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	<title>Government Service &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>भाई सरकारी नौकरी में फिर भी बहन अनुकंपा नियुक्ति की हकदार, High Court का बड़ा फैसला</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Jan 2026 08:38:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[MADHAY PRADESH NEWS]]></category>
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					<description><![CDATA[भाई सरकारी नौकरी में फिर भी बहन अनुकंपा नियुक्ति की हकदार, बशर्ते… High Court का बड़ा फैसला इंदौर। अनुकंपा नियुक्ति को लेकर MP High Court की इंदौर बेंच ने एक ... <a title="भाई सरकारी नौकरी में फिर भी बहन अनुकंपा नियुक्ति की हकदार, High Court का बड़ा फैसला" class="read-more" href="https://swarajvani.com/womans-compassionate-appointment-high-court/" aria-label="Read more about भाई सरकारी नौकरी में फिर भी बहन अनुकंपा नियुक्ति की हकदार, High Court का बड़ा फैसला">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>भाई सरकारी नौकरी में फिर भी बहन अनुकंपा नियुक्ति की हकदार, बशर्ते… High Court का बड़ा फैसला</strong></h1>
<p><strong>इंदौर।</strong> अनुकंपा नियुक्ति को लेकर MP High Court की इंदौर बेंच ने एक अहम और दूरगामी असर वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी परिवार का एक सदस्य पहले से सरकारी नौकरी में है, लेकिन वह परिवार से अलग रहता है और मृत कर्मचारी पर आश्रित नहीं था, तो इस आधार पर किसी अन्य आश्रित की अनुकंपा नियुक्ति रद्द नहीं की जा सकती।</p>
<p>हाईकोर्ट का यह फैसला देवास नोट प्रेस से बिना समुचित जांच के बर्खास्त की गई एक महिला कर्मचारी की याचिका पर आया है। कोर्ट ने विभागीय कार्रवाई को गलत ठहराते हुए महिला की नौकरी बहाल करने और बकाया वेतन देने के आदेश भी दिए हैं।</p>
<h2><strong>अनुकंपा नियुक्ति पर High Court का स्पष्ट रुख</strong></h2>
<p>MP High Court की इंदौर बेंच ने अपने फैसले में कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य मृत कर्मचारी के आश्रित परिवार को आर्थिक संकट से उबारना होता है। यदि परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी नौकरी में है, लेकिन वह अलग रह रहा है और मृत कर्मचारी पर आश्रित नहीं था, तो इसे अनुकंपा नियुक्ति रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता।</p>
<p>Court ने यह भी कहा कि विभाग द्वारा केवल इस आधार पर नियुक्ति रद्द करना कि मृत कर्मचारी का बेटा सरकारी नौकरी में है, पूरी तरह गलत है, जब यह तथ्य रिकॉर्ड पर मौजूद हो कि वह परिवार से अलग रह रहा था और उसकी आर्थिक जिम्मेदारी मृत कर्मचारी या उसके परिवार पर नहीं थी।</p>
<h3><strong>क्या है पूरा मामला?</strong></h3>
<p>देवास की रहने वाली मनीषा ने MP High Court में याचिका दायर कर अपनी बर्खास्तगी को चुनौती दी थी। याचिका में मनीषा ने बताया कि उसके पिता बैंक नोट प्रेस देवास में सीनियर चेकर के पद पर कार्यरत थे। सेवा अवधि के दौरान ही उनके पिता का निधन हो गया।</p>
<p>पिता की मृत्यु के कुछ समय बाद ही उसकी मां का भी निधन हो गया, जिसके बाद मनीषा पूरी तरह से निराश्रित हो गई। परिवार में कोई कमाने वाला सदस्य नहीं बचा था और मनीषा के सामने जीवनयापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया।</p>
<h4><strong>जनवरी 2025 में मिली थी अनुकंपा नियुक्ति</strong></h4>
<p>मनीषा ने बताया कि उसने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। शैक्षणिक योग्यता, दस्तावेजों की जांच और विभागीय सत्यापन के बाद जनवरी 2025 में उसे जूनियर ऑफिस असिस्टेंट के पद पर देवास नोट प्रेस में अनुकंपा आधार पर नियुक्ति दी गई थी।</p>
<p>नियुक्ति के बाद मनीषा नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रही थी और विभागीय स्तर पर उसके कामकाज को लेकर कोई शिकायत भी नहीं थी।</p>
<h5><strong>चार महीने बाद भेजा गया नोटिस</strong></h5>
<p>मनीषा को अनुकंपा नियुक्ति मिलने के करीब चार महीने बाद मई 2025 में विभाग की ओर से एक नोटिस भेजा गया। नोटिस में आरोप लगाया गया कि मनीषा ने यह जानकारी छिपाई है कि उसका बड़ा भाई पहले से पुलिस विभाग में पदस्थ है।</p>
