.com</link>
	<description>From politics and jobs to culture and community stories, we deliver timely, unbiased updates that matter.</description>
	<lastBuildDate>Mon, 12 Oct 2026 08:55:09 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.1.3</generator>

<image>
	<url>https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/07/cropped-स्वराज-वाणी-1-32x32.png</url>
	<title>Indore District Court &#8211; Swaraj Vani</title>
	<link>https://swarajvani.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>इंदौर में अयोध्यापुरी की 350 करोड़ की जमीन पर रहवासियों का दावा खारिज, संघवी-मद्दा की कंपनी के पक्ष में फैसला — दैनिक स्वराज वाणी</title>
		<link>https://swarajvani.com/indore-court-rejects-residents-claim-to-350-crore-ayodhyapuri-land-rules-in-favour-of-sanghvi-madda/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 12 Oct 2026 08:53:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[Deepak Madda]]></category>
		<category><![CDATA[Indore District Court]]></category>
		<category><![CDATA[Prateek Sanghvi]]></category>
		<category><![CDATA[Simplex Investment and Mega Finance]]></category>
		<category><![CDATA[ute]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=366373</guid>

					<description><![CDATA[इंदौर में अयोध्यापुरी की 350 करोड़ की जमीन पर रहवासियों का दावा खारिज, संघवी-मद्दा की कंपनी के पक्ष में फैसला — दैनिक स्वराज वाणी इंदौर। अयोध्यापुरी कॉलोनी की करीब चार ... <a title="इंदौर में अयोध्यापुरी की 350 करोड़ की जमीन पर रहवासियों का दावा खारिज, संघवी-मद्दा की कंपनी के पक्ष में फैसला — दैनिक स्वराज वाणी" class="read-more" href="https://swarajvani.com/indore-court-rejects-residents-claim-to-350-crore-ayodhyapuri-land-rules-in-favour-of-sanghvi-madda/" aria-label="Read more about इंदौर में अयोध्यापुरी की 350 करोड़ की जमीन पर रहवासियों का दावा खारिज, संघवी-मद्दा की कंपनी के पक्ष में फैसला — दैनिक स्वराज वाणी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>इंदौर में अयोध्यापुरी की 350 करोड़ की जमीन पर रहवासियों का दावा खारिज, संघवी-मद्दा की कंपनी के पक्ष में फैसला — दैनिक स्वराज वाणी</strong></h1>
<p><strong>इंदौर।</strong> अयोध्यापुरी कॉलोनी की करीब चार एकड़ जमीन को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद जिला कोर्ट के फैसले के बाद फिर चर्चा में है। अदालत ने अयोध्यापुरी रहवासी कल्याण संघ और देवी अहिल्या श्रमिक कामगार सहकारी संस्था के दावों को खारिज करते हुए सिंपलेक्स इन्वेस्टमेंट एंड मेगा फाइनेंस कंपनी के पक्ष में निर्णय दिया है। कोर्ट ने कंपनी के पक्ष में वर्ष 2007 में हुई रजिस्ट्री को वैध माना। इस जमीन का वर्तमान बाजार मूल्य करीब 350 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।</p>
<h2><strong>2007 में हुआ था चार एकड़ जमीन का सौदा</strong></h2>
<p>मामला अयोध्यापुरी कॉलोनी से जुड़ी कुल 15.52 एकड़ जमीन में से चार एकड़ हिस्से का है। रिपोर्ट के अनुसार, देवी अहिल्या श्रमिक कामगार सहकारी संस्था ने वर्ष 1986 में सीलिंग से मुक्त हुई जमीन खरीदी थी। संस्था ने 24 फरवरी 2007 को चार एकड़ जमीन सिंपलेक्स कंपनी को बेचने के लिए रजिस्ट्री कराई थी। यह सौदा चार करोड़ रुपये में हुआ था। कंपनी का संचालन प्रतीक संघवी और दीपक मद्दा से जुड़ा बताया गया है।</p>
<p>रहवासी संघ का कहना था कि विवादित जमीन पर संस्था के सदस्यों को पहले ही भूखंड आवंटित किए जा चुके थे। संघ ने कंपनी के पक्ष में हुई रजिस्ट्री को चुनौती देते हुए जमीन पर अपने सदस्यों का अधिकार बताया। दूसरी ओर, कंपनी ने रजिस्ट्री और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर जमीन पर अपना दावा रखा।</p>
<h2><strong>कोर्ट ने रजिस्ट्री को माना वैध</strong></h2>
<p>जिला न्यायाधीश डॉ. शुभ्रा सिंह की अदालत ने 65 पृष्ठों के फैसले में कंपनी के पक्ष में हुई रजिस्ट्री को वैध माना। रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने कहा कि रहवासी संघ विवादित चार एकड़ जमीन पर अपने सदस्यों के भूखंड होने के पर्याप्त दस्तावेज, नक्शे या लेआउट पेश नहीं कर सका। कोर्ट के सामने संस्था की आमसभा में जमीन बेचने का प्रस्ताव पारित होने की जानकारी भी रखी गई थी। इसी आधार पर रजिस्ट्री को अमान्य घोषित करने की मांग स्वीकार नहीं की गई।</p>
<p>रिपोर्ट में सौदे की रकम के भुगतान को लेकर भी विवाद का उल्लेख है। बताया गया कि कंपनी ने 20 चेक दिए थे, लेकिन उनमें से 1.80 करोड़ रुपये के चेक ही भुनाए गए और शेष रकम के भुगतान पर सवाल उठे। अदालत ने भुगतान को लेकर उठे विवाद के बावजूद रजिस्ट्री को शून्य मानने की मांग स्वीकार नहीं की। बकाया रकम के संबंध में अलग कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।</p>
<h2><strong>प्रशासन की भूमिका पर भी उठे सवाल</strong></h2>
<p>मामले में जिला प्रशासन और सहकारिता विभाग को भी पक्षकार बनाया गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से प्रभावी जवाब या दस्तावेज पेश नहीं किए गए। इस कारण अदालत में उनका पक्ष मजबूती से सामने नहीं आ सका। जमीन को लेकर पहले प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की पहल भी हुई थी, लेकिन इस फैसले के बाद आगे की रणनीति पर चर्चा शुरू हो गई है।</p>
<h2><strong>रहवासी संघ हाईकोर्ट में देगा चुनौती</strong></h2>
<p>जिला कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट अयोध्यापुरी रहवासी कल्याण संघ ने उच्च न्यायालय में अपील करने की बात कही है। संघ का दावा है कि जमीन पर उसके सदस्यों के अधिकार हैं और कंपनी के पक्ष में हुई रजिस्ट्री को चुनौती दी जानी चाहिए। दूसरी ओर, कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा है कि आदेश की प्रति मिलने और उसका अध्ययन करने के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल जिला कोर्ट के फैसले से कंपनी का पक्ष मजबूत हुआ है, लेकिन रहवासी संघ की प्रस्तावित अपील और प्रशासन के अगले कदम से विवाद आगे भी जारी रह सकता है। जमीन के अंतिम स्वामित्व और फैसले के व्यापक प्रभाव पर आगे की कानूनी कार्यवाही के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
