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	<title>Farmer’s Land Rights &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>जमीन का हक पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगा रहे बुजुर्ग किसान, आमरण अनशन की चेतावनी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Oct 2026 08:27:33 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Farmer’s Land Rights]]></category>
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					<description><![CDATA[जमीन का हक पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगा रहे बुजुर्ग किसान, आमरण अनशन की चेतावनी कई बार आवेदन और न्यायालय के चक्कर लगाने के बाद भी समाधान नहीं ... <a title="जमीन का हक पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगा रहे बुजुर्ग किसान, आमरण अनशन की चेतावनी" class="read-more" href="https://swarajvani.com/elderly-farmer-seeks-land-rights-in-silwani-warns-of-strike/" aria-label="Read more about जमीन का हक पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगा रहे बुजुर्ग किसान, आमरण अनशन की चेतावनी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>जमीन का हक पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगा रहे बुजुर्ग किसान, आमरण अनशन की चेतावनी</strong></h1>
<h2><strong>कई बार आवेदन और न्यायालय के चक्कर लगाने के बाद भी समाधान नहीं मिलने का आरोप; किसान बोले—अब तक केवल आश्वासन मिला</strong></h2>
<p><strong>संवाददाता: वैभव जैन मस्ताना</strong></p>
<p><strong>सिलवानी।</strong> तहसील क्षेत्र के ग्राम खैरी माजगोहा के किसान रामरतन पाल अपनी जमीन का हक पाने के लिए लंबे समय से सरकारी कार्यालयों और न्यायालय के चक्कर लगा रहे हैं। किसान का आरोप है कि कई बार आवेदन देने और संबंधित अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्हें हर बार आश्वासन दिया जाता है कि जमीन का हक दिलाने की कार्रवाई की जाएगी, लेकिन उनके मुताबिक अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।</p>
<p>बुजुर्ग अवस्था में भी किसान को अपने अधिकार के लिए लगातार प्रयास करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि जमीन से जुड़ा मामला उनके परिवार और जीवनयापन के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन बार-बार आवेदन देने के बाद भी उन्हें स्पष्ट समाधान नहीं मिल पाया है। इसी वजह से वे परेशान हैं और प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।</p>
<h3><strong>आवेदन और न्यायालय के चक्कर लगाने का दावा</strong></h3>
<p>रामरतन पाल के मुताबिक, वे अपनी जमीन के अधिकार को लेकर कई बार संबंधित शासकीय कार्यालयों में आवेदन दे चुके हैं। मामले को लेकर न्यायालय के चक्कर लगाने की बात भी उन्होंने कही है। किसान का कहना है कि अलग-अलग स्तर पर उन्हें आदेश या आश्वासन मिला, लेकिन जमीन का हक दिलाने की कार्रवाई अब तक पूरी नहीं हुई।</p>
<p>किसान के अनुसार, हर बार उन्हें यह भरोसा दिलाया जाता है कि उनकी समस्या का निराकरण किया जाएगा। इसके बावजूद समय बीतने के साथ उनकी परेशानी बनी हुई है। उनका आरोप है कि स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही, जिसके कारण उन्हें अपने अधिकार के लिए बार-बार गुहार लगानी पड़ रही है।</p>
<h3><strong>वृद्धावस्था में भी जारी है संघर्ष</strong></h3>
<p>जमीन के मामले को लेकर किसान का संघर्ष लंबे समय से जारी बताया जा रहा है। उम्र अधिक होने के बावजूद उन्हें कार्यालयों और न्यायालय तक जाना पड़ रहा है। किसान का कहना है कि लगातार आवेदन देने और अधिकारियों से मिलने के बाद भी जब कोई ठोस परिणाम नहीं मिला, तो उनकी चिंता बढ़ गई है।</p>
<p>उनके मुताबिक, जमीन का अधिकार मिलने की उम्मीद में वे कई बार संबंधित विभागों तक पहुंचे हैं। हर बार उन्हें सकारात्मक आश्वासन तो मिला, लेकिन अब तक वह हक नहीं मिल सका जिसकी वे मांग कर रहे हैं। किसान ने प्रशासन से आग्रह किया है कि मामले की जांच कर दस्तावेजों और उपलब्ध आदेशों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाए, ताकि विवाद का निराकरण हो सके।</p>
<h3><strong>कार्रवाई नहीं हुई तो आमरण अनशन की चेतावनी</strong></h3>
<p>समस्या का समाधान नहीं होने से परेशान किसान ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उन्हें जमीन का हक नहीं दिलाया गया, तो वे आमरण अनशन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि वे अपने अधिकार के लिए अब तक संबंधित कार्यालयों और न्यायालय के चक्कर लगा चुके हैं। यदि इसके बाद भी सुनवाई नहीं हुई, तो आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।</p>
<p>किसान की चेतावनी के बाद अब प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। मामले से जुड़े आवेदन, दस्तावेज और न्यायालय के आदेशों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है। किसान का कहना है कि उन्हें केवल मौखिक आश्वासन नहीं, बल्कि समस्या का स्थायी और दस्तावेजी समाधान चाहिए।</p>
<h3><strong>प्रशासन से शीघ्र निराकरण की अपेक्षा</strong></h3>
<p>ग्राम खैरी माजगोहा के इस मामले में किसान ने संबंधित अधिकारियों से हस्तक्षेप कर जमीन के अधिकार का निराकरण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मामले की सुनवाई समयबद्ध तरीके से होनी चाहिए, ताकि उन्हें बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन किसान की शिकायत पर क्या कदम उठाता है और उसे उसका दावा किया गया हक दिलाने के लिए कितनी तत्परता दिखाता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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