<p>विभाग ने इसे नियमों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि जब परिवार का एक सदस्य पहले से सरकारी नौकरी में है, तो अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती।</p>
<h6><strong>मनीषा ने दिया स्पष्टीकरण</strong></h6>
<p>नोटिस मिलने के बाद मनीषा ने विभाग को अपना जवाब भेजा। उसने स्पष्ट किया कि उसका बड़ा भाई साल 2013 से पुलिस विभाग में पदस्थ है, लेकिन वह अपने परिवार के साथ अलग रहता है।</p>
<p>मनीषा ने यह भी बताया कि उसका भाई न तो पिता पर आश्रित था और न ही पिता की मृत्यु के बाद उसने परिवार की कोई आर्थिक जिम्मेदारी उठाई थी। पिता के निधन के बाद पूरा परिवार उसकी कमाई पर निर्भर नहीं था और वह अलग गृहस्थी चला रहा था।</p>
<p>इसके बावजूद विभाग ने मनीषा की बातों को नजरअंदाज करते हुए उसकी सेवाएं समाप्त कर दीं और उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया।</p>
<pre><strong>High Cout पहुंची मनीषा</strong></pre>
<p>नौकरी से बर्खास्त किए जाने के बाद मनीषा ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में याचिका दायर की। याचिका में उसने विभागीय कार्रवाई को मनमाना, नियमों के खिलाफ और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया।</p>
<p>मनीषा की ओर से यह तर्क रखा गया कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य ही यह है कि मृत कर्मचारी के आश्रित परिवार को सहारा दिया जाए। जब वह पूरी तरह से निराश्रित थी और उसका भाई परिवार से अलग रह रहा था, तो उसकी नियुक्ति को रद्द करना गलत है।</p>
<pre><strong>हाईकोर्ट का अहम फैसला</strong></pre>
<p>दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मनीषा के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि विभाग ने बिना समुचित जांच के केवल इस आधार पर नियुक्ति रद्द कर दी कि परिवार का एक सदस्य सरकारी नौकरी में है।</p>
<p>कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह देखना जरूरी है कि वह सदस्य मृत कर्मचारी पर आश्रित था या नहीं और क्या वह परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उठा रहा था।</p>
<p>हाईकोर्ट ने माना कि मनीषा का भाई न तो पिता पर आश्रित था और न ही परिवार के साथ रह रहा था। ऐसे में उसकी नौकरी के आधार पर मनीषा की अनुकंपा नियुक्ति रद्द करना पूरी तरह से गलत है।</p>
<pre><strong>नौकरी बहाल करने और बकाया वेतन देने के आदेश</strong></pre>
<p>हाईकोर्ट ने विभाग को आदेश दिया कि मनीषा को तत्काल प्रभाव से सेवा में बहाल किया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए कि बर्खास्तगी की अवधि का पूरा बकाया वेतन मनीषा को दिया जाए।</p>
<p>कोर्ट ने कहा कि विभाग की कार्रवाई न केवल नियमों के खिलाफ थी, बल्कि इससे एक निराश्रित महिला को अनावश्यक मानसिक और आर्थिक पीड़ा भी झेलनी पड़ी।</p>
<pre><strong>अनुकंपा नियुक्ति मामलों में मिसाल</strong></pre>
<p>कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में एक अहम मिसाल बनेगा।</p>
<p>अक्सर देखा जाता है कि यदि परिवार का कोई एक सदस्य सरकारी नौकरी में होता है, तो विभाग अनुकंपा नियुक्ति देने से इनकार कर देता है, भले ही वह सदस्य परिवार से अलग रह रहा हो या मृत कर्मचारी पर आश्रित न रहा हो।</p>
<p>इस फैसले के बाद अब विभागों को यह जांच करनी होगी कि सरकारी नौकरी में कार्यरत परिवार का सदस्य वास्तव में मृत कर्मचारी पर आश्रित था या नहीं।</p>
<pre><strong>निराश्रितों के लिए राहत की खबर</strong></pre>
<p>यह फैसला उन हजारों परिवारों के लिए राहत की खबर है, जो अनुकंपा नियुक्ति के जरिए अपने जीवन को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश करते हैं।</p>
<p>हाईकोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में तकनीकी आधार पर नहीं, बल्कि वास्तविक स्थिति को देखकर निर्णय लिया जाना चाहिए।</p>
<p>कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का यह फैसला न केवल मनीषा को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि भविष्य में ऐसे कई मामलों में निराश्रित परिवारों के हक को मजबूत करने वाला भी साबित होगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
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