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	<title>Electoral Roll 2023 &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>इंदौर की मतदाता सूची पर सवाल: 2023 में दो महीने में बढ़े 1.57 लाख नाम, फिर हटे 5,278</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 11:22:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर की मतदाता सूची पर सवाल: 2023 में दो महीने में बढ़े 1.57 लाख नाम, फिर हटे 5,278 इंदौर। जिले के नौ विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची में नाम जोड़ने ... <a title="इंदौर की मतदाता सूची पर सवाल: 2023 में दो महीने में बढ़े 1.57 लाख नाम, फिर हटे 5,278" class="read-more" href="https://swarajvani.com/indores-2023-voter-list-under-scrutiny-1-57-lakh-names-added-5278-later/" aria-label="Read more about इंदौर की मतदाता सूची पर सवाल: 2023 में दो महीने में बढ़े 1.57 लाख नाम, फिर हटे 5,278">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>इंदौर की मतदाता सूची पर सवाल: 2023 में दो महीने में बढ़े 1.57 लाख नाम, फिर हटे 5,278</strong></h1>
<p><strong>इंदौर।</strong> जिले के नौ विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के आंकड़ों को लेकर सवाल सामने आए हैं। साझा रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से अगस्त के बीच मतदाताओं की संख्या में 8,940 की बढ़ोतरी हुई, जबकि अगस्त से अक्टूबर के बीच यह वृद्धि 1 लाख 57 हजार 636 रही। इसके बाद मतदान से पहले 5,278 नाम कम हुए। खबर अक्टूबर 2026 में प्रकाशित हुई है, लेकिन उपलब्ध विस्तृत विवरण में ये आंकड़े वर्ष 2023 की मतदाता सूची से संबंधित बताए गए हैं। इसलिए इन्हें वर्तमान वर्ष की नई बढ़ोतरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।</p>
<h2><strong>नौ विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़ों में अंतर</strong></h2>
<p>रिपोर्ट में इंदौर जिले के नौ विधानसभा क्षेत्रों की अलग-अलग समय पर जारी मतदाता सूचियों की तुलना की गई है। जनवरी से अगस्त के बीच संख्या में अपेक्षाकृत कम वृद्धि और अगले दो महीने में बड़ी बढ़ोतरी का उल्लेख है।</p>
<p>यह तुलना नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया के दस्तावेजों को समझने की जरूरत सामने लाती है। हालांकि, कुल मतदाताओं की संख्या का अंतर अपने आप में यह नहीं बताता कि कितने आवेदन स्वीकार हुए, कितने नाम हटाए गए और कितनी प्रविष्टियों में अन्य बदलाव किए गए। इसके लिए विस्तृत रिकॉर्ड आवश्यक है।</p>
<h2><strong>जनवरी से नवंबर तक कैसे बदली संख्या?</strong></h2>
<p>उपलब्ध विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2023 में नौ विधानसभा क्षेत्रों में 25 लाख 95 हजार 931 मतदाता थे। अगस्त में संख्या 26 लाख 4 हजार 871 हुई। अक्टूबर में यह बढ़कर 27 लाख 62 हजार 507 पहुंच गई।</p>
<p>नवंबर में मतदान से पहले मतदाताओं की संख्या 27 लाख 57 हजार 229 बताई गई। इन आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से नवंबर तक कुल बढ़ोतरी 1 लाख 61 हजार 298 रही। अलग-अलग सूचियों का यह अंतर ही संबंधित खबर में उठाए गए सवालों का आधार है।</p>
<h2><strong>सूचना के अधिकार से मांगा गया रिकॉर्ड</strong></h2>
<p>रिपोर्ट में पूर्व पार्षद दिलीप कौशल द्वारा सूचना के अधिकार के तहत चार आवेदनों के माध्यम से जानकारी मांगने का उल्लेख है। नाम जोड़ने और हटाने से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने तथा अपीलें लंबित होने की बात भी कही गई है।</p>
<p>निर्वाचन कार्यालय की ओर से प्रक्रिया गरुड़ ऐप के माध्यम से किए जाने की जानकारी दिए जाने का उल्लेख है। हालांकि, उपलब्ध खबर में सभी आरटीआई आवेदनों, लिखित जवाबों और अपील संबंधी दस्तावेजों की प्रतियां शामिल नहीं हैं। इसलिए उनके विस्तृत विषय और वर्तमान स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकी है।</p>
<h2><strong>निर्वाचन कार्यालय से फॉर्म चोरी का उल्लेख</strong></h2>
<p>साझा समाचार में वर्ष 2023 के दौरान निर्वाचन कार्यालय से मतदाता सूची में नाम जोड़ने वाले लगभग 1.63 लाख फॉर्म चोरी होने की घटना का उल्लेख भी है। रिकॉर्ड की उपलब्धता से जुड़े सवालों के साथ इस घटना को सामने रखा गया है।</p>
<p>लेकिन फॉर्म चोरी होने और मतदाता सूची में वृद्धि के बीच सीधा संबंध उपलब्ध जानकारी से स्थापित नहीं होता। दोनों घटनाओं को केवल साथ उल्लेखित किए जाने के आधार पर एक-दूसरे का कारण नहीं माना जा सकता। किसी संबंध का निष्कर्ष जांच और संबंधित प्रमाणों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।</p>
<h2><strong>बढ़ोतरी को फर्जी मतदाता होने का प्रमाण न मानें</strong></h2>
<p>मतदाता संख्या में बड़ी वृद्धि का कारण समझने के लिए आवेदन, पात्रता और सत्यापन का विवरण देखना जरूरी है। केवल कुल संख्या बढ़ने से यह साबित नहीं होता कि जुड़े हुए नाम फर्जी थे। इसी तरह संख्या कम होने से हर हटाए गए नाम को गलत तरीके से हटाया गया नहीं कहा जा सकता।</p>
<p>मुख्य सवाल संबंधित बदलावों के आधार और उनके रिकॉर्ड का है। विधानसभा क्षेत्रवार जानकारी से यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस अवधि में कितने नाम जुड़े, कितने हटे और उन परिवर्तनों के समर्थन में क्या दस्तावेज उपलब्ध हैं।</p>
<h2><strong>आधिकारिक स्पष्टीकरण से स्पष्ट होगी स्थिति</strong></h2>
<p>इस मामले में आंकड़ों की तुलना के साथ रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है। संबंधित कार्यालय के विस्तृत जवाब, उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड और दस्तावेजों से उठाए गए प्रश्नों का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।</p>
<p>फिलहाल साझा खबर में वर्ष 2023 की मतदाता संख्या के अंतर और जानकारी नहीं मिलने के दावे सामने आए हैं। इसे चुनावी अनियमितता का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। आगे आधिकारिक विवरण मिलने पर नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया और रिकॉर्ड की स्थिति अधिक स्पष्ट होगी। खबर पढ़ते समय प्रकाशन वर्ष तथा आंकड़ों के वर्ष का अंतर ध्यान में रखना जरूरी है।</p>
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